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Apache AH-64E delays delivery of helicopter; India is waiting yet, Morocco has got helicopter!

AH-64E Apache Helicopters
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📍New Delhi | 3 Feb, 2025, 7:28 PM


Apache AH-64E: India had ordered the purchase of Apache AH-64E fighter helicopter from the US in February 2020, 22 helicopters have met the Indian Air Force, but the delivery of six helicopters to the rest of the Indian Army has not yet occurred. While Morocco had ordered Apache Helicopter in June 2020 i.e. after India and has also started receiving their delivery. The question arises why India has not yet received Apache Helicopter? Is it a delay case in the delivery line or are some more reasons?

Apache AH-64E Delay: India Still Waiting, Morocco Receives First Batch!

According to the sources, the army had to deliver the first batch of three AH-64E Apache attacker helicopters from Boeing in December 2024, but has not yet been delivered. The Aviation Corps of the Indian Army is still waiting for its state-of-the-art Apache AH-64E attack helicopters. This fleet of six helicopters from the U.S. had already come to India, but it has not been delivered so far. The Indian Army had received the helicopter in a three-three batch and the first consignment of the May-June 2024 as per the scheme. While the Indian Army’s first Apache Squadron is still waiting for his fighter helicopters.

India had signed $600 million (closed Rs 5000 crore) for purchase of six Apache Helicopters in February 2020 with the US. The deal was made to enhance the air battle capacity of the Indian Army, to further strengthen the helicopter fleet of the Army. But in the first batch delivery, more than three months have been delayed, affecting the forces.

Apache AH-64E: Deployment of First Apache Squadron in Naglava of Rajasthan

भारतीय सेना के एविएशन कॉर्प्स ने मार्च 2024 में नागतलाव, जोधपुर में अपनी पहली अपाचे स्क्वाड्रन का गठन किया था। यहां के पायलट और ग्राउंड स्टाफ पहले ही ट्रेनिंग ले चुके हैं और ऑपरेशन के लिए तैयार हैं। लेकिन डिलीवरी में हो रही देरी के कारण फ्लाइट ऑपरेशन शुरू नहीं हो सका। सेना के अधिकारियों को भी यह स्पष्ट जानकारी नहीं है कि इन अटैक हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी कब पूरी होगी।

Apache AH-64E: डिलीवरी में “प्रोडक्शन लाइन इश्यू”?

अपाचे AH-64E को भारतीय सेना की पश्चिमी सीमाओं पर वार ऑपरेशंस में इस्तेमाल करने के लिए शामिल किया गया है। ये अटैक हेलीकॉप्टर अपनी एक्सीलेंट मोबिलिटी, लीथल वेपन सिस्टम्स और एडवांस्ड टार्गेटिंग टेक्नोलॉजी के लिए जाने जाते हैं। भारतीय सेना के लिए ये बेहद जरूरी हैं क्योंकि ये किसी भी ऑपरेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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गौरतलब है कि भारतीय वायुसेना पहले ही अपने 22 अपाचे हेलीकॉप्टरों को ऑपरेशनल कर चुकी है। ये हेलीकॉप्टर 2015 में अमेरिका के साथ हुए एक अलग सौदे के तहत शामिल किए गए थे। हालांकि, भारतीय थल सेना अब भी इन मॉ्र्डन हेलीकॉप्टरों का इंतजार कर रही है, जिससे उसकी युद्ध क्षमता में बड़ा इजाफा हो सके।

सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी रक्षा विभाग और बोइंग की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि भारत की डिलीवरी में “प्रोडक्शन लाइन इश्यू” की वजह से देरी हो रही है। हालांकि, अमेरिका की ओर से अब तक यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी कब शुरू होगी और अगली संभावित तारीख क्या होगी। लेकिन सेना को मिलने वाले हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी अभी तक रुकी हुई है। इसके विपरीत, मोरक्को को उसके ऑर्डर किए गए अपाचे हेलीकॉप्टर मिलने शुरू हो गए हैं।

