📍नई दिल्ली | 10 Apr, 2026, 6:15 PM
Indian Navy NGMV Waterjet Deal: भारतीय नौसेना के नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल यानी एनजीएमवी प्रोग्राम के लिए नॉर्वे की कंपनी कॉन्ग्सबर्ग मैरीटाइम ने वॉटरजेट प्रोपल्शन सिस्टम सप्लाई करने का कॉन्ट्रैक्ट साइन किया है। इस डील के तहत कुल 18 बड़े ‘कामेवा वॉटरजेट’ दिए जाएंगे, जो इन जहाजों की स्पीड और मूवमेंट को काफी बेहतर बनाएंगे।
भारतीय नौसेना के एनजीएमवी प्रोग्राम के तहत हर जहाज में तीन वॉटरजेट लगाए जाएंगे, जिससे ये जहाज तेज गति से चल सकेंगे और तेजी से दिशा बदल पाएंगे। ये सभी जहाज कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड में बनाए जा रहे हैं। यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत को मजबूत करने की दिशा में अहम माना जा रहा है। (Indian Navy NGMV Waterjet Deal)
Indian Navy NGMV Waterjet Deal: क्या होता है वॉटरजेट सिस्टम
वॉटरजेट एक तरह का प्रोपल्शन सिस्टम होता है, जो पारंपरिक प्रोपेलर से अलग काम करता है। इसमें पानी को तेज दबाव से पीछे की ओर फेंका जाता है, जिससे जहाज आगे बढ़ता है। इस तकनीक का सबसे बड़ा फायदा यह है कि जहाज ज्यादा तेज चलता है और उसे मोड़ना आसान होता है। हाई-स्पीड ऑपरेशन और तटीय इलाकों में काम करने के लिए यह सिस्टम काफी उपयोगी माना जाता है। साथ ही ये नॉइज और वाइब्रेशन भी कम करते हैं, इसलिए स्टेल्थ ऑपरेशन के लिए बेहतर हैं।
कंपनी के मुताबिक यह अब तक का उनका सबसे बड़ा वॉटरजेट ऑर्डर है। पिछले कुछ सालों में इस तरह के बड़े ऑर्डर कम मिले थे, लेकिन इस डील के साथ कंपनी ने फिर से बड़े स्तर पर वॉटरजेट मैन्युफैक्चरिंग में वापसी की है। कंपनी के अधिकारियों ने कहा कि यह प्रोजेक्ट उनके लिए एक माइलस्टोन है और इस बात का प्रतीक है कि उनकी तकनीक पर भरोसा किया जा रहा है। (Indian Navy NGMV Waterjet Deal)
क्या है एनजीएमवी प्रोग्राम
एनजीएमवी यानी नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल वेसल भारतीय नौसेना का एक बड़ा प्रोजेक्ट है। इसके तहत छह नए मिसाइल वेसल बनाए जा रहे हैं। कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड इस पूरे प्रोजेक्ट को तैयार कर रहा है। मार्च 2023 में करीब 9804 करोड़ रुपये के इस प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट साइन हुआ था। पहले जहाज की डिलीवरी मार्च 2027 तक होने की योजना है। इसके लिए स्टील कटिंग का काम दिसंबर 2024 में शुरू किया जा चुका है।
ये आधुनिक मिसाइल कॉर्वेट्स हैं, जिन्हें खास तौर पर समुद्र में दुश्मन के जहाजों को निशाना बनाने, समुद्री इलाकों में नियंत्रण बनाए रखने और तटीय क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए डिजाइन किया गया है। इसके अलावा ये जहाज ऑफशोर इलाकों जैसे तेल और गैस प्लेटफॉर्म की सुरक्षा में भी काम आएंगे।
