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एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित बोले- भारत को साझेदार नहीं, प्रतिद्वंद्वी मानता है चीन

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत को क्वाड एलायंस जैसे सहयोगी ढांचे को भी मजबूत बनाए रखना होगा। इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं, जो चीन की बढ़ती ताकत के संतुलन में भूमिका निभा सकते हैं...

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📍नई दिल्ली | 11 Mar, 2026, 8:58 PM

India China Pakistan Strategic Challenge: एक तरफ जहां सरकार अब एक तय सीमा में चीन से आने वाली एफडीआई में 2020 के सख्त नियमों में ढील देने का फैसला कर रही है, तो वहीं दूसरी चीन भारत को साझेदार के रूप में नहीं बल्कि संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है। यह कहना है चीफ ऑफ डिफेंस इंटिग्रेटेड स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का। उन्होंने कहा कि एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा कि आज भारत का पड़ोस वैसा नहीं है जैसा दस साल पहले था। हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक, और ढाका से काबुल तक रणनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं।

नई दिल्ली में बुधवार को आयोजित सेंटर फॉर जॉइंट वारफेयर स्टडीज (CENJOWS) की तरफ से आयोजित सेमिनार “चेंजिंग डायनेमिक्स इन द इंडियन नेबरहुड” में बोलते चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत का रणनीतिक माहौल पिछले दस सालों में तेजी से बदल गया है। कभी जो पड़ोस भारत के प्रभाव क्षेत्र का हिस्सा माना जाता था, आज वही क्षेत्र बड़ी शक्तियों की प्रतिस्पर्धा का मैदान बनता जा रहा है। ऐसे समय में भारत को अपने पड़ोस में होने वाले बदलावों को बहुत ध्यान से समझना और उसके अनुसार अपनी रणनीति बनानी होगी।

India China Pakistan Strategic Challenge: तेजी से बदल रहा है भारत का रणनीतिक पड़ोस

एयर मार्शल अशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत की भौगोलिक स्थिति बहुत खास है। भारत की सीमाएं दो परमाणु हथियारों से लैस देशों चीन और पाकिस्तान से लगती हैं। इसके अलावा भारत के आसपास कई छोटे लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश हैं जैसे नेपाल, भूटान, बांग्लादेश, म्यांमार, श्रीलंका और मालदीव। वहीं अफगानिस्तान मध्य एशिया की ओर जाने वाला महत्वपूर्ण रास्ता है और आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा के लिहाज से भी अहम क्षेत्र माना जाता है।

उन्होंने कहा कि पहले हिंद महासागर को अपेक्षाकृत शांत क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब यहां बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। अब यह इलाका रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बन चुका है। (India China Pakistan Strategic Challenge)

चीन की बढ़ती आक्रामकता बड़ी चिंता

उन्होंने कहा कि पिछले दस सालों में सबसे बड़ा बदलाव चीन की भूमिका में आया है। पहले चीन को क्षेत्रीय स्तर पर एक सावधान खिलाड़ी माना जाता था, लेकिन अब वह अपने प्रभाव को आक्रामक तरीके से बढ़ा रहा है। चीन भारत को साझेदार के रूप में नहीं बल्कि संभावित प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है।

उन्होंने कहा कि भारत-चीन संबंधों में बड़ा मोड़ 2017 के डोकलाम गतिरोध के समय आया। इसके बाद 2020 की गलवान घाटी झड़प ने यह साफ कर दिया कि सीमा पर तनाव कितनी तेजी से बढ़ सकता है। इस घटना के बाद दोनों देशों ने हिमालयी सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिक तैनात कर दिए। आज इस पूरे इलाके में एक लाख से अधिक सैनिक मौजूद हैं।

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उन्होंने कहा कि भारत-चीन के बीच करीब 3488 किलोमीटर लंबी हिमालयी सीमा अब केवल एक एडमिनिस्ट्रेटिव सीमा नहीं रह गई है। यह अब एक बेहद संवेदनशील रणनीतिक क्षेत्र बन चुकी है जहां लगातार सैन्य दबाव बना हुआ है। (India China Pakistan Strategic Challenge)

बेल्ट एंड रोड परियोजना से चीन का घेरा

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव ने भारत की चिंता और बढ़ा दी है। इस परियोजना के तहत चीन ने दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र में कई बड़े निवेश किए हैं।

पाकिस्तान में ग्वादर पोर्ट, बांग्लादेश में बंदरगाह परियोजनाएं, श्रीलंका में हंबनटोटा पोर्ट और मालदीव में बढ़ता प्रभाव, ये सभी मिलकर एक बड़े रणनीतिक नेटवर्क का हिस्सा बनते दिखाई देते हैं।

