📍नासिक/पुणे | 21 Jan, 2026, 7:58 PM
Exercise TOPCHI 2026: भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आधुनिक युद्ध में उसकी भूमिका कितनी निर्णायक है। महाराष्ट्र के देवलाली फील्ड फायरिंग रेंज में 21 जनवरी को आयोजित एक्सरसाइज तोपची 2026 में भारतीय आर्टिलरी ने अपनी फायरपावर, तकनीकी क्षमता और ऑपरेशनल तैयारी को दिखाया। यह अभ्यास हर साल स्कूल ऑफ आर्टिलरी द्वारा आयोजित किया जाता है, जिसमें फायरपावर डेमॉन्स्ट्रेशन और ट्रेनिंग इवेंट के साथ सेना की अग्नि शक्ति को जमीनी स्तर पर परखा और प्रदर्शित किया जाता है।
Exercise TOPCHI 2026: बीएसएफ और भारतीय नौसेना के जवानों के साथ भागीदारी
इस साल का अभ्यास इसलिए खास रहा क्योंकि इसमें न सिर्फ सेना की आधुनिक और स्वदेशी तोपखाना प्रणालियों ने हिस्सा लिया, बल्कि पहली बार सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारतीय नौसेना के जवानों ने भी ड्रोन के साथ भागीदारी की। जो इस बात का संकेत है कि भविष्य के युद्ध सेना केवल अकेले नहीं लड़ेगी बल्कि बल्कि जॉइंट और इंटीग्रेटेड ऑपरेशंस की मदद से लड़े जाएंगे। (Exercise TOPCHI 2026)
एक्सरसाइज तोपची 2026 का आयोजन लेफ्टिनेंट जनरल एनएस सरना के नेतृत्व में किया गया, जो स्कूल ऑफ आर्टिलरी के कमांडेंट और आर्टिलरी रेजिमेंट के कर्नल कमांडेंट भी हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, वेलिंग्टन के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल मनीष एरी थे। इस अभ्यास को देखने के लिए डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और डिफेंस सर्विसेज टेक्निकल स्टाफ कोर्स के स्टूडेंट ऑफिसर्स, नेपाल आर्मी कमांड एंड स्टाफ कॉलेज के अधिकारी, भारतीय सेना के वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि, स्थानीय नागरिक और महाराष्ट्र के विभिन्न स्कूल-कॉलेजों के छात्र मौजूद रहे। (Exercise TOPCHI 2026)
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— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) January 21, 2026
अभ्यास के दौरान यह दिखाया गया कि किस तरह आधुनिक युद्ध में फायरपावर और सर्विलांस टेक्नोलॉजी का सटीक तालमेल जरूरी है। तोप, मोर्टार, रॉकेट सिस्टम, ड्रोन और एविएशन एसेट्स को एक साथ जोड़कर लाइव फायरिंग की गई। यह केवल हथियार चलाने का प्रदर्शन नहीं था, बल्कि यह संदेश भी था कि भारतीय सेना नेटवर्क-सेंट्रिक वॉरफेयर की दिशा में कितनी आगे बढ़ चुकी है। (Exercise TOPCHI 2026)
इस अभ्यास का सबसे बड़ा आकर्षण स्वदेशी और मॉडर्न आर्टिलरी सिस्टम्स की लाइव फायरिंग रही। के-9 वज्र सेल्फ प्रोपेल्ड गन ने अपनी तेज रफ्तार और लंबी मारक रेंज से सभी को प्रभावित किया। इसके साथ ही पहाड़ी इलाकों में तैनाती के लिए बेहद अहम एम-777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर ने अपनी सटीक फायरिंग का प्रदर्शन किया। पुराने लेकिन भरोसेमंद 155 एमएम एफएच-77बी02 बोफोर्स, स्वदेशी धनुष गन, 105 एमएम इंडियन फील्ड गन, लाइट फील्ड गन, 120 एमएम मोर्टार, ग्रैड बीएम-21 और पूरी तरह स्वदेशी पिनाका मल्टीपल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम ने मिलकर यह दिखा दिया कि भारतीय आर्टिलरी किसी भी चुनौती के लिए तैयार है। (Exercise TOPCHI 2026)
पिनाका रॉकेट सिस्टम की फायरिंग के दौरान आसमान में गूंज और जमीन पर कंपन साफ महसूस किया गया। यह वही सिस्टम है, जिसने हाल के वर्षों में भारतीय सेना की लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता को नई ऊंचाई दी है। अभ्यास में यह भी दिखाया गया कि ड्रोन के जरिए टारगेट की पहचान कर किस तरह सटीक और टाइम-बाउंड फायरिंग की जाती है।
इस साल अभ्यास में एक और नया और अहम पहलू देखने को मिला। पहली बार बीएसएफ की गन डिटैचमेंट्स और भारतीय नौसेना के सेलर्स ने ड्रोन के साथ हिस्सा लिया। इससे यह साफ हो गया कि सीमाओं की सुरक्षा और भविष्य के युद्धों में विभिन्न बलों के बीच तालमेल कितना जरूरी होता जा रहा है। इसके अलावा, पैराशूट रेजिमेंट के पैराट्रूपर्स ने पैरामोटर और हैंग ग्लाइडर के साथ अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन किया। (Exercise TOPCHI 2026)
एक्सरसाइज तोपची 2026 ने यह भी दिखाया कि भारतीय सेना किस तरह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में आगे बढ़ रही है। अभ्यास में शामिल अधिकांश हथियार और प्रणालियां स्वदेशी थीं या भारत में ही निर्मित और अपग्रेड की गई थीं। यह दिखाता है कि सेना अब विदेशी निर्भरता को कम करते हुए अपने संसाधनों पर भरोसा बढ़ा रही है।
इस पूरे अभ्यास का उद्देश्य केवल प्रदर्शन नहीं था, बल्कि युवा अधिकारियों और भविष्य के सैन्य नेतृत्व को आधुनिक युद्ध की वास्तविक तस्वीर दिखाना भी था। नेपाल आर्मी के अधिकारियों की मौजूदगी ने यह संदेश दिया कि भारत क्षेत्रीय सहयोग और सैन्य प्रशिक्षण में भी अहम भूमिका निभा रहा है। (Exercise TOPCHI 2026)



