📍नई दिल्ली | 11 Dec, 2025, 7:02 PM
DSC A20 Diving Support Craft: भारतीय नौसेना 16 दिसंबर को कोच्चि में अपने पहले स्वदेशी डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट डीएससी ए20 को औपचारिक रूप से कमीशन करने जा रही है। यह कार्यक्रम साउदर्न नेवल कमांड की मौजूदगी में होगा, जहां फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना जहाज को औपचारिक रूप से नौसेना को सौंपेंगे। डीएससी ए20 के कमीशन होने से नौसेना की अंडरवाटर सपोर्ट और डाइविंग क्षमता को मजबूती मिलेगी।

डीएससी ए20, पांच डाइविंग सपोर्ट क्राफ्ट की सीरीज का पहला जहाज है, जिसका निर्माण कोलकाता स्थित टिटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड ने किया है। यह प्लेटफॉर्म पूरी तरह इंडिजिनस डिजाइन और मेड इन इंडिया पहल का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य तटीय जल में डाइविंग मिशन और अंडरवाटर ऑपरेशन करना है। इस शिप में इंटरनेशनल सेफ्टी मानकों के मुताबिक तैयार स्टेट-ऑफ-द-आर्ट डाइविंग सिस्टम लगाए गए हैं।
इस जहाज की सबसे खास बात इसका कैटामरान हल डिजाइन है, जिससे इसे ज्यादा स्थिरता और बेहतर सीकीपिंग मिलती है। इससे जहाज तेज हवा या ऊंची लहरों में भी स्थिर बना रहता है। जहाज का वजन लगभग 390 टन है और इसे इंडियन रजिस्टर ऑफ शिपिंग के नेवल नियमों के मुताबिक बनाया गया है। इस वेसल की हाइड्रोडायनामिक टेस्टिंग और मॉडल एनालिसिस विशाखापत्तनम में स्थित नेवल साइंस एंड टेक्नोलॉजिकल लेबोरेटरी में की गई, ताकि ऑपरेशन के दौरान इसकी परफॉर्मेंस पूरी तरह विश्वसनीय रहे।
🇮🇳⚓ Indian Navy to Commission First Indigenous Diving Support Craft ‘DSC A20’
The Indian Navy will commission DSC A20, the first vessel of the indigenously designed Diving Support Craft series, on 16 Dec 2025 at Kochi under Southern Naval Command. Vice Admiral Sameer Saxena will… pic.twitter.com/Bes7eXzCAk— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) December 11, 2025
यह क्राफ्ट तटीय जल में डाइविंग ऑपरेशन्स के लिए खास तौर पर बनाया गया है। जहाज में स्टेट-ऑफ-द-आर्ट डाइविंग सिस्टम लगाया गया है, जिसमें हाइपरबेरिक चैंबर, सरफेस सप्लाई डाइविंग सिस्टम और एडवांस सेंसर लगे हुए हैं। नोसेना के मुताबिक, इस क्राफ्ट का उद्देश्य पानी के नीचे इंस्पेक्शन, साल्वेज एसिस्टेंस और जहाजों की अंडरवॉटर मरम्मत जैसे कामों को सुरक्षित और तेज बनाना है।
इस क्राफ्ट में नौसेना की कमांड क्लीयरेंस डाइविंग टीम्स को सपोर्ट देने की पूरी क्षमता है। खासकर बंदरगाहों, जहाजों के नीचे, पाइपलाइनों और अंडरवॉटर प्लेटफॉर्म की जांच जैसे मिशनों में यह महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। यह कोच्चि में रहेगा और साउदर्न नेवल कमांड के तहत ऑपरेशन करेगा।


