📍पणजी, गोवा | 11 Jan, 2026, 12:32 PM
Admiral Arun Prakash SIR Notice: भारतीय नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल अरुण प्रकाश को चुनाव आयोग की ओर से नोटिस भेजा गया है, जिसमें उनसे अपनी पहचान साबित करने के लिए दस्तावेजों के साथ पेश होने को कहा गया है। यह नोटिस गोवा में चल रही मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर प्रक्रिया के तहत जारी किया गया है। वहीं, यह खबर सामने आने के बाद वेटरंस ने बेहद नाराजगी है।
Admiral Arun Prakash SIR Notice: चुनाव आयोग ने भेजा नोटिस
एडमिरल अरुण प्रकाश भारतीय नौसेना के सबसे सम्मानित अधिकारियों में गिने जाते हैं। वे 1971 के भारत–पाक युद्ध के दौरान एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत से कॉम्बैट मिशन उड़ाने वाले नेवल एविएटर रहे हैं। उन्हें वीर चक्र सहित कई बड़े सैन्य सम्मानों से नवाजा जा चुका है। इसके बावजूद चुनाव आयोग की ओर से यह कहा गया है कि चुनावी रिकॉर्ड में उन्हें या उनके परिजनों को रजिस्टर्ड वोटर के तौर पर उनका नाम शामिल नहीं किया जा सकता है। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
चुनाव आयोग के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से भेजे गए नोटिस में कहा गया है कि पहचान और मतदाता जानकारी देने के लिए एडमिरल अरुण प्रकाश को व्यक्तिगत तौर पर डॉक्यूमेंट्स के साथ उपस्थित होना होगा। इस नोटिस के अनुसार, उन्हें 17 जनवरी को और उनकी पत्नी कुमकुम प्रकाश को 19 जनवरी को कोर्टालिम क्षेत्र के इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन आफीसर के सामने पेश होना है। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
एडमिरल अरुण प्रकाश ने भी इस प्रकरण पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि वे पहली बार 1968 में गोवा आए थे। इसके बाद गोवा में उनकी पांच पोस्टिंग्स रहीं और वर्ष 2009 में वे यहां स्थायी रूप से बस गए। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर वे चुनाव आयोग के अधिकारी को संतुष्ट नहीं कर पाए, तो आगे क्या होगा। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
एडमिरल अरुण प्रकाश ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा, उन्हें रिटायर हुए करीब बीस साल हो चुके हैं, लेकिन इस दौरान उन्होंने कभी किसी तरह की खास सुविधा या विशेष अधिकार की मांग नहीं की। उन्होंने साफ किया कि वे और उनकी पत्नी ने चुनाव आयोग की एसआईआर प्रक्रिया के तहत मांगे गए सभी फॉर्म समय पर भरे थे। इतना ही नहीं, उन्हें यह देखकर संतोष भी हुआ था कि गोवा की ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल 2026 में चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दोनों के नाम दर्ज दिखाई दे रहे थे। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
उन्होंने यह भी कहा कि इसके बावजूद, चुनाव आयोग की ओर से जो नोटिस भेजे गए हैं, उनका वे पूरा पालन करेंगे। यानी वे किसी तरह की टकराव या बहस नहीं चाहते, बल्कि नियमों का सम्मान करते हुए प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
हालांकि, इसके साथ ही एडमिरल अरुण प्रकाश ने चुनाव आयोग का ध्यान कुछ व्यावहारिक बातों की ओर दिलाया। उन्होंने कहा कि अगर एसआईआर के लिए भरे गए फॉर्म से जरूरी जानकारी नहीं मिल पा रही है, तो शायद फॉर्म के फॉर्मेट में ही बदलाव की जरूरत है। उन्होंने यह भी बताया कि बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) तीन बार उनके घर आए थे। अगर किसी तरह की अतिरिक्त जानकारी चाहिए थी, तो उसी समय उनसे पूछी जा सकती थी। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
एडमिरल अरुण प्रकाश ने इस प्रक्रिया की एक और व्यावहारिक समस्या की ओर इशारा किया। उन्होंने बताया कि वे और उनकी पत्नी एक बुजुर्ग दंपति हैं, जिनकी उम्र क्रमशः 82 और 78 साल है। इसके बावजूद, दोनों को अलग-अलग तारीखों पर करीब 18 किलोमीटर दूर चुनाव कार्यालय में पेश होने के लिए कहा गया है। उनके मुताबिक, यह व्यवस्था बुजुर्ग नागरिकों के लिए असुविधाजनक है। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
यह मामला सिर्फ एडमिरल अरुण प्रकाश तक सीमित नहीं है। इससे दो दिन पहले कारगिल युद्ध के वेटरन और दक्षिण गोवा से सांसद कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस को भी इसी तरह का नोटिस मिला था। गोवा में चल रही एसआईआर प्रक्रिया के दौरान कई ऐसे मामलों में नोटिस जारी किए गए हैं, जहां मतदाता रिकॉर्ड में किसी तरह का डेटा मिसमैच सामने आया है।