इन जहाजों की एक बड़ी खासियत इनकी स्टेल्थ क्षमता है। यानी इन्हें इस तरह बनाया जा रहा है कि दुश्मन के रडार, इंफ्रारेड सेंसर, साउंड डिटेक्शन और मैग्नेटिक सिस्टम इन्हें आसानी से पकड़ न सकें। इसका मतलब यह हुआ कि ये जहाज दुश्मन के करीब जाकर भी काफी हद तक छिपे रह सकते हैं और अचानक हमला करने में सक्षम होंगे।
इन मिसाइल वेसल को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि ये तेजी से ऑपरेशन कर सकें और जरूरत पड़ने पर जल्दी से अपनी दिशा बदल सकें। इनमें सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें लगाई जाएंगी, जिनमें ब्रह्मोस जैसी मिसाइल शामिल होने की संभावना है। इसके अलावा इनमें शॉर्ट रेंज एयर डिफेंस सिस्टम भी लगाया जाएगा।
इन जहाजों में 76 मिमी की नेवल गन, एयर सर्विलांस और फायर कंट्रोल रडार जैसे सिस्टम भी होंगे।
इस प्रोजेक्ट में सिर्फ वॉटरजेट ही नहीं, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण सिस्टम भी लगाए जा रहे हैं। इसके तहत भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड को एक्स-बैंड मल्टी फंक्शन रडार देने का ऑर्डर मिला है। यह रडार डीआरडीओ द्वारा विकसित किया गया है और इसे इन जहाजों पर लगाया जाएगा। इसके अलावा इन जहाजों में वीएलएसआरएसएएम यानी वर्टिकल लॉन्च शॉर्ट रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल सिस्टम लगाने की भी योजना है। (Indian Navy NGMV Waterjet Deal)
स्पीड होगी 65 किलोमीटर प्रति घंटा
स्पीड की बात करें तो ये जहाज करीब 33 से 35 नॉट्स यानी लगभग 61 से 65 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल सकेंगे, जो समुद्री ऑपरेशन के लिहाज से काफी तेज मानी जाती है। इसी वजह से इन्हें “ब्रह्मोस स्ट्राइक फ्लीट” का हिस्सा भी माना जा रहा है, क्योंकि ये तेज गति के साथ लंबी दूरी तक सटीक हमला करने में सक्षम होंगे।
इन जहाजों का वजन करीब 1500 टन के आसपास हो सकता है और लंबाई लगभग 90 मीटर रहने का अनुमान है। एक जहाज में करीब 80 क्रू मेंबर्स तैनात रहेंगे। इसके अलावा ये जहाज एक बार में करीब 2800 नॉटिकल माइल तक की दूरी तय कर सकते हैं, जिससे ये लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकते हैं। (Indian Navy NGMV Waterjet Deal)
GE एलएम2500 गैस टरबाइन इंजन
इन जहाजों के लिए एलएम2500 गैस टरबाइन इंजन चुना गया है, जिसे जीई एयरोस्पेस बना रही है। इन इंजनों को भारत में एचएएल के जरिए असेंबल किया जाएगा। इस तरह इस प्रोजेक्ट में विदेशी और भारतीय दोनों तरह की कंपनियां शामिल हैं, जो अलग-अलग सिस्टम सप्लाई कर रही हैं।
एनजीएमवी जहाजों का इस्तेमाल पुराने और छोटे मिसाइल क्राफ्ट की जगह किया जाएगा। इसके अलावा कुछ कॉर्वेट्स को भी धीरे-धीरे रिप्लेस किया जाएगा। ये नए जहाज ज्यादा आधुनिक सिस्टम से लैस होंगे और समुद्र में तेज और सटीक ऑपरेशन के लिए तैयार किए जा रहे हैं।
कॉन्ग्सबर्ग मैरीटाइम ने कहा है कि वॉटरजेट सिस्टम की डिलीवरी उसी समय के अनुसार होगी, जिस समय जहाजों का निर्माण आगे बढ़ेगा। यानि जैसे-जैसे जहाज तैयार होते जाएंगे, वैसे-वैसे इन सिस्टम्स को इंस्टॉल किया जाएगा। (Indian Navy NGMV Waterjet Deal)

