📍नई दिल्ली | 29 Jan, 2026, 12:07 PM
V-BAT drone Indian Army: भारतीय सेना ने ड्रोन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए अमेरिका की कैलिफोर्निया स्थित डिफेंस टेक्नोलॉजी कंपनी शील्ड एआई (Shield AI) के साथ एक समझौता किया है। इसके तहत भारतीय सेना को वी-बैट नाम के आधुनिक ड्रोन मिलेंगे। यह डील मेक इन इंडिया पहल के तहत की गई है और इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ये ड्रोन आगे चलकर भारत में ही बनाए जाएंगे।
खास बात यह है कि इस समझौते में केवल ड्रोन खरीद ही शामिल नहीं है, बल्कि इसमें अत्याधुनिक ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर ‘हाइवमाइंड’ (Hivemind) का लाइसेंस भी शामिल है। यह सॉफ्टवेयर वी-बैट ड्रोन में इस्तेमाल होता है, क्योंकि यह ड्रोन दुश्मन के जैमिंग, जीपीएस फेल होने या कम्युनिकेशन टूटने जैसी परिस्थितियों में भी खुद से फैसले लेकर मिशन पूरा कर सकता है। (V-BAT drone Indian Army)
V-BAT drone Indian Army: क्या है V-BAT ड्रोन और क्यों है खास
वी-बैट एक ग्रुप-3 क्लास का वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (VTOL) अनमैन्ड एरियल सिस्टम है। आसान भाषा में कहें तो यह ड्रोन बिना रनवे के, बिल्कुल हेलीकॉप्टर की तरह ऊपर उठ सकता है और नीचे उतर सकता है। लेकिन उड़ान के दौरान यह फिक्स्ड-विंग विमान की तरह तेज और लंबे समय तक उड़ान भर सकता है।
भारत जैसे देश के लिए यह खास तौर पर अहम है, क्योंकि यहां हर जगह लंबे रनवे उपलब्ध नहीं हैं। पहाड़ी इलाके, जंगल, रेगिस्तान, समुद्री तट और यहां तक कि जहाजों के डेक से भी इस ड्रोन को उड़ाया जा सकता है।
V-BAT ड्रोन की सबसे बड़ी ताकत इसकी लंबी उड़ान क्षमता है। यह एक बार उड़ान भरने के बाद 12 घंटे से ज्यादा समय तक हवा में रह सकता है। इतने लंबे समय तक उड़ान का मतलब है कि यह दुश्मन की गतिविधियों पर लगातार नजर रख सकता है। (V-BAT drone Indian Army)
किन कामों में होगा V-BAT ड्रोन का इस्तेमाल
भारतीय सेना V-BAT ड्रोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (आईएसआर) मिशन के लिए करेगी। इन ड्रोन की मदद से सीमा पार होने वाली गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा सकेगी और दुश्मन की मूवमेंट को समय रहते पहचाना जा सकेगा। आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस में भी ये ड्रोन अहम भूमिका निभाएंगे, जहां दूर-दराज और संवेदनशील इलाकों में बिना सैनिक भेजे निगरानी संभव होगी। पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों में, जहां पहुंचना मुश्किल होता है, वहां V-BAT ड्रोन लगातार निगरानी रख सकेंगे। इसके अलावा समुद्री सीमाओं और तटीय इलाकों पर नजर रखने में भी इनका उपयोग होगा। सेना के सूत्रों के मुताबिक, हिमालय से लेकर हिंद महासागर तक, भारत की हर भौगोलिक परिस्थिति में ये ड्रोन प्रभावी साबित हो सकते हैं। (V-BAT drone Indian Army)
हाइवमाइंड सॉफ्टवेयर क्यों है गेम-चेंजर
इस पूरी डील का सबसे अहम हिस्सा हाइवमाइंड ऑटोनॉमी सॉफ्टवेयर है। यह शील्ड एआई का बनाया एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम है, जो ड्रोन को काफी हद तक इंसानी दखल के बिना काम करने की ताकत देता है।
आसान भाषा में समझें तो हाइवमाइंड ड्रोन को “सोचने और समझने” की ताकत देता है। अगर युद्ध के दौरान दुश्मन जीपीएस सिग्नल जाम कर दे या ड्रोन का कंट्रोल स्टेशन से संपर्क टूट जाए, तब भी यह ड्रोन अपने आसपास के माहौल को समझ कर खुद से रास्ता चुन सकता है, मिशन को पूरा कर सकता है और सुरक्षित तरीके से वापस लौट सकता है।
