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Explained: यूक्रेन का Operation Spider Web क्यों है भारत के लिए बड़ा सबक? पढ़ें ‘ट्रोजन हॉर्स’ अटैक की पूरी कहानी

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📍नई दिल्ली | 3 Jun, 2025, 12:38 PM

Operation Spider Web: यूक्रेन और रूस के बीच पिछले तीन साल तीन महीने से युद्ध चल रहा है। रूस-यूक्रेन युद्ध की शुरुआत 24 फरवरी 2022 को हुई थी, जब रूस ने यूक्रेन पर बड़े पैमाने पर हमला शुरू किया। हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव 2014 से ही चल रहा था, जब रूस ने क्रीमिया पर कब्जा कर लिया था और डोनबास क्षेत्र में संघर्ष शुरू हुआ था। कुल मिला कर दोनों के बीच पिछले 11 साल से तनाव जारी है। शांति विराम को लेकर दोनों पक्षों के बीच 2025 में अब तक दो प्रत्यक्ष (16 मई और 2 जून) बैठकें हो चुकी हैं। लेकिन युद्ध बंद करने को लेकर कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। वहीं, दो जून की बैठक से ठीक पहले यूक्रेन ने रूस में ड्रोन से एक बड़ा हमला किया, जिसमें रूस के लगभग 41 स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स को खड़े-खड़े नष्ट कर दिया। इसे नाम दिया गया ऑपरेशन स्पाइडर वेब। इस ऑपरेशन ने न केवल रूस की सैन्य ताकत को बड़ा झटका दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि आधुनिक युद्ध में छोटी और सस्ती तकनीकें कितनी प्रभावी हो सकती हैं। आइए, समझते हैं कि कैसे यूक्रेन ने रूस के एक तिहाई स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमानों को निशाना बनाया।

क्या था Operation Spider Web?

ऑपरेशन स्पाइडर वेब (Operation Spider Web) यूक्रेन की एक ऐसी सैन्य रणनीति थी, जिसमें छोटे-छोटे ड्रोन का इस्तेमाल करके रूस के सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। ये ड्रोन इतने छोटे और सस्ते थे कि इन्हें आसानी से छिपाया जा सकता था, लेकिन इनकी ताकत इतनी थी कि ये रूस के बड़े-बड़े स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमानों को नष्ट करने में सक्षम थे। अनुमान के मुताबिक एक ड्रोन की कीमत करीब 50000 रुपये है। यूक्रेन ने अपने 40,000 ड्रोन सैनिकों में से कुछ को इस मिशन के लिए चुना।

इस ऑपरेशन की सबसे खास बात यह थी कि इन ड्रोनों को रूस की सीमा के अंदर छिपाकर ले जाया गया और फिर वहां से हमला किया गया। यहां कि फ्रंटलाइन से 4000 किमी दूर साइबेरिया में मौजूद रूसी एयरबेस पर भी जहाजों को निशाना बनाया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यूक्रेन ने दावा किया कि इस हमले में रूस के 117 ड्रोन और 117 ऑपरेटर शामिल थे, जिन्होंने मिलकर 41 रूसी विमानों को तबाह कर दिया। इससे रूस के रणनीतिक बमवर्षकों के बेड़े का लगभग एक-तिहाई हिस्सा नष्ट हो गया। इन सैनिकों ने रूस की सीमा में घुसकर ड्रोनों को छिपाने और लॉन्च करने का काम किया। इस ऑपरेशन में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने भी अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा, “यह हमारी सबसे बड़ी सफलता है। हमने दिखा दिया कि छोटे हथियार भी बड़े नुकसान पहुंचा सकते हैं।”

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ऑपरेशन का पहला चरण: ड्रोनों को रूस में भेजना

ऑपरेशन (Operation Spider Web) की शुरुआत यूक्रेन के सैनिकों ने रूस की सीमा में घुसकर की। इसके लिए यूक्रेन ने खास तरह के ड्रोन इस्तेमाल किए, जिन्हें फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोन कहा जाता है। ये ड्रोन कैमरे से लैस होते हैं, जिससे ऑपरेटर दूर बैठकर ड्रोन को कंट्रोल कर सकता है और सीधे निशाना साध सकता है। इन ड्रोनों को रूस की सीमा में ले जाने के लिए यूक्रेन ने ट्रकों का इस्तेमाल किया।

