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राजस्थान में तैयार हो रहे भारतीय सेना के भैरव-अश्नि, एक लाख ड्रोन वॉरियर बदलेंगे जंग की तस्वीर

भैरव बटालियन और अश्नि प्लाटून में सबसे ज्यादा जोर टीमवर्क पर दिया जाता है। जवानों का कहना है कि नई पहचान और कठिन प्रशिक्षण ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है...

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📍नसीराबाद, राजस्थान | 5 Jan, 2026, 10:16 PM

Bhairav Ashni Battalion Indian Army: भारतीय सेना आज ऐसे दौर में कदम रख चुकी है, जहां युद्ध का मतलब सिर्फ सीमा पर गोली चलाना नहीं रह गया है। बदलते खतरे और भविष्य की चुनौतियों को देखते हुए सेना ने खुद को पूरी तरह नए रूप में ढालना शुरू कर दिया है। इसी बदलाव की सबसे बड़ी झलक राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों में दिखाई दी, जहां भारतीय सेना के नए भैरव कमांडोज और ‘अश्नि’ प्लाटून तैयार हो चुकी हैं और एक लाख से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटिव्स के साथ भविष्य की जंग की तैयारी की जा रही है।

राजस्थान का नसीराबाद, बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर और श्रीगंगानगर अब सिर्फ मिलिट्री कैंटोनमेंट्स नहीं रहे हैं, बल्कि वे भारत के नए वार प्रिंसिपल्स की प्रयोगशाला बन चुके हैं। यहां सेना के जवानों को उस तरह की ट्रेनिंग दी जा रही है, जो भविष्य की लड़ाइयों में काम आएगी।

Bhairav Ashni Battalion Indian Army: बदलती जंग, बदलती सोच

सेना के अधिकारियों का कहना है कि आज की जंग पारंपरिक नहीं रही। अब दुश्मन सामने खड़ा हो, यह जरूरी नहीं। ड्रोन, साइबर हमला, इलेक्ट्रॉनिक जामिंग, सटीक मिसाइल स्ट्राइक और सूचना के जरिए भ्रम फैलाना, ये सब आज के युद्ध का हिस्सा हैं। इसे ही हाइब्रिड वॉरफेयर कहा जाता है।

ऐसे माहौल में वही सेना टिक पाती है, जो तेजी से फैसले ले सके, तकनीक को समझे और उन्हें जमीन पर तुरंत लागू कर सके। इसी सोच से भारतीय सेना ने अपने स्ट्रक्चर में बड़े बदलाव किए हैं। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

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नसीराबाद: जहां तैयार हो रहे फ्यूचर सॉल्जोर

राजस्थान का नसीराबाद अब सिर्फ ट्रेनिंग सेंटर नहीं, बल्कि सेना के भविष्य की नींव है। यहां जवानों को ड्रोन वॉरफेयर, नेटवर्क आधारित युद्ध, मल्टी-डोमेन ऑपरेशन और आधुनिक हथियारों की ट्रेनिंग दी जा रही है। यहां ट्रेनिंग सिर्फ किताबों या क्लासरूम तक सीमित नहीं है। जवानों को असली हालात जैसे माहौल में तैयार किया जाता है, ताकि जरूरत पड़ने पर वे बिना हिचक तुरंत कार्रवाई कर सकें। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

Bhairav Ashni Battalion Indian Army: एक लाख ड्रोन वॉरियर होंगे तैयार

भारतीय सेना ने एक लाख से ज्यादा जवानों को ड्रोन ऑपरेशन में ट्रेनिंग दी है। यह अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। ये ड्रोन ऑपरेटिव्स पैदल सेना, टैंक यूनिट, तोपखाने और स्पेशल फोर्स के साथ मिलकर काम करते हैं। अब ड्रोन सिर्फ निगरानी का साधन नहीं रहे। वे दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, ठिकानों की पहचान करते हैं, रियल टाइम जानकारी देते हैं और जरूरत पड़ने पर हमला करने में भी मदद करते हैं। रेगिस्तान जैसे खुले इलाके में ड्रोन की भूमिका और भी अहम हो जाती है, जहां दूर-दूर तक फैला इलाका पारंपरिक तरीकों से कवर करना मुश्किल होता है। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

