📍नई दिल्ली | 12 Aug, 2025, 2:59 PM
Tejas Mk1A Engines: भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सौदों को लेकर बातचीत तेज हो गई है। भारत की कोशिश है कि तेजस एमके-1ए लड़ाकू विमानों के लिए एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) की डिलीवरी को तेज किया जाए। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक ने अब तक दो इंजन भारत को दिए हैं। जबकि तीसरा इंजन अगस्त 2025 में भारत पहुंचेगा। यह डिलीवरी एक साल से ज्यादा की देरी के बाद हुई है। सूत्रों के अनुसार, जीई ने सितंबर तक हर महीने एक इंजन और अक्टूबर से हर महीने दो इंजन देने का वादा किया है।
सूत्रों के अनुसार, जीई ने वादा किया है कि वह हर महीने एक इंजन देगी और अक्टूबर 2025 से हर महीने दो इंजन देना शुरू करेगी। भारत ने तेजस एमके-1ए के लिए 99 एफ404 इंजनों (Tejas Mk1A Engines) का पहला ऑर्डर दिया था। अब 97 और तेजस विमानों के लिए अतिरिक्त इंजनों का ऑर्डर देने की बातचीत चल रही है। इन विमानों की खरीद को रक्षा मंत्रालय पहले ही मंजूरी दे चुका है। यह सौदा अगस्त 2025 के अंत तक पूरा हो सकता है।
इसके साथ ही, अमेरिका से एफ-414 इंजन की खरीद पर भी बातचीत जारी है, जो भारत में बनने वाले एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) और तेजस एमके-2 लड़ाकू विमानों के लिए इस्तेमाल होंगे। ये दोनों विमान भारत में बनाए जा रहे हैं। इस सौदे की तकनीकी बातचीत पूरी हो चुकी है, लेकिन अंतिम समझौता होने में कुछ महीने और लग सकते हैं।
✈️ DGAQA has granted flight clearance to the indigenously built LCA Tejas Mk1A from HAL’s Nashik Division. 🚀
Nashik has now become the third LCA production hub outside Bengaluru, boosting decentralisation in aircraft manufacturing and strengthening India’s strategic aerospace… pic.twitter.com/e76zb87paI— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) August 11, 2025
कुछ खबरों में दावा किया गया था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत पर 50 फीसदी टैरिफ बढ़ाने के बाद भारत ने अमेरिका से रक्षा सौदों को रोक दिया है। लेकिन रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने इन खबरों को गलत और मनगढ़ंत बताया। उन्होंने कहा कि अमेरिका के साथ किसी भी रक्षा सौदे को रद्द करने का कोई फैसला नहीं लिया गया है और रक्षा खरीद की मौजूदा प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं हुआ है।
अगले महीने अमेरिका से एक टीम भारत आएगी। यह टीम रक्षा सौदों पर आगे की बातचीत करेगी। सूत्रों ने बताया कि भारतीय नौसेना के लिए छह और पी-8आई विमानों की खरीद पर भी चर्चा जारी है। इन विमानों का इस्तेमाल समुद्री निगरानी और एंटी-सबमरीन वॉरफेयर के लिए होता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ बढ़ाने का इन सौदों पर कोई असर नहीं पड़ा है।
सूत्रों ने बताया कि तेजस कार्यक्रम के अलावा, भारत मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) की खरीद पर भी विचार कर रहा है। इसकी घोषणा जल्द हो सकती है। भारतीय वायुसेना के पुराने मिग विमानों के रिटायर होने के कारण वायुसेना की ताकत 29 स्क्वाड्रनों तक घट हो सकती है। जबकि वायुसेना को कम से कम 42 स्क्वाड्रनों की जरूरत है। इस कमी को पूरा करने के लिए विदेशी लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार किया जा रहा है।
भारत की आत्मनिर्भर भारत पहल का मकसद स्वदेशी लड़ाकू विमानों को बढ़ावा देना है। लेकिन जरूरत पड़ने पर विदेशी विमानों की खरीद भी एक विकल्प है। भारतीय वायुसेना और नौसेना पहले से ही राफेल विमानों का इस्तेमाल कर रही हैं। सूत्रों के मुताबिक, वायुसेना ने एमआरएफए कार्यक्रम के लिए राफेल को ही सुझाया है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय रूस के एसयू-35, अमेरिकी और स्वीडिश विमानों जैसे अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। वहीं, अमेरिका के पांचवी पीढ़ी के एफ-35 विमानों में भारत की कोई रुचि नहीं है। यह विमान दुनिया के सबसे एडवांस स्टील्थ फाइटर जेट्स में से एक है, लेकिन भारत की प्राथमिकता स्वदेशी विमानों और तकनीक पर है।
हाल ही में हुए ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने अपनी रक्षा तैयारियों को और तेज कर दिया है। अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने यह ऑपरेशन शुरू किया था। इस हमले में 26 लोग मारे गए थे। इसके बाद 6-7 मई की रात को भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पीओके में नौ आतंकी ठिकानों पर हमला किया।
इस ऑपरेशन में भारत ने ड्रोन और स्वदेशी मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इन हमलों में कोई आम नागरिक हताहत नहीं हुआ। पाकिस्तान ने जवाब में ड्रोन और मिसाइल हमले किए, लेकिन भारत के एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम ने इन्हें नाकाम कर दिया। जिसके बाद 10 मई को पाकिस्तान की पहल पर दोनों देशों के बीच सीजफायर का एलान हुआ।