📍नई दिल्ली | 30 Nov, 2025, 3:28 PM
INS Taragiri delivery: मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को प्रोजेक्ट 17ए की तीसरी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी औपचारिक रूप से सौंप दी है। यह नीलगिरी क्लास की चौथी फ्रिगेट है। इस प्रोजेक्ट के तहत प्रोजेक्ट 7 अत्याधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। ये नई पीढ़ी की फ्रिगेट हैं जो पुरानी शिवालिक क्लास (प्रोजेक्ट 17) से कहीं ज्यादा ताकतवर, स्टील्थ और स्वदेशी हैं।
इस प्रोजेक्ट के तहत आईएनएस तारागिरी (यार्ड 12653) एमडीएल की बनाई तीसरी फ्रिगेट है। यह डिलीवरी भारतीय नौसेना के आधुनिक बेड़े में एक बड़ा इजाफा है।
आईएनएस तारागिरी का निर्माण वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो के डिजाइन पर आधारित है और इसे वॉरशिप ओवरसीइंग टीम मुंबई ने मॉनिटर किया है। आईएनएस तारागिरी की कील लेइंग सेरेमनी 10 सितंबर 2020 को हुई थी, जिसके बाद 14 सितंबर 2022 को इसे लॉन्च किया गया। सभी सी-ट्रायल्स सफलतापूर्वक पूरे होने के बाद अब यह पूरी तरह नौसेना को सौंपा जा चुकी है। इसकी कमीशनिंग 2026 के शुरुआत में होने की उम्मीद है।
तारागिरी वास्तव में भारतीय नौसेना की पारंपरिक विरासत का हिस्सा भी है। इससे पहले 1980 से 2013 तक एक लींडर क्लास की आईएनएस तारागिरी नौसेना में 33 साल तक सेवा दे चुकी है। नई तारागिरी उस गौरवशाली परंपरा को आधुनिक और कहीं ज्यादा ताकतवर है।
the Government of India’s “#MakeinIndia” initiative pic.twitter.com/Gdg8wvWfQ9
— Mazagon Dock Shipbuilders Limited (@MazagonDockLtd) November 28, 2025
तारागिरी का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा पूरी तरह स्वदेशी है। इसकी लंबाई 149 मीटर और वजन करीब 6,670 टन है। यह एक मल्टी-मिशन स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो हवा, समुद्र और पानी के भीतर तीनों तरह की लड़ाई एक साथ लड़ने की क्षमता रखती है। इसका स्टेल्थ डिजाइन ऐसा है कि इसका रडार, थर्मल और एकाउस्टिक सिग्नेचर बेहद कम रहता है, जिससे दुश्मन के सेंसर इसे पकड़ नहीं पाते।
हथियारों के मामले में यह बेहद घातक प्लेटफॉर्म है। इसके अलावा जहाज में बराक-8 और बराक-8 ईआर मिसाइलों के लिए 32-सेल वर्टिकल लॉन्च सिस्टम लगा है, जो 150–200 किलोमीटर दूरी तक हवाई खतरों को नष्ट कर सकता है। इसके अलावा जहाज में आठ सुपरसॉनिक ब्रह्मोस क्रूज मिसाइलें लगी हैं जो समुद्र और जमीन दोनों पर हमला कर सकती हैं। मेन गन के तौर पर इसमें 76 एमएम सुपर रैपिड गन माउंट सिस्टम और नजदीकी सुरक्षा के लिए दो एके-630 क्लोज-इन वेपन सिस्टम लगे हैं। साथ ही, यह आरबीयू-6000 एंटी-सबमरीन रॉकेट और टॉरपीडो ट्यूब से भी लैस है।
सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक्स की बात करें तो तारागिरी भारत के एमएफ-स्टार एईएसए रडार से लैस है, जो 360-डिग्री में सैकड़ों लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है। जहाज में स्वदेशी हुमसा-एनजी सोनार और एडवांस्ड टोन्ड एरे सोनार (एटीएएस) भी लगा है, जो पनडुब्बी की गतिविधियों को दूर से पकड़ सकते हैं। पूरा कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम भारत में तैयार किया गया है, जो कई सेंसर और हथियारों को इंटीग्रेट करके ऑपरेट करता है।
आईएनएस तारागिरी में आधुनिक स्टेल्थ डिजाइन का उपयोग किया गया है जिससे इसका रडार, थर्मल, मैग्नेटिक और एकाउस्टिक सिग्नेचर काफी कम रहता है और दुश्मन के सेंसर इसे पकड़ना मुश्किल होता है।
आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17ए का हिस्सा है, जिसे नीलगिरि क्लास भी कहा जाता है। इस कार्यक्रम के तहत सात आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से तीन मझगांव डॉकयार्ड में और चार गार्डन रीच शिपबिल्डर्स लिमिटेड कोलकाता में बन रहे हैं। यह पूरा प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की “मल्टी-रोल” क्षमता को बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है, जिसमें हवाई रक्षा, समुद्री युद्ध, जमीन पर हमला और एंटी-सबमरीन ऑपरेशन शामिल हैं।
आईएनएस तारागिरी की डिलीवरी भारत के जहाज निर्माण क्षेत्र की क्षमता का प्रमाण है। एमडीएल ने पिछले 11 महीनों में प्रोजेक्ट 17ए की चार फ्रिगेट नौसेना को सौंपकर भारतीय निर्माण क्षमता की ताकत दिखाई है। पहले जहाज के निर्माण में जहां 93 महीने लगे थे, वहीं तारागिरी को सिर्फ 81 महीनों में पूरा कर लिया गया। इस प्रोजेक्ट में 200 से अधिक एमएसएमई कंपनियों का योगदान रहा और लगभग 4,000 लोगों को सीधी तथा 10,000 लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला।
