📍मुंबई | 13 Nov, 2025, 6:13 PM
GPS interference India: भारत में लगातार सामने आ रही जीपीएस इंटरफेरेंस यानी जीपीएस स्पूफिंग की घटनाओं ने देश की एविएशन सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इसी के बाद भारत सरकार ने 13 से 17 नवंबर 2025 तक के लिए एक नया नोटाम (नोटिस टू एयरमेन) जारी किया है। यह चेतावनी मुंबई के पास हवाई रूट्स पर जारी की गई है, जहां कई एयरक्राफ्ट ने जीपीएस सिग्नल लॉस और नेविगेशन एरर की शिकायत की थी। इससे पहले दिल्ली के इंदिरा गांधी हवाई अड्डे के पास भी इसी तरह की गड़बड़ी देखी गई थी।
GPS interference India
नोटिस में कहा गया है कि मुंबई के पास कुछ हिस्सों में उड़ान भरते समय एयरक्राफ्ट को जीपीएस बेस्ड नेविगेशन में दिक्कत हो सकती है। इसलिए एयरलाइंस और पायलटों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए पायलटों, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और एयरलाइन ऑपरेटरों को आदेश दिया है कि किसी भी जीपीएस इंटरफेरेंस, जीपीएस स्पूफिंग या सिग्नल लॉस का मामला सामने आते ही 10 मिनट के अंदर रिपोर्टिंग करना अनिवार्य है।
डीजीसीए के सर्कुलर के मुताबिक, अगर किसी एयरक्राफ्ट को अचानक गलत लोकेशन दिखाई दे, रास्ते में बदलाव दिखाई दे, नेविगेशन एरर आए, या ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम सिग्नल (जीएनएसएस) की क्वालिटी गिर जाए, तो तुरंत उसकी जानकारी दर्ज की जाए।
दिल्ली एयरपोर्ट पर हाल ही में ऐसे कई मामले सामने आए, जहां पायलटों ने 60 नॉटिकल माइल्स तक जीपीएस गड़बड़ी की शिकायत की थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर रोजाना लगभग 1,500 एयर ट्रैफिक मूवमेंट होता है, ऐसे में यह समस्या काफी सीरियस मानी जा रही है।
डीजीसीए ने कहा है कि रिपोर्ट में तारीख, समय, एयरक्राफ्ट का प्रकार, रजिस्ट्रेशन नंबर, उड़ान का रास्ता, प्रभावित क्षेत्र और सिग्नल की प्रकृति (जैसे स्पूफिंग, जैमिंग, सिग्नल लॉस) की विस्तृत जानकारी दी जाए। अगर संभव हो तो सिस्टम लॉग, स्क्रीनशॉट या एपएमएस डेटा भी जमा किया जाए।
अभी तक नवंबर 2023 से फरवरी 2025 के बीच 465 जीपीएस इंटरफेरेंस और स्पूफिंग के मामले दर्ज हो चुके हैं। इनमें से कई घटनाएं अमृतसर और जम्मू जैसे संवेदनशील बॉर्डर क्षेत्रों में सामने आई थीं।
सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली एटीसी सिस्टम में पिछले दिनों एक सॉफ्टवेयर बग पाया गया था, जिसकी वजह से भी कुछ जीपीएस गड़बड़ी देखी गई। इसे बाद में अपडेट कर ठीक किया गया। अधिकारियों ने साफ किया कि मुंबई नोटाम का संबंध किसी सैन्य गतिविधि, पाकिस्तान या रणनीतिक ऑपरेशन से नहीं है। नोटाम कई बार एहतियात के तौर पर भी जारी किया जाता है ताकि हवाई सुरक्षा में कोई जोखिम न रहे।
दुनिया भर में भी जीपीएस स्पूफिंग की घटनाएं बढ़ रही हैं। इंटरनेशनल सिविल एविएशन आर्गनाइजेशन और इंटरनेशनल एआईआर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन दोनों ने इस पर चिंता जताई है। यूरोपीय आयोग ने सितंबर में कहा था कि जब वह बुल्गारिया दौरे पर थीं तो रूस पर यूरोपीय यूनियन की अध्यक्ष उर्सुला वोन डेर लेयेन के जहाज का जीपीएस भी जाम करने की कोशिश की गई थी।
भारत भी इन घटनाओं की निगरानी कर रहा है। डीजीसीए और गृह मंत्रालय ने मिलकर जांच शुरू कर दी है कि यह समस्या तकनीकी है, साइबर एरर है, या इसे जानबूझकर किसी बाहरी सोर्स के जरिए अंजाम दिया जा रहा है।
मुंबई नोटाम और दिल्ली जीपीएस गड़बड़ी के संबंध में फिलहाल कोई सबूत सामने नहीं आया है कि यह किसी सुरक्षा खतरे का संकेत है, लेकिन एहतियात के तौर पर सभी उड़ानों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
डीजीसीए ने एयरलाइंस से यह भी कहा है कि पायलटों को ल्टरनेट नेविगेशन सिस्टम्स यानी आईएनएस (इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम) और ग्राउंड-बेस्ड नेविगेशन पर भी तैयार रखा जाए, ताकि जीपीएस पर असर होने पर भी उड़ान सुरक्षित रूप से जारी रह सके।
GPS interference India जीपीएस इंटरफेरेंस जैसी घटनाएँ उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती
भारतीय एयरस्पेस में जीपीएस आधारित नेविगेशन का इस्तेमाल पिछले कई सालों में काफी बढ़ा है। रनवे की लैंडिंग गाइडेंस, फ्लाइट रूट्स, एयरस्पेस मैनेजमेंट, रडार कोऑर्डिनेशन, सभी जगह जीएनएसएस का व्यापक इस्तेमाल होता है। ऐसे में जीपीएस इंटरफेरेंस जैसी घटनाएँ उड़ान सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन सकती हैं।
नोटाम जारी होने के बाद एयरलाइंस और पायलटों को यह भी निर्देशित किया गया है कि प्रभावित क्षेत्रों से गुजरते समय विजिबिलिटी, एल्टीट्यूड और एआईआर ट्रैफिक सेपरेशन को लेकर अतिरिक्त सावधानी बरती जाए।
GPS interference India फिलहाल डीजीसीए इन सभी मामलों का डेटा एकत्र कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि जीपीएस गड़बड़ी किस पैटर्न में हो रही है और इसका सोर्स क्या है। हालांकि भारत सरकार ने साफ किया है कि विमान सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी तरह की जीपीएस गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाएगा।
