📍नई दिल्ली | 7 Feb, 2026, 1:37 PM
Agni-3 missile test Explained: 6 फरवरी को भारत ने अग्नि-3 बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। खास बात यह थी इस मिसाइल की रेंज में पाकिस्तान और चीन के कुछ शहर बीजिंग और शंघाई भी आ सकते हैं। यह मिसाइल भारत के न्यूक्लियर ट्रायड का हिस्सा है और भारत को सेकंड स्ट्राइक कैपेबिलिटी देती है। इस मिसाइल का टेस्ट होना भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, न्यूक्लियर डिटरेंस पॉलिसी और रणनीतिक संतुलन से सीधे जुड़ा है। खासकर ऐसे समय में, जब भारत के आसपास का सुरक्षा माहौल लगातार चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
Agni-3 missile test Explained: अग्नि-3 टेस्ट में आखिर हुआ क्या?
6 फरवरी को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से अग्नि-3 इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल का परीक्षण किया गया। यह लॉन्च स्ट्रैटेजिक फोर्सेस कमांड (SFC) की निगरानी में हुआ, जो भारत की परमाणु ताकत को ऑपरेट करने और संभालने की जिम्मेदारी निभाता है।
टेस्ट के दौरान मिसाइल ने तय की गई दूरी तक बिल्कुल सही रास्ते पर उड़ान भरी और अपने सभी तकनीकी और ऑपरेशनल पैरामीटर्स को सफलतापूर्वक साबित किया। रक्षा सूत्रों के मुताबिक, लॉन्च के दौरान मिसाइल की स्पीड, दिशा, कंट्रोल सिस्टम, गाइडेंस और री-एंट्री सभी चीजें बिल्कुल तय मानकों के मुताबिक रहीं।
यह टेस्ट इसलिए भी अहम है क्योंकि अग्नि-3 पहले से ही भारतीय सेना का हिस्सा है। यह 2011 में भारतीय सेना का हिस्सा बनी थी। ऐसे में अग्नि-3 का फिर से टेस्ट करना यह सुनिश्चित करना था कि जरूरत पड़ने पर यह मिसाइल आज भी पूरी तरह भरोसेमंद और तैनाती के लिए तैयार है। (Agni-3 missile test Explained)
अग्नि-3 आखिर है क्या और कितनी है ताकतवर?
अग्नि-3 एक दो-चरण वाली सॉलिड फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे भारत ने पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से डेवलप किया है। इसकी मारक क्षमता करीब 3,000 से 3,500 किलोमीटर तक मानी जाती है। भविष्य में इसकी रेंज को 5,000 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। इस दूरी के साथ अग्नि-3 पूरे पाकिस्तान को, चीन के बड़े हिस्से को यहां तक कि बीजिंग जैसे अहम इलाकों तक और मध्य पूर्व के कई रणनीतिक ठिकानों को कवर करने में सक्षम है। यानी यह मिसाइल भारत को क्षेत्रीय नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर मजबूत बनाती है।
इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह परमाणु हथियार ले जाने में सक्षम है। इसका पेलोड यानी वारहेड का वजन करीब 1,500 से 2,500 किलोग्राम तक हो सकता है। जरूरत पड़ने पर इसमें पारंपरिक वॉरहेड के साथ-साथ परमाणु वॉरहेड भी लगाया जा सकता है। यह एक न्यूक्लियर कैपेबल मिसाइल है, जिसमें करीब 150 से 250 किलोटन तक की न्यूक्लियर क्षमता वाला वॉरहेड फिट किया जा सकता है। इसी वजह से इसे भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता की रीढ़ माना जाता है।
अग्नि-3 की गति बहुत ज्यादा होती है। टर्मिनल फेज में 5-6 मैक (हाइपरसोनिक स्पीड) पकड़ लेती है, और एंटी-मिसाइल सिस्टम्स को चकमा दे सकती है। जिससे इसे इंटरसेप्ट करना यानी बीच में रोकना दुश्मन के लिए बेहद मुश्किल हो जाता है। (Agni-3 missile test Explained)
अग्नि-3 वजन करीब 50 टन
डिजाइन और स्ट्रक्चर के लिहाज से अग्नि-3 लगभग 17 मीटर लंबी है और इसका वजन करीब 50 टन है। यह एक रोड-मोबाइल मिसाइल है, यानी इसे ट्रक या रेल प्लेटफॉर्म से कहीं भी तैनात करके लॉन्च किया जा सकता है। यह क्षमता इसे दुश्मन के पहले हमले से काफी हद तक सुरक्षित बनाती है, क्योंकि इसकी लोकेशन लगातार बदली जा सकती है और इसे पहले से ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
डिजाइन और स्ट्रक्चर के लिहाज से अग्नि-3 लगभग 17 मीटर लंबी है और इसका वजन करीब 50 टन है। यह एक रोड-मोबाइल मिसाइल है, यानी इसे ट्रक या रेल प्लेटफॉर्म से कहीं भी तैनात करके लॉन्च किया जा सकता है। यह क्षमता इसे दुश्मन के पहले हमले से काफी हद तक सुरक्षित बनाती है, क्योंकि इसकी लोकेशन लगातार बदली जा सकती है और इसे पहले से ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। (Agni-3 missile test Explained)
यह टेस्ट रूटीन नहीं, बल्कि रणनीतिक संदेश क्यों है?
