📍नई दिल्ली | 24 Dec, 2025, 12:15 PM
Sanjay Jasjit Singh: नौसेना के रिटायर्ड वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह को यूनाइटेड सर्विस इंस्टिट्यूशन ऑफ इंडिया (यूएसआई) का नया डायरेक्टर जनरल बनाया गया है। यूएसआई के इतिहास में पहली बार कोई नौसेना अधिकारी इस पद पर पहुंचा है। अब तक ये जिम्मेदारी ज्यादातर थलसेना के अफसरों के पास रही थी।
ये फैसला ऐसे वक्त आया है, जब सेना, नौसेना और वायुसेना तीनों के बीच तालमेल और साझा सोच को बहुत जरूरी माना जा रहा है। जंग अब सिर्फ जमीन, हवा या समंदर तक नहीं, साइबर, स्पेस और ड्रोन जैसे नए मोर्चे भी लड़ी जा रही है।
Sanjay Jasjit Singh: यूएसआई क्या है और क्यों है खास
यूएसआई भारत की सबसे पुरानी डिफेंस स्टडीज संस्था है, जो 1870 में शुरू हुई थी। आजादी के बाद ये शिमला से दिल्ली आई और धीरे-धीरे सबसे अहम मिलिट्री थिंक टैंक्स में गिनी जाने लगी। यहां सिर्फ किताबें या रिसर्च पेपर्स नहीं लिखे जाते, बल्कि अफसरों को स्ट्रैटेजी, वॉर स्टडीज और सिक्योरिटी पर सोचने-लिखने का मौका मिलता है।
यूएसआई की एक खास पहचान यह भी है कि यहां से निकले कई अफसर आगे चलकर डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और दूसरी बड़ी सैन्य संस्थाओं की परीक्षाओं में सफल हुए हैं। यूएसआई की लाइब्रेरी और जर्नल्स काफी मशहूर हैं।
Sanjay Jasjit Singh: वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ पद से रिटायर
वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह हाल ही में वेस्टर्न नेवल कमांड के चीफ पद से रिटायर हुए हैं। इससे पहले वो वाइस चीफ ऑफ नेवल स्टाफ जैसे बड़े रोल में भी रह चुके हैं। उनके करियर का बड़ा हिस्सा ऑपरेशंस, हथियारों के प्रोक्योरमेंट और आत्मनिर्भर भारत से जुड़ी डिफेंस पॉलिसीज पर काम करते हुए बीता है।
नौसेना में उन्होंने सिर्फ ऑपरेशंस की कमान नहीं संभाली, बल्कि कई अहम डॉक्युमेंट्स और डॉक्ट्रिन भी तैयार किए। वे नौसेना की प्रमुख डॉक्ट्रिन्स– इंडियन मैरिटाइम डॉक्ट्रिन (2009), स्ट्रैटेजिक गाइडेंस टू ट्रांसफॉर्मेशन (2015) और इंडियन मैरिटाइम सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी (2015) के मुख्य ड्राफ्टर रह चुके हैं।
जब वे गोवा के नेवल वॉर कॉलेज के कमांडेंट थे तो उन्होंने नए अफसरों को मोर्डन वॉरफेयर की सोच से रूबरू करवाया। इसके अलावा वे ऑपरेशन संकल्प (एंटी-पायरेसी) और गल्फ ऑफ एडन में डिप्लॉयमेंट्स के दौरान उन्होंने इंडियन ओशन रीजन में भारत को मजबूत सिक्योरिटी प्रोवाइडर बनाया।
वाइस एडमिरल संजय जसजीत सिंह एनडीए के बेस्ट नेवल कैडेट (स्वॉर्ड ऑफ ऑनर) विजेता हैं। वे थर्ड जेनरेशन आर्म्ड फोर्सेस ऑफिसर हैं– उनके पिता एयर कमोडोर जसजीत सिंह वीर चक्र से सम्मानित हैं।
उनकी सबसे बड़ी पहचान ये है कि वो मैदान के अनुभव को स्ट्रैटेजिक सोच से जोड़कर देखते हैं। इसी वजह से डिफेंस एक्सपर्ट्स उन्हें “ऑपरेशनल और इंटेलेक्चुअल” दोनों दुनिया को जोड़ने वाला अफसर मानते हैं।
Sanjay Jasjit Singh: ऑपरेशन सिंदूर में निभाई थी अहम भूमिका
संजय जसजीत सिंह भारतीय नौसेना के एक अनुभवी फ्लैग ऑफिसर हैं, जो जुलाई 2025 में 39 साल की शानदार सेवा के बाद रिटायर हुए लिया। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान जनवरी 2024 से जुलाई 2025 तक वे वेस्टर्न नेवल कमांड के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ थे, जो भारतीय नौसेना की सबसे ताकतवर कमांड है। इस कमांड के पास अरब सागर और पश्चिमी तट की जिम्मेदारी की सुरक्षा की जिम्मेदारी है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद, उन्होंने नौसेना की जहाजों, पनडुब्बियों, विमानों और कैरियर बैटल ग्रुप्स (आईएनएस विक्रमादित्य और आईएनएस विक्रांत) की तुरंत तैनाती की। इससे पाकिस्तानी नौसेना अपने कराची बंदरगाह से बाहर ही नहीं निकल सकी।
