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समझें क्या है म्यांमार ड्रोन केस? जिसमें शामिल हैं 6 यूक्रेनी और एक अमेरिकी नागरिक, आतंकी साजिश से जुड़े तार

एनआईए के अनुसार, इस पूरे केस में मैथ्यू वैनडाइक की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है। एजेंसी का दावा है कि वह इस ग्रुप का लीडर था और ड्रोन ट्रेनिंग तथा सप्लाई नेटवर्क को कॉर्डिनेट कर रहा था...

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📍नई दिल्ली | 18 Mar, 2026, 8:09 PM

Myanmar Drone Case: भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा करते हुए छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। इस मामले को “म्यांमार ड्रोन केस” कहा जा रहा है, जिसमें ड्रोन टेक्नोलॉजी, हथियार ट्रेनिंग और सीमा पार गतिविधियों से जुड़ी गंभीर साजिश के आरोप सामने आए हैं। इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी एनआईए कर रही है।

एनआईए के मुताबिक यह मामला भारत की आंतरिक सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़ा हुआ है। एजेंसी ने इन सातों विदेशी नागरिकों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी यूएपीए के तहत केस दर्ज किया है। इस कानून के तहत आतंक से जुड़ी साजिशों पर सख्त कार्रवाई की जाती है। (Myanmar Drone Case)

Myanmar Drone Case: कौन हैं आरोपी और कैसे हुई गिरफ्तारी

जांच एजेंसी के अनुसार, गिरफ्तार किए गए लोगों में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिक शामिल हैं। जिनके नाम पेट्रो हुरबा, तारास स्लिवियाक, इवान सुकमानोव्स्की, मारियन स्टेफानकिव, मक्सिम होंचारुक और विक्टर कामिंस्की बताए गए हैं। इन सभी को 13 मार्च की रात को देश के अलग-अलग एयरपोर्ट्स से पकड़ा गया। ये एयरपोर्ट कोलकाता, दिल्ली और लखनऊ थे। अमेरिकी नागरिक मैथ्यू एरॉन वैनडाइक को पूर्व मर्सेनरी/प्राइवेट मिलिट्री कांट्रैक्टर के रूप में जाना जाता है।

एनआईए का कहना है कि ये सभी भारत में टूरिस्ट वीजा पर आए थे, लेकिन इनके असली मकसद कुछ और थे। जांच में सामने आया कि इन लोगों ने नियमों का उल्लंघन करते हुए मिजोरम जैसे संवेदनशील इलाके में बिना परमिट प्रवेश किया। (Myanmar Drone Case)

मैथ्यू वैनडाइक की भूमिका सबसे अहम

जांच एजेंसी के अनुसार, इस पूरे ग्रुप में अलग-अलग भूमिकाएं तय थीं और सभी मिलकर एक संगठित नेटवर्क की तरह काम कर रहे थे। इस ग्रुप का सबसे प्रमुख नाम मैथ्यू एरॉन वैनडाइक है, जो एक अमेरिकी नागरिक है। उनकी उम्र करीब 40 साल बताई जाती है। वह पेशे से जर्नलिस्ट, डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर और प्राइवेट मिलिट्री कांट्रैक्टर रह चुका है। उसने “Sons of Liberty International” नाम का एक संगठन भी बनाया है। साल 2011 में लीबिया के गृहयुद्ध के दौरान वह गद्दाफी के खिलाफ लड़ाई में शामिल हुआ था, जहां उसे पकड़ लिया गया और त्रिपोली की अबू सलीम जेल में करीब छह महीने तक कैद रखा गया। बाद में वह वहां से भाग निकला। इसके अलावा वह सीरिया, इराक और यूक्रेन में सक्रिय रहा है। (Myanmar Drone Case)

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एनआईए के अनुसार, इस पूरे केस में मैथ्यू वैनडाइक की भूमिका सबसे अहम बताई जा रही है। एजेंसी का दावा है कि वह इस ग्रुप का लीडर था और ड्रोन ट्रेनिंग तथा सप्लाई नेटवर्क को कॉर्डिनेट कर रहा था।

