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Great Nicobar Airfield: हिंद महासागर में बढ़ेगी भारत की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी, ग्रेट निकोबार में दूसरे एयरफील्ड की तैयारी शुरू

इस एयरफील्ड परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,573 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस परियोजना को एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई संभाल रही है...

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📍नई दिल्ली | 13 Dec, 2025, 9:26 PM

Great Nicobar Airfield: भारत ने हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करने के लिए एक और नया एयरफील्ड बनाने की तैयारी कर रहा है। देश के सबसे दक्षिणी हिस्से ग्रेट निकोबार द्वीप पर दूसरे एयरफील्ड बनाने की प्रक्रिया औपचारिक तौर पर शुरू कर दी गई है। यह एयरफील्ड मलक्का जलडमरूमध्य के बेहद नजदीक स्थित होगा, जो चीन और सुदूर पूर्वी देशों की ओर जाने वाले सबसे व्यस्त समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है।

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यह प्रस्तावित एयरफील्ड ग्रेट निकोबार के चिंगेन क्षेत्र में बनाया जाएगा, जो गैलेथिया बे के पास स्थित है। यह इलाका इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप के बांडा आचेह से करीब 150 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में पड़ता है। गैलेथिया बे की भौगोलिक स्थिति इसे रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बनाती है, क्योंकि यह उस शिपिंग चैनल के और करीब है, जो सीधे मलक्का जलडमरूमध्य की ओर जाता है।

Great Nicobar Airfield: पहले से मौजूद आईएनएस बाज के पास नया एयरफील्ड

ग्रेट निकोबार द्वीप पर पहले से ही भारतीय नौसेना का एक महत्वपूर्ण एयरबेस आईएनएस बाज मौजूद है, जो कैंपबेल बे में स्थित है। यह एयरबेस सिक्स डिग्री शिपिंग चैनल पर नजर रखता है, जिसके जरिए बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय जहाज आवाजाही करते हैं। नया एयरफील्ड आईएनएस बाज से कुछ ही किलोमीटर दक्षिण में बनाया जाएगा।

सिंगापुर की मैरीटाइम एंड पोर्ट अथॉरिटी के आंकड़ों के अनुसार, हर साल करीब 96 हजार से ज्यादा जहाज मलक्का जलडमरूमध्य से होकर गुजरते हैं। इसका मतलब है कि औसतन हर दिन 260 से ज्यादा जहाज इस रास्ते का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में ग्रेट निकोबार में दूसरा एयरफील्ड भारत के लिए सामरिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।

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Great Nicobar Airfield: 8,573 करोड़ रुपये की ड्यूल-यूज परियोजना

इस एयरफील्ड परियोजना की अनुमानित लागत करीब 8,573 करोड़ रुपये बताई जा रही है। इस परियोजना को एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी एएआई संभाल रही है। इसे एक ग्रीनफील्ड ड्यूल-यूज एयरपोर्ट के रूप में विकसित किया जाएगा, यानी इसका इस्तेमाल सिविल और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकेगा।

एएआई ने इस परियोजना के लिए भारतीय कंपनियों से प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट के रूप में बोली आमंत्रित की है। यह टेंडर “ग्रेट निकोबार द्वीप पर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के विकास के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सर्विसेज” के नाम से जारी किया गया है। इन बोलियों की अंतिम तारीख 26 दिसंबर तय की गई है।

हालांकि एयरपोर्ट का निर्माण एएआई की देखरेख में होगा, लेकिन इसका इस्तेमाल भारतीय नौसेना, भारतीय वायुसेना और मानवरहित हवाई वाहनों यानी यूएवी के लिए भी किया जाएगा। यह एयरफील्ड चंडीगढ़, डाबोलिम, पुणे, लेह और श्री विजय पुरम जैसे ड्यूल-यूज एयरपोर्ट्स की तर्ज पर काम करेगा।

Great Nicobar Airfield: गैलेथिया बे पोर्ट परियोजना से जुड़ा एयरफील्ड

यह एयरफील्ड गैलेथिया बे में प्रस्तावित इंटरनेशनल कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट परियोजना का भी हिस्सा है। इस पोर्ट को सिंगापुर के मुकाबले एक बड़े लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की योजना है। हालांकि इस परियोजना को लेकर पर्यावरण से जुड़े कुछ मुद्दे सामने आए थे, लेकिन केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने अगस्त में कहा था कि रणनीतिक सुविधा के पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने के लिए विशेष और प्रभावी उपाय शामिल किए गए हैं।

Great Nicobar Airfield: आईएनएस बाज और अन्य सैन्य ठिकानों का विस्तार

ग्रेट निकोबार में मौजूद आईएनएस बाज एयरबेस का भी विस्तार किया जा रहा है। वर्ष 2023 में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने स्वयं मौके पर जाकर इस बेस के विस्तार कार्यों की समीक्षा की थी। इस एयरबेस से स्पेशल ऑपरेशंस एयरक्राफ्ट, डोर्नियर समुद्री निगरानी विमान, वायुसेना के सी-130जे और एयरबस सी-295 जैसे विमानों को ऑपरेट किया जा सकता है।

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इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में पहले से ही एक जॉइंट ऑपरेशंस सेंटर मौजूद है, जहां से निगरानी और अन्य सैन्य अभियानों की संयुक्त योजना बनाई जाती है। उत्तर अंडमान के शिबपुर में स्थित आईएनएस कोहासा नेवल एयर स्टेशन के रनवे को भी बड़ा करने की योजना है, ताकि वहां बड़े सैन्य विमान, नए गोला-बारूद भंडार और फाइटर जेट्स की तैनाती की क्षमता बढ़ाई जा सके।

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