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IAF Inflatable Decoys: भारतीय वायुसेना क्यों खरीद रही हवा से फुलाने वाले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम? ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को दिया था चकमा

भारतीय वायुसेना 400 इन्फ्लेटेबल डिकॉय खरीदने जा रही है, जो फाइटर जेट और S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की नकल होंगे। ऑपरेशन सिंदूर में ऐसे ही डिकॉय का इस्तेमाल कर पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को गुमराह किया गया था...

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📍नई दिल्ली | 14 Sep, 2025, 2:07 PM

IAF Inflatable Decoys: भारतीय वायुसेना अपनी वॉर स्ट्रेटेजी में लगातार बदलाव कर रही है। वायुसेना ने हाल ही में 400 इन्फ्लेटेबल डिकॉय खरीदने का फैसला किया है। हवा से फुलाने वाले ये डिकॉय असली फाइटर जेट और S-400 ट्रायंफ एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हथियारों की हूबहू नकल हैं। इसका मकसद दुश्मन देशों को भ्रम में रख कर अपने असली एसेट्स की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह खरीद इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि मई 2025 में हुए ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायुसेना ने डिकॉय टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को चकमा दिया था।

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IAF Inflatable Decoys: ऑपरेशन सिंदूर में इस्तेमाल किए थे डिकॉय

22 अप्रैल 2025 को पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर ऑपरेशन सिंदूर चलाया। इस जवाबी कार्रवाई में वायुसेना ने कई नई रणनीतियों का इस्तेमाल किया। इनमें सबसे अहम था डिकॉय सिस्टम। इस ऑपरेशन में भारतीय वायुसेना ने पहली बार बड़े पैमाने पर डिकॉय सिस्टम का इस्तेमाल किया।

शुरुआती चरण में डिकॉय ड्रोन, डमी जेट्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पेलोड्स को उड़ाए थे, जिससे पाकिस्तानी रडार कवरेज सैचुरेटेड हो कर कन्फ्यूज हो गया। ये ड्रोन दुश्मन की रडार स्क्रीन पर असली लड़ाकू विमान जैसे दिख रहे थे। इससे उनका एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गया और उन्होंने समय से पहले मिसाइलें दाग दीं। जिसके चलते इसी प्रक्रिया ने उनकी लोकेशन का पता भारतीय वायुसेना को दे दिया।

असल में पाकिस्तान ने चीनी HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को एक नई जगह पर तैनात कर दिया था, जिसका भारत को पता नहीं था। डमी जेट विमानों के जरिए भारत को HQ-9 एडी की नई लोकेशन का पता लग गया। जिससे भारत को रडार व एयर डिफेंस सिस्टम पर हमला करने में मदद मिली। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने इजरायल निर्मित हारोप लूटरिंग म्यूनिशंस और ब्रह्मोस मिसाइलों से इन लक्ष्यों पर हमला किया।

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वायुसेना ने इसके लिए पायलटलेस टारगेट एयरक्राफ्ट (PTA) का इस्तेमाल किया। इन्हें इस तरह तैयार किया गया था कि वे पाकिस्तानी रडार पर Su-30 और MiG-29 जैसे फाइटर जेट्स दिखाई दें। नतीजा यह हुआ कि पाकिस्तान के रडार और एयर डिफेंस सिस्टम भ्रमित हो गए और असली हमले से पहले ही पाकिस्तान की एयर डिफेंस की लोकेशन पता लग गई।

IAF Inflatable Decoys: राफेल पर लगाया था ये खास ‘चकमा’ सिस्टम

इस ऑपरेशन में राफेल फाइटर जेट्स पर लगे X-Guard सिस्टम ने भी अहम भूमिका निभाई। यह एक AI-पावर्ड टोअड डिकॉय (AI-powered Towed Decoy) था, जिसका वजन लगभग 30 किलो होता है। यह सिस्टम दुश्मन की PL-15E एयर-टू-एयर मिसाइलों और J-10C फाइटर जेट्स को चकमा देने में कामयाब रहा। X-Guard दुश्मन के रडार सिग्नल को कॉपी कर देता है, जिससे दुश्मन को लगता है कि उसने असली जेट को निशाना बनाया है। इस दौरान असली राफेल सुरक्षित रहते हुए अपने मिशन को अंजाम देते रहे और आतंकियों के ठिकानों को टरगेट बनाते रहे।