एयर मार्शल दीक्षित के मुताबिक चिंता केवल किसी एक परियोजना की नहीं है, बल्कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद रणनीतिक सोच की है। हर पोर्ट, हर सड़क और हर निवेश एक बड़े रणनीतिक ढांचे का हिस्सा है। (India China Pakistan Strategic Challenge)

भारत को मजबूत करनी होगी तैयारी

आईडीएस चीफ ने कहा कि हाल के सालों में भारत और चीन के बीच कुछ बातचीत और समझौते भी हुए हैं। 2024 के बाद कुछ क्षेत्रों में सैनिकों की वापसी और बातचीत के नए दौर शुरू हुए हैं। लेकिन इसके बावजूद चीन अपनी सैन्य ताकत लगातार बढ़ा रहा है।

2025 में चीन का फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर सक्रिय हुआ और उसी साल एक बड़े सैन्य परेड के जरिए चीन ने अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन भी किया। साथ ही चीन ने रूस और ग्लोबल साउथ के कई देशों के साथ अपने संबंध भी मजबूत किए हैं।

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि चीन के साथ प्रतिस्पर्धा वास्तविक है और आने वाले समय में यह दबाव कम होने वाला नहीं है। इसलिए भारत को भी अपनी तैयारी मजबूत करनी होगी।

उन्होंने कहा कि भारत को सीमा क्षेत्रों में बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से डेवलप करना होगा। सड़कों, सुरंगों और एयरफील्ड का निर्माण तेज करना जरूरी है। लक्ष्य यह है कि 2027 तक बॉर्डर रोड्स ऑर्गनाइजेशन की 100 से ज्यादा परियोजनाएं पूरी हों। (India China Pakistan Strategic Challenge)

क्वाड एलायंस को मजबूत बनाए रखना जरूरी

एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कहा कि भारत को क्वाड एलायंस जैसे सहयोगी ढांचे को भी मजबूत बनाए रखना होगा। इसमें अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश शामिल हैं, जो चीन की बढ़ती ताकत के संतुलन में भूमिका निभा सकते हैं।

बांग्लादेश का जिक्र करते हुए एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि यह उदाहरण है कि किस तरह एक भरोसेमंद पड़ोसी भी अचानक अनिश्चित दिशा में जा सकता है। (India China Pakistan Strategic Challenge)

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बांग्लादेश में बदलती राजनीतिक दिशा

उन्होंने कहा कि भारत के लिए बांग्लादेश लंबे समय तक एक भरोसेमंद साझेदार रहा है। लेकिन हाल के वर्षों में वहां की राजनीति में बदलाव देखने को मिला है।

2024 में शेख हसीना सरकार के हटने और नई सरकार के आने के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसके साथ ही चीन के साथ बांग्लादेश के रिश्ते भी तेजी से मजबूत हो रहे हैं।

चीन ने बांग्लादेश में चटगांव इंडस्ट्रियल इकॉनॉमिक जोन और मोंगला पोर्ट विकास योजना जैसे बड़े निवेश किए हैं। इसके अलावा चीन ने बांग्लादेश को अपने बाजार में जीरो टैरिफ एक्सेस भी दिया है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बांग्लादेश में ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग प्लांट लगाने की योजना भी शुरू हुई है। यह परियोजना चीन की कंपनी सीईटीसी के साथ मिलकर बनाई जा रही है।

इसके अलावा बांग्लादेश की सेना के लिए फोर्सेस गोल 2030 नाम का आधुनिकीकरण कार्यक्रम भी चल रहा है। इसके तहत बांग्लादेश नई पीढ़ी के फाइटर जेट खरीदने की योजना बना रहा है। इसमें पाकिस्तान के जेएफ-17 थंडर फाइटर जेट का भी विकल्प शामिल है।

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि ये सभी घटनाएं यह संकेत देती हैं कि बांग्लादेश अब भारत को अपनी सुरक्षा का स्वाभाविक साझेदार नहीं मान रहा। ये कदम किसी दुश्मन देश के नहीं बल्कि ऐसे पड़ोसी के हैं जो अब अपनी सुरक्षा नीति में नए विकल्प तलाश रहा है।

उन्होंने कहा कि भारत को बांग्लादेश के साथ अपने संबंधों को संतुलित और समझदारी से आगे बढ़ाना होगा। कनेक्टिविटी परियोजनाएं जैसे अगरतला-अखौरा रेल लिंक जारी रहनी चाहिए और दोनों देशों को मिलकर नए सहयोग के रास्ते तलाशने चाहिए। (India China Pakistan Strategic Challenge)