वहीं सूत्रों का कहना है कि जब मोरक्को को समय पर डिलीवरी दी जा सकती है, तो भारत के मामले में प्रोडक्शन लाइन में दिक्कत क्यों आ रही है? रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका ने भारत के मुकाबले मोरक्को को प्राथमिकता दी है, क्योंकि अफ्रीका और मध्य पूर्व में अमेरिका की रणनीतिक जरूरतें अलग हैं। मोरक्को अमेरिका का करीबी सैन्य सहयोगी है और उसकी सुरक्षा रणनीति में वॉशिंगटन की सीधी भागीदारी रहती है। इसलिए, भारत के बजाय मोरक्को को पहले अपाचे हेलीकॉप्टर सौंपे जा रहे हैं।

क्या भारत को जानबूझकर इंतजार कराया जा रहा है?

रक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ वर्षों में रक्षा साझेदारी मजबूत हुई है, लेकिन इस तरह की घटनाएं संकेत देती हैं कि भारत अब भी अमेरिका के शीर्ष प्राथमिकता वाले डिफेंस कस्टमर्स में शामिल नहीं हुआ है। भारत ने हाल के सालों में अमेरिका से कई रक्षा उपकरण खरीदे हैं, जिनमें P-8I समुद्री गश्ती विमान, C-17 ग्लोबमास्टर, C-130J सुपर हरक्यूलिस और MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन शामिल हैं। लेकिन जब डिलीवरी की बात आती है, तो अमेरिका की ओर से “प्रोडक्शन लाइन में दिक्कत”, “नियम-कानून की प्रक्रिया” और “लॉजिस्टिक्स समस्या” जैसे कारण बताए जाते हैं, जो संदेह पैदा करते हैं कि क्या भारत को जानबूझकर इंतजार कराया जा रहा है।

अमेरिका से जवाब मांगे भारत

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि भारत को इस मुद्दे पर अमेरिका से स्पष्ट जवाब मांगना चाहिए। अमेरिकी सरकार को यह बताना चाहिए कि डिलीवरी में और कितनी देरी होगी और इसे तेज करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं। यदि अमेरिका अपने “रणनीतिक साझेदार” भारत को प्राथमिकता नहीं देता है, तो यह भविष्य में दोनों देशों के रक्षा संबंधों पर असर डाल सकता है।

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चीन-पाकिस्तान बढ़ा रहे ताकत

उनका कहना है कि इस देरी का सीधा असर भारतीय सेना की ऑपरेशनल क्षमताओं पर पड़ेगा। चीन और पाकिस्तान हवाई युद्धक क्षमताओं में लगातार अपनी सैन्य ताकत को बढ़ा रहे हैं। चीन ने हाल ही में अपने Z-10 अटैक हेलीकॉप्टरों को अपग्रेड किया है और पाकिस्तान को भी नई तकनीक से लैस लड़ाकू हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए हैं। ऐसे में, भारत को जल्द से जल्द अपने अपाचे हेलीकॉप्टरों की जरूरत है ताकि वह अपनी हवाई आक्रमण और टैंक रोधी युद्धक क्षमताओं को मजबूत कर सके।

Apache AH-64E Delay: India Still Waiting, Morocco Receives First Batch!
Royal Moroccan Air Force Apache

मोरक्को को 36 AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टर?

मोरक्को को AH-64E अपाचे हेलीकॉप्टरों की खरीद के लिए 36 यूनिट्स तक की मंजूरी दी गई थी, जिसमें 24 हेलीकॉप्टर पक्के ऑर्डर के तौर पर और 12 अतिरिक्त विकल्प के रूप में शामिल थे। इस सौदे में 12 लॉन्गबो रडार का भी प्रावधान था, जिससे हेलीकॉप्टरों की टार्गेटिंग और युद्ध क्षमताएं और अधिक प्रभावी हो जाती हैं।