बाकी छह आरोपी यूक्रेन के नागरिक हैं। लेकिन जांच एजेंसी का मानना है कि ये सभी किसी न किसी रूप में मिलिट्री या ड्रोन टेक्नोलॉजी से जुड़े रहे हैं।

इनमें पहला नाम पेट्रो हुरबा का है। माना जा रहा है कि उसका मिलिट्री से जुड़ा बैकग्राउंड हो सकता है। उसे ड्रोन ऑपरेशन और ट्रेनिंग से संबंधित गतिविधियों में शामिल बताया गया है।

दूसरा नाम तारास स्लिवियाक का है। माना जा रहा है कि वह भी ड्रोन ट्रेनिंग और सैन्य गतिविधियों से जुड़ा रहा है। यूक्रेन-रूस युद्ध के बाद कई यूक्रेनी नागरिक ड्रोन टेक्नोलॉजी में एक्सपर्ट बने हैं, और इसे भी उसी श्रेणी में देखा जा रहा है। (Myanmar Drone Case)

तीसरे आरोपी इवान सुकमानोव्स्की को भी ड्रोन से जुड़ी गतिविधियों और सप्लाई नेटवर्क का हिस्सा बताया गया है।

चौथा नाम मारियन स्टेफानकिव का है। जांच एजेंसियों का मानना है कि इनके पास तकनीकी या मिलिट्री एक्सपर्टाइज हो सकती है और ये ट्रेनिंग से जुड़े काम में शामिल था।

पांचवं आरोपी मक्सिम होंचारुक हैं, यह ड्रोन असेंबली और ऑपरेशनल काम में शामिल था, यानी ड्रोन को तैयार करना और इस्तेमाल करना इसका काम था।

छठा यूक्रेनी नागरिक विक्टर कामिंस्की हैं, उसे इस पूरे नेटवर्क में ट्रेनिंग और सप्लाई चेन से जुड़ा हुआ बताया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार, ये सभी आरोपी मिलकर एक संगठित तरीके से काम कर रहे थे, जिसमें ड्रोन ट्रेनिंग, तकनीकी सपोर्ट और उपकरणों की सप्लाई जैसी गतिविधियां शामिल थीं। (Myanmar Drone Case)

रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट का उल्लंघन

भारत के पूर्वोत्तर राज्यों के कुछ हिस्सों में विदेशी नागरिकों के लिए विशेष अनुमति यानी रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट लेना जरूरी होता है। यह नियम सुरक्षा कारणों से लागू किया गया है। लेकिन एनआईए के अनुसार इन आरोपियों ने यह परमिट नहीं लिया और सीधे इन क्षेत्रों में प्रवेश कर गए।

जांच में यह भी सामने आया कि भारत को इन लोगों ने केवल ट्रांजिट रूट की तरह इस्तेमाल किया। यानी इनका मुख्य उद्देश्य भारत में रहना नहीं था, बल्कि यहां से म्यांमार पहुंचना था। (Myanmar Drone Case)

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म्यांमार में ड्रोन और हथियार ट्रेनिंग का आरोप

एफआईआर के मुताबिक, ये सभी आरोपी म्यांमार में सक्रिय एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ट्रेनिंग देने जा रहे थे। इन समूहों को ड्रोन ऑपरेशन, हथियार चलाने, हार्डवेयर असेंबली और सिग्नल जैमिंग जैसी तकनीकी ट्रेनिंग दी जा रही थी। इन्होंने यूरोप से बड़ी मात्रा में ड्रोन (और संबंधित उपकरण) आयात कर भारत के रास्ते म्यांमार पहुंचाए।

जांच एजेंसी का दावा है कि यह ट्रेनिंग काफी एडवांस लेवल की थी। इसमें ड्रोन के जरिए हमले करना, निगरानी करना और इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम को बाधित करना शामिल था। (Myanmar Drone Case)

