📍नई दिल्ली | 18 Mar, 2026, 1:20 PM
IOS SAGAR 2026: भारतीय नौसेना ने हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और सहयोग को मजबूत करने के लिए आईओएस सागर पहल का दूसरा संस्करण शुरू कर दिया है। 16 मार्च से शुरू हुए इस कार्यक्रम में हिंद महासागर क्षेत्र के कई देशों की भागीदारी शामिल है।
यह पहल भारत की उस नीति के तहत की गई है जिसमें क्षेत्र के सभी देशों के साथ मिलकर सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इसे सागर यानी “Security and Growth for All in the Region” और महासागर विजन का हिस्सा माना जा रहा है।
IOS SAGAR 2026: 16 देशों के नौसैनिक ले रहे हैं हिस्सा
इस बार के आईओएस सागर कार्यक्रम में इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) से जुड़े 16 देशों के नौसैनिक शामिल हो रहे हैं। जो पहले संस्करण की तुलना में ज्यादा है। भारतीय नौसेना ने फरवरी 2026 में IONS की चेयरमैनशिप संभाली है। इसके बाद यह पहला बड़ा कार्यक्रम है, जिसमें इतने देशों के सैनिक एक साथ हिस्सा ले रहे हैं। इस पहल के तहत अलग-अलग देशों के नौसैनिक एक ही जहाज पर साथ काम करेंगे और एक-दूसरे के अनुभव से सीखेंगे। (IOS SAGAR 2026)
🇮🇳⚓ IOS SAGAR 2026: Strengthening Maritime Cooperation
The Indian Navy has commenced the second edition of IOS SAGAR 2026, with participation from 16 IONS countries across the Indian Ocean Region.
The initiative includes training in Kochi followed by joint deployment at sea,… pic.twitter.com/TxsLFWI9XA— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 18, 2026
कोच्चि में शुरू हुआ ट्रेनिंग फेज
इस कार्यक्रम की शुरुआत केरल के कोच्चि स्थित भारतीय नौसेना के ट्रेनिंग संस्थानों में हुई है। यहां पर विदेशी नौसैनिकों को समुद्री संचालन, जहाज चलाने की तकनीक और सुरक्षा से जुड़े विभिन्न पहलुओं की ट्रेनिंग दी जा रही है।
इस दौरान उन्हें सीमैनशिप यानी समुद्री कौशल, नेविगेशन, कम्युनिकेशन और समुद्री सुरक्षा से जुड़े विषयों की जानकारी दी जा रही है।
ट्रेनिंग का उद्देश्य यह है कि अलग-अलग देशों के सैनिक एक-दूसरे की कार्यशैली को समझ सकें और साथ मिलकर काम करने की क्षमता विकसित कर सकें। (IOS SAGAR 2026)
समुद्र में संयुक्त ऑपरेशन की तैयारी
ट्रेनिंग के बाद सभी प्रतिभागी एक भारतीय नौसैनिक जहाज पर सवार होकर समुद्र में संयुक्त गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वे वास्तविक परिस्थितियों में ऑपरेशन से जुड़ी गतिविधियों को समझेंगे।
समुद्र में रहने के दौरान यह दल कई तरह के अभ्यास करेगा, जिससे उनकी आपसी समझ और तालमेल मजबूत होगा।
इस चरण में जहाज अलग-अलग देशों के बंदरगाहों पर भी जाएगा, जहां स्थानीय नौसेना और एजेंसियों के साथ बातचीत और सहयोग किया जाएगा। (IOS SAGAR 2026)
पोर्ट विजिट और समुद्री सहयोग
कार्यक्रम के दौरान जहाज विभिन्न देशों के बंदरगाहों का दौरा करेगा। इन विजिट्स के जरिए अलग-अलग देशों के बीच संबंध मजबूत होंगे और समुद्री सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होगी।
इन गतिविधियों के जरिए देशों के बीच जानकारी साझा करने, अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर तालमेल बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
यह पहल खास तौर पर समुद्री चुनौतियों जैसे पायरेसी यानी समुद्री डकैती, तस्करी और अन्य खतरों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित है। (IOS SAGAR 2026)
पहले संस्करण की तुलना में बड़ा कार्यक्रम
आईओएस सागर का पहला संस्करण 2025 में आयोजित किया गया था, जिसमें कम देशों ने हिस्सा लिया था। उस समय यह कार्यक्रम एक महीने तक चला था और इसमें कई देशों के बंदरगाहों का दौरा किया गया था। इस बार का संस्करण अधिक बड़ा और विस्तारित है। इसमें ज्यादा देशों की भागीदारी है और गतिविधियों का दायरा भी बढ़ाया गया है। (IOS SAGAR 2026)
SAGAR और MAHASAGAR विजन पर फोकस
आईओएस सागर पहल भारत के सागर विजन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सभी देशों के लिए सुरक्षा और विकास सुनिश्चित करना है। इसके साथ ही यह पीएम मोदी के महासागर विजन को भी आगे बढ़ाता है, जिसमें भारत समुद्री सहयोग को और व्यापक स्तर पर बढ़ाना चाहता है। इस पहल के जरिए भारत खुद को एक भरोसेमंद समुद्री साझेदार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
समुद्री सुरक्षा में सहयोग बढ़ाने की पहल
भारतीय नौसेना के अनुसार यह कार्यक्रम सिर्फ ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य देशों के बीच वास्तविक सहयोग को बढ़ाना है। इस पहल से विभिन्न देशों के नौसैनिक एक-दूसरे के साथ काम करने का अनुभव हासिल करेंगे, जिससे भविष्य में संयुक्त ऑपरेशन करना आसान होगा। कार्यक्रम के दौरान समुद्री सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और अन्य साझा चुनौतियों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। (IOS SAGAR 2026)

