📍New Delhi | 31 Jul, 2026, 12:01 PM
IAF Garud Commandos Vehicle: Special Force Garud Commandos of Indian Air Force can get a new high mobility all-terrain vehicle (HMTV). This vehicle will be specially designed to perform fast operation on elevated hillsides, deserts, snow-covered areas and hard paths. The Ministry of Defence has released the Request for Information (RFI) for the purchase of this vehicle.
IAF Garud Commandos Vehicle: What are the needs of Guruda Commandos
Indian Air Force Grud Commandos Special campaigns run in the toughest country. The deployment of these often occurs in the protection of elevated mountains, border areas, deserts and sensitive airbases. That is why they need a vehicle that can work at a height of up to 5000 meters.
Their entire Combat operational gear, arms, communication equipment and other mission materials with soldiers in the vehicle should be adequate space to keep. It will also have modern surveillance systems and IFF (Identification Friends Or F) capacity, making it easier to identify yourself and enemies.
The service life of the vehicle should be 10 years or 1 lakh kilometres.
Small size, but heavy capacity
The length of this vehicle should not exceed 4115 millimeters, width 1905 millimeters and height 1778 millimeters. The aim is to easily drive the vehicle into narrow hill roads and limited spaces.
The vehicle will have four doors and at least four full equipped soldiers will have a seating arrangement. A separate boot space of more than 1100 liters is also demanded, so that additional arms and equipment can be placed.
खाली व्हीकल का वजन 1475 किलोग्राम से अधिक नहीं होना चाहिए, जबकि इसका पेलोड 1100 किलोग्राम या उससे अधिक होना जरूरी है। (IAF Garud Commandos Vehicle)
1400 सीसी इंजन और फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम
RFI के अनुसार एचएमएटीवी में चार सिलेंडर टर्बोचार्ज्ड पेट्रोल इंजन लगाया जाएगा। इंजन की क्षमता कम से कम 1400 सीसी होगी। यह 163 हॉर्सपावर की शक्ति और 254 न्यूटन मीटर से अधिक टॉर्क पैदा करने में सक्षम होना चाहिए।
व्हीकल में ऑन-डिमांड टू-व्हील ड्राइव और फोर-व्हील ड्राइव सिस्टम होगा। कठिन रास्तों पर बेहतर पकड़ के लिए न्यूमेटिकली लॉक होने वाले डिफरेंशियल भी दिए जाएंगे।
इसके साथ ऑटोमैटिक सीवीटी ट्रांसमिशन, लो-गियर ट्रांसफर केस और सभी पहियों पर इंडिपेंडेंट सस्पेंशन की व्यवस्था होगी। मिलिट्री ग्रेड के शॉक एब्जॉर्बर भी लगाए जाएंगे ताकि ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर भी व्हीकल संतुलित रहे। (IAF Garud Commandos Vehicle)
मुश्किल रास्तों पर भी नहीं रुकेगा
रक्षा मंत्रालय ने व्हीकल की ऑफ-रोड क्षमता को लेकर भी कई सख्त मानक तय किए हैं।
व्हीकल का ग्राउंड क्लियरेंस 380 मिलीमीटर या उससे अधिक होना चाहिए। यह 35 डिग्री तक की चढ़ाई चढ़ सके, 30 डिग्री तक के साइड स्लोप पर चल सके और 600 मिलीमीटर ऊंची बाधा पार कर सके।
इसके अलावा व्हीकल 650 मिलीमीटर गहरे पानी को पार करने में सक्षम होना चाहिए। इसका टर्निंग रेडियस 5500 मिलीमीटर से कम रखा गया है, ताकि संकरी जगहों पर आसानी से मोड़ा जा सके।
