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पहली बार दिखे सूर्यास्त्र के EXTRA और प्रेडेटर हॉक रॉकेट, 300 किमी तक करते हैं मार

आर्मी कमांडर की इस विजिट के EXTRA और प्रेडेटर हॉक मॉडल्स का डिस्प्ले भी किया गया। ये दोनों लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम्स पहली बार इस स्तर पर सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने प्रदर्शित किए गए...

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📍पुणे | 2 Feb, 2026, 2:01 PM

Indian Army Suryastra: आर्मी डे परेड और रिपब्लिक डे परेड में पहली बार दिखा सूर्यास्त्र यानी पल्स (प्रिसाइज एंड यूनिवर्सल लॉन्चिंग सिस्टम) आज भारतीय सेना की लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक क्षमता का नया चेहरा बनता जा रहा है। इसी आधुनिक और स्वदेशी सिस्टम से जुड़े EXTRA और प्रेडेटर हॉक जैसे एडवांस्ड रॉकेट और मिसाइल मॉडल्स को हाल ही में पुणे के चाकन में पहली बार शोकेस किया गया, जहां साउदर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने निबे लिमिटेड की डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का दौरा किया। हाल ही में भारतीय सेना को इमरजेंसी प्रोक्योरमेंट के तहत दो पल्स यानी सूर्यास्त्र यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर की डिलीवरी भी की गई है। (Indian Army Suryastra)

साउदर्न कमांड के आर्मी कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ का यह दौरा ऐसे समय पर हुआ है, जब भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रही है। चाकन स्थित इस फैसिलिटी में आर्मी कमांडर को उन आधुनिक तकनीकों और इंफ्रास्ट्रक्चर के बारे में जानकारी दी गई, जिनकी मदद से देश में ही मिशन-क्रिटिकल डिफेंस इक्विपमेंट तैयार किए जा रहे हैं। (Indian Army Suryastra)

Indian Army Suryastra: एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को किया शोकेस

दौरे के दौरान लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने निबे लिमिटेड की लीडरशिप और टेक्निकल टीम के साथ विस्तृत बातचीत की। उन्हें बताया गया कि कंपनी किस तरह प्रिसिजन कटिंग, ऑटोमेटेड वेल्डिंग, वर्टिकल और सीएनसी मशीनिंग जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रही है।

कंपनी ने यह भी समझाया कि उसकी लार्ज स्ट्रक्चरल असेंबली लाइन किस तरह बड़े और जटिल मिलिटरी स्ट्रक्चर तैयार करने में सक्षम है। इन सुविधाओं की मदद से लॉन्चर असेंबली, स्ट्रक्चरल सब-सिस्टम और अन्य हाई-एंड डिफेंस कंपोनेंट्स बनाए जाते हैं, जिनका इस्तेमाल मिसाइल, रॉकेट और आर्टिलरी सिस्टम्स में होता है। (Indian Army Suryastra)

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EXTRA और प्रेडेटर हॉक को पहली बार किया शोकेस

आर्मी कमांडर की इस विजिट के EXTRA और प्रेडेटर हॉक मॉडल्स का डिस्प्ले भी किया गया। ये दोनों लॉन्ग-रेंज और हाई-प्रिसिजन स्ट्राइक सिस्टम्स पहली बार इस स्तर पर सेना के वरिष्ठ नेतृत्व के सामने प्रदर्शित किए गए।

ये सिस्टम्स मल्टी-कैलिबर यूनिवर्सल लॉन्चर प्लेटफॉर्म का हिस्सा हैं, जिसे भारत में सूर्यास्त्र नाम से जाना जाता है। यह सिस्टम एक ही लॉन्चर से अलग-अलग रेंज और क्षमता वाले रॉकेट और मिसाइल फायर करने की सुविधा देता है। (Indian Army Suryastra)

EXTRA: लंबी दूरी तक सटीक हमला

EXTRA एक 306 एमएम कैलिबर का एक्सटेंडेड रेंज आर्टिलरी रॉकेट है। इसकी मारक क्षमता करीब 150 किलोमीटर तक मानी जाती है। इसमें करीब 120 किलोग्राम का वारहेड लगाया जा सकता है और इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी जबरदस्त सटीक स्ट्राइक क्षमता है। इसका सीईपी यानी सर्कुलर एरर प्रोबेबल 10 मीटर से भी कम बताया जाता है।

इसका मतलब यह है कि यह रॉकेट दुश्मन के हाई-वैल्यू टारगेट्स को बेहद सटीक तरीके से निशाना बना सकता है। एक लॉन्चर पर चार EXTRA रॉकेट्स लगाए जा सकते हैं, जिससे कम समय में कई टारगेट्स पर हमला संभव हो जाता है। (Indian Army Suryastra)

प्रेडेटर हॉक: 300 किलोमीटर तक मार

वहीं प्रेडेटर हॉक को और भी ज्यादा ताकतवर सिस्टम माना जाता है। इसका कैलिबर 370 एमएम है और इसकी रेंज करीब 300 किलोमीटर तक जाती है। यह लगभग एक टैक्टिकल बैलिस्टिक मिसाइल की तरह काम करता है, लेकिन इसे रॉकेट लॉन्चर प्लेटफॉर्म से दागा जाता है।

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प्रेडेटर हॉक में करीब 140 किलोग्राम का यूनिटरी वारहेड होता है और यह मौसम से प्रभावित हुए बिना अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि लॉन्च के बाद महज कुछ ही मिनटों में यह दुश्मन के कमांड सेंटर, एयरफील्ड या अन्य अहम ठिकानों को निशाना बना सकता है। (Indian Army Suryastra)

टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत देश में बनेंगे

EXTRA और प्रेडेटर हॉक मूल रूप से इजराइल की कंपनी एल्बिट सिस्टम्स के सिस्टम्स हैं, लेकिन निबे लिमिटेड ने टेक्नोलॉजी कोलैबोरेशन के तहत इन्हें भारत में मैन्युफैक्चर और इंटीग्रेट करने की क्षमता विकसित की है।

इस मॉडल के तहत लॉन्चर, स्ट्रक्चर और कई अहम कंपोनेंट्स भारत में बनाए जा रहे हैं, जबकि एडवांस्ड फायर कंट्रोल और गाइडेंस सिस्टम्स का इंटीग्रेशन किया जा रहा है। इससे न केवल विदेशी निर्भरता कम हुई है, बल्कि देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को भी मजबूती मिलेगी। (Indian Army Suryastra)

आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत 2047 की दिशा में कदम

लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ ने इस दौरे के दौरान कहा कि भारतीय सेना और निजी रक्षा उद्योग के बीच इस तरह की साझेदारी भविष्य की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आज की जियो-पॉलिटिकल स्थिति में देश को ऐसी क्षमताओं की जरूरत है, जो तेजी से विकसित हों और संकट के समय विदेशों पर निर्भर न रहें। उन्होंने यह भी कहा कि आत्मनिर्भर भारत सिर्फ एक नारा नहीं, बल्कि एक रणनीतिक जरूरत बन चुका है। (Indian Army Suryastra)

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