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LUCAS Vs Shahed 136: First time US attacked Kamikas Drone, Iranian technology copied

LUCAS drone is designed to give much bearing in lower cost. It is designed by Spectreworks. The price of a drone is about 35,000 dollars...

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📍Tehran/Washington | 1 Mar, 2026, 2:15 PM

LUCAS Vs Shahed 136: The American army has first used long-distance workforce drones in real war between the rising tension in West Asia. This drone is known as LUCAS, which is called "low-cost unscrewed combat attack system". The attack was part of the operation "Epic Fury" run together by the US and Israel, in which many bases of Iran were targeted.

The American Central Command i.e. St.com has confirmed that these drones were launched from the ground. This operation was executed by the unit named Task Force Scorpion Strike, which was specifically designed to respond to Iran’s strategy. (LUCAS Vs Shahed 136)

LUCAS Vs Shahed 136: What happens Worktable Drone

Careers The drone is also called a one-way attack drone. This means that this drone destroys him by hitting his target directly after flying once. There is no system of return. It is also called the Lotering Munition, that it attacks the right spot by staying in the air for some time.

This drone is much cheaper than traditional missiles and can be used in a large number. That’s why these are increasingly used in modern wars.

Put in simple words Shaydow The design of the drone is not completely new. Its roots first find in a concept of Israel, and the inspiration of that concept was also associated with the old design of Germany. That is, this technique has gone through the views and development of many countries, so its background is considered quite complex and mixed. (LUCAS Vs Shahed 136)

What is LUCAS Drone's USP

LUCAS ड्रोन को कम लागत में ज्यादा असर देने के लिए डिजाइन किया गया है। इसे स्पेक्ट्रेवर्क्स ने डिजाइन किया है। एक ड्रोन की कीमत करीब 35,000 डॉलर बताई गई है, जो किसी भी मिसाइल से काफी कम है। इस वजह से इसे बड़ी संख्या में तैयार किया जा सकता है और एक साथ कई ड्रोन भेजकर हमला किया जा सकता है।

इस ड्रोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी दूरी तक उड़ान भरने की क्षमता है। यह “बियॉन्ड लाइन ऑफ साइट” यानी आंखों से दिखाई देने वाली दूरी से भी आगे जाकर काम कर सकता है। इसमें ऑटोमेटेड सिस्टम लगाया गया है, जिससे यह खुद टारगेट पहचानकर हमला कर सकता है। (LUCAS Vs Shahed 136)

इस ड्रोन की रेंज करीब 444 मील तक बताई गई है और यह लगभग 6 घंटे तक हवा में रह सकता है। इसका मतलब है कि यह लंबे समय तक टारगेट ढूंढ सकता है और सही मौके पर हमला कर सकता है। इसमें करीब 40 पाउंड तक पेलोड ले जाने की क्षमता होती है, यानी यह एक सीमित लेकिन प्रभावी वारहेड लेकर जाता है।

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वहीं इसकी क्रूज स्पीड लगभग 74 नॉट्स है, जो जरूरत पड़ने पर 105 नॉट्स तक पहुंच सकती है। LUCAS को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह ऑटोनॉमस यानी अपने आप काम कर सके और नेटवर्क के जरिए दूसरे ड्रोन के साथ मिलकर हमला कर सके। इसे अलग-अलग तरीकों ग्राउंड लॉन्चर, कैटापल्ट या वाहन से लॉन्च किया जा सकता है।

इसके अलावा इसमें स्वार्म यानी झुंड में काम करने की क्षमता भी है। इसका मतलब है कि कई ड्रोन एक साथ मिलकर एक ही लक्ष्य पर हमला कर सकते हैं। इससे दुश्मन की एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बढ़ जाता है और उन्हें रोकना मुश्किल हो जाता है। (LUCAS Vs Shahed 136)