इन ट्रकों को रूस की सीमा के पास ले जाया गया, जहां से सैनिकों ने ड्रोनों को छिपाने का काम शुरू किया। ड्रोनों को रूस के सैन्य ठिकानों के पास जंगलों, गांवों और छोटे-छोटे घरों में छिपाया गया। इस काम में स्थानीय लोगों की मदद भी ली गई, जो रूस के खिलाफ थे और यूक्रेन का समर्थन कर रहे थे। एक बार ड्रोन छिप जाने के बाद, सैनिकों ने इन्हें मोबाइल नेटवर्क के जरिए कंट्रोल करने की तैयारी शुरू की।

ऑपरेशन का दूसरा चरण: हमले की तैयारी

ड्रोनों को छिपाने के बाद यूक्रेन के सैनिकों ने रूस के सैन्य ठिकानों की सही जानकारी जुटाई। इसके लिए सैटेलाइट तस्वीरों और जासूसी का सहारा लिया गया। रूस के जो स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमान इस ऑपरेशन के निशाने पर थे, वे मुख्य रूप से पांच हवाई ठिकानों पर मौजूद थे जिनमें मुरमांस्क, इवानोवो, रियाज़ान, अमूर और इरकुत्स्क शामिल थे।

इन ठिकानों पर रूस के 41 विमान मौजूद थे, जिनमें से ज्यादातर स्ट्रैटेजिक बॉम्बर थे। ये विमान लंबी दूरी तक मिसाइल दागने में सक्षम थे और यूक्रेन के लिए बड़ा खतरा थे। यूक्रेन की रणनीति थी कि इन विमानों को नष्ट करके रूस की हवाई ताकत को कमजोर किया जाए। ड्रोन हमले में रूस के 57 अरब डॉलर के सैन्य विमानों को नष्ट कर दिया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के जो 41 एयरक्राफ्ट नष्ट हुए उनमें ए-50 अर्ली वार्निंग प्लेंस, TU-23M3, TU-95 जैसे स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स भी थे। रूस के पास अब 100 से कम स्ट्रैटेजिक बॉम्बर्स बचे हैं। यह रूस के स्ट्रैटेजिक बॉम्बर बेड़े का 34% हिस्सा था।

ड्रोनों को इन ठिकानों तक पहुंचाने के लिए यूक्रेन ने रात का समय चुना। सैनिकों ने ट्रकों के जरिए ड्रोनों को ठिकानों के पास पहुंचाया और फिर वहां से ड्रोनों को लॉन्च किया। ड्रोन इतने छोटे थे कि रूस के रडार सिस्टम इन्हें पकड़ नहीं सके। जैसे ही ट्रक लक्ष्य के पास पहुंचे, उनकी छत खुली और ड्रोन बाहर निकलकर एक साथ एयरबेस पर टूट पड़े। इन हमलों में छोटे-छोटे FPV ड्रोन इस्तेमाल हुए, जिनकी कीमत मात्र 40,000 से 50,000 रुपये के बीच थी, लेकिन असर टैंक या मिसाइल जितना था।

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ऑपरेशन का तीसरा चरण: हमला और नुकसान

जब ड्रोन रूस के हवाई ठिकानों तक पहुंचे, तो उन्होंने एक साथ हमला शुरू कर दिया। ये सभी ड्रोन विस्फोटकों से लैस थे, जो विमानों को नष्ट करने के लिए काफी थे। यूक्रेन के सैनिकों ने 117 ड्रोनों का इस्तेमाल किया, जिसमें से हर ड्रोन ने एक विमान को निशाना बनाया।

हमले में रूस के 41 विमानों को नुकसान पहुंचा, जिसमें से कई पूरी तरह से नष्ट हो गए। रूस की वायु सेना और सुरक्षा बल इस हमले से हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतने छोटे ड्रोन इतना बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इस हमले में रूस के एक तिहाई स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमानों को नुकसान पहुंचा, जो रूस के लिए एक बड़ा झटका था।

ऑपरेशन की सफलता के पीछे क्या था?

