📍नेल्लोर, आंध्र प्रदेश | 13 Mar, 2026, 7:19 PM
Autonomous Maritime Shipyard: समुद्री तकनीक और रक्षा निर्माण के क्षेत्र में भारत को बड़ी कामयाबी मिली है। आंध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में दुनिया का पहला ऑटोनॉमस मैरीटाइम शिपबिल्डिंग एंड सिस्टम्स सेंटर स्थापित किया जा रहा है। इस परियोजना की आधारशिला 12 मार्च को रखी गई। यह परियोजना भारतीय रक्षा तकनीक कंपनी सागर डिफेंस इंजीनियरिंग प्राइवेट लिमिटेड द्वारा डेवलप की जा रही है।
रक्षा समाचाार इस मौके का खास गवाह बना। यह नया शिपयार्ड आंध्र प्रदेश के जुव्वलादिन्नी फिशिंग हार्बर में बनाया जाएगा। इस जगह की खूबी यह है कि यहां से सीधे समुद्र तक पहुंच उपलब्ध है। इससे जहाजों का निर्माण, लॉन्चिंग, परीक्षण और तैनाती एक ही जगह से की जा सकेगी। इस परियोजना को भारत की स्वदेशी रक्षा निर्माण क्षमता और समुद्री तकनीक को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। (Autonomous Maritime Shipyard)
Autonomous Maritime Shipyard: 29.58 एकड़ क्षेत्र में बनेगा आधुनिक शिपयार्ड
इस परियोजना के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने जुव्वलादिन्नी फिशिंग हार्बर में कुल 29.58 एकड़ भूमि आवंटित की है। इस भूमि में लगभग 7.58 एकड़ वाटरफ्रंट क्षेत्र शामिल है, जबकि बाकी हिस्सा हार्बर क्षेत्र में आता है। समुद्र के पास होने के कारण यहां जहाजों के निर्माण और परीक्षण के लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध होंगी।
यह केंद्र एक मॉडर्न एंड इंटीग्रेटिड कैंपस के तौर पर डेवलप किया जाएगा। यहां जहाज निर्माण सुविधा, परीक्षण इंफ्रास्ट्रक्चर, रिसर्च एंड डेवलपमेंट सेंटर, जहाज मरम्मत और रखरखाव सुविधा तथा विशेष प्रशिक्षण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे। इससे आटोनोमस मैरिन सिस्टम्स के डिजाइन से लेकर परीक्षण तक की पूरी प्रक्रिया एक ही परिसर में संभव होगी। (Autonomous Maritime Shipyard)
Delighted to attend the groundbreaking ceremony of the Autonomous Maritime Shipyard & Systems Development Centre at Juvalladinne, Andhra Pradesh with Sagar Defence Engineering.
The upcoming facility near the Juvvaladinne fishing harbour (SPSR Nellore district) will focus on… pic.twitter.com/0QIFlQttNQ
— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 13, 2026
अनमैन्ड मरीन टेक्नोलॉजी पर होगा फोकस
यह केंद्र मुख्य रूप से ऑटोनॉमस और अनमैन्ड मैरीटाइम सिस्टम्स के डेवलपमेंट पर काम करेगा। इसमें ऐसे जहाज और उपकरण बनाए जाएंगे जो कम मानवीय हस्तक्षेप के साथ काम कर सकें।
यहां अनमैन्ड सरफेस वेसल्स (यूएसवी) यानी समुद्र की सतह पर चलने वाले मानवरहित जहाज विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा ऑटोनॉमस अंडरवाटर व्हीकल्स (एयूवी) भी बनाए जाएंगे जो समुद्र के अंदर काम करने वाले रोबोटिक सिस्टम होंगे।
इन तकनीकों का उपयोग समुद्री निगरानी, तटीय सुरक्षा, समुद्री अनुसंधान और विभिन्न व्यावसायिक कार्यों में किया जा सकेगा। इसके साथ ही केंद्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेविगेशन सिस्टम, समुद्री सेंसर, कम्युनिकेशन नेटवर्क और कमांड एंड कंट्रोल प्लेटफॉर्म भी विकसित किए जाएंगे। (Autonomous Maritime Shipyard)

