📍नई दिल्ली | 11 Nov, 2025, 3:44 PM
Delhi Red Fort blast: दिल्ली के लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर की शाम हुआ भीषण ब्लास्ट अब देश की राजधानी को दहला देने वाला सबसे बड़ा आतंकी हमला माना जा रहा है। शुरुआती जांच में यह साफ हो गया है कि यह धमाका किसी साधारण घटना का नतीजा नहीं, बल्कि एक संगठित आतंकी साजिश थी। अब तक की जानकारी के मुताबिक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें तीन संदिग्ध हमलावर भी शामिल हैं।
Delhi Red Fort blast: आतंकियों की रणनीति में बड़ा बदलाव
खुफिया एजेंसियों का मानना है कि इस धमाके का मकसद सिर्फ जान-माल की हानि नहीं था, बल्कि यह दिखाना था कि आतंकी अब कश्मीर से आगे बढ़कर भारत के दिल यानी दिल्ली को निशाना बना रहे हैं। मामले की जांच कर रहे शीर्ष सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली में लाल किले पर हुआ आतंकी हमला एक फिदायीन हमला था। जैश-ए-मोहम्मद ने राजधानी के दिल पर हमला करने के लिए अपनी ताकत का संदेश देने के लिए लाल किले को चुना है।
Jaish Female Wing: जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग की हेड निकली डॉक्टर शाहीन, पाकिस्तान से था सीधा लिंक
लाल किला मेट्रो स्टेशन दिल्ली के सबसे भीड़भाड़ वाले इलाकों में से एक है, जो संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और अन्य सरकारी संस्थानों से कुछ ही दूरी पर है। यहां हमला करना आतंकियों की “नई रणनीति” का संकेत है, अब वे जंगलों या पहाड़ियों में नहीं, बल्कि शहरी इलाकों में हमला कर रहे हैं।
Delhi Red Fort blast: फरीदाबाद से मिला 2900 किलो विस्फोटक
धमाके से सिर्फ एक दिन पहले, यानी 9 नवंबर को फरीदाबाद पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई में करीब 2,900 किलो विस्फोटक, हथियार और आईईडी बनाने का सामान बरामद किया था। पुलिस ने इस मामले में जम्मू-कश्मीर से जुड़े व्हाइट कॉलर प्रोफेशनल्स यानी कुछ डॉक्टरों को गिरफ्तार किया था।
अब जांच में यह साफ होता जा रहा है कि लाल किला ब्लास्ट का तार उसी फरीदाबाद मॉड्यूल से जुड़ा है। संभावना है कि ये विस्फोटक दिल्ली लाए जा रहे थे और किसी और जगह इस्तेमाल किए जाने थे, लेकिन कार में अचानक ब्लास्ट हो गया।
कश्मीर से दिल्ली तक फैला जैश और अंसार गजवत-उल-हिंद का नेटवर्क
प्रारंभिक जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने इस हमले के पीछे पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और अंसार गजवत-उल-हिंद के हाथ होने की आशंका जताई है।
दोनों संगठन लंबे समय से जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहे हैं, लेकिन अब उनका नेटवर्क राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र तक फैल चुका है। गिरफ्तार आरोपियों में कई उच्च शिक्षित लोग शामिल हैं, जिनमें डॉक्टर और विश्वविद्यालय के शिक्षक भी हैं।
‘व्हाइट कॉलर’ आतंकी
इस पूरे मॉड्यूल में एक खास बात सामने आई है कि अब आतंकी संगठन ‘व्हाइट कॉलर टेररिस्ट’ का इस्तेमाल कर रहे हैं। यानी ऐसे लोग जो दिखने में पढ़े-लिखे, प्रोफेशनल और सम्मानित वर्ग से हों, ताकि सुरक्षा एजेंसियों को उन पर शक न हो।
फरीदाबाद में गिरफ्तार हुई महिला डॉक्टर डॉ. शाहीन शाहिद, जम्मू-कश्मीर के डॉक्टर आदिल अहमद राथर, और अन्य आरोपी इसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए हैं। इन लोगों को पाकिस्तान से भेजे गए संदेशों और फंडिंग के आधार पर आतंक फैलाने के मिशन में लगाया गया था।
आतंकियों की नई रणनीति शहरी इलाकों में हमला
सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, अब आतंकवादी संगठन अपनी रणनीति बदल चुके हैं। पहले वे सीमित इलाकों में सुरक्षा बलों को निशाना बनाते थे, लेकिन अब उनका फोकस घनी आबादी वाले शहरी इलाकों पर है।
उनकी योजना ऐसे शहरों में दहशत फैलाने की है जहां भीड़ और मीडिया की मौजूदगी सबसे ज्यादा हो।
एनएसए अजीत डोभाल की चेतावनी
दिल्ली ब्लास्ट के कुछ दिन पहले ही, 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक कार्यक्रम में कहा था कि भारत ने आतंकवाद पर काफी हद तक नियंत्रण पाया है। उन्होंने कहा था, “जम्मू-कश्मीर को छोड़कर भारत के किसी भी हिस्से में 2013 के बाद कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ।” लेकिन दिल्ली ब्लास्ट ने यह साबित कर दिया कि आतंकियों ने अपनी रणनीति बदल ली है और अब वे देश के अंदरूनी हिस्सों में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं।
Delhi Blast Update – जांच एजेंसियों की निगरानी और सख्त हुई सुरक्षा
Delhi Red Fort blast ब्लास्ट के बाद एनआईए, दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और इंटेलिजेंस ब्यूरो ने जांच की जिम्मेदारी संभाल ली है।
राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया गया है। रेलवे स्टेशन, मेट्रो स्टेशन और धार्मिक स्थलों पर तलाशी अभियान चल रहे हैं।
एजेंसियां इस बात की जांच कर रही हैं कि क्या यह ब्लास्ट किसी बड़े हमले की तैयारी का हिस्सा था। साथ ही, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के साथ इसके सीधे संपर्कों की भी जांच की जा रही है।


