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Indian AMCA fighter jet: स्वदेशी 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट पकड़ेगा रफ्तार, इसके डेवलपमेंट के लिए कई भारतीय कंपनियों ने दिए प्रस्ताव

Indian AMCA fighter jet: Indian firms submit bids with DRDO to build 5th-gen fighter aircraft

Indian AMCA fighter jet: भारत के स्वदेशी फाइटर जेट एएमसीए प्रोजेक्ट के लिए अच्छी खबर है। कई भारतीय कंपनियों ने इस प्रोजेक्ट के लिए डीआरडीओ के साथ साझेदारी के लिए अपने प्रस्ताव जमा कर दिए हैं। यह प्रस्ताव भारत के पहले पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट फाइटर जेट के डिजाइन और डेवलपमेंट के लिए दिए गए हैं।

Stealth Fighter AMCA: स्वदेशी फिफ्थ जनरेशन एयरक्राफ्ट बनाने में बढ़ रही है कंपनियों की दिलचस्पी, लार्सन एंड टुब्रो और बीईएल ने की साझेदारी

30 सितंबर 2025 को एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) की तरफ से जारी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट की आखिरी तारीख थी, और उसी दिन तक कई बड़ी भारतीय कंपनियों ने अपने बिड्स जमा किए। यह परियोजना लगभग 15,000 करोड़ रुपये की लागत से डिजाइन और डेवलपमेंट फेज में पूरी की जाएगी।

Indian AMCA fighter Jet

रक्षा मंत्रालय ने इस परियोजना के लिए एक विशेष समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख ए. सिवथानु पिल्लई कर रहे हैं। यह समिति सभी बिड्स का मूल्यांकन करेगी और अपनी सिफारिशें रक्षा मंत्रालय को सौंपेगी। अंतिम फैसला मंत्रालय ही लेगा कि इस परियोजना में कौन सी कंपनियां डीआरडीओ के साथ मिलकर काम करेंगी।

सूत्रों के अनुसार, रक्षा मंत्रालय इस परियोजना को लेकर बेहद सक्रिय है और कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से इसकी मंजूरी मिलने के बाद से ही इस पर लगातार नजर रखे हुए है। रक्षा सचिव स्वयं इस परियोजना की निगरानी कर रहे हैं ताकि तय समयसीमा में काम पूरा किया जा सके।

भारतीय रक्षा उद्योग के कई बड़े नाम इस परियोजना में शामिल हुए हैं। लार्सन एंड टुब्रो ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के साथ साझेदारी की है। वहीं, भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड ने भी निजी क्षेत्र की अन्य कंपनियों के साथ मिलकर बिड्स जमा किए हैं।

भारत की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ने भी अपने प्रस्ताव पेश किए हैं। एचएएल पहले से ही तेजस फाइटर जेट और दूसरे कई हेलिकॉप्टर प्रोजेक्ट्स में काम कर रही है और AMCA के निर्माण में उसकी भूमिका अहम मानी जा रही है।

AMCA प्रोजेक्ट के तहत भारतीय वायुसेना को एक अत्याधुनिक पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी विमान उपलब्ध कराना है। योजना के अनुसार, यह विमान 2034-35 तक उत्पादन और इंडक्शन के लिए तैयार हो जाएगा। यह पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और तकनीक पर आधारित होगा, हालांकि ग्लोबल स्टैंडर्ड्स के अनुरूप इसमें कुछ अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी शामिल हो सकता है।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि इस परियोजना से भारत न केवल अपनी वायुसेना की क्षमता को नई ऊंचाई देगा, बल्कि दुनिया के चुनिंदा देशों की उस सूची में भी शामिल हो जाएगा जो खुद के पांचवी पीढ़ी के फाइटर जेट बना सकते हैं।

डिजाइन और डेवलपमेंट के बाद, इस प्रोजेक्ट में प्रोडक्शन फेज भी शामिल होगा। अनुमान है कि एएमसीए का उत्पादन करने वाला पार्टनर वही कंपनी होगी, जो इसके डिजाइन और डेवलपमेंट में डीआरडीओ के साथ मिल कर काम करेगी।

भारतीय वायुसेना कम से कम 125 विमान खरीदने की योजना बना रही है। इसके लिए लगभग 2 लाख करोड़ रुपये की लागत आने का अनुमान है। इन विमानों को सात स्क्वाड्रन के रूप में शामिल किया जाएगा, जिससे वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा होगा।

वहीं, एएमसीए प्रोजक्ट Indian AMCA fighter jet भारतीय रक्षा उद्योग के लिए भी एक बड़ा अवसर है। यह ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के पहल को मजबूत करेगा। इस परियोजना के जरिए न केवल स्वदेशी टेक्नोलॉजी का विकास होगा बल्कि भारत के निजी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को भी हाई-टेक डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग में नई ऊंचाई हासिल करने का मौका मिलेगा।

इसके अलावा, AMCA प्रोजेक्ट से भारत को निर्यात बाजार में भी नई संभावनाएं मिल सकती हैं। हालांकि अभी प्राथमिकता भारतीय वायुसेना की जरूरतों को पूरा करना है।

Indian AMCA fighter jet: Indian firms submit bids with DRDO to build 5th-gen fighter aircraft Indian AMCA fighter jet project gains momentum as multiple Indian firms, including HAL, L&T, BEL and BEML, submit bids with DRDO to design and develop India’s first indigenous 5th generation fighter aircraft under the Rs 15,000 crore AMCA program, set for IAF induction by 2034-35.

Armed Forces Medical Services: आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज ने जारी की 18 करोड़ रुपये की बकाया पेंशन, वेटरंस और परिवारों को मिला हक

Armed Forces Medical Services
Lt Gen Sadhna Saxena Nair, Directorate General of Medical Service (Army)

Armed Forces Medical Services: भारतीय सेनाओं की मेडिकल विंग आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज (AFMS) ने वेटरंस और उनके परिवारों को एक बड़ी राहत दी है। सेना के डायरेक्टर जनरल मेडिकल सर्विसेज (आर्मी) के नेतृत्व में मेडिकल पर्सनल रिकॉर्ड सेक्शन ऑफिसर्स ने पेंशन से जुड़ी विसंगतियों का निपटारा करते हुए लगभग 18 करोड़ रुपये की बकाया राशि जारी कर दी है। इस पहल के बाद पेंशनभोगियों के न केवल पेंडिंग मामले निपटे हैं बल्कि उनकी मासिक पेंशन में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।

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यह पहल मुख्य रूप से उन मामलों पर केंद्रित रही जो वर्षों से लंबित थे। इनमें लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन, स्पेशियल फैमिली पेंशन, स्पेशियल फैमिली पेंशन, गैलेंट्री अवॉर्ड्स से जुड़ी आर्थिक सुविधाएं, और वन रैंक वन पेंशन संशोधन शामिल हैं। कई वेटरंस, वीर नारियां और शहीद जवानों के परिजन अपने हक की पेंशन और बकाया राशि से अनजान थे।

