📍नई दिल्ली | 6 Jan, 2026, 6:11 PM
Pinaka Vs PULS: हाल ही में भारतीय सेना ने अपनी आर्टिलरी ताकत को यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम के लिए पुणे की डिफेंस कंपनी निबे डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड को करीब 292.69 करोड़ रुपये का इमरजेंसी ऑर्डर दिया है। यह ऑर्डर इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दिया गया है, इसके तहत निबे कंपनी भारतीय सेना को एक ऐसा रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म देगी, जिसमें अलग-अलग रेंज और कैलिबर के रॉकेट्स को एक ही सिस्टम से दागा जा सकेगा। हालांकि भारत के पास पहले से ही पिनाका मल्टी बैरल लॉन्चर सिस्टम है, लेकिन उसकी रेंज सीमित है, जबकि निबे से मिलने वाले यूनिवर्सल रॉकेट लांचर की रेंज 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक होगी। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यूनिवर्सल रॉकेट लांचर सिस्टम पिनाका को रिप्लेस करेगा।
पुणे की प्राइवेट डिफेंस कंपनी निबे डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड यह मल्टी रॉकेट लॉन्चर सिस्टम इजरायल की दिग्गज रक्षा कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के साथ साझेदारी कर भारत में बनएगी। यह सिस्टम इजरायल का प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम (पीयूएलएस) है। इस साझेदारी का मकसद इजरायली तकनीक को भारत में ही डेवलप करना है, ताकि भारतीय सेना को लंबी दूरी तक सटीक मार करने वाला आधुनिक रॉकेट सिस्टम मिल सके। अगर सेना इसे अपनाती है, तो यह भारत का पहला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम होगा। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS: निबे और एल्बिट का समझौता
निबे डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड ने जुलाई 2025 में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में बताया था कि उसने एल्बिट सिस्टम्स के साथ एक अहम समझौता किया है। इस समझौते के तहत पीयूएलएस (PULS) सिस्टम को भारत में बनाया जाएगा और जरूरत पड़ने पर इसे भारतीय सेना को सप्लाई किया जाएगा।
इस डील की सबसे खास बात यह है कि इसमें ट्रांसफर ऑफ टेक्नोलॉजी (टीओटी) भी शामिल है। यानी सिर्फ असेंबली नहीं, बल्कि तकनीक भी भारत को मिलेगी। इससे मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को बड़ा बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। साथ ही भारत को भविष्य में आर्टिलरी सिस्टम का निर्यातक देश बनाने की दिशा में यह एक मजबूत कदम माना जा रहा है। (Pinaka Vs PULS)

रखा जा सकता है “सूर्या” नाम
रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत में बनने वाले इस यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम को “सूर्या” नाम दिया जा सकता है। यह सिस्टम 300 किलोमीटर तक की दूरी पर मौजूद टारगेट को बेहद अचूक तरीके से निशाना बना सकता है।
निबे लिमिटेड ने पहले अपने बयान में कहा था कि यह यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर मॉडर्न वॉरफेयर की तस्वीर बदल सकता है और इससे कंपनी ग्लोबल डिफेंस मार्केट में एक अहम खिलाड़ी बन सकती है।
इस कॉन्ट्रैक्ट के तहत निबे लिमिटेड भारतीय सेना को यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, उससे जुड़े लॉन्चर, ग्राउंड इक्विपमेंट, एक्सेसरीज, एडवांस्ड प्रोजेक्टाइल्स और एम्युनिशन की सप्लाई करेगी। पूरी डिलीवरी 12 महीनों कई स्टेजेज में पूरी की जाएगी। (Pinaka Vs PULS)
क्या है यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम
यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम दरअसल एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जो अलग-अलग कैलिबर और अलग-अलग रेंज के रॉकेट्स और मिसाइलों को एक ही लॉन्चर से दाग सकता है। यही वजह है कि इसे यूनिवर्सल कहा जाता है। अभी तक सेना के पास मौजूद पिनाका में यह खूबी मौजूद नहीं है।
पीयूएलएस सिस्टम से 122 एमएम, 160 एमएम और 306 एमएम जैसे रॉकेट फायर किए जा सकते हैं। इसके अलावा 150 किलोमीटर और 300 किलोमीटर तक मार करने वाली लंबी दूरी की मिसाइलों को भी इसमें इंटीग्रेट किया जा सकता है। इससे सेना को हर दूरी के लिए अलग-अलग लॉन्चर रखने की जरूरत नहीं पड़ेगी। रॉकेट पॉड्स की संख्या और कॉन्फिगरेशन इस बात पर निर्भर करेगी कि किस तरह का रॉकेट इस्तेमाल किया जा रहा है। (Pinaka Vs PULS)
PULS हर इलाके के लिए तैयार
यह लॉन्चर सिस्टम 6×6 या 8×8 व्हील्ड व्हीकल चैसिस पर लगाया जा सकता है। इससे इसे पहाड़ी इलाकों, रेगिस्तानी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में आसानी से तैनात किया जा सकता है।