ड्रोन सप्लाई नेटवर्क का खुलासा

एनआईए की जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी यूरोप से आधुनिक ड्रोन भारत के रास्ते म्यांमार भेजने में भी शामिल थे। यह एक बड़ा नेटवर्क था, जिसमें हाई-टेक उपकरणों को अवैध तरीके से ट्रांसफर किया जा रहा था।

इन ड्रोन्स का इस्तेमाल म्यांमार के सशस्त्र समूहों द्वारा किया जाना था, जिससे उनकी सैन्य क्षमता बढ़ सके। जांच एजेंसी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। (Myanmar Drone Case)

भारत की सुरक्षा को क्यों है खतरा

एनआईए के अनुसार, जिन एथनिक आर्म्ड ग्रुप्स को ट्रेनिंग दी जा रही थी, उनके संबंध भारत के प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों से हैं। ये संगठन पूर्वोत्तर भारत में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।

जांच में यह आशंका जताई गई है कि ड्रोन टेक्नोलॉजी और हथियारों की यह ट्रेनिंग भारत के खिलाफ भी इस्तेमाल हो सकती थी। खासकर मणिपुर जैसे राज्यों में पहले से चल रहे तनाव को देखते हुए इसे गंभीर माना जा रहा है।

एफआईआर में साफ कहा गया है कि आरोपियों की गतिविधियों का सीधा असर भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता था। (Myanmar Drone Case)

कोर्ट ने दी 11 दिन की कस्टडी  

गिरफ्तारी के बाद इन सभी आरोपियों को एनआईए की विशेष अदालत में पेश किया गया। कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 11 दिन की कस्टडी मंजूर की है। यह रिमांड 27 मार्च तक चलेगा।

अभियोजन पक्ष ने कोर्ट में कहा कि इस मामले की पूरी साजिश को समझने के लिए आरोपियों से पूछताछ जरूरी है। साथ ही उनके डिजिटल डिवाइस की जांच भी महत्वपूर्ण है। (Myanmar Drone Case)

डिजिटल फॉरेंसिक जांच जारी

एनआईए ने आरोपियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप को जब्त कर लिया है। इन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इन लोगों के संपर्क किन-किन लोगों से थे।

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एजेंसी का कहना है कि शुरुआती जांच में आरोपियों का संपर्क हथियारबंद लोगों से मिला है, जो एके-47 जैसे हथियारों का इस्तेमाल कर रहे थे। (Myanmar Drone Case)

गिरफ्तारी पर क्या बोले यूक्रेन और अमेरिका 

यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि उनके छह नागरिकों के खिलाफ भारत या म्यांमार में किसी भी गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने के पुख्ता सबूत मौजूद नहीं हैं। नई दिल्ली में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्सांद्र पोलिशचुक ने भारत के विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी सिबी जॉर्ज से मुलाकात कर विरोध दर्ज कराया और एक आधिकारिक नोट सौंपा।

यूक्रेन ने अपने नागरिकों की तुरंत रिहाई की मांग की है और उनके लिए कांसुलर एक्सेस यानी दूतावास से संपर्क की अनुमति देने की बात कही है। यूक्रेन का यह भी कहना है कि भारत के कुछ प्रतिबंधित इलाकों में जाने के लिए विशेष परमिट जरूरी होता है, लेकिन कई जगह जमीन पर इसकी स्पष्ट जानकारी या निशान नहीं होते। ऐसे में विदेशी पर्यटक अनजाने में नियमों का उल्लंघन कर सकते हैं। (Myanmar Drone Case)

वहीं अमेरिका की ओर से प्रतिक्रिया सीमित रही है। अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि उन्हें मैथ्यू वैनडाइक की गिरफ्तारी की जानकारी है, लेकिन उन्होंने निजी कारणों का हवाला देते हुए इस पर ज्यादा टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।

इस पूरे मामले पर भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, जबकि एनआईए की जांच लगातार जारी है।

भारत के विदेश मंत्रालय की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है। हालांकि एनआईए की जांच लगातार जारी है और एजेंसी इस मामले के हर पहलू की जांच कर रही है। (Myanmar Drone Case)

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