Armed Forces Medical Services ने एक कम्पैशनेट आउटरीच कैम्पेन चलाया, जिसके जरिए ऐसे लाभार्थियों की पहचान की गई और उनसे संपर्क साधा गया। इस प्रक्रिया में उन्हें दस्तावेजी मदद उपलब्ध कराई गई ताकि वे जल्दी से जल्दी अपने हक का पैसा प्राप्त कर सकें।

Armed Forces Medical Services – आर्म्ड फोर्सेस मेडिकल सर्विसेज

Armed Forces Medical Services ने यह भी सुनिश्चित किया कि सभी पात्र वेटरंस और उनके परिवार स्पर्श SPARSH पोर्टल के माध्यम से खुद सत्यापित कर सकें। इसके अलावा डिफेंस पेंशन लाइजन सेंटर्स और मेडिकल पर्सनल रिकॉर्ड सेक्शन ऑफिसर्स ने विशेष हेल्प डेस्क बनाए, ताकि लाभार्थियों को हर स्तर पर सहायता मिल सके।

इस पहल में डिजिटल पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया गया। सभी मामलों के लिए रियल-टाइम स्टेटस अपडेट्स और ग्रिवांस रीड्रेसल मैकेनिज्म शुरू किए गए, जिससे लाभार्थियों को अपनी फाइल की स्थिति पता चलती रही।

सीडीए पुणे और सीडीए इलाहाबाद की लायजन सेल्स में पर्सनलाइज्ड असिस्टेंस डेस्क बनाए गए, जहां परिवारों को दस्तावेजी सहायता दी गई और पेंशन वितरण की प्रक्रिया तेज की गई।

लेफ्टिनेंट जनरल साधना सक्सेना नायर, डायरेक्टरेट जनरल ऑफ मेडिकल सर्विसेज (आर्मी), ने इस पहल को ऐतिहासिक करार दिया। उन्होंने कहा, “कई वेटरंस और उनके परिवारों को यह जानकारी ही नहीं थी कि उन्हें बकाया राशि मिलनी है। पुरानी व्यवस्थाओं की वजह से यह भुगतान अटका हुआ था। हमने स्वयं आगे बढ़कर उनसे संपर्क किया, विवरण सत्यापित किया और सुनिश्चित किया कि जो उनका हक है वह उन्हें लौटाया जाए।”

इस पहल से सबसे अधिक राहत उन परिवारों को मिली है जो लिबरलाइज्ड फैमिली पेंशन और स्पेशल फैमिली पेंशन जैसी श्रेणियों के अंतर्गत आते हैं। शहीद जवानों के परिजन और विधवाओं को न सिर्फ बकाया राशि मिली बल्कि उनकी मासिक पेंशन में भी बढ़ोतरी हुई। वहीं, ओआरओपी संशोधन के बाद जिन वेटरन्स को अतिरिक्त लाभ मिलना था, उन्हें Armed Forces Medical Services से अब सीधा फायदा पहुंचा है।

Tri Services Jointness: रक्षा मंत्री बोले- ऑपरेशन सिंदूर में IACCS, आकाशतीर और त्रिगुण नेटवर्क ने दिखाया कमाल, स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स से पहले सोच बदलें सेनाएं

Tri Services Jointness Operation Sindoor
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing a seminar organised by the Indian Air Force at Subroto Park, New Delhi on September 30, 2025.

Tri Services Jointness: ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेनाओं ने ऐसा ऐतिहासिक उदाहरण पेश किया जिसने दिखा दिया कि आने वाले समय में युद्ध जीतने की असली ताकत थल सेना, नौसेना और वायुसेना की संयुक्त क्षमता होगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन ने एक यूनिफाइड रियल-टाइम ऑपरेशनल पिक्चर बनाकर कमांडरों को समय पर फैसला लेने, हालात की सही समझ बनाने और फ्रेंडली फायर जैसी घटनाओं से बचने में सक्षम बनाया।

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ऑपरेशन सिंदूर: जॉइंटनेस का असली चेहरा

नई दिल्ली के सब्रोतो पार्क में आयोजित वायुसेना की एक सेमिनार के दौरान राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब तीनों सेनाएं मिलकर काम करती हैं, तो परिणाम कितने निर्णायक होते हैं। उन्होंने बताया कि इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना का इंटीग्रेटेड एयर कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम (IACCS), भारतीय थल सेना के आकाशतीर सिस्टम और भारतीय नौसेना का त्रिगुण नेटवर्क एक साथ जुड़े। इन तीनों ने मिलकर एक Tri Services Jointness जॉइंट ऑपरेशनल बैकबोन तैयार किया, जिसने दुश्मन पर काबू पाने में अहम भूमिका निभाई। रक्षा मंत्री ने कहा कि भविष्य के युद्धों में यह जॉइंटनेस ही जीत की गारंटी बनेगी।

Tri Services Jointness Operation Sindoor
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing a seminar organised by the Indian Air Force at Subroto Park, New Delhi on September 30, 2025.

क्यों जरूरी है जॉइंटनेस?

राजनाथ सिंह ने कहा कि आज युद्ध का स्वरूप बदल चुका है। पारंपरिक खतरों के साथ-साथ अब हाइब्रिड थ्रेट्स, साइबर वॉरफेयर, स्पेस डोमेन और ड्रोन अटैक जैसी चुनौतियां सामने आ चुकी हैं। इन हालात में कोई भी सर्विस अकेले काम नहीं कर सकती। उन्होंने कहा, “जॉइंटनेस अब विकल्प नहीं बल्कि जरूरत है। यह राष्ट्रीय सुरक्षा और ऑपरेशनल इफेक्टिवनेस का मूल आधार है।”

उन्होंने यह भी जोड़ा कि थल, जल, नभ, अंतरिक्ष और साइबर, ये सभी आपस में जुड़े हुए डोमेन्स हैं और इन्हें अलग-अलग नहीं देखा जा सकता और Tri Services Jointness सेना के लिए अहम है।

रक्षा मंत्री ने याद दिलाया कि हाल ही में कोलकाता में आयोजित कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी तीनों सेनाओं के बीच इंटीग्रेशन पर जोर दिया था। यह सरकार की स्पष्ट प्राथमिकता है कि भारतीय सशस्त्र बल केवल परंपरा और मूल्यों में ही नहीं, बल्कि भविष्य के लिए तैयार टेक्नॉलॉजी और सिस्टम्स में भी दुनिया में अग्रणी बनें।

राजनाथ सिंह ने कहा, “हमारी सरकार का उद्देश्य सिर्फ नीति स्तर पर नहीं बल्कि जीवित रहने के सवाल के रूप में जॉइंटनेस को बढ़ावा देना है। सुरक्षा परिदृश्य इतनी तेजी से बदल रहा है कि यदि हम संयुक्त रूप से काम नहीं करेंगे तो खतरे और बड़े होंगे।”

डिजिटल पहलों की तरीफ

रक्षा मंत्री ने सेना, वायुसेना और नौसेना की डिजिटल पहलों की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि आर्मी का कंप्यूटराइज्ड इन्वेंट्री कंट्रोल ग्रुप (CICG), एयरफोर्स का इंटीग्रेटेड मैटेरियल्स मैनेजमेंट ऑनलााइन सिस्टम (IMMOLS) और नेवी का इंटीग्रेटेड लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट सिस्टम पहले ही लॉजिस्टिक्स को बदल चुके हैं।

उन्होंने यह भी ऐलान किया कि अब एक ट्राइ सर्विसेज लॉजिस्टिक्स एप्लीकेशन पर काम चल रहा है, जिससे तीनों सेनाओं के गुड्स और रिसोर्सेज एक साझा प्लेटफॉर्म पर ट्रैक होंगे। इससे फिजूलखर्ची कम होगी, क्रॉस-सर्विस रिसोर्सेज का इस्तेमाल बढ़ेगा और पारदर्शिता आएगी।

Tri Services Jointness Operation Sindoor-2
Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing a seminar organised by the Indian Air Force at Subroto Park, New Delhi on September 30, 2025.