कैप्टन विरियाटो फर्नांडिस ने कहा, “यह प्रक्रिया शायद नियमों के तहत हो, लेकिन इसे लागू करने के तरीके पर दोबारा विचार होना चाहिए। पूर्व सैनिकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग और सरल व्यवस्था होनी चाहिए।”
स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी एसआईआर चुनाव आयोग की एक नियमित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना, फर्जी नाम हटाना और असली मतदाताओं की जानकारी को सही करना होता है। इस प्रक्रिया के तहत बूथ लेवल ऑफिसर घर-घर जाकर वैरिफिकेशन करते हैं और जरूरत पड़ने पर नागरिकों को दस्तावेजों के साथ बुलाया जाता है। हालांकि, कई बार पुराने रिकॉर्ड, सॉफ्टवेयर अपडेट या डाटा एंट्री से जुड़ी गलतियों के कारण ऐसे नोटिस उन लोगों को भी जारी हो जाते हैं, जो दशकों से एक ही जगह रह रहे होते हैं। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
एडमिरल अरुण प्रकाश का मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में आ गया है, क्योंकि वे न सिर्फ एक पूर्व नौसेना प्रमुख हैं, बल्कि एक वॉर वेटरन और राष्ट्रीय स्तर पर पहचाने जाने वाले व्यक्ति भी हैं। सोशल मीडिया पर कई पूर्व सैनिकों और नागरिकों ने सोशल मीडिया पर इस पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि जिन लोगों की पूरी सेवा और पहचान सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है, उनसे इस तरह पहचान साबित करने को कहना व्यवस्था की खामियों को दिखाता है।
कुछ रक्षा विशेषज्ञों और वेटरन अधिकारियों का मानना है कि पूर्व सैनिकों के लिए पेंशन पेमेंट ऑर्डर, सर्विस रिकॉर्ड या वेटरन कार्ड जैसे दस्तावेज पहले से ही सरकारी सिस्टम में मौजूद होते हैं। ऐसे में अलग से पहचान साबित करने की प्रक्रिया उन्हें बेवजह परेशानी में डाल सकती है। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
रिटायर्ड कर्नल दिनेश कुमार ने इस मामले पर नाराजगी जताते हुए कहा, “यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि एक पूर्व नौसेना प्रमुख और युद्ध वेटरन को अपनी पहचान साबित करने के लिए बुलाया जा रहा है। जिन्होंने दशकों तक देश की सेवा की है, उनकी पूरी सर्विस हिस्ट्री सरकार के रिकॉर्ड में मौजूद है। ऐसे में अलग से पहचान साबित कराने की प्रक्रिया समझ से परे है।” (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
इस पूरे मामले पर सेना से रिटायर लेफ्टिनेंट कर्नल टी.एस. आनंद ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि यह नोटिस किसी सॉफ्टवेयर या डेटा से जुड़ी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से आया हो। उनका मानना है कि अगर किसी नागरिक के कागजात सही हैं, तो चुनाव आयोग के सामने जाकर उन्हें दिखाने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कहा कि एडमिरल अरुण प्रकाश जैसे पूर्व वरिष्ठ सैन्य अधिकारी के मामले में पीपीओ (पेंशन पेमेंट ऑर्डर) या वेटरन कार्ड ही पहचान और नागरिकता का पर्याप्त सबूत है। उनके अनुसार, प्रोटोकॉल के तहत एसआईआर टीम को खुद उनके घर जाकर यह प्रक्रिया पूरी करनी चाहिए थी। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
भारतीय वायुसेना ग्रुप कैप्टन के पद से रिटायर अजय सिंह ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “हम सब कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन सम्मान दोनों तरफ से होना चाहिए। वेटरंस ने अपनी पहचान युद्ध के मैदान में साबित की है। सिस्टम को यह याद रखना चाहिए।”
ऑपरेशन विजय और ऑपरेशन मेघदूत में हिस्सा ले चुके वेटरन राजेन भदूरी का मानना है, “एडमिरल अरुण प्रकाश जैसे अधिकारी को नोटिस भेजना सिस्टम की गंभीर खामी को दिखाता है। पूर्व सैनिकों का डेटा सरकार के पास पहले से है। अगर फिर भी उन्हें पहचान साबित करनी पड़ रही है, तो यह डिजिटल सिस्टम की विफलता है।”
मर्चेंट नेवी से रिटायर्ड कैप्टन संजय के मुताबिक, “यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है। आज एक पूर्व नौसेना प्रमुख को नोटिस मिला है, कल किसी आम सैनिक या जूनियर अफसर को मिलेगा। प्रशासन को यह समझना चाहिए कि वेटरंस कोई संदिग्ध नागरिक नहीं हैं।” (Admiral Arun Prakash SIR Notice)
फिलहाल चुनाव आयोग की ओर से इस खास मामले पर कोई अलग आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। आयोग का कहना है कि एसआईआर एक रूटीन प्रक्रिया है और इसका उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है। (Admiral Arun Prakash SIR Notice)


