📍मऊ, मध्य प्रदेश | 28 Aug, 2025, 12:06 PM
Ran Samwad 2025 Doctrine: मध्यप्रदेश के मऊ स्थित आर्मी वॉर कॉलेज में आयोजित रण संवाद 2025 भारतीय रक्षा इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हुआ है। इस दो दिवसीय ट्राई सर्विसेज सेमिनार में सेना, नौसेना और वायुसेना के टॉप अफसरों के साथ-साथ इंडस्ट्री, एकेडमिशियंस और रणनीतिक विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। इसी मौके पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भारतीय स्पेशल फोर्सेज के लिए पहली बार जॉइंट डॉक्ट्रिन (Joint Doctrine for Special Forces Operations) जारी की।
यह डॉक्ट्रिन बताती है कि अब स्पेशल फोर्सेज को केवल पारंपरिक युद्धक्षेत्रों जमीन, हवा और समुद्र में ही नहीं बल्कि सूचना युद्ध (Information Warfare) और नैरेटिव प्रबंधन (Narrative Management) जैसे नए क्षेत्रों में भी एक्टिव रहना होगा। देश की पहली सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जॉइंट स्पेशल फोर्सेस पॉलिसी में यह साफ कहा गया है कि स्पेशल फोर्सेस को अब प्रचार का मुकाबला करने, सूचनाओं को नियंत्रित करने और समाज में सही संदेश पहुंचाने की रणनीति तैयार करनी होगी। इस नीति में सूचना युद्ध को एक महत्वपूर्ण युद्धक्षेत्र के रूप में मान्यता दी गई है, जो पारंपरिक सैन्य कार्रवाइयों जितना ही जरूरी है।
Ran Samwad 2025 Doctrine: ह्यूमन ब्रेन बना बैटलफील्ड
डॉक्ट्रिन में कहा गया है कि आधुनिक समय में “इंसान का दिमाग भी युद्धक्षेत्र बन चुका है”। सोशल मीडिया, डीप फेक तकनीक और मनोवैज्ञानिक अभियानों के जरिए विरोधी देश जनमत को प्रभावित कर सकते हैं और समाज में अस्थिरता पैदा कर सकते हैं।
इसलिए भारतीय स्पेशल फोर्सेज को अब आक्रामक और रक्षात्मक दोनों प्रकार के इन्फो वॉरफेयर में सक्षम बनाया जाएगा। उन्हें न केवल दुश्मन के प्रोपेगेंडा को रोकना होगा, बल्कि भारत के पक्ष में मजबूत नैरेटिव तैयार करके उसे दुनियाभर में पहुंचाना भी होगा।
Ran Samwad 2025 Doctrine: ऑपरेशन सिंदूर से सीखे सबक
नई डॉक्ट्रिन का सबसे बड़ा संदर्भ ऑपरेशन सिंदूर है, जिसने दिखा दिया कि युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि इनफॉरमेशन और परसेप्शन से भी जीता या हारा जा सकता है। इस ऑपरेशन ने यह साफ कर दिया कि युद्ध के मैदान में जीत के साथ-साथ लोगों के दिमाग में सही संदेश पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने पाकिस्तान पर आतंक के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की थी। उस समय जनरल चौहान ने बताया था कि लगभग 15 फीसदी ऊर्जा दुश्मन की झूठी सूचनाओं और दुष्प्रचार को रोकने में खर्च हुई।
Lt Gen Vipul Singhal, Dy Chief (Doctrine, Organisation & Training), HQ-IDS: Future wars demand jointness, training reforms & doctrine-driven preparedness. 🇮🇳 #RANSamvad #IndianArmy #Jointness
“Organisational synergy across the three services is the key to operational edge in… pic.twitter.com/TD7oAjuTKU— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 27, 2025
उन्होंने यह भी कहा था कि मिसइन्फॉर्मेशन (गलत सूचना) किसी एक घटना तक सीमित नहीं होती बल्कि यह लगातार चलती रहती है। इसलिए इसका जवाब भी बेहद सावधानीपूर्वक और संयमित तरीके से देना जरूरी है, ताकि दुश्मन को नैरेटिव बनाने का मौका न मिल सके।
मई 2025 में पाकिस्तान के खिलाफ चले इस ऑपरेशन में भारत ने हवाई, थल और नौसैनिक तीनों मोर्चों पर निर्णायक बढ़त हासिल की थी। लेकिन इस दौरान दुश्मन ने सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर झूठे नैरेटिव फैलाने की कोशिश की। पाकिस्तान ने यह प्रचारित किया कि उसने भारत को भारी नुकसान पहुंचाया, जबकि हकीकत इसके बिल्कुल उलट थी।
Ran Samwad 2025 Doctrine: “विक्ट्री इज इन द माइंड”- जनरल उपेंद्र द्विवेदी
सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने हाल हाल ही में कहा था कि आज की लड़ाई केवल जमीन पर जीतने से तय नहीं होती, बल्कि जनता के दिमाग में भी लड़ी जाती है। उन्होंने याद दिलाया कि पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में हार के बावजूद यह प्रचार किया कि उसने ऑपरेशन सिंदूर जीता, और वहां की जनता भी यही मानने लगी। जबकि सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत थी।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि अगर आप किसी पाकिस्तानी से पूछें कि ऑपरेशन सिंदूर में उनकी हार हुई या जीत, तो वह कहेगा, “हमारे प्रमुख को फील्ड मार्शल बनाया गया है, हमने तो जीत हासिल की।” इस घटना से यह साफ होता है कि लोगों के परसेप्शन को कंट्रोल करना अब युद्ध का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है। उन्होंने एक “मैसेज मैनेजमेंट सिस्टम” की जरूरत पर भी जोर दिया ताकि इनफॉरमेशन और परसेप्शन वॉर को और मजबूत किया जा सके।

‘Airborne & Heliborne Operations’ during RAN SAMWAD 2025, at the Army War College.