परंपरागत बंदिशों को तोड़ने की जरूरत

राजनाथ सिंह ने कहा कि दशकों से हर सेवा ने अपने-अपने अनुभवों के आधार पर इंस्पेक्शन, ऑडिट और ऑपरेशनल प्रैक्टिसेज डेवलप की हैं। लेकिन यह ज्ञान अक्सर उसी सेवा तक सीमित रह गया।

उन्होंने कहा, “अगर आर्मी ने कोई नया सिस्टम डेवलप किया तो वह सिर्फ आर्मी तक रह गया। अगर नेवी या एयरफोर्स ने कुछ सीखा, तो वह भी उनके दायरे में ही रह गया। इस कम्पार्टमेंटलाइजेशन ने कीमती अनुभवों को साझा होने से रोका है। अब वक्त है कि हम इस दीवार को तोड़ें और सामूहिक सीख को अपनाएं।”

रक्षा मंत्री ने चेतावनी दी कि एविएशन सेफ्टी और साइबर वॉरफेयर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अगर स्टैंडर्ड्स में फर्क रहा तो यह घातक साबित हो सकता है। उन्होंने कहा कि किसी भी छोटी गलती का असर चेन-रिएक्शन की तरह होता है और अलग-अलग स्टैंडर्ड दुश्मन के लिए मौके पैदा कर सकते हैं।

साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि इंटीग्रेशन का मतलब यह नहीं कि हर जगह एक जैसा सिस्टम थोप दिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिमालय की ठंड और रेगिस्तान की गर्मी में अंतर है। इसी तरह, नौसेना की चुनौतियां थल सेना और वायुसेना से अलग हैं। इसलिए जरूरी है कि विशिष्टताओं को बनाए रखते हुए साझा न्यूनतम मानक बनाए जाएं।

मानसिकता में बदलाव सबसे अहम

राजनाथ सिंह ने कहा कि स्ट्रक्चरल रिफॉर्म्स से पहले ज्यादा जरूरी है कि सोच में बदलाव लाया जाए। उन्होंने सभी वरिष्ठ सैन्य नेताओं से अपील की कि वे लगातार अपने अधीनस्थों को जॉइंटनेस का महत्व समझाएं। उन्होंने स्वीकार किया कि यह बदलाव आसान नहीं होगा, क्योंकि दशकों की परंपराएं और आदतें बीच में आएंगी।

लेकिन उन्होंने विश्वास जताया कि संवाद, आपसी समझ और परंपराओं के सम्मान से इन चुनौतियों को पार किया जा सकता है। उन्होंने कहा, “हर सेवा को यह महसूस होना चाहिए कि दूसरी सेवाएँ उनकी चुनौतियों को समझती हैं। तभी हम नए सिस्टम मिलकर बना सकते हैं।”

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारतीय सेनाओं को लगातार अंतरराष्ट्रीय अनुभवों और बेस्ट प्रैक्टिसेज का अध्ययन करना चाहिए। लेकिन उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारत को अपने जवाब खुद ढूंढने होंगे।

उन्होंने कहा, “हम दूसरों से सीख सकते हैं, लेकिन हमारे समाधान भारतीय भूगोल, हमारी संस्कृति और हमारी जरूरतों के हिसाब से होने चाहिए। तभी हम स्थायी और भविष्य के लिए तैयार सिस्टम बना पाएंगे।”

राजनाथ सिंह ने भरोसा दिलाया कि सरकार तीनों सेनाओं और अन्य सुरक्षा संस्थाओं जैसे भारतीय तटरक्षक, बीएसएफ और डीजीसीए को भी इस रास्ते पर आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेगी।

उन्होंने कहा, “केवल तभी जब हमारी सेनाएं एक सुर में, तालमेल के साथ और पूर्ण समन्वय में काम करेंगी, तभी हम हर डोमेन में दुश्मन को मात दे पाएंगे और भारत को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। यह समय की मांग है और हमें इसे हासिल करना ही होगा।”

Rajnath Singh Celebrate Dussehra: भुज में जवानों के साथ दशहरा मनाएंगे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, देखेंगे संयुक्त सैन्य अभ्यास

Rajnath Singh Celebrate Dussehra

Rajnath Singh Celebrate Dussehra: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस साल दशहरा गुजरात के भुज मिलिट्री स्टेशन पर जवानों के साथ मनाएंगे। 1 और 2 अक्टूबर को होने वाली इस यात्रा में वे सैनिकों के साथ समय बिताएंगे, उनके साथ भोजन करेंगे, शस्त्र पूजा करेंगे और तीनों सेनाओं का संयुक्त अभ्यास भी देखेंगे। यह केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं बल्कि पश्चिमी सीमा पर तैनात सैनिकों का मनोबल बढ़ाने वाला कदम माना जा रहा है।

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पहले दिन: बड़ा खाना और जवानों से बातचीत

1 अक्टूबर को राजनाथ सिंह भुज कैंटोनमेंट पहुंचेंगे। यहां वे बड़ा खाना कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। यह सेना की पुरानी परंपरा है, जिसमें अधिकारी और जवान एक साथ भोजन करते हैं। यह आयोजन सैनिकों के बीच एकजुटता का प्रतीक है और अधिकारियों और जवानों के बीच समानता व पारस्परिक सम्मान का संदेश देता है।

रक्षा मंत्री इस मौके पर सैनिकों से उनकी समस्याएं और अनुभव भी सुनेंगे। सूत्रों के अनुसार, जवानों की सीधी बात सुनना और उनकी जरूरतों को समझना इस दौरे का अहम हिस्सा होगा।

Rajnath Singh Celebrate Dussehra
File Photo (PIB)

दूसरे दिन: शस्त्र पूजा और युद्धाभ्यास – Rajnath Singh Celebrate Dussehra

2 अक्टूबर को दशहरे के अवसर पर भुज मिलिट्री स्टेशन में शस्त्र पूजा की जाएगी। भारतीय सेना में विजयदशमी पर हथियारों की पूजा एक लंबे समय से चली आ रही परंपरा है। यह बुराई पर अच्छाई की जीत और योद्धा धर्म का प्रतीक है।

