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Blue Water Diplomacy: विशाखापत्तनम पहुंचे रूस के दो आधुनिक वॉरशिप, गुआम में US के साथ नेवी कर रही अभ्यास

अमेरिका के गुआम स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस पर ‘सी ड्रैगन 2026’ अभ्यास 9 मार्च से शुरू हो चुका है। यह एक बहुराष्ट्रीय एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी पनडुब्बी रोधी अभ्यास है, जिसमें कई देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं...

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📍नई दिल्ली | 17 Mar, 2026, 6:22 PM

Indian Navy Blue Water Diplomacy: एक तरफ भारतीय नौसेना जहां गुआम में अमेरिका के साथ एंटी-सबमरीन वॉरफेयर क्षमता को मजबूत करने के लिए सी ड्रैगन एक्सरसाइज में हिस्सा ले रही है, तो वहीं दूसरी तरफ रूस के दो युद्धपोत भारत के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर पहुंचे हुए हैं। वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव के बीच भारतीय नौसेना की ब्लूवॉटर डिप्लोमेसी ही है, जो एक साथ अलग-अलग देशों के साथ अपने सैन्य संबंधों को संतुलित तरीके से आगे बढ़ा रही है। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

Indian Navy Blue Water Diplomacy: गुआम में शुरू हुई सी ड्रैगन एक्सरसाइज

अमेरिका के गुआम स्थित एंडरसन एयर फोर्स बेस पर ‘सी ड्रैगन 2026’ अभ्यास 9 मार्च से शुरू हो चुका है। यह एक बहुराष्ट्रीय एंटी-सबमरीन वारफेयर यानी पनडुब्बी रोधी अभ्यास है, जिसमें कई देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।

इस अभ्यास में क्वॉड देशों भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया के अलावा न्यूजीलैंड भी शामिल है। यह अभ्यास लगभग तीन सप्ताह यानी 21 मार्च तक चलेगा। इसमें सभी देश अपने-अपने लॉन्ग रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट यानी समुद्री निगरानी विमानों को तैनात कर रहे हैं।

भारतीय नौसेना ने इसमें अपने अत्याधुनिक पी-8आई एंटी-सबमरीन एयरक्राफ्ट को भेजा है। यह विमान समुद्र के भीतर मौजूद पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें ट्रैक करने में सक्षम है। इसके अलावा यह विमान समुद्र की निगरानी और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में भी उपयोगी है। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

200 घंटे से ज्यादा का उड़ान प्रशिक्षण

इस अभ्यास के दौरान पायलट और एयरक्रू को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। शुरुआत में सिमुलेशन के जरिए अभ्यास होता है, जिसमें नकली टारगेट्स को ट्रैक किया जाता है। इसके बाद वास्तविक परिस्थितियों में पनडुब्बियों को खोजने और उनका पीछा करने का अभ्यास कराया जाता है।

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इस पूरे अभ्यास में 200 घंटे से अधिक का उड़ान प्रशिक्षण शामिल है। इसके साथ ही क्लासरूम सेशन भी आयोजित किए जा रहे हैं, जहां अलग-अलग देशों के अधिकारी मिलकर रणनीति और तालमेल पर चर्चा करते हैं।

इस अभ्यास का आयोजन साल 2019 से हर साल किया जा रहा है और इसका उद्देश्य अलग-अलग देशों के बीच बेहतर समन्वय और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना है। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

अमेरिका की नौसेना ने इसमें अपने दो पी-8ए पोसाइडन विमान भेजे हैं, जो अलग-अलग स्क्वाड्रन से आते हैं और पहले जापान के कडेना एयर बेस के जरिए तैनात किए गए हैं। भारतीय नौसेना की ओर से एक पी-8आई विमान शामिल किया गया है, जो इसी प्लेटफॉर्म का भारतीय संस्करण है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में पनडुब्बियों का पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस अभ्यास में जापान ने अपने कावासाकी पी-1 समुद्री निगरानी विमान को इस अभ्यास में भेजा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया की वायु सेना ने दो पी-8ए विमान और करीब 50 प्रशिक्षित कर्मियों को इसमें शामिल किया है। न्यूजीलैंड की ओर से भी एक पी-8ए विमान इस अभ्यास में हिस्सा ले रहा है। इस अभ्यास में शामिल अधिकांश विमान बोइंग पी-8 प्लेटफॉर्म पर आधारित हैं। इन विमानों के मिशन सिस्टम, सेंसर और डेटा लिंक काफी हद तक एक जैसे हैं। इससे अलग-अलग देशों के बीच जानकारी साझा करना आसान हो जाता है। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

विशाखापत्तनम पहुंचे रूसी युद्धपोत

दूसरी ओर, रूस के दो युद्धपोत ‘सोवर्शेन्नी’ (hull 333) और ‘रेजकी’ (hull 343) 14 मार्च को विशाखापत्तनम पहुंचे। ये दोनों जहाज रूस के प्रशांत बेड़े का हिस्सा हैं और आधुनिक मल्टी-रोल कॉर्वेट श्रेणी में आते हैं। ये व्लादिवोस्तोक से 12 फरवरी को लंबी दूरी की तैनाती पर निकले थे और एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई समुद्री इलाकों त्सुशिमा जलडमरूमध्य, पूर्वी चीन सागर और फिलीपीन सागर (जापान द्वारा अपने ईईजेड के पास निगरानी) जैसे इलाकों से होते हुए भारत पहुंचे हैं। इन जहाजों की यात्रा के दौरान जापान के समुद्री क्षेत्र के पास भी इनकी निगरानी की गई थी।

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विशाखापत्तनम पहुंचने के बाद इन जहाजों का स्वागत भारतीय नौसेना और रूस के दूतावास के प्रतिनिधियों द्वारा किया गया। इस दौरान बंदरगाह पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किया गया। इन जहाजों की यह यात्रा एक आधिकारिक “बिजनेस कॉल” के रूप में है, जिसका मतलब है कि यह कोई सैन्य अभ्यास नहीं बल्कि नियमित दौरा है। इस दौरान जहाजों के चालक दल को आराम दिया जाएगा, आवश्यक सामान की आपूर्ति की जाएगी और भारतीय नौसेना के साथ सांस्कृतिक और खेल गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब हाल ही में विशाखापत्तनम में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन जैसे बड़े नौसैनिक कार्यक्रम आयोजित किए गए थे, जिनमें कई देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था। रूस के इन जहाजों का आना भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा संबंधों को भी दर्शाता है। दोनों देश अब रक्षा क्षेत्र में संयुक्त विकास और उत्पादन पर भी काम कर रहे हैं।

इसी बीच भारत ने हाल ही में एक ईरानी युद्धपोत को कोच्चि बंदरगाह पर शरण दी थी, जहां उसके चालक दल को भी सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। यह कदम मानवीय आधार पर उठाया गया था। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

अमेरिका और रूस दोनों के साथ संबंध

भारत लंबे समय से अमेरिका और रूस दोनों के साथ अपने सैन्य संबंध बनाए हुए है। हाल के वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच संयुक्त अभ्यास और सहयोग बढ़ा है। वहीं दूसरी ओर रूस के साथ भारत के रक्षा संबंध कई दशकों पुराने हैं। दोनों देश अब रक्षा क्षेत्र में सह-विकास और सह-उत्पादन पर भी काम कर रहे हैं। (Indian Navy Blue Water Diplomacy)

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