📍New Delhi | 18 Mar, 2026, 12:14 PM
Ukraine Drone Warfare: US President Trump, among the wars running between the US-Iran in West Asia, sought the Interceptor Drone to combat Shaheed Drone from Ukraine. After which Ukraine deployed 200 Ukrainian Air Defense Expert West Asia with Interceptor Drone. This disclosure himself carried out in the UK Parliament by Vladimir Gellensky, President of Ukraine. Jelensky, addressing the Parliament, detailed information on rapid changing techniques in the modern war. He said the drone technology has completely changed the appearance of the war and now cheap weapons are also challenging the expensive military system.
He also told in his address that the scope of war is increasing in the way of defence cooperation between Russia and Iran. According to them, it is not only a regional conflict, but its influence can be seen globally. (Ukraine Drone Warfare)
Ukraine Drone Warfare: New Strategy Starting At Shahid Drone
Jailensky said that about three years ago Russia from Iran "Shaydow"The drones were met. These are drones that are designed in low cost, but they are used to damage expensive infrastructure. He told Iran to use and build these drones to Russia. Later Russia has made changes to this and now these drones have included parts of Russian technology. (Ukraine Drone Warfare)
Large strength becoming low-cost weapons
Gelensky said that in the modern war is now getting a new kind of competition. While there are expensive air defense systems and weapons on one side, there are low-cost drones on the other hand. He told a small Drone A few hundred dollars can be ready, while the cost of the system used to prevent it is up to thousands or millions of dollars. This is why the balance of war is changing. (Ukraine Drone Warfare)
able to attack the ground from the sea
Ukraine has also developed such bots, which can carry and launch other drones. Also such systems are designed, which can attack the ground from the sea. Gelensky reported that these drones are being made to work more stable and longer distances. He said that such systems are being prepared in the future, which will also be able to work in the toughest conditions of the sea.
According to Gelensky, Ukraine has also changed its strategy, understanding the way of this changing war. Gelensky reported that initially Ukraine made ordinary Kamikaji Marine Drone, used to target enemy ships. Then Ukraine developed such drones, which have been imposed by the Turret i.e. the gun system. These drones can also target the helicopter in the air.
He told that now Ukraine has also developed drones that can also target enemy fighters by flying from the sea. This technique is being considered a major change in modern wars. (Ukraine Drone Warfare)
Ongoing work even on the underwater system
उन्होंने यह भी बताया कि यूक्रेन अब अंडरवाटर सिस्टम यानी पानी के नीचे काम करने वाले ड्रोन पर भी काम कर रहा है। ब्लैक सी में बढ़ते खतरों को देखते हुए यह तकनीक विकसित की जा रही है। उनके अनुसार, इन तकनीकों की मदद से यूक्रेन ने अपनी सुरक्षा के लिए नए समाधान तैयार किए हैं।
Jailensky ने बताया कि यूक्रेन अब ऐसे ड्रोन विकसित कर रहा है, जो लंबे समय तक समुद्र में काम कर सकें। जेलेंस्की ने कहा कि इन ड्रोन को और ज्यादा स्थिर और प्रभावी बनाया जा रहा है, ताकि वे कठिन मौसम और समुद्री परिस्थितियों में भी ऑपरेशन कर सकें। उन्होंने कहा कि जल्द ही ऐसे सिस्टम तैयार होंगे, जो महासागर जैसी परिस्थितियों में भी काम कर सकेंगे। (Ukraine Drone Warfare)
We must go further. We must build modern defense forces – together. Only together, with you, with our allies. In Europe, we must produce all levels of air defense – against drones and all types of missiles, including ballistic. Our seas must be secure, and our forces in other… pic.twitter.com/XSCmAYDN7L
— Volodymyr Zelenskyy March 17, 2019
दूसरे देशों को भी दे रहा है तकनीकी सहयोग
जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन अपनी इस तकनीक को अन्य देशों के साथ साझा करने के लिए भी तैयार है। उन्होंने बताया कि यूक्रेन के सैन्य विशेषज्ञ कई देशों में काम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यूक्रेन के करीब 200 से ज्यादा विशेषज्ञ मध्य पूर्व और खाड़ी देशों में मौजूद हैं। और 34 अन्य लोग तैनाती के लिए तैयार हैं। ये सभी सैन्य विशेषज्ञ हैं, जिन्हें “शाहेद” जैसे ड्रोन से बचाव और मुकाबला करने का अनुभव है। हमारी टीमें पहले से ही यूएई, कतर और सऊदी अरब में काम कर रही हैं, जबकि कुछ टीमें कुवैत के रास्ते में हैं। इसके अलावा हम कई अन्य देशों के साथ भी सहयोग कर रहे हैं और इसको लेकर समझौते पहले ही हो चुके हैं।
