📍नई दिल्ली | 21 Mar, 2026, 2:49 PM
INS Taragiri: भारतीय नौसेना को जल्द ही नया वारशिप मिलने वाला है। देश में बना आधुनिक स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस तारागिरी (F41) जल्द ही नौसेना के बेड़े में शामिल होने वाला है। इस युद्धपोत का कमीशनिंग समारोह 3 अप्रैल को आयोजित किया जाएगा, जिसमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद रहेंगे।
आईएनएस तारागिरी प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाए जा रहे आधुनिक फ्रिगेट्स की सीरीज का हिस्सा है। यह इस प्रोजेक्ट का चौथा युद्धपोत है, जिसे विशेष रूप से आधुनिक समुद्री युद्ध की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। हालांकि रक्षा समाचार ने 14 मार्च को ही इस बारे में पहले ही बता दिया था…”INS Taragiri: भारत का नया स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट अप्रैल में होगा नौसेना में शामिल, ब्रह्मोस-बराक से है लैस”
INS Taragiri: क्या है प्रोजेक्ट 17ए और क्यों है अहम
प्रोजेक्ट 17ए भारतीय नौसेना का एक बड़ा और महत्वपूर्ण कार्यक्रम है, जिसके तहत नीलगिरी क्लास के स्टेल्थ फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इन युद्धपोतों को नई तकनीक, बेहतर डिजाइन और आधुनिक हथियारों से लैस किया गया है।
इस सीरीज का पहला जहाज आईएनएस नीलगिरी पहले ही नौसेना में शामिल हो चुका है। इसके बाद आईएनएस उदयगिरि और आईएनएस हिमगिरि भी सेवा में आ चुके हैं। अब आईएनएस तारागिरी इस श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए नौसेना की ताकत में नया इजाफा करेगा।
यह प्रोजेक्ट इसलिए भी खास है क्योंकि इसका उद्देश्य भारत को रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना है और आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार करना है। (INS Taragiri)
🚢 Indian Navy Set to Commission Stealth Frigate ‘Taragiri’ (F41) 🇮🇳
A major boost to India’s maritime power! The Indian Navy will commission its latest stealth frigate INS Taragiri on 03 April 2026, marking another milestone in the journey towards Aatmanirbhar defence.
Built by… pic.twitter.com/A8zAXrLku3— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) March 21, 2026
स्वदेशी तकनीक से बना है INS Taragiri
आईएनएस तारागिरी को मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में तैयार किया गया है। यह जहाज करीब 6,670 टन वजनी है और इसमें 75 प्रतिशत से ज्यादा स्वदेशी यानी भारत में बनी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है।
इस युद्धपोत के निर्माण में देश की अपनी तकनीक और उद्योगों की बड़ी भूमिका रही है। इस प्रोजेक्ट में 200 से ज्यादा एमएसएमई यानी छोटे और मध्यम उद्योगों ने भी योगदान दिया है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है।
यह जहाज ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का एक मजबूत उदाहरण माना जा रहा है। (INS Taragiri)
स्टेल्थ डिजाइन से दुश्मन के लिए मुश्किल
आईएनएस तारागिरी की सबसे बड़ी खासियत इसका स्टेल्थ डिजाइन है। स्टेल्थ का मतलब होता है ऐसा डिजाइन, जिससे दुश्मन के रडार और सेंसर इसे आसानी से पकड़ न सकें।
इस जहाज का बाहरी ढांचा बहुत स्मूद और स्लीक बनाया गया है। इसके अलावा इसमें रडार क्रॉस सेक्शन कम करने वाली तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इससे यह जहाज दुश्मन की नजर से काफी हद तक छिपा रह सकता है।
