📍मुंबई | 2 Dec, 2025, 8:21 PM
India Navy Operation Sindoor: भारतीय नौसेना के वेस्टर्न नेवल कमांड के प्रमुख वाइस एडमिरल के. स्वामीनाथन ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना की आक्रामक तैयारियों ने पाकिस्तान पर ऐसा दबाव बनाया कि उसे सीजफायर की मांग करनी पड़ी। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन मीडिया से बातचीत में बताया कि नौसेना की इस कार्रवाई ने हालात बदल दिए और पाकिस्तान पीछे हटने पर मजबूर हुआ।
ऑपरेशन सिंदूर इस साल 6-7 मई को शुरू किया गया था। यह ऑपरेशन पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में था, जिसमें अप्रैल में 26 लोगों की जान गई थी। भारत ने इसके बाद पाकिस्तान और पीओके में मौजूद आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया।
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने बताया कि इस ऑपरेशन में नौसेना ने 30 से ज्यादा जहाज और सबमरीन को बहुत कम समय में तैयार कर दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया की किसी भी नौसेना के लिए इतना बड़ा फ्लीट सिर्फ चार से छह दिन में ऑपरेशनल करना बहुत बड़ी बात है। इस दौरान भारतीय नौसेना के फ्रंटलाइन वॉरशिप्स मकरान तट के पास तैनात किए गए थे। इन जहाजों को आईएनएस विक्रांत कैरियर बैटल ग्रुप का सुरक्षा कवर मिला हुआ था।
उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना की यह तैयारियां इतनी मजबूत थीं कि पाकिस्तान अपनी नौसेना को अपने तट से दूर नहीं भेज सका। पाकिस्तान को आशंका थी कि भारतीय नौसेना किसी भी समय हमला कर सकती है। वाइस एडमिरल स्वामीनाथन के अनुसार, “हमारी ऑफेंसिव तैनाती और हथियार परीक्षणों ने पाकिस्तान नौसेना को अपने तट के करीब रहने पर मजबूर कर दिया। इस दबाव के बाद ही पाकिस्तान सीजफायर के लिए मजबूर हुआ।”
उन्होंने बताया कि नौसेना बड़ा हमला करने की स्थिति में थी। कुछ फाइटर एयरक्राफ्ट भी टेक-ऑफ कर चुके थे। भारतीय वायुसेना ने सीमा के पार स्ट्राइक्स कीं, और अगर हालात और बिगड़ते, तो नौसेना भी हमले के लिए समुद्र में आगे बढ़ जाती।
वाइस एडमिरल स्वामीनाथन ने यह भी बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान पाकिस्तान और तुर्की के बीच संभावित सहयोग दिखाई दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय नौसेना को पहले से अंदेशा था कि चीन और पाकिस्तान के साथ-साथ तुर्की भी किसी स्तर पर सहयोग कर सकता है। ऑपरेशन के दौरान एक तुर्की नेवी का जहाज पाकिस्तान में मौजूद था, जिसे भारत पहले से एक “स्पॉइलर फैक्टर” के तौर पर देख रहा था।
उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का श्रेय पॉलिटिकल-मिलिट्री सिनर्जी को दिया। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार और तीनों सेनाओं के बीच तालमेल बहुत मजबूत था। हर स्तर पर जानकारी साझा की जा रही थी, और सभी जानते थे कि कौन-सा कदम कब उठना है।
भारत और पाकिस्तान ने 10 मई को जमीन, समुद्र और हवा में सभी तरह की गोलीबारी और सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति बनाई थी। यह फैसला चार दिनों तक ड्रोन और मिसाइल स्ट्राइक्स के बाद लिया गया, जब दोनों देश लगभग युद्ध की स्थिति में पहुंच चुके थे।


