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संसद में जनरल नरवणे के संस्मरण को लेकर बड़ा बवाल, राहुल गांधी के बयान पर सदन में हंगामा

राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि संसद में किसी ऐसी किताब या संस्मरण का हवाला नहीं दिया जा सकता, जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है...

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📍नई दिल्ली | 2 Feb, 2026, 3:24 PM

General Naravane memoir controversy: लोकसभा में बजट सत्र के दौरान सोमवार, 2 फरवरी को उस वक्त बड़ा राजनीतिक हंगामा देखने को मिला, जब राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव यानी मोशन ऑफ थैंक्स पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे के एक कथित संस्मरण से जुड़ा हवाला दिया। इस पर सत्ता पक्ष ने कड़ा विरोध जताया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तथा गृह मंत्री अमित शाह ने इसे संसद की मर्यादा और नियमों के खिलाफ बताया।

यह पूरा विवाद एक मैगजीन आर्टिकल से जुड़ा है, जो जनरल नरवणे के अब तक अप्रकाशित संस्मरण पर आधारित बताया जा रहा है। इस आर्टिकल को लेकर पहले से ही राजनीतिक हलकों में चर्चा थी, लेकिन जब इसका हवाला नेताा प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने संसद के पटल पर दिया, तो इस पर बवाल मच गया। (General Naravane memoir controversy)

General Naravane memoir controversy: किस आर्टिकल से शुरू हुआ विवाद

1 फरवरी को एक अंग्रेजी मैगजीन में “नरवणेज मोमेंट ऑफ ट्रुथ” शीर्षक से एक लेख प्रकाशित हुआ। इस लेख में दावा किया गया कि यह पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे के अभी तक प्रकाशित न हुए संस्मरण पर आधारित है। लेख में भारत-चीन सीमा से जुड़े कुछ घटनाक्रमों, खासकर डोकलाम गतिरोध और गलवान घाटी संघर्ष का उल्लेख किया गया था।

लेख में यह लिखा गया कि 2020 में हुए गलवान संघर्ष के दौरान सीमा पर हालात को लेकर सरकार और सेना के आकलन में अंतर था और कुछ मौकों पर सरकार ने स्थिति को अलग तरीके से पेश किया। यही बातें राजनीतिक तौर पर संवेदनशील मानी गईं, क्योंकि सीमा और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे संसद में हमेशा बेहद गंभीर माने जाते हैं। (General Naravane memoir controversy)

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लोकसभा में राहुल गांधी का बयान

मोशन ऑफ थैंक्स पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अपने भाषण में इस लेख का हवाला दिया। उन्होंने सदन में मैगजीन की प्रिंटेड कॉपी दिखाते हुए कहा कि पूर्व आर्मी चीफ के संस्मरण में सीमा हालात को लेकर ऐसे तथ्य बताए गए हैं, जो सरकार के आधिकारिक दावों से मेल नहीं खाते।

राहुल गांधी ने कहा कि अगर सरकार को सच से डर नहीं है, तो उन्हें यह बातें सदन में पढ़ने दी जानी चाहिए। उन्होंने चीन सीमा से जुड़े मुद्दों, गलवान घाटी की घटना और सरकार के “एक इंच भी जमीन नहीं गई” वाले बयान पर सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने अग्निपथ योजना को लेकर भी टिप्पणी की और कहा कि यह फैसला सेना पर अचानक थोपा गया। (General Naravane memoir controversy)

क्यों भड़का सत्ता पक्ष

राहुल गांधी के बयान के तुरंत बाद सत्ता पक्ष के सांसदों ने जोरदार आपत्ति जताई। उनका कहना था कि संसद में किसी ऐसी किताब या संस्मरण का हवाला नहीं दिया जा सकता, जो अभी प्रकाशित ही नहीं हुई है और जिसकी प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं हुई है।