शस्त्र पूजा के बाद रक्षा मंत्री पाकिस्तान सीमा से लगे लक्की नाला क्षेत्र में होने वाले बड़े संयुक्त अभ्यास का निरीक्षण करेंगे। इस अभ्यास में भारतीय थल सेना, वायुसेना, नौसेना, तटरक्षक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां शामिल होंगी। इस दौरान सीमा पर तैनाती, हवाई ताकत, नौसैनिक सहयोग और आपसी तालमेल का प्रदर्शन किया जाएगा।

पश्चिमी सीमा की सुरक्षा का केंद्र है भुज

भुज मिलिट्री स्टेशन केवल एक सैन्य अड्डा नहीं बल्कि भारत की पश्चिमी सीमा की सुरक्षा का केंद्र है। यह पाकिस्तान से सटे इलाके में स्थित है और यहां से कई अहम ऑपरेशन ऑपरेट किए गए हैं।

विशेष रूप से ऑपरेशन सिंदूर में भुज की अहम भूमिका रही थी। इसके अलावा, हाल के वर्षों में पाकिस्तानी ड्रोन गतिविधियों की निगरानी और रोकथाम का काम भी यहीं से किया गया। इस वजह से रक्षा मंत्री का यह दौरा सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

Rajnath Singh Celebrate Dussehra भारत में विजयदशमी पर हथियारों की पूजा करने की परंपरा सदियों पुरानी है। यह न केवल धार्मिक आस्था बल्कि सैनिक संस्कृति का हिस्सा भी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पिछले कई सालों से यह त्योहार अग्रिम मोर्चों पर सैनिकों के साथ मना रहे हैं।

पिछले साल उन्होंने पश्चिम बंगाल के सुकना, दार्जिलिंग स्थित 33 कोर मुख्यालय में शस्त्र पूजा की थी। इस बार उनका भुज दौरा यह संदेश देगा कि सरकार सैनिकों के साथ खड़ी है और उनकी भूमिका को सम्मान देती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी हर साल सैनिकों के साथ दीवाली मनाते हैं और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह दशहरे पर जवानों से मिलते हैं और Rajnath Singh Celebrate Dussehra। इन परंपराओं ने सेना और सरकार के बीच भरोसे को और गहरा किया है।

Suru Autumn Carnival 2025: भारतीय सेना पहली बार कारगिल में आयोजित करेगी शरदोत्सव का आयोजन, 8 माउंटेन डिवीजन ने की पहल

Suru Autumn Carnival 2025

कारगिल की धरती पहली बार भारतीय सेना के रंगारंग और ऐतिहासिक आयोजन की गवाह बनने जा रही है। सुरु शरद उत्सव (Suru Autumn Carnival 2025) का आयोजन 1 और 2 अक्टूबर को खुम्बुथांग मिलिट्री स्टेशन पर किया जाएगा। इसे 8 माउंटेन डिवीजन की तरफ से आयोजित किया जा रहा है। यह पहला मौका है जब सेना इस तरह का उत्सव स्थानीय लोगों के साथ मनाएगी।

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इस कार्निवल का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं है। इसका मकसद युवाओं को रोजगार, शिक्षा और विकास से जोड़ना है और साथ ही सेना और नागरिकों के बीच भरोसे और भाईचारे को और गहरा करना है।

सेना और नागरिकों के बीच भरोसे का पुल

आयोजन की जानकारी देते हुए लेफ्टिनेंट कर्नल परमजीत सिंह ने लद्दाख ऑटोनॉमस हिल डेवलपमेंट काउंसिल (LAHDC) कारगिल के चेयरमैन और मुख्य कार्यकारी पार्षद डॉ. मोहम्मद जाफर अखून को औपचारिक निमंत्रण दिया।

डॉ. अखून ने सेना की इस पहल को ऐतिहासिक बताया और कहा कि यह आयोजन नागरिकों और सैनिकों के बीच विश्वास और सहयोग को और मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि यह कार्निवल स्थानीय लोगों के लिए एक साझा मंच बनेगा जहां विकास, संस्कृति और मनोरंजन साथ-साथ होंगे।

रोजगार और जागरूकता का केंद्र

इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत होगी युवाओं के लिए रोजगार और मार्गदर्शन केंद्र। यहां सेना और प्राइवेट सेक्टर में करियर के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही पर्यटन, उद्योग, बैंकिंग, हैंडलूम और हैंडीक्राफ्ट्स से जुड़े सरकारी विभाग अपने स्टॉल लगाएंगे। इन स्टॉल्स के जरिए युवाओं और स्थानीय लोगों को सरकारी योजनाओं और अवसरों के बारे में विस्तार से जानकारी मिलेगी।

मनोरंजन और परंपरा का भी पूरा ख्याल

सुरु ऑटम कार्निवल 2025 में मनोरंजन और परंपरा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। आयोजन में तीरंदाजी, पतंगबाजी, ड्रॉइंग प्रतियोगिताएं और एडवेंचर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियां होंगी। इसके अलावा, स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और सेना के जैज़ बैंड का प्रदर्शन भी होगा। इन कार्यक्रमों के जरिए कारगिल की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को एक नया मंच मिलेगा।

आयुर्वेद और औषधीय पौधों की देंगे जानकारी

इस ऐतिहासिक आयोजन से ठीक पहले लद्दाख में 10वां आयुर्वेद दिवस भी मनाया गया। 23 सितंबर को स्टेट मेडिसिनल प्लांट बोर्ड ने लेह के सरकारी हाई स्कूल (बॉयज) के बायोलॉजी छात्रों के लिए एक शैक्षणिक यात्रा आयोजित की।

छात्रों ने नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ सोवा रिग्पा के ट्रांस-हिमालयन हर्बल गार्डन और सीएसआईआर-आईआईआईएम पालम फार्म का दौरा किया। उन्हें औषधीय पौधों की पहचान, उनके वैज्ञानिक नाम और पारंपरिक चिकित्सा में उनके उपयोग के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।

सीएसआईआर-आईआईआईएम फार्म में छात्रों को आधुनिक खेती की तकनीकों और खासतौर पर केसर की खेती की ट्रेनिंग दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि किस तरह वैज्ञानिक तरीकों से खेती को और बेहतर बनाया जा सकता है। इसके अलावा हर्बेरियम प्रदर्शनी और चित्रों के जरिए छात्रों को लद्दाख की समृद्ध जैव विविधता से अवगत कराया गया।

सेना और जनता की साझेदारी का प्रतीक

सुरु ऑटम कार्निवल 2025 केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि सेना और जनता के बीच साझेदारी का प्रतीक है। यह आयोजन कारगिल के लोगों को विकास और अवसरों से जोड़ने का काम करेगा और साथ ही यह दिखाएगा कि भारतीय सेना केवल सीमाओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज के साथ मिलकर प्रगति और एकता की राह भी बनाती है।

HAL Restructuring: तेजस फाइटर जेट बनाने वाली कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में बड़े बदलाव की तैयारी में सरकार, कंसल्टिंग ग्रुप को सौंपी जिम्मेदारी!

