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150 किमी तक मार करेगा रैमजेट आर्टिलरी शेल Sceptre, अमेरिका-ब्रिटेन के बीच 500 मिलियन डॉलर की डील

सेप्टर एक 155 मिमी का आर्टिलरी शेल है, जिसे लंबी दूरी तक हमला करने के लिए डेवलप किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाला रैमजेट इंजन है...

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📍नई दिल्ली | 15 Oct, 2026, 12:14 PM

Sceptre Ramjet Artillery Shell: अमेरिका की डिफेंस कंपनी टिबेरियस एयरोस्पेस ने अपने रैमजेट इंजन से चलने वाले 155 मिमी आर्टिलरी शेल ‘सेप्टर’ (Sceptre) के निर्माण, टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग और डिस्ट्रिब्यूशन के लिए ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी कंपनियों के साथ 500 मिलियन डॉलर का समझौता किया है। कंपनी ने हााल ही में इस साझेदारी एलान किया है। इस समझौते की खास बात यह है कि सेप्टर को 155 मिमी तोपों से दागने के लिए डिजाइन किया गया है, इसकी अधिकतम रेंज 150 किलोमीटर तक है।

टिबेरियस एयरोस्पेस के मुताबिक, इस समझौते के तहत दोनों पार्टियां हथियार की इंजीनियरिंग, तकनीकी विकास और मैन्युफैक्चरिंग पर मिलकर काम करेंगे। हालांकि, कंपनी ने अभी यह नहीं बताया है कि समझौते में कितने आर्टिलरी शेल शामिल हैं, ब्रिटेन की किन कंपनियों के साथ यह करार हुआ है और इसके लिए भुगतान कौन करेगा। किसी सरकार ने भी अब तक सेप्टर के लिए ऑर्डर की आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

क्या है Sceptre Ramjet Artillery Shell?

सेप्टर एक 155 मिमी का आर्टिलरी शेल है, जिसे लंबी दूरी तक हमला करने के लिए डेवलप किया जा रहा है। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाला रैमजेट इंजन है। सामान्य आर्टिलरी शेल को तोप से दागने के बाद उसकी रफ्तार और उड़ान का रास्ता मुख्य रूप से शुरुआती वेलोसिटी, गुरुत्वाकर्षण और एरोडायनेमिक् पर निर्भर करता है। लंबी दूरी वाले कुछ शेल्स में अतिरिक्त दूरी हासिल करने के लिए रॉकेट असिस्ट का इस्तेमाल किया जाता है।

वहीं, सेप्टर की तकनीक इससे अलग है। इसमें लिक्विड फ्यूल पर चलने वाला रैमजेट इंजन लगाया गया है, जो उड़ान के दौरान शेल को अतिरिक्त थ्रस्ट देने के लिए डिजाइन किया गया है। इस तकनीक का उद्देश्य तोप से निकलने के बाद भी शेल की स्पीड बनाए रखना और उसकी मारक दूरी बढ़ाना है।

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कंपनी के अनुसार, सेप्टर की अधिकतम रेंज लगभग 150 किलोमीटर है। इसकी रफ्तार मैक 3.5 तक है। जो ध्वनि की रफ्तार से लगभग साढ़े तीन गुना तेज है। कंपनी का यह भी दावा है कि शेल 19,800 मीटर यानी लगभग 65,000 फीट की ऊंचाई से ऊपर तक पहुंच सकता है।

कैसे काम करता है रैमजेट इंजन?

रैमजेट एक ऐसा एयर-ब्रीदिंग इंजन है, जिसमें हवा को इंजन के भीतर लाने के लिए अलग से घूमने वाले कंप्रेसर की जरूरत नहीं होती। जब कोई प्रोजेक्टाइल बहुत तेज गति से आगे बढ़ता है, तो उसके सामने से आने वाली हवा इंजन के भीतर प्रवेश करती है। इस हवा को उपयुक्त परिस्थितियों में संपीड़ित किया जाता है और ईंधन के साथ दहन से थ्रस्ट पैदा होता है।

कंपनी का दावा है कि सेप्टर को मौजूदा नाटो-मानक 155 मिमी हॉवित्जर से दागा जा सकता है और इसके लिए तोप में बदलाव करने की जरूरत नहीं होगी। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

अप्रैल 2026 में हुआ था अहम परीक्षण

टिबेरियस एयरोस्पेस ने अप्रैल 2026 में अमेरिका के न्यू मैक्सिको में नाटो-मानक 155 मिमी हॉवित्जर से सेप्टर का परीक्षण किया था। कंपनी के अनुसार, इस परीक्षण के दौरान उड़ान में रैमजेट इंजन को चालू करने में सफलता मिली।

कंपनी ने इसे तरल ईंधन वाले रैमजेट प्रोजेक्टाइल को इस तरह लॉन्च करके उड़ान के दौरान इंजन चालू करने का पहला परीक्षण बताया। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

समझौते में क्या शामिल है?

