📍नई दिल्ली | 24 Oct, 2025, 7:45 PM
INS Mahe Delivery: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड ने भारतीय नौसेना को अपनी पहली एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट ‘माहे’ (INS Mahe) सौंप दी है। यह आठ क्राफ्ट सीरीज की पहली यूनिट है जिसे कोचीन शिपयार्ड बना रहा है। वहीं इसकी कमीशनिंग नवंबर के आखिर तक की जाएगी।
‘माहे’ का नाम केंद्र शासित प्रदेश पुदुच्चेरी के ऐतिहासिक बंदरगाह माहे के नाम पर रखा गया है। माहे पूरी तरह से स्वदेशी डिजाइन और तकनीक से बनी है जो भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम है।
‘माहे’ की लंबाई लगभग 78 मीटर और वजन करीब 1,100 टन है। इसे तटीय इलाकों में पनडुब्बियों की निगरानी और उन्हें नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। यह जहाज समुद्र में कम गहराई वाले क्षेत्रों में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर मिशन को अंजाम देगा। इसके साथ ही यह लो इंटेंसिटी मैरीटाइम आपरेशंस (लिमो) और माइन बिछाने जैसे अभियानों में भी इस्तेमाल की जा सकती है।
इसमें एडवांस सोनार और रडार सिस्टम, हल्के टॉरपीडो, और मल्टी-फंक्शनल एंटी-सबमरीन रॉकेट्स लगे हैं। यह क्राफ्ट समुद्री निगरानी और तटीय सुरक्षा को मजबूत करेगी। यह पुराने अभय-क्लास कोरवेट्स की जगह लेगी। यह भारतीय नौसेना का ऐसा सबसे बड़ा शिप है। इसका साउंड सिग्नेचर भी कम होगा और यह पनडुब्बियों को आसानी से चकमा देगी। इस शिप को डेट नॉर्स्के वेरिटास नियमों के अनुसार बनाया गया है।
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‘माहे’ के निर्माण में 80 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है, जो भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का हिस्सा। इस प्रोजेक्ट को रक्षा मंत्रालय की डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल ने 2013 में मंजूरी दी थी। इसके तहत कुल 16 नावों का निर्माण किया जाना है, जिनमें से 8 कोचीन शिपयार्ड और बाकी 8 गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स कोलकाता बना रहा है। कोचिन शिपयार्ड (सीएसएल) के बनाए शिप्स की डिलीवरी जून 2028 तक चलेगी।
⚓️ India’s Maritime Might: ‘Mahe’ Delivered to Indian Navy! 🇮🇳
A major boost for our naval power and the #AatmanirbharBharat mission!
‘Mahe,’ the first of eight Anti-Submarine Warfare Shallow Water Crafts (ASW SWC), was delivered to the Indian Navy by Cochin Shipyard Limited… pic.twitter.com/mjasCdUTbl— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) October 24, 2025
भारतीय नौसेना के पास फिलहाल दो एंटी-सबमरीन शैलो वॉटर क्राफ्ट (एएसडब्ल्यू-एसडब्ल्यूसी) कमीशन हो चुकी हैं। ये नावें तटीय इलाकों में पनडुब्बी रोधी अभियानों के लिए डिजाइन की गई हैं। ये दोनों नावें गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाई हैं। पहली नाव आईएनएस अर्नाला को 18 जून 2025 को कमीशन किया गया। जबकि दूसरे शिप ‘अंद्रोथ’ पहले ही 13 सितंबर को डिलीवर किया जा चुका है। जिसकी कमीशनिंग 6 अक्टूबर को विशाखापत्तनम में हुई थी।
‘माहे’ की डिलीवरी कोच्चि में एक विशेष समारोह में हुई। इस अवसर पर कमांडर अमित चंद्र चौबे, जो ‘माहे’ के कमांडिंग ऑफिसर हैं, और एस. हरिकृष्णन, डायरेक्टर (ऑपरेशंस), कोचिन शिपयार्ड ने औपचारिक दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किए। इस मौके पर रियर एडमिरल आर.के. पांडे और नौसेना के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि यह जहाज भारत की नौसैनिक क्षमता में नई ताकत जोड़ेगा।
इन शैलो वॉटर क्राफ्ट्स के आने से नौसेना को उन इलाकों में दुश्मन की पनडुब्बियों की खोज और निगरानी में मदद मिलेगी, जहां बड़े जहाज जैसे डिस्ट्रॉयर और फ्रिगेट्स वहां मुश्किल से जाते हैं। इससे भारत की तटीय रक्षा और समुद्री सीमा की सुरक्षा और अधिक मजबूत होगी।



