📍नई दिल्ली | 1 Nov, 2025, 6:58 PM
Indian Navy Satellite Launch: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी इसरो रविवार को अपना सबसे भारी रॉकेट ‘बाहुबली’ लॉन्च करने जा रहा है। यह रॉकेट भारतीय नौसेना के लिए खास तौर पर तैयार किए गए कम्यूनिकेशन सैटेलाइट सीएमएस-03 को अंतरिक्ष में स्थापित करेगा। इस सैटेलाइट का उद्देश्य नौसेना के जहाजों और बेस को सिक्योर कम्यूनिकेशन नेटवर्क से जोड़ना है, ताकि समुद्री सुरक्षा और निगरानी को और मजबूत किया जा सके।
यह प्रक्षेपण आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन स्पेस सेंटर से रविवार शाम 5:26 बजे किया जाएगा। यह लॉन्च व्हीकल मार्क-3 यानी एलवीएम-3 रॉकेट का आठवां मिशन होगा। इसरो का यह भारी रॉकेट अब तक 100 फीसदी सफल रहा है और 2023 में इसी ने चंद्रयान-3 को चांद तक पहुंचाया था।
43.5 मीटर ऊंचा यह रॉकेट लगभग 15 मंजिला इमारत के बराबर है और इसका वजन 642 टन है, जो करीब 150 एशियाई हाथियों के वजन के बराबर माना जाता है। इस बार रॉकेट अपने साथ जो सैटेलाइट ले जा रहा है, वह भारत का अब तक का सबसे भारी कम्युनिकेशन सैटेलाइट है। इसका वजन करीब 4,400 किलोग्राम है और यह जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित किया जाएगा।
यह नया सैटेलाइट जीसैट-7 या रुक्मिणी सैटेलाइट की जगह लेगा, जो 2013 से नौसेना की सेवा कर रहा है। सीएमएस-03 सैटेलाइट की खासियत यह है कि यह कई फ्रीक्वेंसी बैंड्स में काम करता है और भारत के तटीय क्षेत्रों से 2,000 किलोमीटर तक फैले नौसैनिक संसाधनों को एक साथ जोड़ सकता है।
इस मिशन में इस्तेमाल होने वाला हर एलवीएम-3 रॉकेट लगभग 500 करोड़ रुपये का होता है। इस 16 मिनट की उड़ान के दौरान रॉकेट में भारत में विकसित किया गया क्रायोजेनिक इंजन इस्तेमाल किया जाएगा। इसरो के वैज्ञानिकों के अनुसार, यह तकनीक भारत की अंतरिक्ष आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी उपलब्धि है।
इस सैटेलाइट का सैन्य महत्व भी बेहद अहम है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय नौसेना ने रुक्मिणी सैटेलाइट की मदद से पाकिस्तान की नौसेना पर नजर रखी थी और नेटवर्क सेंट्रिक ऑपरेशंस के जरिए अपनी बढ़त बनाई थी। अब नया सैटेलाइट सीएमएस-03 उस क्षमता को और अधिक आधुनिक और तेज बनाएगा।
यह भी उल्लेखनीय है कि यही ‘बाहुबली’ रॉकेट भविष्य में भारत के मानव अंतरिक्ष मिशन ‘गगनयान’ को भी अंतरिक्ष में ले जाएगा। इसके लिए रॉकेट का ह्यूमन रेटेड वर्जन तैयार किया जा रहा है।


