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अब यूरोप भी हुआ भारतीय ड्रोन का कायल, टाटा के ALS लॉइटरिंग मुनिशन ने किया मिशन-रेडी डेमो

टीएएसएल की एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन की एक बड़ी खासियत इसकी वीटीओएल क्षमता है। यानी यह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है...

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📍नई दिल्ली | 24 Jan, 2026, 12:58 PM

Tata ALS Loitering Munition: टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने हाल ही में स्वदेश में बनाए एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन का यूरोप में सफल लाइव फ्लाइट डेमो पूरा किया। कंपनी के इस डेमो का फोकस अंतरराष्ट्रीय डिफेंस कस्टमर्स हैं, जिसमें इस सिस्टम की मिशन-रेडी क्षमता को रियलटाइम परिस्थितियों में परखा गया। वहीं, इस सफलता ने न सिर्फ एएलएस सिस्टम की विश्वसनीयता को साबित किया है, बल्कि यह भी दिखाया है कि भारत अब ग्लोबल डिफेंस मार्केट पर फोकस करने के लिए तैयार है।

डेमो में एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन ने उड़ान भरते हुए अपने सभी अहम पैरामीटर्स को पूरा किया। उड़ान के दौरान इसकी स्टेबिलिटी, कंट्रोल, टार्गेट आइडेंटिफिकेशन और एक्युरेसी को परखा गया। अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के सामने हुए इस प्रदर्शन का मकसद यह देखना था कि सिस्टम रियल वार-लाइक कंडीशंस में कितना भरोसेमंद है। टीएएसएल के लिए यह डेमो इसलिए भी खास है क्योंकि इसके जरिए कंपनी ने अपने प्रोडक्ट को “मिशन-रेडी” स्तर पर स्थापित किया है। (Tata ALS Loitering Munition)

Tata ALS Loitering Munition: ड्रोन में है वीटीओएल फीचर

लॉइटरिंग मुनिशन को आम भाषा में “कामिकाजे ड्रोन” भी कहा जाता है। यह ऐसा हथियार होता है जो उड़ते हुए टारगेट एरिया में कुछ समय तक मंडराता रहता है और सही मौके पर टारगेट को निशाना बनाता है। एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन इसी आधुनिक सोच का उदाहरण है, जहां निगरानी और हमला, दोनों क्षमताएं एक ही प्लेटफॉर्म में मौजूद हैं। एएलएस सिस्टम को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह पहले इलाके की जानकारी जुटा सके और फिर जरूरत पड़ने पर सटीक हमला कर सके। (Tata ALS Loitering Munition)

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टीएएसएल की एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन की एक बड़ी खासियत इसकी वीटीओएल क्षमता है। यानी यह वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सकता है। आसान शब्दों में कहें तो इसे रनवे की जरूरत नहीं होती। यह हेलीकॉप्टर की तरह सीधा ऊपर उठ सकता है और फिर फिक्स्ड-विंग मोड में लंबी दूरी तक उड़ान भर सकता है। इन खूबियों की वजह से यह पहाड़ी इलाकों, सीमित जगहों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। (Tata ALS Loitering Munition)

एएलएस के बारे में मिली जानकारी के मुताबिक एएलएस-50 वेरिएंट वजन में 50 किलोग्राम से कम है, लेकिन इसकी मारक क्षमता और उड़ान समय काफी अच्छा है। यह 50 किलोमीटर से ज्यादा दूरी तक जा सकता है और करीब एक घंटे से अधिक समय तक हवा में रह सकता है। (Tata ALS Loitering Munition)

इस सिस्टम में इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल और इंफ्रारेड सेंसर लगे हैं, जो दिन और रात दोनों समय टारगेट की पहचान कर सकते हैं। रियल-टाइम वीडियो फीड ऑपरेटर तक पहुंचती है, जिससे वह तुरंत फैसला ले सकता है। एएलएस लॉइटरिंग मुनिशन की सटीकता इसकी सबसे बड़ी ताकत मानी जा रही है। इसमें ऐसे एल्गोरिदम इस्तेमाल किए गए हैं, जो टारगेट पर बेहद एक्युरेसी से वार करते हैं। (Tata ALS Loitering Munition)

एक और अहम बात यह है कि एएलएस सिस्टम को अलग-अलग तरह के वारहेड्स के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है। यानी जरूरत के हिसाब से इसमें बदलाव किया जा सकता है। जिससे इसे कई तरह के मिशनों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके अलावा इसमें एंटी-जैमिंग फीचर्स भी मौजूद हैं, जिससे यह जीपीएस-डिनाइड माहौल में भी काम कर सकता है। मॉडर्न वॉरफेयर में जहां इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग एक बड़ा खतरा है, वहां इस खूबी का जबरदस्त फायदा मिलेगा।

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यूरोप में हुए इस लाइव फ्लाइट डेमो का फायदा भारत की डिफेंस एक्सपोर्ट नीति को भी मिलेगा। भारत लंबे समय तक रक्षा उपकरणों के लिए आयात पर निर्भर रहा है, लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदल रही है। टीएएसएल जैसी कंपनियां स्वदेशी तकनीक विकसित कर उसे वैश्विक बाजार में पेश कर रही हैं। यह मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक ठोस कदम माना जा रहा है। (Tata ALS Loitering Munition)

बताया जाता है कि भारतीय वायुसेना को पहले ही एएलएस-50 के कुछ यूनिट्स दिए जा चुके हैं, जहां इसका उपयोग और इवैल्यूएशन किया जा रहा है। अब यूरोप में हुए इस सफल प्रदर्शन के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसमें दिलचस्पी बढ़ने की उम्मीद है। इससे न केवल टीएएसएल की वैश्विक पहचान मजबूत होगी, बल्कि भारत की छवि एक भरोसेमंद डिफेंस सप्लायर के तौर पर भी मजबूत मिलेगी। (Tata ALS Loitering Munition)

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