इसके साथ ही इसमें कम इंफ्रारेड सिग्नेचर यानी कम गर्मी छोड़ने वाली तकनीक भी दी गई है, जिससे इसे ट्रैक करना और भी मुश्किल हो जाता है। युद्ध के समय यह क्षमता बेहद अहम होती है। (INS Taragiri)
आधुनिक हथियारों से लैस
आईएनएस तारागिरी को आधुनिक और शक्तिशाली हथियारों से लैस किया गया है। इसमें सुपरसोनिक सर्फेस-टू-सर्फेस मिसाइल यानी ब्रह्मोस सिस्टम लगाया गया है, जो दुश्मन के जहाजों और जमीन पर मौजूद ठिकानों को तेजी से निशाना बना सकता है।
इसके अलावा इसमें मीडियम रेंज सर्फेस-टू-एयर मिसाइल सिस्टम भी है, जो हवाई खतरों जैसे फाइटर जेट या मिसाइल से जहाज की रक्षा करता है। जहाज में एंटी-सबमरीन वॉरफेयर सिस्टम भी लगाया गया है, जिससे यह समुद्र के अंदर छिपी पनडुब्बियों को खोजकर उन पर हमला कर सकता है।
इसके साथ ही इसमें आधुनिक रडार, सेंसर और कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम लगाया गया है। यह सिस्टम सभी हथियारों और सेंसर को एक साथ जोड़ता है, जिससे जहाज का क्रू तेजी से फैसले ले सकता है और तुरंत कार्रवाई कर सकता है। (INS Taragiri)
तेज रफ्तार और लंबी दूरी की क्षमता
आईएनएस तारागिरी में सीओडीओजी (कंबाइंड डीजल ऑर गैस) प्रोपल्शन सिस्टम लगाया गया है। इसका मतलब यह है कि जहाज जरूरत के हिसाब से डीजल इंजन या गैस टरबाइन दोनों का इस्तेमाल कर सकता है।
इससे जहाज को हाई स्पीड और लंबी दूरी तक चलने की क्षमता मिलती है। यानी यह युद्धपोत तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच सकता है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है।
निर्माण में इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक
इस युद्धपोत के निर्माण में इंटीग्रेटेड मॉड्यूलर कंस्ट्रक्शन तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्सों को पहले अलग से तैयार किया जाता है और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा जहाज बनाया जाता है।
इस तकनीक से निर्माण में कम समय लगता है और गुणवत्ता भी बेहतर रहती है। आईएनएस तारागिरी को बनाने में पहले के मुकाबले कम समय लगा, जो भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को दिखाता है।
कई तरह के मिशन के लिए तैयार
आईएनएस तारागिरी सिर्फ युद्ध के लिए ही नहीं बना है, बल्कि यह कई तरह के मिशन को पूरा करने में सक्षम है। यह जहाज हाई इंटेंसिटी कॉम्बैट यानी बड़े युद्ध के अलावा ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (एचएडीआर) जैसे कामों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
मतलब, यह जहाज जरूरत पड़ने पर आपदा के समय लोगों की मदद करने, राहत सामग्री पहुंचाने और बचाव कार्यों में भी उपयोगी साबित होगा।
पूर्वी नौसेना कमान में होगी तैनाती
आईएनएस तारागिरी को भारतीय नौसेना की पूर्वी कमान में तैनात किया जाएगा, जिसका मुख्यालय विशाखापत्तनम में है। यह कमान हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की समुद्री सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालती है। इस युद्धपोत के शामिल होने से पूर्वी फ्लीट की ताकत और बढ़ेगी और समुद्री क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा बेहतर होगी।
आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होने से भारत की समुद्री ताकत को तेजी से मजबूती मिलेगी। यह जहाज न सिर्फ तकनीकी रूप से आधुनिक है, बल्कि यह देश की रक्षा उत्पादन क्षमता को भी दिखाता है।
भारत अब ऐसे युद्धपोत बना रहा है, जो पूरी तरह देश में डिजाइन किए गए हैं, देश में बनाए गए हैं और देश के ही सैनिकों द्वारा संचालित किए जाएंगे। यह भारतीय नौसेना को और ज्यादा मजबूत, तैयार और आत्मनिर्भर बनाता है। (INS Taragiri)