उनकी कमांड ने अरब सागर में पूरा कंट्रोल बनाए रखा, जिससे भारत की समुद्री सीमाएं सुरक्षित रहीं और पाकिस्तान को कोई जवाबी कार्रवााई नहीं करने दी। उनके नेतृत्व में पाकिस्तानी नौसेना केवल डिफेंसिव पोजिशन में रही। इसके अलावा ट्राई-सर्विस कोऑर्डिनेशन करते हुए वेस्टर्न नेवल कमांड ने वायुसेना और सेना के साथ मिलकर जॉइंट ऑपरेशंस किए, जिसमें मैरिटाइम सर्विलांस, एयर कवर और पोटेंशियल स्ट्राइक्स की तैयारियां शामिल थी।
Sanjay Jasjit Singh: मिला सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल
ऑपरेशन सिंदूर में उनके इस योगदान के लिए उन्हें सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल से सम्मानित किया गया। यह भारत का सबसे ऊंचा वॉरटाइम डिस्टिंग्विश्ड सर्विस अवॉर्ड है, और वे पहले नेवी ऑफिसर हैं जिन्हें यह मिला है। 2025 में सर्वोत्तम युद्ध सेवा मेडल तीनों सेनाओं के सात टॉप ऑफिसर्स को मिल था, जिनमें सिंह शामिल थे।
Sanjay Jasjit Singh: जॉइंटनेस को मिलेगा बूस्ट
संजय जसजीत सिंह की यूएसआई में नियुक्ति को सिर्फ एक प्रमोशन की तरह नहीं देखा जा रहा। ये सरकार और मिलिट्री लीडरशिप की उस सोच से जुड़ा है, जिसमें तीनों सेनाओं के बीच तालमेल और मजबूत करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
पिछले कुछ सालों में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की पोस्ट बनी, थिएटर कमांड्स पर चर्चा शुरू हुई, ये सब इसी दिशा में उठाए गए कदम हैं। यूएसआई जैसे थिंक टैंक में नौसेना अफसर की लीडरशिप देना इस बात का संकेत है कि थल, जल, वायु तीनों को बराबरी की जगह मिलेगी।
यूएसआई की वर्किंग और रोल
यूएसआई सिर्फ सेमिनार्स या लेक्चर्स तक सीमित नहीं है। यहां सेना के सेवारत और रिटायर्ड अफसर, सिविल सर्विसेज के लोग और डिफेंस एक्सपर्ट्स मिलकर नेशनल सिक्योरिटी से जुड़े मुद्दों पर खुलकर बात करते हैं। चीन की बढ़ती ताकत, हिंद महासागर की स्ट्रैटेजिक बैलेंसिंग, टेररिज्म, नई टेक्नोलॉजीज, ये सब यहां डिस्कशन के टॉपिक हैं।
संस्था के संरक्षक तीनों सेनाओं के चीफ होते हैं, और चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ अध्यक्ष की भूमिका निभाते हैं। तो यूएसआई की रिसर्च और बातचीत का असर सीधा पॉलिसी मेकिंग तक पहुंचता है।
नौसेना को होगा फायदा
भारत की सुरक्षा अब सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं है। समुद्री व्यापार, एनर्जी सप्लाई और इंडो-पैसिफिक के बदलते समीकरण अब उतने ही अहम हैं, जितनी जमीन की हिफाजत। यूएसआई की कमान नौसेना अफसर के हाथ में आने से एक नया नजरिया सामने आ रहा है।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि संजय जसजीत सिंह के लीडरशिप में यूएसआई में नेवल सिक्योरिटी, नेवल डिप्लोमेसी और जॉइंट ऑपरेशंस पर ज्यादा गहराई से चर्चा होगी। आगे चलकर ये सोच नीतियों और मिलिट्री प्लानिंग को भी नया आकार दे सकती है।
संजय जसजीत सिंह 1 जनवरी 2026 से यूएसआई की जिम्मेदारी संभालेंगे। उनकी चुनौती होगी इतिहास और परंपरा को बरकरार रखते हुए संस्था को भविष्य के लिए तैयार करना। टेक्नोलॉजी बदल रही है, जंग की परिभाषा बदल रही है, ऐसे में थिंक टैंक्स की जिम्मेदारी पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है।


