📍लक्षद्वीप | 26 Feb, 2026, 1:03 PM
Kalari Leap Exercise: भारतीय वायुसेना की दक्षिण एयर कमांड ने हाल ही में ‘कलारी लीप’ नाम की जॉइंट मैरिटाइम एक्सरसाइज का आयोजन किया था। जिसे लक्षद्वीप और मिनिकॉय द्वीपसमूह में सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस अभ्यास में भारतीय वायुसेना के साथ आर्म्ड फोर्सेस स्पेशल ऑपरेशंस डिवीजन और इंडियन कोस्ट गार्ड की टीमें भी शामिल रहीं। यह अभ्यास समुद्री इलाकों में तेज और सटीक ऑपरेशन करने की क्षमता को परखने के लिए आयोजित किया गया था।
Kalari Leap Exercise: क्या है कलारी लीप?
‘कलारी लीप’ नाम के पीछे भी एक खास अर्थ है। यह नाम केरल की पारंपरिक मार्शल आर्ट ‘कलरिपयट्टू’ से लिया गया है, जो ताकत, संतुलन और तेज कार्रवाई का प्रतीक मानी जाती है। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए इस अभ्यास का नाम रखा गया, ताकि एयर, समुद्र और जमीन तीनों क्षेत्रों में एक साथ काम करने की क्षमता को दिखाया जा सके।
इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य जॉइंट प्लानिंग, रैपिड फोर्स प्रोजेक्शन और प्रिसिजन एक्जीक्यूशन को टेस्ट करना था। आसान शब्दों में कहें तो यह देखा गया कि कैसे अलग-अलग फोर्स मिलकर कितनी तेजी से किसी मिशन को प्लान कर सकती हैं, कितनी जल्दी फोर्स को मौके पर पहुंचा सकती हैं और कितनी सटीकता से ऑपरेशन को पूरा कर सकती हैं। यह अभ्यास खास तौर पर ऐसे समुद्री इलाकों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां भौगोलिक हालात चुनौतीपूर्ण होते हैं।
अभ्यास के दौरान कई तरह के ऑपरेशन किए गए। इसमें एयरबोर्न और एयर-लैंडेड इंसर्शन शामिल था, जिसमें सैनिकों को हवाई मार्ग से टारगेट एरिया में उतारा गया। इसके अलावा हेलीकॉप्टर के जरिए स्पेशल मिशन भी किए गए, जिन्हें हेलिबोर्न ऑपरेशन कहा जाता है। समुद्र से तट पर हमला करने की तैयारी के लिए एम्फीबियस असॉल्ट की भी प्रैक्टिस की गई। (Kalari Leap Exercise)
एंटी-शिप स्ट्राइक का अभ्यास
इसके साथ ही एंटी-शिप स्ट्राइक का अभ्यास किया गया, जिसमें दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने की प्रक्रिया को परखा गया। समुद्र में किसी आपात स्थिति से निपटने के लिए सर्च एंड रेस्क्यू यानी खोज और बचाव अभियान भी इस अभ्यास का हिस्सा रहा। इन सभी ऑपरेशन्स को इस तरह डिजाइन किया गया था कि वास्तविक परिस्थितियों के करीब अनुभव मिल सके।
इस एक्सरसाइज में भारतीय वायुसेना ने कई अहम एसेट्स का इस्तेमाल किया। इसमें एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट, एमआई-17 वी5 हेलीकॉप्टर और सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट शामिल रहे। एएन-32 का इस्तेमाल सैनिकों को ले जाने और मेडिकल इवैक्यूएशन के लिए किया गया। वहीं, सुखोई-30 एमकेआई फाइटर जेट ने मैरिटाइम स्ट्राइक मिशन में हिस्सा लिया। (Kalari Leap Exercise)
इंडियन कोस्ट गार्ड भी हुआ शामिल
इंडियन कोस्ट गार्ड ने भी इस अभ्यास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कोस्ट गार्ड के जहाज, जेमिनी बोट्स और डोर्नियर 228 एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया। डोर्नियर विमान ने सर्च एंड रेस्क्यू मिशन में मदद की और फाइटर जेट्स को गाइड करने का काम भी किया। इसके अलावा स्पेशल फोर्स के जवानों ने कॉम्बैट फ्री फॉल यानी पैराशूट जंप के जरिए इंसर्शन किया और एम्फीबियस ऑपरेशन में भाग लिया।
इस अभ्यास का एक अहम हिस्सा मास कैजुअल्टी मैनेजमेंट ड्रिल भी रहा। इसमें घायल सैनिकों को तेजी से निकालने और इलाज के लिए एयरलिफ्ट करने की प्रक्रिया का अभ्यास किया गया। अगत्ती से तिरुवनंतपुरम तक एएन-32 एयरक्राफ्ट के जरिए मरीजों को ले जाने का अभ्यास किया गया, जिससे मेडिकल रिस्पॉन्स सिस्टम को भी मजबूत किया जा सके। (Kalari Leap Exercise)
एयर डिफेंस सिस्टम और नेटवर्क के साथ मिलकर करे काम
‘कलारी लीप’ अभ्यास में एक और महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया था कि यह मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम और नेटवर्क के साथ मिलकर काम कर सके। इसमें एंटी-जैमिंग और एडवांस कम्युनिकेशन सिस्टम का भी इस्तेमाल किया गया, ताकि ऑपरेशन के दौरान किसी तरह की रुकावट न आए।
यह अभ्यास यह दिखाने के लिए आयोजित किया गया था कि भारतीय सशस्त्र बल द्वीपीय क्षेत्रों में एक साथ मिलकर ऑपरेशन करने में सक्षम हैं। इसमें एयर, मैरिटाइम और स्पेशल ऑपरेशंस का पूरा तालमेल देखने को मिला। अभ्यास के दौरान सभी फोर्सेस ने मिलकर जटिल ऑपरेशन्स को अंजाम दिया और अपनी तैयारी का प्रदर्शन किया। (Kalari Leap Exercise)