HAL Restructuring: Government plans overhaul of Hindustan Aeronautics Limited to boost efficiency
Photo: HAL (File Image)

HAL Restructuring: भारत सरकार सार्वजनिक क्षेत्र की एयरोस्पेस दिग्गज कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड के स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव पर विचार कर रही है। इस बदलाव का उद्देश्य है कंपनी की कार्यक्षमता बढ़ाना और डिफेंस फोर्सेस को समय पर इक्विपमेंट्स उपलब्ध कराना। सूत्रों के अनुसार सरकार ने इसके लिए एक बाहरी कंसल्टिंग ग्रुप को जिम्मेदारी सौंपी है, जो एचएएल के मौजूदा स्ट्रक्चर और कामकाज की गहन समीक्षा कर रहा है।

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माना जा रहा है कि एचएएल के पास इस समय रिकॉर्ड स्तर का ऑर्डर बुक है, जिसकी कीमत करीब 2.7 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें फाइटर जेट्स, यूटिलिटी हेलीकॉप्टर, अटैक चॉपर और इंजन शामिल हैं। इसके अलावा आने वाले महीनों में और भी बड़े ऑर्डर मिलने की संभावना है। इतने बड़े स्तर पर पेंडिंग ऑर्डर एचएएल की क्षमता और डिलीवरी टाइमलाइन पर असर डाल सकते हैं।

सूत्रों का कहना है कि सरकार के सामने एक विकल्प यह है कि कंपनी को तीन अलग-अलग स्वतंत्र यूनिट्स में बांटा जाए। इनमें से एक यूनिट फिक्स्ड विंग एयरक्राफ्ट यानी फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट प्लेन निर्माण पर ध्यान दे, दूसरी यूनिट हेलीकॉप्टर मैन्युफैक्चरिंग पर फोकस करे, और तीसरी यूनिट मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सर्विसेज की एक्सपर्ट बने। हालांकि, इससे पहले भी ऐसा प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन तब कंपनी के पास इतने बड़े ऑर्डर नहीं थे, इसलिए योजना लागू नहीं हो पाई थी।

मौजूदा वक्त में एचएएल का ऑर्डर बुक उसकी सालाना आय से आठ गुना ज्यादा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी बड़ी जिम्मेदारी कंपनी की समय पर डिलीवरी क्षमता को कमजोर कर सकती है। क्योंकि पहले ही भारतीय वायुसेना के लिए बनाए जा जा रहे लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट तेजस की डिलिवरी पहले ही तय समय से काफी पीछे चल रही है। एयर फोर्स ने अपनी चिंताएं जताई हैं क्योंकि फाइटर स्क्वॉड्रन की संख्या लगातार घट रही है।

एचएएल पर दबाव केवल मौजूदा परियोजनाओं तक ही सीमित नहीं है। कंपनी को भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट एडवांस्ड मल्टीरोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) कार्यक्रम में भी सक्रिय भूमिका निभानी है। लेकिन वर्तमान में डिलीवरी में देरी और बड़े ऑर्डर बुक से इसकी भागीदारी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

सरकार की इस रिव्यू का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि एचएएल न केवल मौजूदा जरूरतें पूरी करे बल्कि भविष्य की डिफेंस जरूरतों को भी समय पर पूरा करे। इसके लिए इसके रीस्ट्रक्चरिंग को लेकर मंथन तेज हो गया है और टॉप मैनेजमेंट के साथ लगातार बातचीत की जा रही है।

इससे पहले पिछले महीने 22 अगस्त को रक्षा मामलों की संसदीय स्थायी समिति ने बेंगलुरु में हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड का दौरा किया था। दस सदस्यों वाली इस समिति की अगुवाई लोकसभा सांसद राधा मोहन सिंह ने की। समिति ने हेलिकॉप्टर डिवीजन, एलसीए तेजस डिवीजन और एयरक्राफ्ट डिवीजन का निरीक्षण किया और एचएएल की आधुनिकीकरण योजनाओं तथा स्वदेशी परियोजनाओं की प्रगति पर जानकारी ली थी। इस दौरान तेजस Mk-1A, हिंदुस्तान टर्बो ट्रेनर-40, यशस जेट ट्रेनर, ध्रुव एडवांस लाइट हेलिकॉप्टर, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर और हॉक-आई जैसे विमानों ने उड़ान भरी थी।

वहीं, इससे पहले, जुलाई में प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने एचएएल की सुविधाओं का दौरा कर तेजस Mk-2, एडवांस मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA), ‘प्रचंड’ लाइट कॉम्बैट हेलिकॉप्टर और गगनयान मिशन से जुड़ी तैयारियों का जायजा लिया था।

Ex-Servicemen Welfare: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पूर्व सैनिकों को बताया राष्ट्र की अमूल्य धरोहर, कहा- पेंशन, स्वास्थ्य संबंधी कई चुनौतियों का करते हैं सामना

Ex-Servicemen Welfare- Rajnath Singh calls veterans a national asset at National Conclave 2025

Ex-Servicemen Welfare: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि पूर्व सैनिक राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं, जिन्होंने न केवल वर्दी में रहकर देश की सेवा की बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी समाज में अपनी भूमिका निभाते रहे। उन्होंने कहा कि वेटरन्स का अनुशासन, नेतृत्व और रणनीतिक सोच समाज को दिशा देने और युवाओं को प्रेरित करने में अहम है। उन्होंने पूर्व सैनिकों के योगदान और उनके कल्याण को लेकर सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।

Rajnath Singh at CCC 2025: कंबाइंड कमांडर्स कॉन्फ्रेंस बोले रक्षा मंत्री- अदृश्य खतरों के लिए तैयार रहें सेना, युद्ध में जीत के लिए JAI है जरूरी

नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में आयोजित नेशनल कॉन्क्लेव 2025 में बोलते हुए राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एक्स-सर्विसमेन सामाजिक और आर्थिक पहलों के माध्यम से समुदायों और राष्ट्र को मजबूत बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वेटरन्स समाज में भरोसा, एकता और सहयोग की भावना को बढ़ावा देते हैं और यही समाज को स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है। दो दिवसीय यह कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत डिपार्टमेंट ऑफ एक्स-सर्विसमेन वेलफेयर (DESW) द्वारा आयोजित किया गया। इस वर्ष कॉन्क्लेव का विषय रखा गया था- “विकसित भारत और एक्स-सर्विसमेन वेलफेयर”।

अपने संबोधन में उन्होंने युवाओं को सही दिशा दिखाने और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने में वेटरन्स की भूमिका की सराहना की। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त सैनिकों का अनुभव और नेतृत्व क्षमता समाज को सकारात्मक दिशा देने में हमेशा सहायक साबित होता है।

रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि वेटरन्स सामुदायिक विकास और सामाजिक परियोजनाओं में अहम योगदान देते हैं। उन्होंने गांवों में तालाब या मंदिर बनाने जैसे सामूहिक प्रयासों का उदाहरण दिया और कहा कि पूर्व सैनिक लोगों को एकजुट कर सामाजिक परिवर्तन के वाहक बन सकते हैं।

Ex-Servicemen Welfare- Rajnath Singh calls veterans a national asset at National Conclave 2025
Glimpses of Raksha Mantri Shri Rajnath Singh addressing the National Conclave 2025 at Manekshaw Centre, New Delhi on September 29, 2025.