1 अक्टूबर हुए इस समझौते के तहत टिबेरियस एयरोस्पेस और ब्रिटेन के तकनीकी साझेदार सेप्टर के निर्माण, टेक्नोलॉजी लाइसेंसिंग और वितरण पर सहयोग करेंगे। कंपनी ने इस साझेदारी को अपने ‘डिफेंस-ऐज-अ-सर्विस’ मॉडल के तहत बड़े स्तर पर आगे बढ़ने वाला पहला कार्यक्रम बताया है।

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इस मॉडल में कंपनी हथियार की तकनीक विकसित करने, उसका परीक्षण करने और उसकी क्षमता को वैलिडेट करने पर काम करेगी। इसके बाद योग्य मैन्युफैक्चरर्स और साझेदार देशों को तकनीक का लाइसेंस देकर स्थानीय स्तर पर उत्पादन करने की व्यवस्था बनाई जा सकती है।

यह समझौता अमेरिका के इंटरनेशनल ट्रैफिक इन आर्म्स रेगुलेशंस (आईटीएआर) के तहत तकनीकी सहयोग की मंजूरी से जुड़ा है। अमेरिकी विदेश विभाग की अनुमति से नियंत्रित सैन्य तकनीकी जानकारी विदेशी साझेदारों के साथ साझा की जा सकती है। इस व्यवस्था के तहत तकनीकी डेटा, इंजीनियरिंग और मैन्युफैक्चरिंग से संबंधित सहयोग को नियामकीय शर्तों के अनुसार आगे बढ़ाया जाता है। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

एआई प्लेटफॉर्म GRAIL

टिबेरियस एयरोस्पेस अपने उत्पादन और तकनीकी साझेदारी के मॉडल में ग्रेल (GRAIL) नाम के एआई-आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती है। कंपनी के अनुसार, यह प्लेटफॉर्म हथियार की जरूरतों, इंजीनियरिंग, सप्लायर, निर्यात नियमों और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े कामों को एक साथ जोड़ता है।

कंपनी के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी चैड स्टीलबर्ग ने कहा, “पश्चिम की सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत आविष्कार करने, प्रतिस्पर्धा करने और निर्माण करने की स्वतंत्रता है।”

उन्होंने सेप्टर को इस मॉडल का पहला बड़े स्तर का उदाहरण बताया। स्टीलबर्ग इससे पहले आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी वेरिटोन की सह-स्थापना कर चुके हैं। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय और अमेरिकी सेना के साथ भी काम

टिबेरियस एयरोस्पेस ने 2022 में अपनी शुरुआत की थी। कंपनी ने मई 2025 में लंदन में आयोजित फ्यूचर आर्टिलरी सम्मेलन में सेप्टर को सार्वजनिक रूप से पेश किया था। इससे पहले कंपनी गोपनीय रूप से इस तकनीक पर काम कर रही थी।

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कंपनी के कार्यक्रम में ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय के साथ अनुबंध के तहत किया गया काम भी शामिल रहा है। इसके अलावा उसे अमेरिकी डिफेंस इनोवेशन यूनिट से समर्थन मिला है और अमेरिकी सेना के कॉम्बैट कैपेबिलिटीज डेवलपमेंट कमांड आर्मामेंट्स सेंटर के साथ कोऑपरेटिव रिसर्च एंड डेवलपमेंट एग्रीमेंट के तहत सहयोग किया गया है। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

भारत और नॉर्वे में भी रैमजेट आर्टिलरी पर काम

155 मिमी रैमजेट आर्टिलरी शेल पर काम केवल टिबेरियस एयरोस्पेस तक सीमित नहीं है। नॉर्वे की कंपनी नाम्मो भी इसी तरह का रैमजेट शेल डेवलप कर रही है। कंपनी ने अपने प्रोजेक्टाइल की अधिकतम रेंज 150 किलोमीटर तक बताई है।

भारत में डीआरडीओ भी रैमजेट प्रोजेक्टाइल तकनीक पर काम कर रही है। यह तकनीक एटीएजीएस यानी एडवांस्ड टोव्ड आर्टिलरी गन सिस्टम जैसी 155 मिमी तोपों के साथ इस्तेमाल के संदर्भ में चर्चा में रही है।

रैमजेट तकनीक का मुख्य उद्देश्य तोप के शेल की दूरी बढ़ाना है, ताकि लंबी दूरी के लक्ष्यों पर हमला करने के लिए हर बार मिसाइल का इस्तेमाल न करना पड़े। (Sceptre Ramjet Artillery Shell)

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  • News Desk

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