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गुरुग्राम रोड रेज मामला: रिटायर्ड आर्मी कर्नल पर हमला, सेना ने तुरंत लिया एक्शन

शुरुआत में कर्नल यादव ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि महिला जांच अधिकारी अस्पताल नहीं आईं और उल्टा उन्हें ही दोषी मान रही थीं...

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📍नई दिल्ली/गुरुग्राम | 23 Feb, 2026, 10:31 PM

Gurugram Road Rage Retired Army Officer: गुरुग्राम में 21 फरवरी की रात रिटायर्ड भारतीय सेना के अधिकारी के साथ दिल दहला देने वाला रोड रेज का मामला सामने आया है। यह घटना उस समय हुई जब वह अपने परिवार में मेडिकल इमरजेंसी के चलते मेदांता अस्पताल से अकेले घर लौट रहे थे। रास्ते में एक मामूली सड़क हादसा हुआ, लेकिन बात इतनी बढ़ गई कि दूसरी गाड़ी में बैठे लोगों ने उन पर हमला कर दिया। वहीं, भारतीय सेना ने इस घटना पर तुरंत संज्ञान लेते हुए गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया और मामले में चल रही जांच की जानकारी ली।

Gurugram Road Rage Retired Army Officer: मामूली टक्कर से शुरू हुआ विवाद

जानकारी के मुताबिक, भारतीय सेना के रिटायर्ड कर्नल अनिल यादव की गाड़ी और दूसरी कार के बीच हल्की टक्कर हो गई थी। आमतौर पर ऐसे मामलों में लोग बातचीत कर मामला सुलझा लेते हैं, लेकिन मामला गंभीर हो गया। जैसे ही अधिकारी अपनी गाड़ी से बाहर निकले और नुकसान का जायजा लेने की कोशिश की, तो दूसरी कार में बैठे लोगों ने उनके साथ बहस शुरू कर दी।

कुछ ही देर में यह बहस हिंसा में बदल गई। आरोप है कि उन लोगों ने अधिकारी के साथ मारपीट की, उनकी गाड़ी को नुकसान पहुंचाया और उन्हें चोटें आईं। यह पूरी घटना कुछ ही मिनटों में हुई। उन्होंने आरोप लगाया कि युवकों ने बीयर की बोतलों से उन पर हमला किया, गाड़ी तोड़ी, उन्हें पीटा और 30 हजार रुपये यूपीआई से लूट लिए।

अस्पताल में कराया गया इलाज

हमले के बाद घायल अधिकारी को तुरंत गुरुग्राम के आर्टेमिस हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उनका इलाज किया गया। डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक इलाज किया और कुछ समय निगरानी में रखने के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया।

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शुरुआत में कर्नल यादव ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने लिखा कि महिला जांच अधिकारी अस्पताल नहीं आईं और उल्टा उन्हें ही दोषी मान रही थीं। पोस्ट वायरल होने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया। सेक्टर-50 थाने में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मात्र कुछ घंटों में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। ये सभी 21 फरवरी को बादशाहपुर में एक शादी में आए थे। पंकज, साहिल और अंकित रेवाड़ी की निप्पोन कंपनी में काम करते हैं। विकास बीए दूसरी वर्ष का छात्र है और निखिल बीकॉम दूसरी वर्ष का। छठा आरोपी अभी फरार है। पुलिस पूछताछ कर रही है। आरोपियों ने अपराध कबूल कर लिया है।

सेना ने लिया तुरंत संज्ञान

इस घटना के सामने आते ही भारतीय सेना ने तुरंत संज्ञान लिया। सेना के स्थानीय अधिकारियों ने गुरुग्राम पुलिस से संपर्क किया, ताकि मामले में तेजी से कार्रवाई हो सके और उचित कॉर्डिनेशन बना रहे।

