📍नई दिल्ली | 9 Mar, 2026, 6:15 PM
Indonesia BrahMos missile deal: इंडोनेशिया ने भारत से सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस खरीदने के लिए समझौता किया है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रिको रिकार्डो सिरैत ने बताया कि यह समझौता देश की सैन्य क्षमताओं को आधुनिक बनाने की योजना का हिस्सा है। खास तौर पर यह कदम समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
हालांकि उन्होंने इस समझौते की कुल कीमत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी। इससे पहले खबरें आई थीं कि इस डील की संभावित कीमत 200 से 350 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है।
अगर यह सौदा पूरी तरह लागू होता है तो इंडोनेशिया, भारत से ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा देश बन जाएगा। इससे पहले फिलीपींस ने 2022 में भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदा था। (Indonesia BrahMos missile deal)
Indonesia BrahMos missile deal: मैरीटाइम डिफेंस क्षमता को कर रहा मजबूत
इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े द्वीप देशों में से एक है। उसके पास हजारों किलोमीटर लंबी समुद्री सीमा है और कई महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते उसके आसपास से गुजरते हैं। इसी वजह से इंडोनेशिया लंबे समय से अपनी मैरीटाइम डिफेंस क्षमता को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की खरीद इसी रणनीति का हिस्सा है। इस मिसाइल को खास तौर पर कोस्टल डिफेंस, एंटी-शिप ऑपरेशन और ग्राउंड अटैक के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इंडोनेशिया का मानना है कि इस तरह की लंबी दूरी की सुपरसोनिक मिसाइलें उसकी नौसैनिक क्षमता को काफी मजबूत कर सकती हैं। इससे देश अपने समुद्री इलाकों की बेहतर सुरक्षा कर सकेगा। (Indonesia BrahMos missile deal)
शुरुआती चरण में एक बैटरी खरीदने की योजना
रक्षा मामलों से जुड़े सूत्रों के अनुसार इंडोनेशिया शुरुआती चरण में ब्रह्मोस मिसाइल की एक बैटरी खरीदने की योजना बना रहा है। मिसाइल की एक बैटरी में आम तौर पर लॉन्चर, कमांड पोस्ट, रडार और सपोर्ट सिस्टम शामिल होते हैं।
सूत्रों का कहना है कि इंडोनेशिया इस खरीद के लिए अपने किसी बैंक से फाइनेंसिंग की प्रक्रिया पूरी कर रहा है। जैसे ही बैंक से फंडिंग से जुड़ी औपचारिकताएं पूरी होंगी, दोनों देशों के बीच आधिकारिक कॉन्ट्रैक्ट पर हस्ताक्षर किए जा सकते हैं।
अगले दो से तीन महीनों में इस सौदे को अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके बाद आने वाले समय में इंडोनेशिया ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम की संख्या बढ़ाने पर भी विचार कर सकता है। (Indonesia BrahMos missile deal)
भारत और रूस मिल कर बना रहे हैं ब्रह्मोस
ब्रह्मोस मिसाइल दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलों में से एक मानी जाती है। यह मिसाइल भारत और रूस की संयुक्त परियोजना है। इसे भारत के डीआरडीओ और रूस की कंपनी एनपीओ मशिनोस्त्रोयेनीय ने मिलकर डेवलप किया है।
इस परियोजना की शुरुआत 1998 में हुई थी। इसके बाद से इस मिसाइल को लगातार अपग्रेड किया जाता रहा है। ब्रह्मोस का नाम भारत की ब्रह्मपुत्र नदी और रूस की मॉस्कवा नदी के नाम को मिलाकर रखा गया है।
ब्रह्मोस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी रफ्तार है। यह मिसाइल सुपरसोनिक स्पीड से उड़ती है, यानी इसकी गति आवाज की रफ्तार से लगभग तीन गुना तक हो सकती है। यही वजह है कि इसे रोकना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल माना जाता है। मिसाइल को जमीन, समुद्र और हवा तीनों प्लेटफॉर्म से लॉन्च किया जा सकता है। इसे जहाजों, पनडुब्बियों, मोबाइल लॉन्चर और लड़ाकू विमानों से भी दागा जा सकता है। भारत की सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों ब्रह्मोस मिसाइल का इस्तेमाल करती हैं। (Indonesia BrahMos missile deal)
एक्सपोर्ट वर्जन की रेंज 290 किलोमीटर
ब्रह्मोस मिसाइल के अलग-अलग वर्जन मौजूद हैं। लेकिन जो मिसाइल विदेशों को बेची जाती है, उसकी रेंज 290 किलोमीटर तक सीमित रखी जाती है। यह सीमा अंतरराष्ट्रीय मिसाइल टेक्नोलॉजी कंट्रोल रेजीम (MTCR) के नियमों को ध्यान में रखकर तय की गई है। इस रेंज के भीतर ब्रह्मोस मिसाइल बेहद सटीक तरीके से लक्ष्य को निशाना बना सकती है। यह समुद्र में चल रहे युद्धपोतों, दुश्मन के ठिकानों और महत्वपूर्ण सैन्य ढांचों पर हमला करने में सक्षम है। (Indonesia BrahMos missile deal)
फिलीपींस के बाद दूसरा ग्राहक बनेगा इंडोनेशिया
भारत लंबे समय से ब्रह्मोस मिसाइल को अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात करने की कोशिश कर रहा था। इस दिशा में पहली बड़ी सफलता 2022 में मिली जब फिलीपींस ने भारत से ब्रह्मोस मिसाइल सिस्टम खरीदने का समझौता किया। फिलीपींस ने तटीय रक्षा के लिए ब्रह्मोस मिसाइल की तीन बैटरियां खरीदने का फैसला किया था। अब अगर इंडोनेशिया के साथ यह सौदा पूरी तरह हो जाता है, तो वह ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन जाएगा। यह भारत के रक्षा निर्यात के लिए एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। (Indonesia BrahMos missile deal)
दक्षिण-पूर्व एशिया में बढ़ रहा रक्षा सहयोग
इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का सौदा केवल एक रक्षा खरीद नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भी मजबूत होगा। भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी के तहत इस क्षेत्र के देशों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इंडोनेशिया हिंद महासागर और प्रशांत महासागर के बीच स्थित एक महत्वपूर्ण देश है। इसलिए भारत के लिए उसके साथ रक्षा सहयोग बढ़ाना रणनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। (Indonesia BrahMos missile deal)
भारत के रक्षा निर्यात को मिलेगा बढ़ावा
पिछले कुछ वर्षों में भारत ने रक्षा निर्यात बढ़ाने पर खास ध्यान दिया है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत केवल हथियार खरीदने वाला देश न रहे, बल्कि हथियार निर्यात करने वाले देशों में भी शामिल हो। ब्रह्मोस मिसाइल इस दिशा में भारत का सबसे सफल रक्षा उत्पाद माना जा रहा है। इंडोनेशिया के साथ संभावित सौदा इस बात का संकेत है कि दुनिया के कई देश अब भारतीय रक्षा तकनीक में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इंडोनेशिया के साथ ब्रह्मोस मिसाइल का यह सौदा सफल रहता है, तो भविष्य में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और भी बढ़ सकता है। इंडोनेशिया अपनी नौसेना और तटीय रक्षा प्रणाली को लगातार मजबूत कर रहा है। ऐसे में एडवांस मिसाइल सिस्टम और समुद्री सुरक्षा उपकरणों की मांग भी बढ़ रही है। (Indonesia BrahMos missile deal)