उन्होंने जोर देकर कहा कि कोलैबोरेटिव गवर्नेंस ही बड़े लक्ष्यों को हासिल करने का रास्ता है। जीएसटी, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत योजना और कोविड-19 टीकाकरण जैसे अभियानों की सफलता इसी का प्रमाण है। इसी तरह यदि वेटरन्स वेलफेयर में केंद्र और राज्यों का सहयोग बढ़ाया जाए तो नतीजे और बेहतर हो सकते हैं।

रक्षा मंत्री ने वेटरन्स की उद्यमशीलता और सामाजिक योगदान की भी प्रशंसा की। उन्होंने कहा, “वंस अ सोल्जर, आलवेज ए सोल्जर” का मंत्र वेटरन्स ने सच कर दिखाया है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वेटरन्स को पेंशन, स्वास्थ्य सुविधाओं और रोजगार से जुड़ी कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। इन समस्याओं के समाधान के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, जिनमें स्मार्ट कैंटीन कार्ड्स, ऑनलाइन ईएसएम, आईडी कार्ड्स, डीजीआर सेवाओं की डिजिटल पहुंच और स्पर्श पोर्टल शामिल हैं। इनसे प्रशासनिक प्रक्रियाएं सरल होंगी और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

कार्यक्रम में डिपार्टमेंट ऑफ एक्स-सर्विसमेन वेलफेयर के सचिव नितेन चंद्र ने विभिन्न राज्यों और जिलों के सै‍निक बोर्ड्स की प्रस्तुतियों का स्वागत किया और कहा कि यह चर्चा भविष्य की नीतियों को आकार देने में मदद करेगी। इस मौके पर पूर्व सैनिकों की प्रेरणादायक कहानियों पर बनी एक फिल्म दिखाई गई, उत्कृष्ट योगदान देने वाले सैनिक बोर्ड्स और वेटरन्स को सम्मानित किया गया और नई गाइडबुक्स भी जारी की गईं।

कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी, वित्तीय सलाहकार डॉ. मयंक शर्मा समेत रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

Future Wars: हाइब्रिड थ्रेट्स और ड्रोन वारफेयर से निपटने को तैयार हो रही भारतीय इन्फैंट्री, मॉर्डनाइजेशन में केवल हथियारों का अपग्रेडेशन काफी नहीं

Future Wars: Field Marshal KM Cariappa Memorial Seminar

Future Wars: लखनऊ में आयोजित एक सेमिनार में डायरेक्टर जनरल ऑफ इन्फैंट्री लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने कहा कि इन्फैंट्री को आधुनिक बनाने की दिशा में केवल हथियारों का अपग्रेडेशन काफी नहीं है। इसके लिए नई तकनीकों का समावेश, थ्योरीज का रिफाइनमेंट और हर स्तर पर ऑपरेशनल रेडीनेस को बढ़ाना जरूरी है। सेमिनार में इस पर भी जोर दिया गया आधुनिक युद्ध केवल बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं रह गए हैं। बल्कि आज हाइब्रिड थ्रेट्स, ड्रोन वारफेयर, साइबर कॉन्फ्लिक्ट और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स युद्ध की नई हकीकत हैं।

Ran Samwad 2025 Training Reforms: भारतीय सेना में बड़े बदलाव की तैयारी, अब ट्रेनिंग में ड्रोन और साइबर वॉरफेयर होंगे शामिल

29 सितंबर 2025 को लखनऊ स्थित मुख्यालय सेंट्रल कमांड में फील्ड मार्शल केएम करियप्पा मेमोरियल सेमिनार का आयोजन किया गया। यह आयोजन डायरेक्टरेट जनरल ऑफ इन्फैंट्री और सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज (CLAWS) के सहयोग से हुआ। कार्यक्रम का मुख्य विषय था – “मॉडर्नाइजेशन ऑफ इन्फैंट्री सोल्जर टू फाइट कंटपरेरी एंड फ्यूचर वॉर्स”। इसमें स्वतंत्र भारत के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल केएम करिअप्पा की स्मृति को नमन करते हुए भारतीय इन्फैंट्री को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने की रणनीति पर मंथन किया गया।

कार्यक्रम का उद्घाटन डायरेक्टर जनरल ऑफ इन्फैंट्री लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार ने किया। उन्होंने कहा कि इन्फैंट्री को आधुनिक बनाने की दिशा में केवल हथियारों का अपग्रेडेशन काफी नहीं है। उनका जोर इस बात पर था कि नई तकनीकों को अपनाने, सिद्धांतों में बदलाव लाने और हर स्तर पर कॉम्बैट रेडीनेस को बेहतर करने की आवश्यकता है।

सेंट्रल कमांड के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने कहा कि इन्फैंट्री का आधुनिकीकरण कोई विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता है। सेनगुप्ता ने सैनिकों की फुर्ती, अनुकूलन क्षमता और तकनीक-आधारित ट्रेनिंग को भविष्य के जटिल युद्धों में जीत का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सेना, शिक्षा जगत और उद्योग को मिलकर काम करना होगा ताकि इन्फैंट्री को हाइब्रिड थ्रेट्स, ड्रोन वारफेयर, साइबर कॉन्फ्लिक्ट और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स जैसी चुनौतियों के लिए तैयार किया जा सके। सेनगुप्ता ने सैनिकों में फुर्ती, अनुकूलन क्षमता और टेक्नोलॉजी-आधारित ट्रेनिंग को आवश्यक बताया। उनका कहना था कि बदलते युद्धक्षेत्र में केवल हथियार नहीं, बल्कि सैनिकों का माइंडसेट भी आधुनिक होना चाहिए।

Future Wars- Field Marshal KM Cariappa Memorial Seminar

सेमिनार में विशेषज्ञों ने आधुनिक युद्ध की बदलती तस्वीर पर जोर दिया। मेजर जनरल विवेक सेहगल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर ने पारंपरिक रणनीतियों को अप्रासंगिक बना दिया है। मेजर जनरल पंकज सक्सेना (सेवानिवृत्त) ने बताया कि यूएएस और काउंटर-ड्रोन तकनीक युद्ध की दिशा तय कर रही हैं। वहीं, सेमिनार में लेफ्टिनेंट जनरल डी.पी. पांडे (सेवानिवृत्त) ने कहा कि भारतीय इन्फैंट्री को केवल पैदल सैनिक के तौर पर नहीं देखा जा सकता। अब उसे तकनीकी रूप से प्रशिक्षित, अनुकूलनशील और बहु-क्षेत्रीय ऑपरेशन्स में सक्षम बनाना होगा।

मेजर जनरल विवेक सेहगल (सेवानिवृत्त) ने कहा कि युद्धक्षेत्र लगातार बदल रहा है। ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर जैसे नए खतरों ने पारंपरिक रणनीतियों को अप्रासंगिक बना दिया है। उन्होंने कहा कि भारत को आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ते हुए स्वदेशी तकनीकों का इस्तेमाल करना होगा। इससे न केवल भारतीय सेना की क्षमताएँ बढ़ेंगी बल्कि विदेशी सप्लाई चेन पर निर्भरता भी कम होगी।