भारतीय सेना ने अपने आधिकारिक बयान में साफ कहा कि वह इस घटना से पूरी तरह अवगत है और अपने वेटरन्स के सम्मान और सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। सेना ने यह भी बताया कि अधिकारी अब सुरक्षित हैं और उनकी स्थिति में सुधार हो रहा है।

क्या कहा सेना के बयान में

भारतीय सेना के आधिकारिक बयान में कहा गया कि 21 फरवरी को गुरुग्राम में रिटायर्ड आर्मी अधिकारी के साथ हुई रोड रेज घटना की जानकारी सेना को है। अधिकारी एक पारिवारिक मेडिकल इमरजेंसी के बाद मेदांता अस्पताल से लौट रहे थे, जब एक मामूली ट्रैफिक घटना के बाद उन पर हमला किया गया।

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सेना ने बताया कि अधिकारी को चोटें आईं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई। स्थानीय सैन्य अधिकारियों ने पुलिस से संपर्क कर मामले में समन्वय सुनिश्चित किया। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और पांच लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। मामला अभी जांच के तहत है।

वेटरन्स की सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने एनसीआर में बढ़ते रोड रेज के मामलों पर चिंता जताई है। कर्नल यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा कि अगर उनकी जगह कोई युवती होती तो क्या होता। उन्होंने कहा, “मैं सैनिक हूं, झेल गया, लेकिन सड़क पर ऐसे लोग हों तो कोई भी सुरक्षित नहीं।”

पूर्व सेना अधिकारी कर्नल रोहित देव ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उनका कहना है कि जो सैनिक देश की रक्षा करता है, वह रिटायर होने के बाद भी अगर अपनी ही सड़कों पर सुरक्षित नहीं है, तो यह बेहद चिंताजनक बात है। उन्होंने कर्नल अनिल यादव पर हुए हमले को शर्मनाक बताया और कहा कि पुलिस की शुरुआती लापरवाही और युवाओं में बढ़ती हिंसा पर गंभीरता से सोचने की जरूरत है। साथ ही उन्होंने वेटरन्स एसोसिएशन से भी इस मुद्दे पर आवाज उठाने की अपील की।

सेना मेडल विजेता ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) दनवीर सिंह ने भी इस घटना को समाज के लिए एक बड़ा सवाल बताया। उन्होंने कहा कि सेना के लोग सीमा पर दुश्मनों से लड़ते हैं, लेकिन अगर घर लौटकर अपनी ही सड़कों पर सुरक्षित न रहें, तो यह समाज की नैतिक गिरावट को दिखाता है। उन्होंने माना कि पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर अच्छा काम किया है, लेकिन सिस्टम में सुधार की जरूरत अब भी बनी हुई है।

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वहीं, राष्ट्रीय वेटरन्स वेलफेयर एसोसिएशन से जुड़े कर्नल एसके सिंह ने इस घटना को सिर्फ एक मामला नहीं, बल्कि वेटरन्स के प्रति बढ़ते अपमान का संकेत बताया। उनका कहना है कि सैनिक देश के लिए अपना खून-पसीना बहाते हैं, लेकिन नागरिक जीवन में उन्हें पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिल रही। उन्होंने गुरुग्राम पुलिस की त्वरित कार्रवाई की सराहना की, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि एनसीआर में रोड रेज के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जिसे रोकने के लिए सरकार को वेटरन्स के लिए एक विशेष सुरक्षा नीति बनाने पर विचार करना चाहिए।

वहीं, मेजर जनरल (रिटायर्ड) वी.के. शर्मा ने भी इस घटना को पूरे वेटरन समुदाय के लिए झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि सैनिक भले ही रिटायर हो जाए, लेकिन उसकी सेवा और पहचान कभी खत्म नहीं होती। ऐसे में कर्नल अनिल यादव पर हमला बेहद गंभीर है। उन्होंने खास तौर पर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आम नागरिकों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होंगे। उन्होंने सेना के आधिकारिक बयान की सराहना की, लेकिन यह भी कहा कि अब जरूरी है कि दोषियों को जल्दी और सख्त सजा मिले, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

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