मोरक्को को अमेरिकी कंपनी बोइंग से मिले इस सैन्य पैकेज में प्रिसीजन-गाइडेड वेपन सिस्टम भी शामिल हैं। इसमें 1,000 से अधिक AGM-114 हेलफायर मिसाइलें, 600 APKWS लेजर-निर्देशित रॉकेट, 50 से अधिक FIM-92 स्टिंगर मिसाइलें और 5,216 हाइड्रा 70 अनगाइडेड रॉकेट दिए गए हैं, जो अपाचे की मारक क्षमता को और बढ़ाते हैं।

इसके अलावा, इस सौदे में 30 मिमी गोला-बारूद के 93,000 राउंड, विभिन्न सहायक प्रणालियां और लॉजिस्टिक्स सेवाएं भी शामिल हैं। कुल पैकेज की अनुमानित लागत $4.25 बिलियन आंकी गई थी। इन अपाचे के आगमन के साथ, मोरक्को मिस्र के बाद AH-64 ऑपरेट करने वाला दूसरा अफ्रीकी देश बन गया है। हालांकि, इस महाद्वीप में एडवांस AH-64E वर्जन को तैनात करने वाला मोरक्को पहला देश है, जिसे “गार्जियन” के रूप में भी जाना जाता है।

Apache Helicopters: await will end soon! Indian army will get the first AH-64E Apache Helicopter batch in December 2024

वहीं, भारत को अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में देरी के चलते भारतीय सेना को रणनीतिक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान और चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के मद्देनजर सेना के लिए ये हेलीकॉप्टर बेहद अहम हैं। यह स्पष्ट नहीं है कि भारत को ये हेलीकॉप्टर कब तक मिलेंगे, लेकिन इस देरी ने भारतीय सेना की युद्ध क्षमताओं को प्रभावित किया है।

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रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस डील में और देरी होती है, तो भारतीय सेना को अपने मौजूदा संसाधनों पर ही निर्भर रहना होगा। इससे जमीनी अभियानों में हवाई समर्थन देने की क्षमता सीमित हो सकती है।

क्या भारत को अन्य विकल्प तलाशने होंगे?

यदि अपाचे हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी में और देरी होती है, तो भारतीय रक्षा मंत्रालय को अन्य विकल्पों पर भी विचार करना पड़ सकता है। भारत पहले से ही लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर (LCH) प्रोजेक्ट पर जोर दे रहा है, जिसे HAL ने डेवलप किया है। इसके अलावा, अन्य देशों के साथ भी सामरिक समझौतों पर विचार किया जा सकता है।

भारतीय सेना को अपनी पहली अपाचे स्क्वाड्रन को ऑपरेट करने के लिए अभी और इंतजार करना होगा। अमेरिका की ओर से कोई स्पष्ट डिलीवरी टाइमलाइन नहीं दी गई है, जिससे भारतीय सैन्य रणनीति को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। अब यह देखना होगा कि क्या अमेरिका जल्द से जल्द इन हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी कर पाता है, या भारतीय सेना को अपने मौजूदा संसाधनों के साथ ही काम चलाना पड़ेगा।

भारत को अपाचे हेलीकॉप्टर की जरूरत क्यों?

भारत के लिए अपाचे AH-64E एक महत्वपूर्ण लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जिसे दुनिया का सबसे आधुनिक और घातक अटैक हेलीकॉप्टर माना जाता है। भारतीय सेना और वायुसेना दोनों के लिए यह हेलीकॉप्टर रणनीतिक रूप से बेहद अहम है, खासकर चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए।

अपाचे AH-64E हेलीकॉप्टर की खासियतें:

  • हेलफायर मिसाइल से लैस यह हेलीकॉप्टर दुश्मन के टैंकों और बख्तरबंद वाहनों को नष्ट करने में सक्षम है।
  • इसमें लॉन्गबो रडार लगा है, जिससे यह दिन और रात दोनों में सटीक हमले कर सकता है।
  • एडवांस एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम, इसे किसी भी युद्धक्षेत्र में इस्तेमाल के लिए आदर्श बनाते हैं।

Author

  • Herry passport

    Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.

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