सेमिनार के समापन पर सेंट्रल कमांड के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल नवीन सचदेवा ने कहा कि इन्फैंट्री का आधुनिकीकरण केवल हथियारों तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसके लिए डेटा-आधारित फैसले, रियलिस्टिक ट्रेनिंग और उद्योग-शैक्षणिक संस्थानों के साथ साझेदारी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सेना को ऐसी यूनिट्स तैयार करनी होंगी जो हर क्षेत्र में बिना रुकावट और तेजी से काम कर सकें।

सेमिनार में लगातार इस बात पर जोर दिया गया कि आधुनिक युद्ध केवल बंदूक और टैंक तक सीमित नहीं रह गए हैं। आज हाइब्रिड थ्रेट्स, ड्रोन वारफेयर, साइबर कॉन्फ्लिक्ट और मल्टी-डोमेन ऑपरेशन्स युद्ध की नई हकीकत हैं। इन हालात में भारतीय इन्फैंट्री को केवल उपकरणों से ही नहीं बल्कि मानसिकता और प्रशिक्षण के स्तर पर भी आधुनिक बनाना होगा।

Kenya Navy Commander India Visit: भारत यात्रा पर केन्या नेवी कमांडर, भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी से की मुलाकात

Kenya Navy Commander India Visit

Kenya Navy Commander India Visit: केन्या नेवी के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओवुओर ओटिएनो इन दिनों भारत यात्रा पर हैं। सोमवार को मेजर जनरल ओटिएनो ने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश त्रिपाठी से मुलाकात की। इस अवसर पर उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर प्रदान किया गया। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच समुद्री सहयोग से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा हुई, जिनमें ऑपरेशनल एंगेजमेंट, प्रशिक्षण, हाइड्रोग्राफिक सहयोग और मल्टीलेचरल एक्सरसाइज शामिल थे। इसके अलावा, दोनों देशों के बीच ‘बहारी’ मैरिटाइम विजन को भी मजबूत करने पर सहमति बनी।

Navy Chief Sri Lanka Visit: श्रीलंका की पीएम से मिले नेवी चीफ, संयुक्त अभ्यास में और ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाएंगी दोनों देशों की नौसेनाएं

28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2025 तक भारत की आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे केन्या नेवी के कमांडर मेजर जनरल पॉल ओवुओर ओटिएनो ने नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल पर शहीद सैनिकों को पुष्पांजलि अर्पित की। उनकी इस यात्रा का उद्देश्य भारत और केन्या के बीच नौसैनिक सहयोग और द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करना है।

अपने इस दौरे के दौरान मेजर जनरल ओटिएनो गुरुग्राम स्थित इंफॉर्मेशन फ्यूजन सेंटर–इंडियन ओशन रीजन का दौरा करेंगे। इसके अलावा, वे भारतीय नौसेना के सदर्न नेवल कमांड, कोच्चि में मौजूद प्रशिक्षण केंद्रों का भी निरीक्षण करेंगे। इस दौरे का उद्देश्य प्रशिक्षण सहयोग को गहराना और भविष्य में साझा अभ्यासों को और व्यापक बनाना है।

केन्या नौसेना को भारतीय महासागर क्षेत्र में एक अहम साझेदार माना जाता है। उसने लगातार एक्सरसाइज AIKEYME, इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS), गोवा मैरिटाइम कॉन्क्लेव और जिबूती कोड ऑफ कंडक्ट–जेद्दा अमेंडमेंट (DCoC-JA) जैसे मंचों में सक्रिय भागीदारी की है। इस यात्रा से दोनों देशों की साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत-केन्या नौसैनिक संबंधों की झलक उस समय भी देखने को मिली जब भारतीय नौसेना के पहले प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के जहाज आईएनएस तीर, आईएनएस सुजाता, आईएनएस शार्दुल और आईसीजीएस सारथी ने केन्या के मोंबासा बंदरगाह का दौरा किया। इस दौरान द्विपक्षीय समुद्री सहयोग और गहरा हुआ।

भारत और केन्या के बीच ‘BAHARI Maritime Vision’ साझेदारी का एक अहम हिस्सा है। इसका उद्देश्य समुद्री क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाना और भारतीय महासागर क्षेत्र में साझा सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मेजर जनरल ओटिएनो की यह यात्रा इस विजन को आगे बढ़ाने में मील का पत्थर साबित हो रही है।

Ladakh Protest: सज्जाद कारगिली बोले, लद्दाख के लोगों को ‘देश विरोधी’ बताकर दबाना गलत, लेह एपेक्स बॉडी का केंद्र से बातचीत से इंकार

Ladakh Protest: Sajjad Kargili Ladakh:
Atul Sati and Sajjad Kargili on Sonam Wangchuk arrest

Ladakh Protest: लद्दाख की राजनीति और आंदोलन इस समय राष्ट्रीय सुर्खियों में है। कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस और लेह एपेक्स बॉडी ने संयुक्त रूप से आंदोलन का नेतृत्व करते हुए केंद्र सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि लद्दाख की जनता की संवैधानिक मांगों को नजरअंदाज कर सरकार उन्हें “अलग-थलग” करने की कोशिश कर रही है। वहीं, उत्तराखंड की जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के संयोजक अतुल सती ने कहा कि 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती पर राष्ट्रव्यापी बंद का आह्वान किया है। यह बंद पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और उनके साथियों की तत्काल और बिना शर्त रिहाई की मांग को लेकर किया जा रहा है।

Nyoma Airstrip in Eastern Ladakh: एलएसी पर चीन को टक्कर देने की तैयारी, अक्टूबर तक न्योमा एयरस्ट्रिप पर लैंड कर सकेंगे मिग-29 और सुखोई-30 फाइटर जेट

24 सितंबर को लेह में हुए प्रदर्शन पर गोलीबारी, चार नागरिकों की मौत और 80 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद हालात और बिगड़ गए हैं। इसी के साथ प्रसिद्ध पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत गिरफ्तार कर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के वरिष्ठ नेता सज्जाद कारगिली ने कहा कि सोनम वांगचुक और अन्य युवाओं की तुरंत और बिना शर्त रिहाई होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार और लद्दाख की यूनियन टेरिटरी एडमिनिस्ट्रेशन ने हालात को संभालने में पूरी तरह असफल साबित हुए हैं।

कारगिली ने कहा, “जो गोलीबारी हुई, जिन लोगों की जान गई और जो घायल हुए, उसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। यह घटना इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि लद्दाख में लोकतंत्र क्यों जरूरी है।” उन्होंने सवाल उठाया कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया भर में कहते हैं कि लोकतंत्र भारतीय डीएनए में है, तो लद्दाखियों को यह लोकतांत्रिक अधिकार क्यों नहीं दिया जा रहा।