IAF Inflatable Decoys: ब्रह्मोस हमलों से पहले उड़ाए डमी एयरक्राफ्ट

सूत्रों के मुताबिक ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलों के हमले से पहले भी डमी एयरक्राफ्ट का इस्तेमाल किया गया था। डिकॉय के इस्तेमाल से पाकिस्तान का एयर डिफेंस सिस्टम बार-बार एक्टिव होता रहा। जब उनके रडार ने भारतीय विमानों को आते देखा, तो उन्होंने HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया। लेकिन वास्तव में वे डमी टारगेट थे।

9-10 मई 2025 की रात भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के 12 में से 11 बड़े एयरबेस पर हमले किए। इन हमलों में लगभग 15 ब्रह्मोस मिसाइलें दागी गईं। इसके साथ ही स्कैल्प, रैम्पेज और क्रिस्टल मेज जैसी लंबी दूरी की मिसाइलें भी इस्तेमाल हुईं।

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इन हमलों का मकसद पाकिस्तानी वायुसेना को पूरी तरह नष्ट करना नहीं था, बल्कि उनके एयरबेस को निष्क्रिय करना और उनकी विमान तैनाती क्षमता को सीमित करना था।

इन हमलों में पाकिस्तान ने न केवल अपने एयरबेस का बड़ा हिस्सा खोया, बल्कि खबरों के मुताबिक एक AWACS (Airborne Warning and Control System) विमान और कई लंबे समय तक उड़ान भरने वाले UAV भी नष्ट हुए।

IAF Inflatable Decoys: 400 नए इन्फ्लेटेबल डिकॉय

अब भारतीय वायुसेना 400 नए इन्फ्लेटेबल डिकॉय खरीदने जा रही है। ये डिकॉय न केवल फाइटर जेट्स बल्कि S-400 जैसे एयर डिफेंस सिस्टम की भी हूबहू नकल कर सकते हैं। इससे दुश्मन की इंटेलिजेंस सर्विलांस और ड्रोन जासूसी नेटवर्क को चकमा दिया जा सकेगा। इससे दुश्मन वास्तविक और डमी टारगेट्स में फर्क नहीं कर पाएगा, जिससे अहम हथियार की सुरक्षा में इजाफा होगा।

भारतीय वायुसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये डिकॉय सर्विलांस या स्ट्राइक मिशन्स के दौरान दुश्मन के लिए वास्तविक और नकली एसेट्स के बीच अंतर करना मुश्किल बना देंगे। इससे दुश्मन की रडार प्रणाली कन्फ्यूज होगी और वास्तविक मिलिट्री एसेट्स की सुरक्षा बढ़ेगी।

रिटायर्ड कर्नल अनिल राणा के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर ने यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध केवल गोलियों और मिसाइलों से नहीं जीता जाता, बल्कि दुश्मन को धोखे में रखना (Deception Tactics) भी अहम रणनीति है। ऑपरेशन सिंदूर में हमने डिकॉय का इस्तेमाल करके भारत ने न केवल पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम को नाकाम किया, बल्कि अपने विमानों और पायलटों को भी सुरक्षित रखा।

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उनका कहना है कि S-400 जैसे दिखने वाले ये नए इन्फ्लेटेबल डिकॉय भारत की सैन्य क्षमताओं में बढ़ोतरी करेंगे। इनके इस्तेमाल से भारत अपने एयर डिफेंस को और मजबूत कर सकेगा और भविष्य में होने वाली जंगों में दुश्मनों को चकमा देने में मदद मिलेगी।

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  • IAF Inflatable Decoys: भारतीय वायुसेना क्यों खरीद रही हवा से फुलाने वाले S-400 एयर डिफेंस सिस्टम? ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को दिया था चकमा

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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