ये विशेषज्ञ ड्रोन से सुरक्षा और रक्षा प्रणाली को मजबूत करने में मदद कर रहे हैं। इन विशेषज्ञों का काम वहां ड्रोन से सुरक्षा के उपाय तैयार करना और डिफेंस सिस्टम को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि इन सैन्य विशेषज्ञों को मैंने हमारे सहयोगी देशों के अनुरोध पर भेजा है, जिसमें अमेरिका भी शामिल है। दरअसल, यह उसी “ड्रोन डील” का हिस्सा है, जिसे हमने अमेरिका के साथ मिलकर प्रस्तावित किया था और जिस पर अभी भी बातचीत जारी है। (Ukraine Drone Warfare)
रियल टाइम कंट्रोल सिस्टम से बढ़ी क्षमता
यूक्रेन ने एक ऐसा डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया है, जिसके जरिए पूरे युद्ध क्षेत्र की स्थिति को रियल टाइम में देखा जा सकता है। जेलेंस्की ने बताया कि इस सिस्टम के जरिए फ्रंटलाइन की स्थिति, हमलों की जानकारी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है।
जेलेंस्की ने कहा कि मेरे पास इस बात के सबूत हैं कि सुरक्षा व्यवस्था को बहुत तेजी से बदला जा सकता है, और यह पुराने रक्षा सिस्टम के मुकाबले सस्ती भी हो सकती है। उन्होंने कहा, यह एक आईपैड है, जिसमें ऐसा सॉफ्टवेयर है जो हमें रियल टाइम में अपनी सुरक्षा पर नजर रखने और उसे कंट्रोल करने की सुविधा देता है। यह कोई कल्पना नहीं, बल्कि हकीकत है। मेरे पास यह आईपैड है, हमारे प्रधानमंत्री, रक्षा मंत्री और शीर्ष सैन्य कमांडरों के पास भी यही सिस्टम है। इसके जरिए हम यूक्रेन के फ्रंटलाइन की स्थिति देख सकते हैं, यहां तक कि दुश्मन के नुकसान को भी वीडियो सबूत के साथ ट्रैक कर सकते हैं।
इस समय फ्रंटलाइन पर रूस के लगभग 90% नुकसान हमारे ड्रोन के कारण हो रहे हैं। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी हो गया है कि ड्रोन टेक्नोलॉजी में किसके पास बढ़त है और उनसे बचाव में कौन ज्यादा मजबूत और तेज है।
यह आईपैड हमें आसमान में होने वाले हर हमले, समुद्री क्षेत्र की गतिविधियों और रूस के खिलाफ हमारी लंबी दूरी की स्ट्राइक की जानकारी भी देता है। इसके जरिए लोगों की सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा क्षेत्र पर भी रियल टाइम नजर रखी जाती है।
मेरा मानना है कि भविष्य में सुरक्षा का यह सिस्टम इतना विकसित हो जाएगा कि हर देश के नेता, रक्षा मंत्री ही नहीं, बल्कि आम लोगों के पास भी ऐसे टूल्स होंगे, जिनसे वे अपनी सुरक्षा को बेहतर तरीके से समझ और देख सकेंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरह के सिस्टम से कमांड और कंट्रोल में सुधार होता है और तेजी से फैसले लिए जा सकते हैं। (Ukraine Drone Warfare)
ड्रोन से होने वाले हमलों को रोकने की तैयारी
जेलेंस्की ने यह भी बताया कि यूक्रेन ने ड्रोन से होने वाले हमलों को रोकने के लिए इंटरसेप्टर सिस्टम भी विकसित किए हैं। उन्होंने कहा कि यूक्रेन हर दिन बड़ी संख्या में ऐसे इंटरसेप्टर तैयार कर सकता है।
जेलेंस्की ने बताया कि हम हर दिन कम से कम 2,000 प्रभावी और युद्ध में साबित इंटरसेप्टर बनाने में सक्षम हैं। हम इससे ज्यादा भी बना सकते हैं, यह निवेश पर निर्भर करता है। हमें रोज लगभग 1,000 इंटरसेप्टर की जरूरत होती है, और हम अपने सहयोगी देशों को भी कम से कम 1,000 इंटरसेप्टर रोज उपलब्ध करा सकते हैं।
उन्होंने कहा, हमें यह अच्छी तरह पता है कि “शाहेद” जैसे ड्रोन और अन्य ड्रोन किस तरह आते हैं, और उन्हें रोकने के लिए हम रडार और ध्वनि (एकॉस्टिक) निगरानी सिस्टम तैयार कर सकते हैं।
इसके अलावा रडार और सॉफ्टवेयर सिस्टम भी बनाए गए हैं, जो इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के बावजूद काम करते रहते हैं। इससे ड्रोन की पहचान और उन्हें रोकना आसान होता है। (Ukraine Drone Warfare)
ड्रोन से बदल रहा वैश्विक सुरक्षा ढांचा
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि अब ड्रोन केवल जमीन से ही नहीं, बल्कि समुद्र से भी लॉन्च किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि लंबी दूरी तक हमले करना अब सामान्य होता जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि समुद्र में मौजूद जहाजों से भी ड्रोन लॉन्च किए जा सकते हैं, जिससे सुरक्षा चुनौतियां और बढ़ जाती हैं।
जेलेंस्की ने कहा कि आधुनिक हथियार अब हजारों किलोमीटर दूर तक हमला करने में सक्षम हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन दोनों ही लंबी दूरी तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि दुनिया के किसी भी हिस्से में हो रहा संघर्ष अब दूसरे देशों को भी प्रभावित कर सकता है। (Ukraine Drone Warfare)
रूस-ईरान के सहयोग पर उठाए सवाल
जेलेंस्की ने अपने संबोधन में रूस और ईरान के बीच बढ़ते रक्षा सहयोग पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच हथियारों और तकनीक का आदान-प्रदान हो रहा है। उनके अनुसार, यह सहयोग वैश्विक सुरक्षा के लिए चुनौती बन सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के सहयोग से युद्ध का स्वरूप और जटिल हो रहा है। (Ukraine Drone Warfare)
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