कारगिली ने स्वीकार किया कि सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी ने लद्दाख के मुद्दों को पूरे देश में सामने ला दिया है। उन्होंने कहा, “बहुत कम लोग लद्दाख के संघर्ष को जानते थे। लेकिन अब वांगचुक की गिरफ्तारी के बाद यह आंदोलन हर घर में चर्चा का विषय बन गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि अब यह विरोध सिर्फ लद्दाख तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों में लोग आवाज उठाएंगे।

लेह एपेक्स बॉडी का केंद्र से बातचीत से इंकार

लेह एपेक्स बॉडी ने साफ कहा है कि जब तक शांति बहाल नहीं होती और न्यायिक जांच की घोषणा नहीं होती, वे केंद्र सरकार से बातचीत में हिस्सा नहीं लेंगे। लेह एपेक्स बॉडी के अध्यक्ष थुपस्तान छेवांग ने कहा, “लद्दाखियों को ‘देश विरोधी’ बताना और पाकिस्तान से जोड़ना बेहद शर्मनाक है। हम तब तक बातचीत नहीं करेंगे जब तक केंद्र माफी नहीं मांगता और गोलीबारी की न्यायिक जांच का आदेश नहीं देता।”

सज्जाद कारगिली ने कहा कि लद्दाख बेहद संवेदनशील इलाका है। एक ओर चीन के साथ एलएसी है और दूसरी ओर पाकिस्तान के साथ एलओसी। ऐसे में लद्दाख की जनता को लोकतंत्र से वंचित करना खतरनाक है। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत के अन्य राज्यों में संघीय ढांचा लागू है, उसी तरह लद्दाख में भी लोकतंत्र की बुनियाद रखी जानी चाहिए।

सज्जाद कारगिली ने याद दिलाया कि लद्दाख का आंदोलन हमेशा शांतिपूर्ण रहा है। चाहे दिल्ली बॉर्डर पर गिरफ्तारी हो या माइनस डिग्री में लेह की सड़कों पर प्रदर्शन, जनता ने लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखी है। लेकिन हर बार सरकार ने तब ही बातचीत की है जब आंदोलन ने जोर पकड़ा।

उन्होंने कहा, “हमारी चुप्पी में कभी कोई अधिकारी हाल पूछने नहीं आता। जब हम आवाज उठाते हैं और लोग सड़कों पर उतरते हैं, तभी बैठकें तय होती हैं। यह दर्शाता है कि सरकार जनता के दबाव में ही बात करती है।”

24 सितंबर को हुई हिंसा पर सवाल उठाते हुए कारगिली ने कहा कि प्रशासन के पास पहले से जानकारी थी कि हालात बिगड़ सकते हैं, लेकिन कोई तैयारी नहीं की गई। न तो बैरिकेडिंग की गई, न ही वाटर कैनन लगाए गए। सीधे गोलीबारी क्यों की गई?

कारगिली ने इसे 2019 में अनुच्छेद 370 हटाने से जोड़ा। उन्होंने कहा, “जब कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटाया गया, तब सरकार ने पूरा इलाका सील कर दिया था। अगर लद्दाख में भी जानकारी थी, तो पहले से एहतियाती कदम क्यों नहीं उठाए गए?”

उन्होंने कहा कि इस घटना के बाद लद्दाख के लोग पहले से ज्यादा आहत महसूस कर रहे हैं। उनका कहना है कि उन्हें हमेशा देश की रक्षा के लिए सीमा पर खड़ा किया गया, कारगिल युद्ध हो या गलवान घाटी का संघर्ष, लद्दाखियों ने अपनी शहादत दी। लेकिन अब उन्हें “देश विरोधी” बताना गलत है।

सज्जाद कारगिली ने देश के सामने चार मुख्य मांगें रखी हैं। इनमें पहली मांग है – लद्दाख को राज्य का दर्जा दिया जाए। उनका कहना है कि केंद्रशासित प्रदेश बनने के बाद लद्दाख की जनता को लोकतांत्रिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया है। यहां नौकरशाह केंद्र सरकार से नियुक्त होते हैं और लोगों की आवाज को दरकिनार किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि लद्दाख की दूसरी बड़ी मांग है छठी अनुसूची में शामिल किया जाना। यह मांग 2019 के लोकसभा चुनाव और 2020 के लेह हिल काउंसिल चुनाव में भाजपा ने भी वादा किया था। सज्जाद कारगिली ने कहा कि 90 फीसदी से ज्यादा आबादी आदिवासी है और जलवायु परिवर्तन के खतरों से यह क्षेत्र बेहद संवेदनशील है। छठी अनुसूची से ही यहां की सांस्कृतिक पहचान, जमीन और पर्यावरण की सुरक्षा सुनिश्चित हो पाएगी।

तीसरी मांग को लेकर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लद्दाख के युवाओं के लिए सबसे अहम मुद्दा रोजगार है। पिछले छह साल में लद्दाख को न तो पब्लिक सर्विस कमीशन मिला, न ही किसी भी तरह की भर्ती हुई। प्रशासनिक और पुलिस सेवाओं में एक भी स्थानीय युवक की भर्ती न होना बड़ी चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी से युवाओं में आक्रोश और निराशा बढ़ रही है।

चौथी मांग रखते हुए सज्जाद कारगिली ने कहा कि लद्दाख देश का सबसे बड़ा संसदीय क्षेत्र है। सज्जाद कारगिली ने बताया कि यह इलाका जम्मू-कश्मीर से भी तीन गुना बड़ा है। इसलिए लेह और कारगिल को अलग-अलग प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। उनका कहना है कि एक सांसद पूरे क्षेत्र की सही तरह से देखभाल नहीं कर सकता।

सज्जाद कारगिली ने कहा कि पिछले तीन साल से लद्दाख की जनता सर्दियों की बर्फीली रातों से लेकर दिल्ली की गर्म सड़कों तक शांतिपूर्ण विरोध कर रही है। लद्दाख का आंदोलन पूरी तरह अहिंसक और लोकतांत्रिक रहा है। लेह, जम्मू, दिल्ली और अन्य जगहों पर प्रदर्शन हुए। यहां तक कि माइनस डिग्री तापमान में भी लोग अपने अधिकारों की मांग के लिए जुटे रहे।

सज्जाद कारगिली ने लद्दाख के इकोसिस्टम पर भी बात की। उन्होंने कहा कि लद्दाख का मुद्दा केवल लोकतंत्र का नहीं, बल्कि जलवायु संकट से भी जुड़ा हुआ है। 2025 की मानसून आपदाओं में उत्तरकाशी, मंडी, जोशीमठ, लद्दाख और सिक्किम जैसे इलाकों में भूस्खलन और बाढ़ की तबाही हुई। यह सिर्फ प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि लापरवाह विकास मॉडल और जंगलों की कटाई का नतीजा है। उन्होंने कहा कि चारधाम रोड प्रोजेक्ट जैसी योजनाओं ने पहाड़ों की नाजुक संरचना को और कमजोर किया है। पर्यावरणीय सुरक्षा जैसे कानूनों को कमजोर करने से हिमालयी क्षेत्र पर आपदा का खतरा बढ़ गया है।