भारतीय सेना के लिए यह खास तौर पर इसलिए अहम है, क्योंकि उसे अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों में ऑपरेशन करने पड़ते हैं। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान और पूर्वोत्तर के पहाड़ी क्षेत्रों तक, हर जगह यह सिस्टम इस्तेमाल किया जा सकेगा। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS: “शूट एंड स्कूट” क्षमता का क्या है फायदा
मॉडर्न वॉरफेयर में सबसे जरूरी है “शूट एंड स्कूट”। यानी फायर करने के तुरंत बाद अपनी जगह बदल लेना, ताकि दुश्मन की काउंटर फायर से बचा जा सके। यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम इसीलिए डिजाइन किया गया है। फायरिंग के बाद यह सिस्टम तुरंत मूव कर सकता है। लॉन्चर के पीछे एक रिमोटली कंट्रोल्ड और पावर्ड यूनिट लगी होती है। ऑटोमेटेड रीलोडिंग सिस्टम की मदद से यह लॉन्चर एक मिनट से भी कम समय में अपना मिशन पूरा कर सकता है। यह सिस्टम आधुनिक कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क से भी जुड़ सकता है और ड्रोन, रडार या फॉरवर्ड ऑब्जर्वर से सीधे टारगेटिंग डेटा ले सकता है। इसमें जीपीएस आधारित नेविगेशन सिस्टम है, जिससे गाइडेड रॉकेट्स की सटीकता बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। यही वजह है कि इसे आधुनिक नेटवर्क-सेंट्रिक युद्ध के लिए बेहद उपयुक्त माना जा रहा है। (Pinaka Vs PULS)

Pinaka Vs PULS: पिनाका है भारत का भरोसेमंद रॉकेट सिस्टम
भारत फिलहाल अपने स्वदेशी पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पर भरोसा करता है। पिनाका का नाम भगवान शिव के धनुष पर रखा गया है और इस सिस्टम ने 1999 के करगिल युद्ध में पहली बार अपनी ताकत दिखाई थी। ऊंचे पहाड़ी इलाकों में दुश्मन की चौकियों को तब पिनाका ने भारी नुकसान पहुंचाया था।
एक पिनाका लॉन्चर 44 सेकंड में 12 रॉकेट दाग सकता है, जबकि एक पूरी बैटरी 72 रॉकेट फायर कर सकती है। पिनाका एमके-1 की रेंज करीब 37.5 किलोमीटर है, जबकि पिनाका एमके-2 की रेंज 60 किलोमीटर से ज्यादा है। इसके अलावा पिनाका एक्सटेंडेड रेंज वर्जन 60 से 90 किलोमीटर तक मार कर सकता है। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS
हालांकि पिनाका एक मजबूत और भरोसेमंद सिस्टम है, लेकिन इसमें यूनिवर्सल लॉन्च क्षमता नहीं है। पिनाका मुख्य रूप से एरिया बॉम्बार्डमेंट के लिए डिजाइन किया गया है, यानी यह बड़े इलाके में एक साथ भारी मात्रा में रॉकेट गिरा कर उसे तबाह कर सकता है।
वहीं पीयूएलएस एक मल्टी-कैलिबर और मल्टी-रेंज सिस्टम है, जो अचूक हमलों के लिए बनाया गया है। इसकी सबसे बड़ी ताकत इसकी 300 किलोमीटर तक की मारक दूरी और अलग-अलग तरह के हथियार दागने की क्षमता है। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS: क्या पिनाका को मिलेगी चुनौती?
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम पिनाका का विकल्प नहीं, बल्कि उसका सप्लीमेंट बनेगा। पिनाका अभी भी सेना की रॉकेट आर्टिलरी का अहम हिस्सा रहेगा, खास तौर पर मध्यम दूरी और एरिया फायर के लिए।
वहीं यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम लंबी दूरी और प्रिसिजन स्ट्राइक के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस तरह सेना के पास एक लेयर्ड आर्टिलरी कैपेबिलिटी होगी, जिसमें अलग-अलग रेंज और रोल के सिस्टम शामिल होंगे। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS: पीयूएलएस को कई देशों ने चुना
एल्बिट सिस्टम्स का पीयूएलएस सिस्टम दुनिया के कई देशों का ध्यान खींच चुका है। नीदरलैंड और जर्मनी जैसे देशों ने भी इसे चुना है, क्योंकि यह अमेरिकी हिमार्स सिस्टम की तुलना में जल्दी उपलब्ध हुआ और लागत के लिहाज से भी ज्यादा किफायती साबित हुआ।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पीयूएलएस भविष्य में और ज्यादा एडवांस मिसाइलों के साथ भी काम कर सकता है। यही वजह है कि इसे भविष्य के लिए तैयार प्लेटफॉर्म माना जा रहा है। (Pinaka Vs PULS)
Pinaka Vs PULS: भारतीय सेना को क्या होगा फायदा
पीयूएलएस या सूर्या सिस्टम के आने से भारतीय सेना की लंबी दूरी की मारक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा। चीन और पाकिस्तान जैसे दो मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रही सेना के लिए यह सिस्टम बेहद अहम माना जा रहा है। 300 किलोमीटर तक मार करने वाले रॉकेट और मिसाइलें सेना को दुश्मन के इलाके में गहराई तक मौजूद ठिकानों पर हमला करने का मौका देंगी। इससे सेना की रणनीतिक पकड़ और मजबूत होगी।जब अगले एक साल में यह सिस्टम पूरी तरह सेना में शामिल हो जाएगा, तो भारतीय सेना की फायर पावर और ऑपरेशनल तैयारी में इसका असर साफ तौर पर देखा जा सकेगा। (Pinaka Vs PULS)