Ran Samwad 2025 Doctrine: स्पेशल फोर्सेज की नई भूमिका
भारतीय स्पेशल फोर्सेज जिनमें आर्मी के पैरा एसएफ (Para SF), नौसेना की मरीन कमांडो यूनिट्स (MARCOS) और वायुसेना की गरुड़ कमांडो फोर्स शामिल हैं, उन्हें अब एक नए बैटलफील्ड में काम करना होगा।
नई डॉक्ट्रिन कहती है कि स्पेशल फोर्सेज को सांस्कृतिक समझ, रणनीतिक संवाद और मनोवैज्ञानिक दृढ़ता (Psychological Resilience) की भी ट्रेनिंग दी जाएगी। यह स्किल उन्हें दुश्मन की प्रचार मशीनरी का मुकाबला करने और अपने संदेश को सही रूप में दुनिया तक पहुंचाने में मदद करेगी।
हाइब्रिड वॉरफेयर की तैयारी
डॉक्ट्रिन ने यह भी साफ किया है कि भविष्य का युद्ध केवल पारंपरिक हथियारों से नहीं लड़ा जाएगा। इसे हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जाता है। इसमें पारंपरिक सैन्य बलों के साथ-साथ साइबर हमले, आर्थिक दबाव, फर्जी सूचनाएं और प्रॉक्सी संगठनों का इस्तेमाल किया जाएगा।
इसलिए भारतीय स्पेशल फोर्सेज को मल्टी-डोमेन यानी जमीन, हवा, समुद्र, अंतरिक्ष, साइबर और सूचना हर क्षेत्र में तैयार रहना होगा।
पहली स्वतंत्र स्पेशल ऑपरेशंस कमांड!
2018 में गठित और 2019 में पूरी तरह एक्टिव हुई आर्मर्ड फोर्सेस स्पेशल ऑपरेशन डिविजन (AFSOD) भारत की पहली ट्राई सर्विसेज स्पेशल ऑपरेशन यूनिट है। इसमें लगभग 3,000 कमांडो शामिल हैं, जो अलग-अलग सेवाओं से आते हैं। नई डॉक्ट्रिन में संकेत दिया गया है कि भविष्य में AFSOD का दायरा और स्ट्रक्चर बढ़ाया जा सकता है। इसे एक फुल-फ्लेज्ड कमांड का रूप दिया जा सकता है, जो सीधे चीफ ऑफ स्टााफ कमेटी (COSC) के तहत काम करेगा। वहीं, अगर ऐसा होता है तो भारत धीरे-धीरे उस दिशा में बढ़ेगा, जहां एक स्वतंत्र स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (SOC) बनाया जा सके।
ट्रेनिंग सिस्टम में बड़ा बदलाव
इस डॉक्ट्रिन में ट्रेनिंग को लेकर भी अहम सुधारों की बात कही गई है। अभी तक तीनों सेनाओं की अपनी-अपनी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूशंस और स्कूल हैं। लेकिन अब इन्हें अपग्रेड करके जॉइंट सर्विस ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट्स (JSTIs) बनाने की योजना है। हर JSTI को किसी खास कौशल (Core Competency) जैसे माउंटेन वॉर, समुद्री अभियान या साइबर ऑपरेशंस में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाया जाएगा। हालांकि इन संस्थानों का प्रशासनिक नियंत्रण संबंधित मूल सेना के पास ही रहेगा।
सूचना की जंग पर खुलेगा मोर्चा
यह डॉक्ट्रिन ऑपरेशन सिंदूर के बाद जारी की गई है। जिसने भारतीय सैन्य रणनीति को यह बड़ा सबक दिया कि युद्ध केवल हथियारों से नहीं जीते जाते। इस ऑपरेशन में भारत ने दिखाया कि कैसे भारचीय मिसाइलों ने दुश्मन की सीमा के अंदर तक प्रहार किया, नौसेना ने अरब सागर में पाकिस्तान की गतिविधियों को रोका और थल सेना ने सीमा पर मोर्चा संभाला।
लेकिन इसके साथ ही एक और जंग लड़ी गई सूचना की जंग। पाकिस्तान ने फर्जी वीडियो, मनगढ़ंत खबरें और सोशल मीडिया ट्रेंड्स के जरिए यह दिखाने की कोशिश की कि भारत को नुकसान हुआ है। भारतीय सेना और सरकार ने इस प्रोपेगेंडा का समय रहते जवाब दिया और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सही तस्वीर रखी। यही वजह है कि अब डॉक्ट्रिन में इसे “ऑपरेशनल इम्पेरेटिव” यानी युद्ध का जरूरी हिस्सा माना गया है।