रोबोटिक्स और एआई प्रोसेस-बेस्ड मैन्युफैक्चरिंग
इस शिपयार्ड में पारंपरिक जहाज निर्माण से अलग आधुनिक डिजिटल तकनीकों का उपयोग किया जाएगा। यहां एआई आधारित शिपयार्ड मैनेजमेंट सिस्टम लगाया जाएगा जो डिजाइन, उत्पादन और परीक्षण प्रक्रियाओं का समन्वय करेगा।
निर्माण प्रक्रिया में रोबोटिक वेल्डिंग, ऑटोमेटेड कटिंग, पेंटिंग और असेंबली जैसी तकनीकों का इस्तेमाल होगा। इसके अलावा 3डी प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग विशेष पुर्जों और स्पेयर पार्ट्स के निर्माण में किया जाएगा।
साथ ही यहां डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी का भी इस्तेमाल किया जाएगा। इसके तहत जहाज और शिपयार्ड के डिजिटल मॉडल तैयार किए जाएंगे, जिनकी मदद से वास्तविक परीक्षण से पहले ही उनके प्रदर्शन का आकलन किया जा सकेगा। (Autonomous Maritime Shipyard)
समुद्र में वास्तविक परीक्षण की सुविधा
जुव्वलादिन्नी हार्बर के पास होने के कारण इस केंद्र को समुद्र में एक्चुअल टेस्ट करने की सुविधा भी मिलेगी। यहां विकसित किए गए जहाजों और सिस्टम्स का परीक्षण सीधे समुद्री वातावरण में किया जाएगा।
परीक्षण के दौरान जहाजों की ऑटोनॉमस नेविगेशन, ऑब्स्टेकल अवॉयडेंस और डॉकिंग क्षमता को जांचा जाएगा। इसके अलावा सेंसर और नेविगेशन तकनीकों का भी परीक्षण किया जाएगा।
इस तरह के परीक्षण से नए सिस्टम्स की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता का आकलन किया जा सकेगा। (Autonomous Maritime Shipyard)
आंध्र प्रदेश सरकार करेगी मदद
इस परियोजना को आंध्र प्रदेश सरकार भी सहयोग कर रही है। आधारशिला समारोह में राज्य के मानव संसाधन विकास, आईटी और इलेक्ट्रॉनिक्स मंत्री नारा लोकेश ने हिस्सा लिया।
नारा लोकेश ने कहा कि यह परियोजना आंध्र प्रदेश की समुद्री तकनीक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के संस्थापक निकुंज पराशर का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना से राज्य के समुद्री क्षेत्र को नई दिशा मिलेगी।
उन्होंने कहा कि भारत की करीब 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है और आंध्र प्रदेश देश की दूसरी सबसे लंबी तटरेखा वाला राज्य है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और तटीय समुदायों के विकास में अहम भूमिका निभा सकता है। (Autonomous Maritime Shipyard)

मैरीटाइम ऑपरेशंस में ऑटोनॉमस तकनीकों का बढ़ा इस्तेमाल
सागर डिफेंस इंजीनियरिंग के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैप्टन निकुंज पराशर ने कहा कि यह प्रोजेक्ट समुद्री तकनीक के क्षेत्र में एक नया अध्याय साबित हो सकता है। उनके अनुसार दुनिया भर में मैरीटाइम ऑपरेशंस तेजी से ऑटोनॉमस तकनीकों की ओर बढ़ रहा है और यह केंद्र भारत को अगली पीढ़ी की अनमैन्ड मैरीटाइम सिस्टम्स को देश के भीतर डिजाइन करने, परीक्षण करने और निर्माण करने की क्षमता देगा।
उन्होंने यह भी बताया कि इस शिपयार्ड में स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें रोबोटिक सिस्टम के जरिए ऑटोमेटेड वेल्डिंग, कटिंग, पेंटिंग और असेंबली जैसे कार्य किए जाएंगे। इसके अलावा रोबोट और ऑटोमेटेड गाइडेड व्हीकल्स की मदद से सामग्री को एक जगह से दूसरी जगह ले जाया जाएगा। विशेष पुर्जों और स्पेयर पार्ट्स के तेज निर्माण के लिए 3डी प्रिंटिंग तकनीक का भी इस्तेमाल किया जाएगा।