आज के आधुनिक युद्ध में, जहां इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे ऑटोनॉमस सिस्टम को बेहद अहम माना जा रहा है। (V-BAT drone Indian Army)
यूक्रेन युद्ध से मिली पहचान
V-BAT ड्रोन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान यूक्रेन युद्ध के दौरान मिली। शुरुआत में जब रूस ने भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग की, तो कई ड्रोन सिस्टम प्रभावित हुए। इसके बाद शील्ड एआई ने V-BAT में हाइवमाइंड सॉफ्टवेयर को पूरी तरह इंटीग्रेट किया।
कंपनी के मुताबिक, इसके बाद यूक्रेन में इन ड्रोन ने दर्जनों मिशन सफलतापूर्वक पूरे किए। साल 2025 में ही इन ड्रोन ने 200 से ज्यादा रूसी टारगेट्स की पहचान की। इनमें एयर डिफेंस सिस्टम, मिलिट्री हेडक्वार्टर और ड्रोन कंट्रोल सेंटर्स शामिल थे। इसलिए इसे भारतीय सेना के लिए भी बेहद उपयोगी माना जा रहा है। (V-BAT drone Indian Army)
हैदराबाद में लगेगा प्लांट
इस डील का एक और बड़ा पहलू भारत में मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ा है। दिसंबर 2025 में शील्ड एआई ने भारत की जेएसडब्ल्यू डिफेंस के साथ मिलकर हैदराबाद के ईएमसी महेश्वरम में एक अत्याधुनिक फैक्ट्री का निर्माण शुरू किया है।
इस प्रोजेक्ट में करीब 90 मिलियन डॉलर, यानी लगभग 750 करोड़ रुपये, का निवेश किया जा रहा है। यह फैक्ट्री सिर्फ भारतीय सेना की जरूरतें पूरी करने के लिए नहीं होगी, बल्कि शील्ड एआई की ग्लोबल प्रोडक्शन हब के रूप में भी काम करेगी। इससे भारत में तकनीकी विशेषज्ञता बढ़ेगी, स्थानीय सप्लाई चेन मजबूत होगी और भविष्य में भारत से दूसरे देशों को ड्रोन निर्यात करने की संभावना भी बनेगी।
शील्ड एआई की स्थापना साल 2015 में हुई थी। इसे अमेरिकी नेवी सील रह चुके ब्रैंडन सैंग ने अपने भाई और एक अन्य सहयोगी के साथ शुरू किया था। शुरुआत में कंपनी ने छोटे ड्रोन बनाए, जिन्हें सैनिकों से पहले सुरंगों और इमारतों में भेजा जाता था ताकि अंदर की स्थिति की जानकारी मिल सके।
बाद में कंपनी ने बड़े और लंबी उड़ान क्षमता वाले ड्रोन प्लेटफॉर्म पर फोकस किया और 2021 में V-BAT ड्रोन को अपने पोर्टफोलियो में शामिल किया। आज शील्ड एआई को दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती डिफेंस स्टार्ट-अप कंपनियों में गिना जाता है और इसकी वैल्यूएशन करीब 5.6 बिलियन डॉलर बताई जाती है। (V-BAT drone Indian Army)
भारत के लिए क्या हैं रणनीतिक मायने
भारतीय सेना के लिए यह डील कई मायनों में बेहद अहम मानी जा रही है। इससे सेना की ड्रोन क्षमता में बड़ा इजाफा होगा और एआई आधारित सैन्य सिस्टम के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। सीमा पर चीन और पाकिस्तान जैसे देशों की बढ़ती ड्रोन गतिविधियों के बीच यह समझौता भारत के लिए एक मजबूत रणनीतिक जवाब माना जा रहा है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि भविष्य की लड़ाइयां केवल टैंक और सैनिकों से नहीं, बल्कि ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के दम पर लड़ी जाएंगी। ऐसे में V-BAT जैसे सिस्टम भारतीय सेना को तकनीकी रूप से आगे रखते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, आने वाले समय में भारतीय सेना ऐसे और एडवांस ड्रोन सिस्टम को अपने बेड़े में शामिल कर सकती है। V-BAT के साथ हाइवमाइंड सॉफ्टवेयर का भारतीय पार्टनर्स के साथ साझा किया जाना देश में अपने खुद के ऑटोनॉमस मिलिटरी सिस्टम डेवलप करने का रास्ता खोल सकता है। (V-BAT drone Indian Army)