भैरव कमांडोज: नाम में ही छिपा है संदेश

भैरव का नाम भारतीय परंपरा के उस योद्धा से लिया गया है, जो निर्भीक, तेज और निर्णायक होता है। यह कमांडोज सामान्य इन्फैंट्री की पैरा यूनिट से अलग है। इसके जवानों को हथियार चलाने के साथ-साथ ड्रोन ऑपरेशन, संचार व्यवस्था, मेडिकल इमरजेंसी, एक्सप्लोसिव डिस्पोजल और डिजिटल वॉरफेयर में भी माहिर बनाया जाता है। भैरव कमांडोज का मकसद कम समय में ज्यादा असर, कम संसाधनों में बड़ा परिणाम और पहली जीत सुनिश्चित कराना है। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

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राजस्थान का रेगिस्तान: असली परीक्षा

बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटे इलाके रणनीतिक रूप से बेहद अहम हैं। यहां मौसम कठोर है, दूरी लंबी है और संसाधन सीमित होते हैं। इन्हीं हालात में भैरव कमांडोज को तैयार किया गया है। ड्रोन के साथ मिलकर ये जवान दुश्मन की हर हलचल पर नजर रखते हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाब देने की क्षमता रखते हैं। रेगिस्तान की गर्मी और कठिन हालात इन जवानों को कमजोर नहीं, बल्कि और मजबूत बनाते हैं। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

अशनि प्लाटून: बिजली की तरह हमला

जहां भैरव कमांडोज मल्टी-कैपेबिलिटी एंड फ्लेक्सिबिलिटी दिखाती है, वहीं अश्नि प्लाटून सेना की तेज और आक्रामक ताकत है। ‘अश्नि’ का मतलब है बिजली तेज, अचानक और प्रभावी। इस प्लाटून का काम है दुश्मन की अग्रिम रक्षा को तोड़ना, अहम ठिकानों पर तुरंत वार करना और जंग का रुख पलट देना। ड्रोन और खुफिया जानकारी के सहारे अशनि बटालियन भविष्य की लड़ाइयों में अहम भूमिका निभाने वाली है। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

Bhairav Ashni Battalion Indian Army: नया टीम कल्चर है पहचान

भैरव बटालियन और अश्नि प्लाटून में सबसे ज्यादा जोर टीमवर्क पर दिया जाता है। जवानों का कहना है कि नई पहचान और कठिन प्रशिक्षण ने उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है। रेगिस्तान में तैनात जवान खुद को सिर्फ जवान नहीं, बल्कि तकनीक से लैस योद्धा मानते हैं। उनके लिए ड्रोन और आधुनिक सिस्टम हथियार का ही हिस्सा हैं। (Bhairav Ashni Battalion Indian Army)

Author

  • साहिल पठान

    साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

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साहिल पठान एक अनुभवी राष्ट्रीय मामलों के पत्रकार हैं, जो रक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य रणनीति और अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर लिखते हैं। साहिल ने डीडी न्यूज, बीबीसी, न्यूज 24, भारत एक्सप्रेस और टी.ऐ.ऍन्‌. नेटवर्क जैसे कई बड़े मीडिया संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण खबरें और विशेष रिपोर्टें की हैं। वह अक्सर सीमावर्ती इलाकों और सैन्य क्षेत्रों से रिपोर्टिंग करते हैं, जहां वे भारत के रणनीतिक हितों से जुड़े मुद्दों को स्पष्टता, जिम्मेदारी और तथ्यों के साथ प्रस्तुत करते हैं।

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