इस ऑपरेशन (Operation Spider Web) की सफलता के पीछे कई कारण थे। पहला, यूक्रेन ने सस्ते और छोटे ड्रोनों का इस्तेमाल किया, जिन्हें रूस के रडार सिस्टम पकड़ नहीं सके। दूसरा, यूक्रेन ने रूस की सीमा के अंदर अपनी जासूसी और स्थानीय लोगों की मदद से सही जानकारी जुटाई। तीसरा, इस ऑपरेशन में यूक्रेन के सैनिकों ने बहुत साहस और समझदारी दिखाई। इस हमले की खास बात यह थी कि ड्रोन ट्रकों के अंदर छिपाकर रूस के अंदर भेजे गए थे। ये ट्रक रूस में सामान्य नागरिक ट्रकों की तरह चलाए जा रहे थे। अंदर छिपे ड्रोन को मोबाइल नेटवर्क के जरिए ऑपरेटर कंट्रोल कर रहे थे।

यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा, “यह ऑपरेशन (Operation Spider Web) हमारी तकनीक और साहस का प्रतीक है। हमने दिखा दिया कि युद्ध में ताकत ही सब कुछ नहीं होती, रणनीति भी बहुत मायने रखती है।”

रूस के नुकसान का आकलन

यूक्रेन के जासूसी विभाग SBU के प्रमुख ने कहा कि “रूसी विमानों को बम सहित नष्ट किया गया।” रूस की सेना ने माना कि उनके रडार सिस्टम और एयर डिफेंस सिस्टम छोटे ड्रोनों को पकड़ने में नाकाम रहा। रूस के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेंगे और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकने के लिए नए कदम उठाएंगे।

हालांकि, इस हमले से रूस को बड़ा नुकसान हुआ। रूस के स्ट्रैटेजिक बॉम्बर विमान लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम थे, और इनका नष्ट होना रूस की सैन्य ताकत के लिए एक बड़ा झटका था। विशेषज्ञों का कहना है कि रूस को इन विमानों को दोबारा बनाने में कई साल लग सकते हैं, क्योंकि ये विमान बहुत महंगे और जटिल होते हैं।

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आधुनिक युद्ध में ड्रोन गेम-चेंजर

ऑपरेशन सिंदूर में (Operation Spider Web) जिस तरह से पाकिस्तान ने भारत पर हमला करने के लिए सस्ते ड्रोनों का इस्तेमाल किया औऱ जिस तरह से यूक्रेन ने रूस के बॉम्बर्स नष्ट किए, उसने यह साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में ड्रोन एक गेम-चेंजर साबित हो सकते हैं। ये ड्रोन न केवल सस्ते होते हैं, बल्कि इन्हें कहीं भी छिपाकर हमला करने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। इस ऑपरेशन ने दुनिया भर की सेनाओं को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि वे अपनी सुरक्षा व्यवस्था को कैसे बेहतर करें।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस ऑपरेशन (Operation Spider Web) ने यह साफ कर दिया है कि आने वाले युद्धों में ड्रोन और ‘छल’ (Trojan Horse) जैसे हमले निर्णायक भूमिका निभाएंगे। यूक्रेन के इस प्रयोग ने युद्ध की परिभाषा ही बदल दी है। उनका कहना है कि भविष्य में ड्रोन युद्ध और बढ़ेगा। छोटे और सस्ते ड्रोन बड़े हथियारों को नष्ट करने में सक्षम होंगे, जिससे युद्ध की रणनीति पूरी तरह से बदल जाएगी। यूक्रेन ने इस ऑपरेशन के जरिए यह दिखा दिया कि तकनीक और रणनीति का सही इस्तेमाल किसी भी सेना को मजबूत बना सकता है, चाहे वह कितनी भी छोटी क्यों न हो।

भारत में ड्रोन टेक्नोलॉजी

भारत ने हाल के वर्षों में ड्रोन तकनीक पर काफी ध्यान दिया है। भारतीय सेना ने DRDO के जरिए स्वदेशी ड्रोन विकसित किए हैं, जैसे कि रुस्तम-2 और घटक। इसके अलावा, भारत ने इजरायल और अमेरिका से ड्रोन खरीदे हैं, जैसे कि हैरन और प्रेडेटर ड्रोन। 2023 में भारत ने ड्रोन नियमों को आसान बनाया, जिसके बाद निजी कंपनियां भी ड्रोन बनाने में सक्रिय हो गई हैं।

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हालांकि, भारत को अभी भी बड़े पैमाने पर ड्रोन ऑपरेशन और सस्ते FPV ड्रोनों के इस्तेमाल में काफी काम करने की जरूरत है। यूक्रेन का यह ऑपरेशन भारत को एक रोडमैप देता है कि कैसे सस्ते ड्रोन का इस्तेमाल बड़े दुश्मन के खिलाफ किया जा सकता है।

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    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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