ईरान के ड्रोन से प्रेरित है अमेरिकी LUCAS

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार LUCAS ड्रोन का डिजाइन काफी हद तक iran के मशहूर शाहेद-136 ड्रोन से लिया गया है। अमेरिकी सेना ने एक ईरानी ड्रोन को हासिल किया और उसकी तकनीक को समझकर उसे अपने तरीके से विकसित किया।

शाहेद-136 ड्रोन पहले से ही कई युद्धों में इस्तेमाल हो चुका है। यह लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है और तय किए गए टारगेट पर जाकर हमला करता है। रूस ने भी इसी तरह के ड्रोन का इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में किया है।

LUCAS ड्रोन उसी डिजाइन पर आधारित है, लेकिन इसमें अमेरिकी टेक्नोलॉजी और नए फीचर्स जोड़े गए हैं। (LUCAS Vs Shahed 136)

शाहेद-136 ड्रोन की खूबियां

शाहेद-136 ईरान का एक कामिकेज ड्रोन है, जो अपनी लंबी रेंज और भारी वारहेड के लिए जाना जाता है। इसमें छोटा इंजन लगा होता है, लेकिन इसके बावजूद यह लगभग 2,000 किलोमीटर तक उड़ सकता है, जो इसे बहुत लंबी दूरी का हथियार बनाता है।

शाहेद ड्रोन का डिजाइन पूरी तरह नया नहीं है। इसकी जड़ें पहले इजरायल की एक अवधारणा में मिलती हैं, और उस अवधारणा की प्रेरणा भी जर्मनी के पुराने डिजाइन से जुड़ी थी। 1980 के दशक में दुनिया ने पहली बार जर्मनी के एक खास ड्रोन द्रोहने एंटी-रडार (डीएआर) को देखा था, जिसे डोर्नियर कंपनी ने बनाया था। इसका मकसद दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को कमजोर करना था।

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करीब चार दशक बाद, इसी तरह की सोच पर आधारित तकनीक और आगे बढ़ी। ईरान ने अपना मशहूर ड्रोन शाहेद-136 तैयार किया, जिसका इस्तेमाल रूस ने यूक्रेन युद्ध में बड़े पैमाने पर किया। बाद में ईरान ने भी इसे इजरायल के खिलाफ संघर्ष में इस्तेमाल किया। (LUCAS Vs Shahed 136)

इसी तरह भारत ने भी इज़राइली एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के हेरोप और हार्पी जैसे ड्रोन का इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान दुश्मन के ठिकानों पर सटीक हमले करने के लिए किया।

अब अमेरिका ने भी इसी की नकल करके अपना नया ड्रोन LUCAS बनाया जिसे FLM-136 भी कहा जाता है।

शाहेद ड्रोन की टॉप स्पीड करीब 100 नॉट्स (लगभग 185 किमी/घंटा) है और यह करीब 40 किलोग्राम तक का वारहेड लेकर जा सकता है। इसका मतलब है कि यह एक बार में ज्यादा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। इसे पहले से प्रोग्राम किए गए टारगेट पर हमला करने के लिए डिजाइन किया गया है, यानी लॉन्च से पहले इसमें लक्ष्य की जानकारी डाल दी जाती है।

ईरान ने इसके कई नए वेरिएंट भी बनाए हैं, जैसे शाहेद-238, जिसमें बेहतर गाइडेंस सिस्टम, रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इंफ्रारेड ट्रैकिंग जैसी तकनीक शामिल की गई है। इसके अलावा रूस भी इसी डिजाइन पर आधारित “गेरान” ड्रोन बना रहा है।

शाहेद-136 की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे बड़ी संख्या में इस्तेमाल किया जा सकता है और यह एयर डिफेंस सिस्टम के लिए चुनौती बन जाता है। हाल के संघर्षों में इसने कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया है, जिससे इसकी प्रभावशीलता सामने आई है। (LUCAS Vs Shahed 136)

