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Defence Shares Fall: 79,000 करोड़ रुपये की DAC मंजूरी के बावजूद तीसरे दिन भी गिरे डिफेंस शेयर, जानिए गिरावट की असली वजह

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📍नई दिल्ली | 30 Dec, 2025, 2:37 PM

Defence Shares Fall: डिफेंस सेक्टर से जुड़ी कंपनियों के शेयरों में मंगलवार को लगातार तीसरे कारोबारी दिन गिरावट देखने को मिली। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब कुछ ही दिन पहले डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (डीएसी) ने करीब 79 हजार करोड़ रुपये के बड़े रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी है। आमतौर पर ऐसी खबरों से डिफेंस शेयरों में तेजी आती है, लेकिन इस बार बाजार का रुख थोड़ा अलग दिखा।

मंगलवार के कारोबार में निफ्टी डिफेंस इंडेक्स करीब 1.5 फीसदी तक गिर गया। बीते तीन कारोबारी सत्रों में यह इंडेक्स कुल मिलाकर 2 फीसदी से ज्यादा टूट चुका है। इंडेक्स में शामिल 18 में से 16 कंपनियों के शेयर लाल निशान में ट्रेड करते नजर आए। यानी गिरावट सिर्फ कुछ चुनिंदा शेयरों तक सीमित नहीं रही, बल्कि पूरे सेक्टर में दबाव देखने को मिला।

सबसे ज्यादा गिरावट मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स के शेयरों में दर्ज की गई, जो दिन के दौरान करीब 4 फीसदी तक लुढ़क गए। इसके अलावा सोलर इंडस्ट्रीज इंडिया के शेयरों में करीब 3.5 फीसदी और डेटा पैटर्न्स (इंडिया) में लगभग 3 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। कुछ अन्य डिफेंस कंपनियों के शेयर भी 1 से 2 फीसदी तक नीचे आए।

Defence Shares Fall: गिरावट की वजह क्या है?

बाजार जानकारों का कहना है कि इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह प्रॉफिट बुकिंग है। पिछले कुछ हफ्तों में डिफेंस शेयरों में अच्छी तेजी देखने को मिली थी। खासतौर पर डीएसी मीटिंग से पहले बाजार में यह उम्मीद बन गई थी कि बड़े रक्षा सौदों को मंजूरी मिलेगी। इसी उम्मीद के चलते कई निवेशकों ने पहले ही खरीदारी कर ली थी।

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अब जब डीएसी ने वाकई में बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दे दी, तो कुछ निवेशकों ने मुनाफा कमा कर अपने शेयर बेचने शुरू कर दिए। शेयर बाजार में इसे अक्सर “बाय ऑन रूमर, सेल ऑन न्यूज” कहा जाता है। यानी खबर आने से पहले खरीद और खबर आते ही बिक्री।

इसके अलावा, साल 2025 में अब तक डिफेंस इंडेक्स करीब 19 से 20 फीसदी तक ऊपर जा चुका है। ऐसे में कई शेयरों की वैल्यूएशन पहले ही काफी बढ़ चुकी थी। साल के आखिरी दिनों में निवेशक थोड़ा सतर्क हो जाते हैं और मुनाफा निकालना पसंद करते हैं। इसका असर भी डिफेंस शेयरों पर पड़ा है।

Defence Shares Fall:  डीएसी की मंजूरी डिफेंस सेक्टर के लिए बेहद अहम

हालांकि शेयरों में गिरावट के बावजूद डीएसी की मंजूरी को सेक्टर के लिए बेहद अहम माना जा रहा है। 29 दिसंबर को हुई बैठक में सेना, नौसेना और वायुसेना के लिए कई बड़े प्रस्तावों को एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी दी गई। इन प्रस्तावों का मकसद भारतीय सशस्त्र बलों की ताकत बढ़ाना और भविष्य की जंग के लिए उन्हें तैयार करना है।

सेना के लिए जिन सिस्टम्स को मंजूरी मिली है, उनमें लोटरिंग म्यूनिशन सिस्टम, लो लेवल लाइट वेट रडार, पिनाका मल्टी लॉन्च रॉकेट सिस्टम के लिए लॉन्ग रेंज गाइडेड रॉकेट, और इंटीग्रेटेड ड्रोन डिटेक्शन एंड इंटरडिक्शन सिस्टम मार्क-2 शामिल हैं। ये सभी सिस्टम ड्रोन खतरे से निपटने और लंबी दूरी तक सटीक हमला करने की क्षमता बढ़ाएंगे।

भारतीय वायुसेना के लिए अस्त्र मार्क-2 मिसाइल, एसपीआईसी-1000 प्रिसिजन गाइडेंस किट, एलसीए तेजस के लिए फुल मिशन सिमुलेटर, और ऑटोमैटिक टेक-ऑफ लैंडिंग रिकॉर्डिंग सिस्टम को मंजूरी मिली है। इससे एयर कॉम्बैट, ट्रेनिंग और सेफ्टी तीनों मजबूत होंगी।

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नौसेना के लिए भी कुछ अहम प्रस्ताव पास किए गए हैं, जिनमें हार्बर में जहाजों को संभालने वाले टग्स, हाई फ्रीक्वेंसी सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो, और हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस ड्रोन शामिल हैं। इनसे समुद्री निगरानी और कम्युनिकेशन बेहतर होगी।

Defence Shares Fall: एनालिस्ट क्यों अब भी पॉजिटिव हैं?

भले ही शेयरों में फिलहाल गिरावट दिख रही हो, लेकिन ज्यादातर मार्केट एनालिस्ट डिफेंस सेक्टर को लेकर मीडियम से लॉन्ग टर्म में पॉजिटिव हैं। उनका कहना है कि डीएसी की मंजूरी का असर तुरंत नहीं, बल्कि आने वाले महीनों और सालों में दिखेगा।

डीएसी की मंजूरी के बाद अगला कदम टेंडर, कॉन्ट्रैक्ट और फिर ऑर्डर मिलने का होता है। इससे डिफेंस पीएसयू और निजी कंपनियों की ऑर्डर बुक मजबूत होगी। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, भारत डायनेमिक्स लिमिटेड जैसी सरकारी कंपनियों को इन प्रोजेक्ट्स से सीधे फायदा मिलने की उम्मीद है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का फोकस लगातार स्वदेशी रक्षा उत्पादन पर बढ़ रहा है। आत्मनिर्भर भारत नीति के तहत ज्यादातर प्रोजेक्ट्स भारतीय कंपनियों को दिए जा रहे हैं। इसके अलावा डिफेंस एक्सपोर्ट भी लगातार बढ़ रहा है।

फिलहाल जो गिरावट दिख रही है, उसे बाजार जानकार शॉर्ट टर्म करेक्शन मान रहे हैं। उनका कहना है कि जब भी किसी सेक्टर में तेजी बहुत तेज होती है, तो बीच-बीच में ऐसी गिरावट स्वाभाविक होती है। इससे शेयरों की कीमतें कुछ हद तक संतुलित हो जाती हैं।

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