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Saturday, August 30, 2025
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Speedy Justice for Armed Forces: दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश; आर्मी, नेवी, एयरफोर्स और पैरामिलिट्री मामलों की सुनवाई को मिलेगी प्राथमिकता

सर्कुलर में कहा गया है कि संसद ने पहले से ही सशस्त्र बलों की जिम्मेदारियों को देखते हुए विभिन्न कानूनों में विशेष प्रावधान किए हैं...

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दिल्ली हाई कोर्ट के नियमों और आदेशों के वॉल्यूम-1 में भी स्पष्ट किया गया है कि सैन्य सेवा से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ या उनके पक्ष में दायर मुकदमों को प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से अध्याय 6 के अंतर्गत आने वाले प्रावधान इस बात पर जोर देते हैं कि सेना और वायुसेना से जुड़े विवादों को तेजी से निपटाया जाए...
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📍नई दिल्ली | 21 Aug, 2025, 9:48 PM

Speedy Justice for Armed Forces: दिल्ली हाई कोर्ट ने एक अहम सर्कुलर जारी करते हुए निर्देश दिया है कि राजधानी की सभी अदालतें भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और पैरामिलिट्री बलों से जुड़े मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता दें। यह आदेश हाई कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल अरुण भारद्वाज की ओर से जारी किया गया है।

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सर्कुलर में कहा गया है कि संसद ने पहले से ही सशस्त्र बलों की जिम्मेदारियों को देखते हुए विभिन्न कानूनों में विशेष प्रावधान किए हैं। इनमें आर्मी एक्ट 1950 की धारा 32, नेवी एक्ट 1957 की धारा 24 और एयर फोर्स एक्ट 1950 की धारा 32 शामिल हैं। इन प्रावधानों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से जुड़े मामलों की सुनवाई तेजी से हो सके।

इसके अलावा, भारतीय सैनिक (विवाद) अधिनियम 1925, जिसे 19 नवंबर 2018 को संशोधित किया गया था, भी इस विशेष सुरक्षा का आधार है। इस अधिनियम के तहत भारतीय सैनिकों को सिविल और राजस्व मामलों की सुनवाई में प्राथमिकता दिए जाने का प्रावधान है।

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दिल्ली हाई कोर्ट के नियमों और आदेशों के वॉल्यूम-1 में भी स्पष्ट किया गया है कि सैन्य सेवा से जुड़े व्यक्तियों के खिलाफ या उनके पक्ष में दायर मुकदमों को प्राथमिकता दी जाए। विशेष रूप से अध्याय 6 के अंतर्गत आने वाले प्रावधान इस बात पर जोर देते हैं कि सेना और वायुसेना से जुड़े विवादों को तेजी से निपटाया जाए।

इस आदेश के अनुसार, दिल्ली के सभी सिविल और राजस्व अदालतों को यह निर्देश दिया गया है कि वे आर्मी, नेवी और एयरफोर्स से जुड़े मुकदमों और आपराधिक मामलों को प्राथमिकता से लें। साथ ही, कोर्ट को यह भी कहा गया है कि पैरामिलिट्री बलों के मामलों की जल्दी सुनवाई और अंतिम निपटारा सुनिश्चित किया जाए।

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मुख्य न्यायाधीश के इस आदेश की प्रतियां दिल्ली की सभी जिला और सत्र अदालतों के प्रधान न्यायाधीशों को भेज दी गई हैं। इनमें तिहाड़ कोर्ट, रोहिणी कोर्ट, साकेत कोर्ट, द्वारका कोर्ट, कड़कड़डूमा कोर्ट, पटियाला हाउस कोर्ट और शाहदरा कोर्ट शामिल हैं।

सर्कुलर के साथ यह भी निर्देश दिया गया है कि अदालतें इस तरह के मामलों की जल्दी सुनवाई और अंतिम निर्णय की व्यवस्था करें ताकि वर्दीधारी बलों को अनावश्यक देरी से राहत मिल सके।

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