📍नई दिल्ली/लेह | 2 Oct, 2025, 7:51 PM
Mig La Pass: भारत ने दशहरा के अवसर पर एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन ने लद्दाख में दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास मिग ला पास तैयार कर लिया है। विजयादशमी के दिन बीआरओ ने मिग ला पास पर झंडा भी फहराया 19,400 फीट की ऊंचाई पर बना यह पास मौजूदा उमलिंगला पास से भी ऊंचा है, जिसकी ऊंचाई 19,024 फीट है। मिग ला पास न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार है, बल्कि यह भारत की सामरिक क्षमता और संकल्प का प्रतीक भी है।
प्रोजेक्ट हिमांक के तहत बना पास
यह सफलता बीआरओ के प्रसिद्ध प्रोजेक्ट हिमांक के अंतर्गत हासिल हुई। 1 अक्टूबर 2025 को चीफ इंजीनियर ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव के नेतृत्व में टीम ने मिग ला पास पर राष्ट्रीय ध्वज और बीआरओ का झंडा फहराया।
इससे पहले लद्दाख का ही उमलिंग ला पास (19,024 फीट, लगभग 5,799 मीटर) दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास माना जाता था। यह लद्दाख, भारत में हंसुला घाटी में स्थित है और पहले दुनिया का सबसे ऊंचा मोटरेबल पास था। लेकिन अब मिग ला पास (19,400 फीट) ने यह रिकॉर्ड तोड़कर नया इतिहास रच दिया है। बीआरओ ने लगातार कठिन चुनौतियों के बीच काम करते हुए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड को फिर से अपने नाम कर लिया।
क्या है इसका रणनीतिक महत्व
Mig La Pass का महत्व केवल ऊंचाई तक सीमित नहीं है। यह मार्ग लिकारू-मिग ला-फुकचे रोड अलाइनमेंट का हिस्सा है और सीधे फुकचे गांव तक कनेक्टिविटी प्रदान करता है। फुकचे भारत-चीन सीमा के बेहद नजदीक है, इसलिए यह मार्ग भारतीय सेना के लिए एक तीसरा अहम एक्सिस बन गया है। मिग ला पास से जुड़ी सड़क फुकचे गांव तक जाती है। यह गांव भारत-चीन सीमा के पास स्थित है और यहां के स्थानीय निवासियों को भी इस सड़क से बड़ा फायदा होगा। पहले यहां तक पहुंचना बेहद कठिन था, लेकिन अब बेहतर कनेक्टिविटी से लोगों के जीवन स्तर में सुधार आएगा।
इस पास के जरिए तेजी से सैनिकों, वाहनों और रसद की आवाजाही आसान होगी। अब दौलत बेग ओल्डी जैसे सामरिक एयरबेस और अन्य फॉरवर्ड पोस्ट तक पहुंच आसान हो जाएगी।
किया कई चुनौतियों का सामना
19,400 फीट की ऊंचाई पर सड़क निर्माण किसी भी इंजीनियरिंग संस्था के लिए आसान नहीं होता। यहां ऑक्सीजन की मात्रा समुद्र तल की तुलना में लगभग 50 फीसदी कम होती है। -40°C तक गिरने वाले तापमान, लगातार बर्फबारी, भूस्खलन और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों ने निर्माण कार्य को और कठिन बना दिया।
फिर भी BRO की टीम ने अदम्य साहस और तकनीकी उत्कृष्टता दिखाते हुए असंभव को संभव बना दिया। ब्रिगेडियर विशाल श्रीवास्तव ने कहा, “यह उपलब्धि हमारी टीम की निष्ठा, दृढ़ संकल्प और भारत की सीमाओं की सुरक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता का प्रतीक है।”
वहीं, मिग ला पास का सीधा लाभ भारतीय सेना को मिलेगा। इस मार्ग से अब भारी सैन्य वाहन और सप्लाई ट्रक आसानी से आगे तक जा सकेंगे। इसके अलावा, यह सड़क से किसी भी आकस्मिक परिस्थिति में सेना की तेजी से तैनाती संभव होगी। सरहद पर चीन के साथ मौजूद संवेदनशील परिस्थितियों को देखते हुए यह उपलब्धि सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण है।
वहीं, सैन्य महत्व के अलावा मिग ला पास का पर्यटन की दृष्टि से भी बड़ा महत्व है। लद्दाख पहले से ही रोमांचक पर्यटन और एडवेंचर स्पोर्ट्स का गढ़ है। अब 19,400 फीट की ऊंचाई पर स्थित मिग ला पास साहसिक यात्रियों और बाइकर्स के लिए एक नया आकर्षण होगा।
यह पास आगंतुकों को सिंधु घाटी के अद्भुत नज़ारे और बर्फीले पहाड़ों की भव्यता का अनुभव कराएगा। हालांकि, इतनी ऊंचाई पर यात्रा करने से पहले स्वास्थ्य और सुरक्षा के विशेष इंतजाम जरूरी होंगे।
बीआरओ ने बनाए सबसे ऊंचे मोटरेबल पास
बीआरओ अब तक दुनिया के 14 सबसे ऊंचे मोटरेबल पास में से 11 का निर्माण कर चुका है। जिससे न केवल भारत की सीमाओं को मजबूत हो रही हैं, बल्कि इंजीनियरिंग की दृष्टि से नए आयाम भी स्थापित कर रही है। Mig La Pass पर काम पूरा करना इस बात का प्रमाण है कि भारतीय इंजीनियर किसी भी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी क्षमता का परिचय दे सकते हैं।
Mig La Pass उमलिंग ला से भी ऊंचा
अगर Mig La Pass पास की तुलना उमलिंग ला पास से की जाए तो दोनों ही लद्दाख की ऊंचाई वाली घाटियों में हैं। उमलिंग ला पास 19,024 फीट पर स्थित है और यह भी बीआरओ द्वारा बनाया गया था। लेकिन मिग ला पास 19,400 फीट की ऊंचाई के साथ अब सबसे ऊपर है।
यह ऊंचाई माउंट एवरेस्ट बेस कैंप (17,600 फीट) से भी अधिक है और एवरेस्ट कैंप-1 (20,000 फीट) से केवल 600 फीट नीचे है। जिससे पता चलता है यहां सड़क बनाना कितना चुनौतीपू्र्ण रहा होगा।





