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कर्तव्य पथ पर दिखेगी DRDO की सबसे खतरनाक मिसाइल, मैक 10 की रफ्तार से दुश्मन पर करेगी वार

डीआरडीओ पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में एलआर-एएसएचएम मिसाइल को उसके लॉन्चर के साथ कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित करेगा...

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📍नई दिल्ली | 22 Jan, 2026, 9:31 PM

Republic Day 2026 DRDO: इस साल 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर भारत अपनी डिफेंस पावर और स्वदेशी तकनीक का भव्य प्रदर्शन करने जा रहा है। इस बार डीआरडीओ देश की राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी कई अहम और अत्याधुनिक तकनीकों को कर्तव्य पथ और भारत पर्व में प्रदर्शित करेगा। इनमें सबसे प्रमुख हैं लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (एलआर-एएसएचएम) और डीआरडीओ का विशेष टेबल्यू– ‘कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक तकनीक’।

Republic Day 2026 DRDO: कर्तव्य पथ पर हाइपरसोनिक मिसाइल की ताकत

डीआरडीओ पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में एलआर-एएसएचएम मिसाइल को उसके लॉन्चर के साथ कर्तव्य पथ पर प्रदर्शित करेगा। यह मिसाइल भारतीय नौसेना की तटीय सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित की गई है। यह एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, जो स्थिर और चलती दोनों तरह की मैरीटाइम टार्गेट्स को निशाना बनाने में सक्षम है।

इस मिसाइल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें पूरी तरह स्वदेशी एवियोनिक्स सिस्टम और ज्यादा सटीकता वाले सेंसर पैकेज लगाए गए हैं। डीआरडीओ के अनुसार, यह मिसाइल अलग-अलग प्रकार के पेलोड ले जा सकती है। (Republic Day 2026 DRDO)

मैक 10 की रफ्तार से दुश्मन पर वार

एलआर-एएसएचएम मिसाइल क्वासी-बैलिस्टिक ट्रैजेक्टरी पर उड़ान भरती है। इसकी शुरुआती रफ्तार मैक 10 तक जाती है और उड़ान के दौरान यह औसतन मैक 5 की रफ्तार बनाए रखती है। यह मिसाइल कई बार “स्किप” करते हुए आगे बढ़ती है, जिससे इसका पता लगाना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है।

डीआरडीओ ने इसमें ऐसे स्वदेशी सेंसर लगाए हैं, जो अंतिम चरण में चलते हुए टारगेट को भी सटीकता से पहचान सकते हैं। कम ऊंचाई पर बेहद तेज रफ्तार और ज्यादा मैन्युवर क्षमता के चलते यह मिसाइल अपने अधिकांश मार्ग में दुश्मन के जमीनी और जहाज आधारित रडार की पकड़ से बाहर रहती है। (Republic Day 2026 DRDO)

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दो स्टेज प्रोपल्शन सिस्टम

एलआर-एएसएचएम मिसाइल में दो-स्टेज सॉलिड प्रोपल्शन रॉकेट मोटर सिस्टम लगाया गया है। पहले स्टेज का काम मिसाइल को जरूरी हाइपरसोनिक रफ्तार तक पहुंचाना होता है। जब पहली स्टेज का काम पूरा कर हो जाता है, तो वह अलग हो जाता है। इसके बाद दूसरे चरण के खत्म होने पर मिसाइल बिना इंजन के वातावरण में ग्लाइड करते हुए आवश्यक मोड़ लेती है और टारगेट पर हमला करती है। (Republic Day 2026 DRDO)

भारत पर्व में नौसेना की पनडुब्बी शक्ति का प्रदर्शन

डीआरडीओ का विशेष टेबल्यू भारत पर्व में 26 जनवरी से 31 जनवरी तक लाल किले पर आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाएगा। इस टेबल्यू की थीम है ‘कॉम्बैट सबमरीन के लिए नौसैनिक तकनीक’। इसमें भारतीय नौसेना की पारंपरिक पनडुब्बियों की ताकत बढ़ाने वाली स्वदेशी प्रणालियों को दिखाया जाएगा।

इनमें प्रमुख रूप से इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट (आईसीएस), वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो (डब्ल्यूजीएचडब्ल्यूटी) और एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) प्रणाली शामिल हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

क्या है इंटीग्रेटेड कॉम्बैट सूट

आईसीएस एक आधुनिक पनडुब्बी आधारित डिफेंस सिस्टम है, जो पानी के अंदर युद्ध और एंटी-सबमरीन ऑपरेशंस के लिए बेहद अहम मानी जाती है। यह “सिस्टम ऑफ सिस्टम्स” के रूप में काम करती है और पनडुब्बी को चारों ओर की स्थिति की पूरी जानकारी देती है।

इस प्रणाली के जरिए खतरे की तस्वीर साफ मिलती है, जिससे हथियारों के चयन, लॉन्च और गाइडेंस जैसे सामरिक फैसले आसानी से लिए जा सकते हैं। आईसीएस को विकसित करने में डीआरडीओ की आठ प्रयोगशालाओं ने मिलकर काम किया है, जिसमें देशभर के करीब 150 उद्योग और एमएसएमई भी शामिल रहे हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

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हैवी वेट टॉरपीडो से समुद्र में बढ़ेगी मारक क्षमता

वायर गाइडेड हैवी वेट टॉरपीडो एक आधुनिक पनडुब्बी से छोड़ा जाने वाला हथियार है, जिसे दुश्मन के जहाजों और पनडुब्बियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है। यह एंटी-सबमरीन युद्ध में एक बेहद घातक हथियार माना जाता है और सभी पनडुब्बियों का मुख्य हथियार होता है।

भारतीय नौसेना अपने सबमरीन बेड़े का लगातार विस्तार कर रही है, ताकि खुले समुद्र यानी ब्लू वॉटर नेवल वॉरफेयर में बढ़त बनाए रखी जा सके। इसके लिए तेज गति, लंबी दूरी और अधिक समय तक काम करने वाले स्वदेशी टॉरपीडो की जरूरत है, जिसे डीआरडीओ पूरा कर रहा है। (Republic Day 2026 DRDO)

एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन से बढ़ेगी पनडुब्बियों की क्षमता

एआईपी सिस्टम से पनडुब्बियों को लंबे समय तक पानी के नीचे रहने की क्षमता मिलती है, जिससे उनकी स्टेल्थ यानी छिपकर काम करने की ताकत बढ़ जाती है। यह प्रणाली फॉस्फोरिक एसिड फ्यूल सेल पर आधारित है और इसमें ऑनबोर्ड हाइड्रोजन जनरेटर लगाया गया है।

यह सिस्टम हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के जरिए बिजली पैदा करता है। तैयार बिजली को पनडुब्बी की पावर लाइन में भेजा जाता है, जिससे पनडुब्बी बिना शोर किए पानी के नीचे आगे बढ़ती है। यह तकनीक मॉड्यूलर है और भविष्य की पनडुब्बियों में भी इस्तेमाल की जा सकती है। (Republic Day 2026 DRDO)

परेड में दिखेंगे डीआरडीओ के बाकी हथियार

कर्तव्य पथ पर होने वाली परेड में सशस्त्र बलों की टुकड़ियों के साथ डीआरडीओ द्वारा विकसित कई अन्य सिस्टम भी दिखाए जाएंगे। इनमें अर्जुन मेन बैटल टैंक, नाग मिसाइल सिस्टम (नामिस-II), एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम, ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश एयर डिफेंस सिस्टम, बैटलफील्ड सर्विलांस रडार और एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल शामिल हैं। (Republic Day 2026 DRDO)

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