पाकिस्तान की रणनीति में बड़ा बदलाव

भारत के लिए पाकिस्तान लंबे समय से एक प्रमुख सुरक्षा चुनौती रहा है। एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि पाकिस्तान अब भी भारत के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नीति पर काम कर रहा है। आतंकवाद और सैन्य दबाव पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा बने हुए हैं। हाल के वर्षों में पाकिस्तान ने अपनी मिलिट्री स्ट्रक्चर में भी बदलाव किए हैं।

ऑपरेशन सिंदुर के बाद पाकिस्तान ने अपनी सैन्य रणनीति में नए कदम उठाए। अगस्त 2025 में पाकिस्तान ने आर्मी रॉकेट फोर्स कमांड बनाने की घोषणा की। यह कमांड चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी रॉकेट फोर्स की तर्ज पर बनाई गई है। इसका उद्देश्य भारत के भीतर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने की क्षमता बढ़ाना है।

इसके अलावा पाकिस्तान ने 2025 में अपने संविधान में संशोधन कर चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेस का पद बनाया। इसके तहत तीनों सेनाओं आर्मी, नेवी और एयर फोर्स की कमान एक व्यक्ति के हाथ में दी गई है।

इस बदलाव का मतलब है कि पाकिस्तान में मिलिट्री फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे, लेकिन इससे गलत फैसलों का जोखिम भी बढ़ सकता है।

भारत को बनानी होगी नई रणनीति

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि भारत को इन सभी चुनौतियों का सामना करने के लिए एक व्यापक रणनीति बनानी होगी। सबसे पहले भारत को अपनाा बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करना होगा। इसके लिए सड़कों, सुरंगों और एयरफील्ड का निर्माण तेजी से किया जा रहा है। लक्ष्य है कि 2027 तक सीमा क्षेत्रों में 100 से अधिक परियोजनाएं पूरी की जाएं।

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इसके साथ ही भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत को बढ़ावा देना होगा। विशेष रूप से ड्रोन, एयर डिफेंस सिस्टम और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमता विकसित करना जरूरी है।

हिंद महासागर में बढ़ती प्रतिस्पर्धा

एयर मार्शल दीक्षित के मुताबिक हिंद महासागर क्षेत्र भी अब पहले जैसा शांत नहीं रहा। यहां बड़ी शक्तियों के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है। मालदीव, श्रीलंका और म्यांमार जैसे देशों में चीन की बढ़ती सक्रियता भारत के लिए चिंता का विषय है। हालांकि भारत ने कई मौकों पर इन देशों की मदद करके अपना भरोसा मजबूत किया है। उदाहरण के तौर पर श्रीलंका के आर्थिक संकट के दौरान भारत ने उसे खाद्य सामग्री, ईंधन और आर्थिक सहायता दी।

पड़ोस की स्थिरता भारत की सुरक्षा से जुड़ी

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि भारत के पड़ोस में होने वाली हर अस्थिरता का असर भारत की सुरक्षा पर पड़ता है। अगर किसी पड़ोसी देश में आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता या गृहयुद्ध होता है, तो उसका असर भारत की सीमाओं पर भी दिखाई देता है। इसलिए पड़ोस में स्थिरता बनाए रखना केवल कूटनीतिक जरूरत नहीं, बल्कि भारत के राष्ट्रीय हित से भी जुड़ा है।

पड़ोस के साथ भरोसे का रिश्ता जरूरी

एयर मार्शल दीक्षित ने कहा कि भारत को अपने पड़ोस के साथ भरोसे का रिश्ता बनाए रखना होगा। उन्होंने कहा कि आज की दुनिया में प्रतिस्पर्धा केवल युद्ध से नहीं होती। यह निवेश, बुनियादी ढांचे, तकनीक और आर्थिक सहयोग के जरिए भी होती है।

भारत को अपने पड़ोस में भरोसेमंद साझेदार के रूप में मौजूद रहना होगा। तभी भारत अपने क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा सुनिश्चित कर सकेगा।

उन्होंने कहा कि भारत का पड़ोस कोई दूर की जगह नहीं है, बल्कि वही क्षेत्र है जहां से भारत की सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक हित जुड़े हुए हैं। इसलिए भारत को अपने पड़ोस के साथ मजबूत, संतुलित और दूरदर्शी नीति अपनानी होगी। (India China Pakistan Strategic Challenge)

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  • हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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