व्हीकल की टॉप स्पीड 100 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे अधिक हो। वहीं, पूरी क्षमता के साथ यह 20 सेकंड के भीतर 0 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार पकड़ सके। इसकी ऑपरेशनल रेंज कम से कम 400 किलोमीटर होनी चाहिए।
रन-फ्लैट टायर और सेल्फ रिकवरी विंच
व्हीकल के सभी पांच पहियों में रन-फ्लैट सिस्टम होगा। यदि गोली लगने या किसी अन्य कारण से टायर खराब हो जाए, तब भी व्हीकल कम से कम 10 किलोमीटर तक बिना रुके चल सकेगा।
इसके आगे की तरफ 4500 किलोग्राम क्षमता वाली सेल्फ रिकवरी विंच लगाई जाएगी। इसमें कम से कम 10 मीटर लंबी स्टील केबल होगी, जिससे व्हीकल खुद को दलदल, बर्फ या कठिन इलाके से बाहर निकाल सके।
इसके अलावा 1500 किलोग्राम क्षमता वाला टो-हिच, दो फ्यूल टैंक, एक स्पेयर व्हील और बर्फीले क्षेत्रों के लिए चार एंटी-स्किड स्नो चेन भी अनिवार्य होंगे। (IAF Garud Commandos Vehicle)
अत्याधुनिक नेविगेशन सिस्टम से हो लैस
एचएमएटीवी में अत्याधुनिक Navigation System लगाया जाएगा, जो नैविक, जीपीएस और ग्लोनास तीनों सैटेलाइट सिस्टम के साथ काम करेगा।
डिजिटल डिस्प्ले पर सैनिकों को नक्शा, स्थान, दिशा और अन्य जरूरी जानकारी मिलेगी। इसमें डिफेंस सीरीज मैप्स का भी सपोर्ट होगा।
व्हीकल में ऑपरेटर थर्मल नाइट साइट भी होगी, जिससे रात में 100 मीटर दूरी पर किसी व्यक्ति और 200 मीटर दूरी पर व्हीकल की पहचान की जा सकेगी।
इसके अलावा थर्मल इन्फ्रारेड बीकन भी लगाया जाएगा, जिसकी हवाई पहचान क्षमता कम से कम 4 किलोमीटर होगी।
दुश्मन की नजर से बचाने के लिए विशेष कैमोफ्लाज
वहीं, व्हीकल में थ्री-डी मल्टी-स्पेक्ट्रल कैमोफ्लाज किट भी होना जरूरी है। यह कैमोफ्लाज केवल सामान्य रंग बदलने वाला कवर नहीं होगा, बल्कि विजिबल लाइट के साथ-साथ मिड-वेव इन्फ्रारेड (एमडब्ल्यूआईआर) और लॉन्ग-वेव इन्फ्रारेड (एलडब्ल्यूआईआर) स्पेक्ट्रम में भी व्हीकल की पहचान कम करेगा। इसमें 700 मेगाहर्ट्ज से 24 गीगाहर्ट्ज तक के रडार स्पेक्ट्रम में टेस्ट भी शामिल रहेगा। (IAF Garud Commandos Vehicle)
हवाई मार्ग से भी ले जाया जा सकेगा
इस व्हीकल को भारतीय वायुसेना के मौजूदा परिवहन विमानों में ले जाने योग्य बनाया जाएगा। जरूरत पड़ने पर इसे चिनूक और एमआई-26 हेलीकॉप्टर के नीचे लटकाकर भी ले जाया जा सकेगा।
इसके अलावा इसे मिलिट्री रेलवे वैगन के जरिए भी एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाया जा सकेगा। सथ ही इसे पैरा-ड्रॉप भी किया जा सकेगा।
यह खरीद डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (डीएपी)-2020 के तहत ‘बाय इंडियन’ श्रेणी में की जाएगी। वाहन में कम से कम 60 फीसदी स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल जरूरी होगा। कॉन्ट्रैक्ट पर साइन होने के बाद पूरी डिलीवरी 12 महीने के भीतर पूरी करनी होगी। (IAF Garud Commandos Vehicle)
Author
Harendra Chaudhary is active in defence journalism and is associated with RakshaSamachar.com. They have long been covering strategic news, defence policies and national security related issues involving Indian Army, Navy and Air Force. In his career of journalism, Harendra has written detailed articles on Parliament’s activities, military campaigns, India-Pak and India-China border dispute, defence procurement and ‘Make in India’ defence projects. They are known for deep understanding and analytical approach of defense cases.