कैसे लॉन्च किया गया ड्रोन

इस ऑपरेशन में LUCAS ड्रोन को जमीन से लॉन्च किया गया। इसके लिए अलग-अलग लॉन्च सिस्टम का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसे कैटापल्ट, रॉकेट असिस्टेड टेकऑफ या मोबाइल वाहन से लॉन्च किया जा सकता है।

अमेरिकी नौसेना ने पहले एक युद्धपोत से भी इस ड्रोन का परीक्षण किया था। इससे यह साफ होता है कि भविष्य में इसे समुद्र से भी लॉन्च किया जा सकता है। (LUCAS Vs Shahed 136)

ड्रोन की रेंज सैकड़ों किलोमीटर तक

इस तरह के ड्रोन की रेंज सैकड़ों किलोमीटर तक हो सकती है और यह कई घंटों तक हवा में रह सकता है। इसमें सीमित वजन का वारहेड लगाया जाता है, जो टारगेट पर जाकर विस्फोट करता है।

यह ड्रोन जीपीएस और अन्य नेविगेशन सिस्टम की मदद से उड़ान भरता है। कुछ आधुनिक वर्जन में रडार और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर भी लगाए जाते हैं, जिससे यह चलते हुए लक्ष्य को भी पहचान सकता है। (LUCAS Vs Shahed 136)

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आधुनिक युद्ध में ड्रोन का बढ़ता इस्तेमाल

हाल के वर्षों में ड्रोन युद्ध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। पहले जहां महंगे मिसाइल सिस्टम पर निर्भरता थी, अब कम लागत वाले ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। इससे छोटे देशों को भी बड़ी सैन्य ताकत मिल रही है।

ईरान ने इस क्षेत्र में काफी पहले काम शुरू कर दिया था और अब अमेरिका भी उसी मॉडल को अपनाता दिख रहा है। इससे यह साफ होता है कि भविष्य के युद्ध में ड्रोन की भूमिका और बढ़ने वाली है।

क्यों एक जैसे दिखते हैं ये ड्रोन

अगर अलग-अलग देशों के कामिकेज ड्रोन को देखा जाए, तो उनमें काफी समानता नजर आती है। इसका मुख्य कारण उनका डिजाइन है। इन ड्रोन में डेल्टा विंग यानी त्रिकोण आकार के पंख होते हैं, जो उन्हें ज्यादा स्थिरता और लंबी दूरी देते हैं।

इस डिजाइन से ड्रोन को ज्यादा ईंधन रखने की जगह मिलती है और वह ज्यादा समय तक उड़ सकता है। साथ ही यह डिजाइन सस्ता और आसान भी होता है, इसलिए कई देश इसी तरह के ड्रोन बना रहे हैं। (LUCAS Vs Shahed 136)

कितना प्रभावी है यह हथियार

इस तरह के ड्रोन दुश्मन के ठिकानों, रडार सिस्टम और एयर डिफेंस को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनकी खासियत यह है कि ये अचानक हमला करते हैं और कम लागत में ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। ये कम ऊंचाई पर लो लेवल पर उड़ान भरते हैं, जिससे ये रडार की पकड़ में आसानी से नहीं आते। हालांकि एयर डिफेंस सिस्टम इन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, लेकिन बड़ी संख्या में आने पर इन्हें पूरी तरह रोकना मुश्किल हो जाता है।

ऑपरेशन में कितने ड्रोन इस्तेमाल हुए

अमेरिका ने इस ऑपरेशन में कितने LUCAS ड्रोन इस्तेमाल किए और किन-किन ठिकानों को निशाना बनाया, इस बारे में आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। अमेरिकी अधिकारियों ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार किया है। फिर भी यह स्पष्ट है कि यह पहली बार है जब अमेरिका ने इस तरह के लंबी दूरी के कामिकेज ड्रोन को सीधे युद्ध में इस्तेमाल किया है। (LUCAS Vs Shahed 136)

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