निकुंज पराशर ने कहा कि भारत की करीब 7,500 किलोमीटर लंबी तटरेखा है और आंध्र प्रदेश देश की दूसरी सबसे लंबी तटरेखा वाला राज्य है। ऐसे में समुद्री क्षेत्र देश की आर्थिक वृद्धि और तटीय सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उनके अनुसार यह परियोजना समुद्री तकनीक, रक्षा निर्माण और तटीय क्षेत्रों के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। (Autonomous Maritime Shipyard)
सागर डिफेंस इंजीनियरिंग की स्थापना वर्ष 2015 में कैप्टन निकुंज पराशर और उनके सहयोगियों द्वारा की गई थी। कंपनी ने शुरुआत मुंबई में एक छोटे वर्कस्पेस से की थी। समय के साथ यह कंपनी रक्षा तकनीक क्षेत्र में काम करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल हो गई।
कंपनी पुणे में स्थित अपने 10 एकड़ के रिसर्च एंड मैन्युफैक्चरिंग परिसर में विभिन्न प्रकार के स्वायत्त सिस्टम्स विकसित कर रही है। इनमें समुद्री, हवाई और जमीन पर काम करने वाले मानवरहित सिस्टम शामिल हैं।
कंपनी ने जेनेसिस नाम का एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम भी डेवलप किया है। यह तकनीक किसी भी जहाज को रिमोट, सेमी-ऑटोनॉमस या पूरी तरह ऑटोनॉमस मोड में ऑपरेट कर सकती है। (Autonomous Maritime Shipyard)
ब्लू इकोनॉमी को मिलेगा बढ़ावा
इस परियोजना से आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। इस केंद्र के संचालन से 300 से 1,000 तक नौकरियां प्रत्यक्ष नौकरियां पैदा होंगी। इसके अलावा इंजीनियर, तकनीशियन, जहाज डिजाइन विशेषज्ञ और प्रशासनिक कर्मचारियों के लिए भी अवसर उपलब्ध होंगे। इस सेंटर से न केवल ब्लू इकोनॉमी का विकास होगा बल्कि भारत को वैश्विक ऑटोनॉमस समुद्री टेक्नोलॉजी हब बनाने में मदद मिलेगी।
इसके साथ ही इस परियोजना से आसपास के क्षेत्रों में लॉजिस्टिक्स, हार्बर सेवाओं और सहायक उद्योगों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। (Autonomous Maritime Shipyard)
मछुआरों के लिए भी होगा फायदा
इस परियोजना से स्थानीय मछुआरा समुदाय को भी फायदा मिलने की बात कही गई है। इस केंद्र में जहाजों की मरम्मत और रखरखाव की सुविधा उपलब्ध होगी, जिससे मछली पकड़ने वाली नौकाओं की मरम्मत जल्दी हो सकेगी।
इसके अलावा नई तकनीकों की मदद से रीयल टाइम मछली लोकेशन मैप्स, मौसम अलर्ट और समुद्री सुरक्षा सिस्टम जैसी सुविधाओं को भी विकसित करने की योजना है। इससे समुद्र में काम करने वाले मछुआरों की सुरक्षा और कार्यक्षमता बढ़ाई जा सकेगी। (Autonomous Maritime Shipyard)
भारत की समुद्री तकनीक क्षमता को बढ़ावा
यह केंद्र स्वदेशी समुद्री तकनीक के विकास में भूमिका निभाएगा। यहां विकसित होने वाले सिस्टम्स का उपयोग समुद्री निगरानी, अनुसंधान, आपदा प्रबंधन और विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जा सकेगा। इस परियोजना के माध्यम से समुद्री तकनीक, रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोनॉमस सिस्टम्स के क्षेत्र में नए अनुसंधान और विकास कार्य भी किए जाएंगे। (Autonomous Maritime Shipyard)