अक्सर लोग सवाल करते हैं कि जब अग्नि-3 पहले से सेना में शामिल है, तो फिर इसका टेस्ट क्यों जरूरी था। इसका जवाब है– ऑपरेशनल रेडीनेस। परमाणु हथियारों और बैलिस्टिक मिसाइलों में सबसे अहम बात यह होती है कि वे आखिरी वक्त तक पूरी तरह भरोसेमंद रहें। सालों तक स्टोरेज में रहने के बाद भी अगर मिसाइल बिना किसी तकनीकी दिक्कत के लॉन्च हो जाए, तो ही वह असली ताकत कहलाती है।
अग्नि-3 का यह टेस्ट यह साबित करता है कि भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर भी पूरी तरह तैयार है। यह दुश्मन देशों को साफ संदेश देता है कि भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता मजबूत और विश्वसनीय है। (Agni-3 missile test Explained)
भारत की “नो फर्स्ट यूज” पॉलिसी
भारत की परमाणु नीति साफ है– “नो फर्स्ट यूज”। यानी भारत कभी पहले परमाणु हमला नहीं करेगा, लेकिन अगर उस पर हमला हुआ, तो जवाब इतना सख्त होगा कि दुश्मन दोबारा ऐसा सोच भी न सके।
इस नीति में अग्नि-3 जैसी मिसाइलों की भूमिका बेहद अहम हो जाती है। चूंकि यह रोड और रेल मोबाइल है, इसलिए इसे छिपाकर रखा जा सकता है। दुश्मन के पहले हमले में इसे पूरी तरह नष्ट करना आसान नहीं होता। यही वजह है कि अग्नि-3 भारत की सेकंड स्ट्राइक क्षमता को मजबूत बनाती है। (Agni-3 missile test Explained)
चीन और पाकिस्तान के संदर्भ में क्यों अहम है अग्नि-3?
अगर रणनीतिक नजरिए से देखा जाए, तो अग्नि-3 की रेंज और क्षमता सीधे तौर पर चीन और पाकिस्तान दोनों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। पाकिस्तान के मामले में अग्नि-3 भारत को पूरी तरह निर्णायक बढ़त देता है, क्योंकि इसकी रेंज में पाकिस्तान का हर रणनीतिक ठिकाना आ जाता है।
चीन के संदर्भ में भी यह मिसाइल बेहद अहम है। इसकी मारक क्षमता चीन के कई अहम सैन्य और औद्योगिक इलाकों तक पहुंचने में सक्षम है। इससे भारत को रणनीतिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है, खासकर तब जब चीन अपनी मिसाइल और न्यूक्लियर ताकत लगातार बढ़ा रहा है। (Agni-3 missile test Explained)
अग्नि सीरीज में अग्नि-3 की जगह क्या है?
अग्नि-3, भारत की अग्नि मिसाइल सीरीज का एक अहम हिस्सा है। इस सीरीज में अलग-अलग रेंज की मिसाइलें शामिल हैं, जो मिलकर भारत को फुल स्पेक्ट्रम डिटरेंस देती हैं।
अग्नि-1 और अग्नि-2 कम दूरी के लिए हैं, जबकि अग्नि-4 और अग्नि-5 लंबी दूरी की जरूरतों को पूरा करती हैं। अग्नि-3 इन दोनों के बीच एक मजबूत कड़ी की तरह काम करती है, जो इंटरमीडिएट रेंज में भारत की जरूरतें पूरी करती है। (Agni-3 missile test Explained)
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को क्या फायदा?
अग्नि-3 जैसे सफल टेस्ट भारत को उन चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा करते हैं, जिनके पास भरोसेमंद इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता है। यह भारत की रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करता है और दुनिया को दिखाता है कि भारत अपनी सुरक्षा जरूरतों के लिए किसी पर निर्भर नहीं है।
साथ ही, यह टेस्ट ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक राजनीति में सैन्य ताकत का महत्व फिर से बढ़ गया है। ऐसे में भारत की यह क्षमता उसे एक जिम्मेदार लेकिन मजबूत शक्ति के तौर पर स्थापित करती है। (Agni-3 missile test Explained)
अग्नि-3 का यह टेस्ट सिर्फ एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है। यह भारत की रणनीतिक सोच, आत्मनिर्भर रक्षा नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा की रीढ़ को मजबूत करने वाला कदम है।
यह टेस्ट यह भरोसा देता है कि भारत की परमाणु प्रतिरोधक क्षमता आज भी उतनी ही मजबूत और भरोसेमंद है, जितनी उसे होना चाहिए। बदलते सुरक्षा हालात में, अग्नि-3 जैसी मिसाइलें भारत को न सिर्फ सुरक्षित बनाती हैं, बल्कि दुश्मनों को साफ संदेश भी देती हैं कि भारत किसी भी चुनौती का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। (Agni-3 missile test Explained)


