📍नई दिल्ली | 27 Jan, 2026, 8:19 PM
LR-ASHM hypersonic missile: 26 जनवरी को कर्तव्य पथ पर आयोजित 77वें गणतंत्र दिवस परेड में पहली बार लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल (LR-ASHM) को सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित किया गया। यह मिसाइल एक व्हीकल पर तैनात (व्हीकल-माउंटेड) कॉन्फिगरेशन में दिखाई गई, जिसने साफ कर दिया कि भारत अब हाइपरसोनिक हथियार बनाने के लिए तैयार है।
LR-ASHM hypersonic missile: क्या है व्हीकल-माउंटेड LR-ASHM
गणतंत्र दिवस परेड में दिखाई गई लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल जमीन से लॉन्च की जाने वाला, व्हीकल-माउंटेड सिस्टम है। इसकी मारक क्षमता लगभग 1,500 किलोमीटर तक है। इतनी लंबी रेंज के साथ यह मिसाइल समुद्र में मौजूद दुश्मन के बड़े युद्धपोतों, एयरक्राफ्ट कैरियर और अन्य रणनीतिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म को निशाना बनाने में सक्षम है।
डीआरडीओ से जुड़े सूत्रों के अनुसार, इस मिसाइल का लिमिटेड प्रोडक्शन शुरू हो चुका है। इसका उद्देश्य भारतीय नौसेना के साथ मिलकर सिस्टम की फाइन-ट्यूनिंग करना है, ताकि इसे ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से पूरी तरह तैयार किया जा सके। यह प्रोसेस आमतौर पर किसी भी नई और अत्याधुनिक हथियार प्रणाली के साथ अपनाया जाता है। (LR-ASHM hypersonic missile)
भविष्य में शिप-बेस्ड वर्जन भी होगा तैयार
फिलहाल जो लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल दिखाई गई है, वह जमीन से लॉन्च होने वाला वर्जन है। मौजूदा स्थिति में इसका साइज और वजन इतना है कि इसे सीधे किसी वॉरशिप पर फिट करना संभव नहीं है। यही वजह है कि अभी यह मिसाइल नौसेना के लिए कोस्टल बैटरी रोल में ज्यादा उपयुक्त मानी जा रही है।
हालांकि, डीआरडीओ और नौसेना के स्तर पर यह साफ कर दिया गया है कि भविष्य में एक हाइपरसोनिक नेवल वर्जन जरूर डेवलप किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि आने वाले वर्षों में लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का एक ऐसा वर्जन भी सामने आ सकता है, जिसे सीधे जहाज से लॉन्च किया जा सके। लेकिन इसके लिए डिजाइन, वजन, प्रोपल्शन और स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव जरूरी होंगे। (LR-ASHM hypersonic missile)
तीनों सेनाओं के लिए अलग-अलग वर्जन क्यों जरूरी
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि लैंड, शिप और एयर वर्जन की मिसाइलें कभी एक जैसी नहीं हो सकतीं। अगर ऐसा किया गया, तो मिसाइल अपनी पूरी क्षमता के साथ काम नहीं कर पाएगी।
जमीन से लॉन्च होने वाली मिसाइलों की जरूरतें अलग होती हैं, जहाज से दागी जाने वाली मिसाइलों की सीमाएं अलग होती हैं और हवा से लॉन्च होने वाली मिसाइलों का डिजाइन बिल्कुल अलग होता है। इसी वजह से लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल का हर वर्जन अलग-अलग रोल और प्लेटफॉर्म के हिसाब से डेवलप किया जाएगा, ताकि उसकी स्पीड, रेंज और मैनूवरेबिलिटी पर कोई समझौता न करना पड़े। (LR-ASHM hypersonic missile)
सागर विजन को मजबूत करने वाला हथियार
लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल भारत के सागर विजन (सिक्युरिटी एंड ग्रोथ फोर ऑल इन द रीजन) को जमीन पर उतारने में एक अहम भूमिका निभा सकती है। सागर का मूल विचार यह है कि हिंद महासागर क्षेत्र सुरक्षित रहे, खुले समुद्री मार्ग सुरक्षित रहें और सभी देशों के लिए व्यापार और विकास के अवसर बने रहें।
इस रणनीति के तहत भारत यह स्पष्ट संदेश है कि बाहरी शक्तियों का स्वागत तभी होगा, जब वे शांतिपूर्ण व्यापार और सहयोग के उद्देश्य से आएं। अगर कोई भी देश सैन्य दबाव या आक्रामक इरादों के साथ इस क्षेत्र में आता है, तो भारत के पास उसे रोकने की पूरी क्षमता होनी चाहिए। (LR-ASHM hypersonic missile)
महासागर विजन और इंडो-पैसिफिक में साझा सुरक्षा
आने वाले समय में भारत की रणनीति सिर्फ अकेले आगे बढ़ने की नहीं है। महासागर विजन के तहत भारत, आसियान देशों, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे साझेदारों के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समन्वित सुरक्षा व्यवस्था की ओर बढ़ सकता है।
इस सोच के पीछे विचार यह है कि अगर हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र सुरक्षित रहेंगे, तो वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री संचार भी सुरक्षित रहेगा। लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलें इस शेयर्ड सिक्युरिटी फ्रेमवर्क में भारत की भूमिका को और मजबूत बनाती हैं। (LR-ASHM hypersonic missile)
क्यों खास है LR-ASHM की हाइपरसोनिक क्षमता
लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल एक हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल है, यानी यह आवाज की गति से पांच गुना से भी ज्यादा रफ्तार से उड़ती है। इसकी उड़ान प्रोफाइल ऐसी है कि यह कम ऊंचाई पर उड़ती है, बहुत तेज रफ्तार बनाए रखती है, और उड़ते हुए दिशा बदल सकती है।
इन खूबियों की वजह से दुश्मन के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम के लिए इसे समय पर पकड़ पाना बेहद मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि इसे सी-डिनायल ऑपरेशंस के लिए एक गेम-चेंजर माना जा रहा है। (LR-ASHM hypersonic missile)
हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की बढ़ती भूमिका
हिंद महासागर से होकर दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्ते गुजरते हैं। तेल, गैस और वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र पर निर्भर है। ऐसे में जो देश इस क्षेत्र में प्रभावी सैन्य क्षमता रखता है, उसकी रणनीतिक स्थिति भी मजबूत होती है।
लॉन्ग रेंज एंटी-शिप हाइपरसोनिक मिसाइल के साथ भारत ने यह संदेश दिया है कि वह न सिर्फ अपनी सुरक्षा को लेकर गंभीर है, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की जिम्मेदारी भी समझता है। (LR-ASHM hypersonic missile)