सत्ता पक्ष का तर्क था कि अनऑथेंटिकेटेड यानी गैर-प्रमाणित स्रोतों से कोट करना संसद के नियमों के खिलाफ है। हंगामा इतना बढ़ गया कि कई सांसद अपनी सीटों से खड़े हो गए और सदन में शोर-शराबा शुरू हो गया। (General Naravane memoir controversy)

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स्पीकर को करना पड़ा हस्तक्षेप

हंगामे के बीच लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हस्तक्षेप करना पड़ा। उन्होंने राहुल गांधी से कहा कि सदन के नियमों के तहत किसी अप्रकाशित और अप्रमाणित स्रोत से उद्धरण पढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती। स्पीकर ने बार-बार सदन को शांत करने की कोशिश की, लेकिन हंगामा कुछ देर तक चलता रहा।

आखिरकार, स्पीकर ने राहुल गांधी से अपना भाषण समेटने और अगले वक्ता को बोलने का आग्रह किया, जिसके बाद संसद 3 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। लेकिन जब 3 बजे जब संसद शुरू हुई तो फिर से राहुल गांधी ने उस विषय पर बोलना चाहा, जिसके बाद हंगामा बढ़ गया और स्पीकर ने संसद को चार बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। (General Naravane memoir controversy)

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा संसदीय नियमों के खिलाफ

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सदन में स्पष्ट शब्दों में कहा कि नेता प्रतिपक्ष को ऐसे संस्मरण से कोट नहीं करना चाहिए, जो अभी प्रकाशित नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि यह न केवल नियमों के खिलाफ है, बल्कि सेना और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील विषयों पर भ्रम फैलाने जैसा भी है। उन्होंने दोहराया कि सरकार ने पहले भी संसद में साफ किया है कि सीमा पर भारत की एक इंच जमीन भी नहीं गई है।

गृह मंत्री अमित शाह ने जताया कड़ा ऐतराज

गृह मंत्री अमित शाह ने भी सदन में इस मुद्दे पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने स्पीकर से अपील की कि अनपब्लिश्ड और अनवेरिफाइड सामग्री को संसद की कार्यवाही का हिस्सा न बनने दिया जाए।

बाद में गृह मंत्री ने कहा कि संसद का विशेषाधिकार राष्ट्रीय हित में जिम्मेदार व्यवहार की अपेक्षा करता है। उनका कहना था कि सेना और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर गैर-जिम्मेदार बयान देश के खिलाफ नकारात्मक माहौल बना सकते हैं। (General Naravane memoir controversy)

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अभी तक अप्रकाशित है जनरल एमएम नरवणे की किताब

दरअसल यह पूरा मामला पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की एक अप्रकाशित आत्मकथा से जुड़ा है, जिसे लेकर संसद में विवाद हुआ। जनरल एमएम नरवणे की किताब का नाम “फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी: एन ऑटोबॉयोग्राफी” है, जिसे पेंग्विन रैंडम हाउस प्रकाशित करने वाली थी, लेकिन अभी तक यह किताब बाजार में नहीं आई है।

दरअसल, नियमों के मुताबिक पूर्व सेना प्रमुखों को अपनी किताब प्रकाशित करने से पहले रक्षा मंत्रालय से मंजूरी लेनी होती है। यह मंजूरी इसलिए जरूरी होती है ताकि कोई संवेदनशील या गोपनीय जानकारी सार्वजनिक न हो। जनरल नरवणे की यह किताब भी इसी मंजूरी के इंतजार में अटकी हुई है।

इस किताब में गलवान वैली संघर्ष, डोकलाम स्टैंडऑफ, अग्निपथ स्कीम और चीन सीमा से जुड़े अनुभवों का जिक्र है। कुछ अंश पहले मीडिया में आए थे, जिनमें सरकार की नीतियों पर सवाल उठते दिखे। इन्हीं अंशों पर आधारित एक मैगजीन लेख का हवाला राहुल गांधी ने संसद में दिया, जिससे हंगामा खड़ा हो गया। (General Naravane memoir controversy)

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