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Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव को कैसे हथियार बना रहा पाकिस्तान, कैसे किसान आंदोलन, दिल्ली हिंसा और पहलगाम हमला हैं “सॉफ्ट पावर वॉर” का हिस्सा? भारत को कमजोर करने की साजिश

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान की तरफ से भारत को जाल में फंसाने की हो सकती है साजिश...

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📍मऊ, मध्य प्रदेश | 29 Aug, 2025, 1:13 PM

Pakistan Narrative Warfare: मऊ (मध्य प्रदेश) में आयोजित पहले ट्राई-सर्विसेज कॉन्क्लेव ‘रण संवाद 2025’ में भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी मेजर जनरल एसपी विश्वसराव ने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर और नैरेटिव बिल्डिंग की अहमियत पर जोर दिया। उन्होंने इसे “Weaponising the Narrative” यानी नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया बताया, जो न सिर्फ युद्ध के मैदान बल्कि जनता की सोच और दुश्मन के मनोबल को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमला पाकिस्तान की तरफ से भारत को जाल में फंसाने की कोशिश हो सकती है।

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वेस्टर्न सेक्टर में एडिशनल डायरेक्टर जनरल रिक्रूटमेंट मेजर जनरल विश्वसराव पहले पाकिस्तान में भारत के डिफेंस अताशे रह चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस हमले का मकसद भारत को उकसाना और सीमा पर तनाव बढ़ाना था। उन्होंने इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर पर अपने संबोधन के दौरान बताया कि आतंकियों ने हिंदुओं को चुनकर निशाना बनाया और बचे हुए लोगों से कहा कि यह संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाना। उनके मुताबिक यह सीधा-सीधा राजनीतिक और सांप्रदायिक संदेश था, जिसका लक्ष्य भारत में विभाजनकारी स्थिति पैदा करना था।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान चाहता था कि भारत गुस्से में आकर सर्जिकल स्ट्राइक जैसी कोई बड़ी कार्रवाई करे और इसके लिए शायद पाकिस्तान पहले से तैयार भी था।

बता दें कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ और स्वयंभू फील्डमार्शल जनरल आसिम मुनीर अपने कट्टरपंथी इस्लामी विचारों के लिए जाने जाते हैं। मुनीर पहले आईएसआई के प्रमुख भी रह चुके हैं और पुलवामा हमले के दौरान वे इसी पद पर थे। उनकी सोच अपने पूर्ववर्ती जनरल बाजवा से अलग है। बाजवा डॉक्ट्रिन में भारत से कामकाजी रिश्तों पर जोर दिया गया था, जबकि मुनीर फिर से वैश्विक मंच पर कश्मीर मुद्दे को उभारना चाहते हैं।

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Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव वॉरफेयर कितनी है जरूरी

मेजर जनरल विश्वसराव ने नैरेटिव को हथियार बनाने की प्रक्रिया (Weaponising the Narrative) विषय पर बोलते हुए बताया कि कैसे आज की दुनिया में युद्ध सिर्फ गोलियों और मिसाइलों से नहीं, बल्कि विचारों और सूचनाओं से भी लड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि तकनीक की मदद से स्ट्रैटेजिक कम्यूनिकेशन को तीनों सेनाओं में एकसाथ जोड़ा जा सकता है और इससे दुश्मन की सोच पर दबाव बनाया जा सकता है।

उनके अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस वाले एनालिसिस और टेक्नोलॉजी बेस्ड इनफॉरमेशन सेल अब जरूरी हो गए हैं, ताकि भारत अपनी कहानी और अपना नैरेटिव मजबूती से दुनिया के सामने रख सके। उन्होंने कहा कि Neocortical Warfare यानी ‘नैरेटिव को हथियार की तरह इस्तेमाल करना’ शांति बनाए रखने और भारत की रणनीतिक विश्वसनीयता को मजबूत करने का अहम साधन बन सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: किसान आंदोलन ‘नैरेटिव वॉर’ का हिस्सा!

मेजर जनरल विश्वसराव ने अपने प्रेजेंटेशन के दौरान किसान आंदोलन, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध, दिल्ली हिंसा, जम्मू-कश्मीर, यमुना और मणिपुर के हालात की तस्वीरें दिखाईं। उन्होंने कहा कि यह सब भारत को अस्थिर करने की एक बड़ी रणनीति का हिस्सा थे। उन्होंने इसे कलर रिवोल्यूशन (Colour Revolution) की तरह बताया, जिसमें “कलर रिवोल्यूशन” जैसी रणनीतियों के जरिए समाज में अस्थिरता पैदा की जाती है और विरोध प्रदर्शनों को एक नैरेटिव की शक्ल दी जाती है।

उन्होंने बताया कि पाकिस्तान कैसे आतंकवाद और हिंसा का इस्तेमाल केवल सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उसे “सॉफ्ट पावर वॉर” यानी नैरेटिव के जरिए भारत को अस्थिर करने के लिए भी इस्तेमाल करता है। उन्होंने कहा कि ऐसा ही प्रयोग पहले बांग्लादेश में हुआ था और अब भारत में भी विरोध प्रदर्शनों को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उनके मुताबिक, 2008-2010 और 2016 में कश्मीर में जो हिंसक आंदोलन हुए, वे भी इसी रणनीति का हिस्सा थे।

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उन्होंने दुश्मन की “Centre of Gravity” यानी उसकी असली ताकत और हौसले के स्रोत को निशाना बनाने की बात कही। मतलब, जहां से दुश्मन को ताकत और आत्मविश्वास मिलता है, अगर उसी को कमजोर कर दिया जाए, तो उसका पूरा ढांचा हिल सकता है।

Pakistan Narrative Warfare: ऑपरेशन सिंदूर का नैरेटिव

अपने संबोधन में मेजर जनरल विश्वसराव ने ऑपरेशन सिंदूर का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इस अभियान ने भारतीय सेना को यह सबक दिया कि सूचना युद्ध (Information Warfare) कितनी अहम भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि नैरेटिव पर कंट्रोल रखना और सही समय पर सही संदेश देना युद्ध के मैदान में हथियारों जितना ही महत्वपूर्ण है।

उन्होंने बताया कि अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर, नाटो-रूस संघर्ष, आर्टिकल 370 हटना, गलवान झड़प, बलूचिस्तान और तालिबान के हालात, पाकिस्तान की राजनीति और जम्मू-कश्मीर चुनाव, इन सबका इस्तेमाल पाकिस्तान भारत के खिलाफ नैरेटिव वॉर में करता है।

उन्होंने कहा कि भविष्य के युद्धों में सिर्फ टैंक, जहाज और लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि साइबर ऑपरेशन्स, ड्रोन और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर (EW) जैसे हथियार निर्णायक भूमिका निभाएंगे। सूचना और नैरेटिव को कंट्रोल करना दुश्मन को मानसिक तौर पर कमजोर करने का तरीका है। इससे न केवल देश एकजुट रहता है बल्कि ऑपरेशनल क्षमता भी और मजबूत होती है।

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  • Pakistan Narrative Warfare: नैरेटिव को कैसे हथियार बना रहा पाकिस्तान, कैसे किसान आंदोलन, दिल्ली हिंसा और पहलगाम हमला हैं "सॉफ्ट पावर वॉर" का हिस्सा? भारत को कमजोर करने की साजिश

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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