📍विशाखापत्तनम | 7 Feb, 2026, 6:46 PM
IFR MILAN 2026 Indo-Pacific: हिंद महासागर में सजे सैकड़ों युद्धपोत, आसमान में लहराते दर्जनों देशों के झंडे और तट पर उमड़ती भीड़, यह दृश्य केवल सैन्य ताकत का प्रदर्शन नहीं होगा, बल्कि यह भारत की बढ़ती समुद्री कूटनीति का साफ संकेत देगा। एक ही शहर में इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ का आयोजन, इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की भूमिका को नए नजरिये से स्थापित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
IFR MILAN 2026 Indo-Pacific: विशाखापत्तनम में सबसे बड़ा नौसैनिक जमावड़ा
साल 2016 में विशाखापत्तनम के तट पर 70 से ज्यादा भारतीय और विदेशी युद्धपोत एक साथ नजर आए थे। अब, दस साल बाद 2026 में, यह आयोजन पहले से कहीं ज्यादा बड़ा और राजनीतिक रूप से ज्यादा अहम होने जा रहा है। इस बार इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू के साथ-साथ नौसैनिक अभ्यास ‘मिलन’ भी विशाखापत्तनम में ही आयोजित होगा। इसे भारतीय महासागर क्षेत्र के सबसे बड़े नेवल डिप्लॉयमेंट्स में से एक माना जा रहा है। कार्यक्रम के दौरान समुद्र में युद्धपोतों की सलामी के साथ-साथ शहर की सड़कों पर अंतरराष्ट्रीय सिटी परेड और हाई-लेवल मैरीटाइम सेमिनार्स भी होंगी।
बेड़े के निरीक्षण यानी फ्लीट इंस्पेक्शन की परंपरा कोई नई नहीं है। ब्रिटेन के स्पिटहेड रिव्यू से लेकर अमेरिका के ‘ग्रेट व्हाइट फ्लीट’ तक, नौसेनाएं हमेशा अपने जहाजों की कतारों के जरिए दुनिया को राजनीतिक और रणनीतिक संदेश देती रही हैं। भारत ने भी 1953 में पहला प्रेसिडेंट फ्लीट इंस्पेक्शन आयोजित कर यह दिखाया था कि अब देश की नौसेना किसी वायसराय को नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रपति को सलामी देती है। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)
समय के साथ-साथ भारत की समुद्री ताकत लगातार बढ़ती गई। स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत से लेकर नीलगिरी और कोलकाता श्रेणी के युद्धपोतों तक, हर फ्लीट रिव्यू ने यह साबित किया कि भारत समुद्री शक्ति की सीढ़ियां लगातार चढ़ रहा है। 2001 में मुंबई के तट पर हुआ पहला इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और 2016 का विशाखापत्तनम आयोजन इसी लंबी यात्रा के अहम पड़ाव रहे हैं। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)
1995 में पोर्ट ब्लेयर से शुरू हुआ यह मिलन
अगर इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू को नौसैनिक कूटनीति का “शोकेस विंडो” कहा जाए, तो अभ्यास ‘मिलन’ को उसका “वर्कशॉप” कहना गलत नहीं होगा। साल 1995 में पोर्ट ब्लेयर से शुरू हुआ यह अभ्यास शुरुआत में सिर्फ पांच देशों तक सीमित था, लेकिन आज यह 40 से ज्यादा देशों की नौसेनाओं के लिए साझा मंच बन चुका है।
पिछले कुछ वर्षों में ‘मिलन’ ने कॉम्प्लेक्स नेवल एक्सरसाइज, कोआर्डिनेटेड पैट्रोलिंग और मानवीय सहायता व आपदा राहत (HADR) जैसे क्षेत्रों में वास्तविक सहयोग को मजबूत किया है। 2024 में 47 नौसेनाओं की भागीदारी और आईएनएस विक्रांत की मौजूदगी ने यह साफ संकेत दिया कि भारत क्षेत्रीय सुरक्षा ढांचे में एक भरोसेमंद और पसंदीदा साझेदार बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)
आज इंडो-पैसिफिक क्षेत्र तेज सामरिक प्रतिस्पर्धा और जटिल सहयोग का केंद्र बन चुका है। चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी, पाकिस्तान की लगातार समुद्री गतिविधियां और अमेरिकी नौसेना की बदलती प्राथमिकताएं, क्षेत्र के कई देशों को असमंजस में डालती हैं। इसी बीच मालदीव से मॉरीशस और वियतनाम से इंडोनेशिया तक के तटीय देश समुद्री डकैती, अवैध मछली पकड़ने और जलवायु से जुड़ी आपदाओं जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)
“कन्वीनिंग पावर” बनकर उभरा है भारत
ऐसे माहौल में भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी “कन्वीनिंग पावर” बनकर उभरती है, यानी अलग-अलग देशों की नौसेनाओं को एक मंच पर लाने की क्षमता। इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू पारदर्शिता और भरोसे का संदेश देता है, जबकि ‘मिलन’ अभ्यास उस भरोसे को जमीन पर उतारने का काम करता है। किसी भी उभरती शक्ति के लिए यह बेहद अहम होता है कि कितने देश उसके बुलावे पर एक साथ आने को तैयार हैं।
अक्सर यह सवाल भी उठता है कि इतने बड़े आयोजनों पर खर्च करना कितना सही है। आलोचक इन्हें “महंगा तमाशा” कहकर खारिज करते हैं। लेकिन सच्चाई यह है कि समुद्री शक्ति केवल जहाजों और पनडुब्बियों से नहीं बनती, बल्कि साझेदारी, भरोसे और अंतरराष्ट्रीय मौजूदगी से भी बनती है। अगर भारत इन आयोजनों के साथ-साथ अपनी वास्तविक समुद्री क्षमता, दूरदराज समुद्री इलाकों में सतत मौजूदगी और घरेलू शिपबिल्डिंग को मजबूत करता रहा, तो इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और ‘मिलन’ जैसे कार्यक्रम लंबे समय के लिए निवेश साबित होंगे। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)
छोटी और मध्यम नौसेनाओं के लिए यह मंच सिर्फ ट्रेनिंग का जरिया नहीं, बल्कि भारत के साथ स्थायी रिश्ते बनाने का अवसर भी बन सकता है।
फरवरी 2026 में विशाखापत्तनम इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू, अभ्यास ‘मिलन’ और इंडियन ओशन नेवल सिंपोजियम (आईओएनएस) के चीफ्स कॉन्क्लेव की मेजबानी करेगा। समुद्र में कतारबद्ध युद्धपोतों से लेकर शहर की सड़कों पर निकलने वाली अंतरराष्ट्रीय परेड और कूटनीतिक बैठकों तक, हर स्तर पर दुनिया यह परखने की कोशिश करेगी कि भारत सिर्फ शान-ओ-शौकत दिखा रहा है या सचमुच क्षेत्रीय नेतृत्व की ओर बढ़ रहा है।
इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और ‘मिलन’ जैसे आयोजन आने वाले सालों में इंडो-पैसिफिक की शक्ति-संतुलन की कहानी के अहम अध्याय बन सकते हैं। (IFR MILAN 2026 Indo-Pacific)



