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अब ऊंचे पहाड़ी इलाकों में भी चीनी टैंकों की खैर नहीं! प्रचंड हेलीकॉप्टर को मिलेंगी घातक हेलिना-ध्रुवास्त्र मिसाइलें

पिछले साल 28 मार्च को रक्षा मंत्रालय ने 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड की खरीद के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ एक बड़ा करार किया था। इस सौदे की कुल कीमत करीब 62,700 करोड़ रुपये है...

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📍नई दिल्ली | 4 Feb, 2026, 12:53 PM

Prachand HELINA Dhruvastra missile: भारत का स्वदेशी लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड अब एक नए और ज्यादा घातक अवतार में सामने आने वाला है। अब तक पहाड़ी इलाकों में फुर्तीले हमलों और सपोर्ट रोल के लिए पहचाने जाने वाले प्रचंड को जल्द ही एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल से लैस किया जाएगा। एचएएल की तरफ से हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलों को प्रचंड हेलीकॉप्टर पर इंटीग्रेट करने की तैयारी की जा रही है।

Prachand HELINA Dhruvastra missile: 156 प्रचंड का मेगा कॉन्ट्रैक्ट

पिछले साल 28 मार्च को रक्षा मंत्रालय ने 156 लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर प्रचंड की खरीद के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के साथ एक बड़ा करार किया था। इस सौदे की कुल कीमत करीब 62,700 करोड़ रुपये है। इस ऑर्डर में भारतीय सेना के लिए 90 और भारतीय वायुसेना के लिए 66 हेलीकॉप्टर शामिल हैं।

इससे पहले लिमिटेड सीरीज प्रोडक्शन के तहत 15 प्रचंड हेलीकॉप्टर पहले ही सर्विस में आ चुके हैं। इनमें वायुसेना के पास 10 और सेना के पास 5 हेलीकॉप्टर हैं। हालांकि ये हेलीकॉप्टर ऑपरेशनल तो हैं, लेकिन अभी तक इन पर मुख्य रूप से 70 एमएम रॉकेट, 20 एमएम नोज गन और कुछ एयर-टू-एयर मिसाइलों का ही इस्तेमाल किया जा रहा है। लेकिन असली टैंक-किलर हथियार अब तक शामिल नहीं हो पाए थे। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

हेलिना और ध्रुवास्त्र क्या हैं

हेलिना और ध्रुवास्त्र असल में एक ही मिसाइल के दो नाम हैं। यह मिसाइल नाग एंटी टैंक मिसाइल का हेलीकॉप्टर से दागा जाने वाला वर्जन है। सेना इसे हेलिना कहती है, जबकि वायुसेना के लिए यही मिसाइल ध्रुवास्त्र नाम से जानी जाती है।

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यह एक पूरी तरह फायर-एंड-फॉरगेट मिसाइल है। यानी पायलट को टारगेट लॉक करने के बाद मिसाइल छोड़नी होती है, उसके बाद हेलीकॉप्टर को दुश्मन के सामने रुके रहने की जरूरत नहीं होती। मिसाइल खुद टारगेट तक पहुंचती है।

इसकी मारक क्षमता बेहद ज्यादा है। यह मिसाइल 7 से 10 किलोमीटर तक के टारगेट को भेद सकती है और आधुनिक टैंकों के मजबूत कवच को भी तोड़ने में सक्षम है। इसमें टैंडम हाई-एक्सप्लोसिव एंटी-टैंक वारहेड लगा है, जो पहले टैंक की सुरक्षा को तोड़ता है और फिर अंदर तक वार करता है। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

लद्दाख में हो चुके हैं ट्रायल

हेलिना और ध्रुवास्त्र मिसाइलों के यूजर ट्रायल्स 2022-23 में पूरे किए गए थे। खास बात यह रही कि इनका परीक्षण लद्दाख जहां पतली हवा और बेहद कम तापमान जैसे ऊंचे और ठंडे इलाकों में किया गया।

इन ट्रायल्स में मिसाइलों ने न सिर्फ टारगेट को सही तरीके से लॉक किया, बल्कि उसे पूरी तरह तबाह भी किया। भारत डायनामिक्स लिमिटेड ने साफ कहा है कि यह सिस्टम अब पूरी तरह तैयार है और इंटीग्रेशन का इंतजार कर रहा है। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

अब प्रचंड पर होगा असली इंटीग्रेशन

अब अगला और सबसे अहम कदम इन मिसाइलों को प्रचंड हेलीकॉप्टर पर इंटीग्रेट करना है। एचएएल की योजना के मुताबिक, 2026 के आखिर या 2027 की शुरुआत में प्रचंड से हेलिना और ध्रुवास्त्र के फ्लाइट ट्रायल्स शुरू किए जाएंगे।

इन ट्रायल्स का मकसद सिर्फ मिसाइल दागना नहीं होगा, बल्कि यह देखना होगा कि ऊंचाई पर उड़ते हुए, सेंसर और हेलमेट-माउंटेड साइटिंग सिस्टम के साथ मिलकर मिसाइल कितनी सटीक काम करती है। प्रचंड की खासियत यह है कि वह 21,000 फीट तक ऑपरेट कर सकता है, जो उसे पहाड़ी इलाकों में बेहद खास बनाता है।

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सेना और वायुसेना की कोशिश है कि जब नई 156 प्रचंड हेलीकॉप्टरों की डिलीवरी 2027-28 से शुरू हो, तब वे पहले दिन से ही पूरी तरह कॉम्बैट-रेडी हों। पुराने प्रोजेक्ट्स में हथियारों की कमी बाद में पूरी की जाती थी, लेकिन इस बार वह गलती नहीं दोहराई जाएगी। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

और भी होंगे कई अपग्रेड्स

नई खेप के प्रचंड हेलीकॉप्टरों में सिर्फ हेलिना या ध्रुवास्त्र ही नहीं, बल्कि कई और अहम अपग्रेड भी शामिल होंगे। इनमें आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट, न्यूक्लियर-बायोलॉजिकल-केमिकल डिटेक्शन सिस्टम और ऑब्स्टेकल अवॉइडेंस सिस्टम शामिल हैं, जो पहाड़ों में लो-लेवल फ्लाइंग को ज्यादा सुरक्षित बनाएंगे।

भविष्य की योजना में लॉइटरिंग म्यूनिशन और एयर-लॉन्च्ड ड्रोन को भी प्रचंड से जोड़ने पर काम चल रहा है, ताकि वह सिर्फ हमला ही नहीं, बल्कि निगरानी और सटीक स्ट्राइक में भी माहिर बन सके। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

क्यों माना जा रहा है इसे गेमचेंजर

हेलिना और ध्रुवास्त्र के आने के बाद प्रचंड सिर्फ एक लाइट अटैक हेलीकॉप्टर नहीं रहेगा, बल्कि एक पूरी तरह सक्षम टैंक-किलर प्लेटफॉर्म बन जाएगा। खास तौर पर पहाड़ी सीमाओं पर, जहां भारी हेलीकॉप्टर ऑपरेट नहीं कर पाते, वहां प्रचंड अपनी ताकत दिखाएगा।

सबसे बड़ी बात यह है कि यह पूरा सिस्टम पूरी तरह स्वदेशी है। डिजाइन से लेकर निर्माण तक, इसमें देश की ही कंपनियां शामिल हैं। इससे न सिर्फ आत्मनिर्भर भारत को मजबूती मिलेगी, बल्कि सेना और वायुसेना को एक भरोसेमंद, लंबे समय तक साथ निभाने वाला हथियार मिलेगा। (Prachand HELINA Dhruvastra missile)

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