📍पूंछ, जम्मू-कश्मीर | 25 seconds ago
Army Chief Poonch Visit: जम्मू-कश्मीर का पूंछ जिला हमेशा से भारतीय सेना के लिए रणनीतिक रूप से अहम रहा है। लाइन ऑफ कंट्रोल के पास बसे इस इलाके में सेना की तैनाती सिर्फ सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां सेना और आम लोगों के बीच एक गहरा रिश्ता भी है। जिसकी एक झलक शनिवार को देखने को मिली, जब भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी पूंछ पहुंचे।
भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी फॉरवर्ड इलाकों में तैनात जवानों की ऑपरेशनल तैयारी की समीक्षा करने पहुंचे थे, इस दौरान उन्होंने अपने पुराने साथियों से मुलाकात भी की।
Army Chief Poonch Visit: फॉरवर्ड एरिया में जवानों से मुलाकात
पूंछ पहुंचने के बाद जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने लाइन ऑफ कंट्रोल के पास तैनात जवानों से सीधे बातचीत की। उन्होंने सैनिकों की तैनाती, सतर्कता और तैयारियों का जायजा लिया। सेना प्रमुख ने जवानों के ऊंचे मनोबल, अनुशासन और प्रोफेशनल रवैये की सराहना की।
उन्होंने जवानों से कहा कि मौजूदा सुरक्षा हालात में उनकी भूमिका बेहद अहम है और देश को उन पर पूरा भरोसा है। इस तरह की मुलाकातें जवानों का हौसला बढ़ाती हैं, क्योंकि उन्हें यह एहसास होता है कि सेना का शीर्ष नेतृत्व उनकी मेहनत और चुनौतियों को समझता है। (Army Chief Poonch Visit)
🇮🇳 Old comrades, lasting bonds in Poonch 🇮🇳
During his visit to forward areas in Poonch, Jammu & Kashmir, Army Chief General Upendra Dwivedi reviewed the operational preparedness of troops and interacted with soldiers deployed at forward posts, praising their high morale and… pic.twitter.com/FxuztEO4zu— Raksha Samachar | रक्षा समाचार 🇮🇳 (@RakshaSamachar) February 7, 2026
कामसार गांव में की मुलाकात
इस दौरे के दौरान जनरल द्विवेदी पूंछ के कामसार गांव पहुंचे। यहां उनकी मुलाकात रिटायर्ड सुबेदार (ऑनरेरी कैप्टन) परवेज अहमद से हुई। परवेज अहमद जनरल द्विवेदी के पुराने साथी रहे हैं।
जनरल उपेंद्र द्विवेदी और परवेज अहमद ने 18 जम्मू एंड कश्मीर राइफल्स में साथ काम किया था। खासकर 2002 से 2005 के बीच, जब जनरल द्विवेदी इस बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर थे, उस समय दोनों ने कई मुश्किल हालात में एक साथ देश की सेवा की। कश्मीर में यह दौर काफी संवेदनशील माना जाता है, जब आतंकवाद विरोधी ऑपरेशंस चरम पर थे।
सालों बाद जब दोनों मिले तो काफी भावुक हो गए। भारतीय सेना की यह खूबी है यहां रिश्ता सिर्फ ड्यूटी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वह जिंदगी भर का साथ भी बन जाता है। (Army Chief Poonch Visit)
मार्च 1991 में भारतीय सेना की थी जॉइन
सुबेदार परवेज अहमद ने मार्च 1991 में भारतीय सेना जॉइन की थी। करीब 28 साल की सेवा के बाद वे मार्च 2019 में रिटायर हुए। अपने करियर के दौरान उन्होंने कई ऑपरेशनल जिम्मेदारियां निभाईं और ट्रेनिंग संस्थानों में इंस्ट्रक्टर के तौर पर भी काम किया।
सेना में रहते हुए उन्होंने कई स्पेशलाइज्ड कोर्स पूरे किए और अपनी मेहनत और अनुशासन के लिए सराहना भी पाई। रिटायरमेंट के बाद भी उनका रिश्ता सेना से खत्म नहीं हुआ। (Army Chief Poonch Visit)
ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका
रिटायर होने के बाद भी परवेज अहमद स्थानीय इलाके में सक्रिय रहे। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जब सुरक्षा हालात काफी संवेदनशील थे, उन्होंने तैनात जवानों की हर संभव मदद की।
उन्होंने लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, स्थानीय समन्वय और इलाके की जानकारी के जरिए सेना को सहयोग दिया। यह सब उन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर किया। उनकी स्थानीय पहचान और यूनिट के साथ पुराने संबंधों की वजह से सेना को काफी मदद मिली। (Army Chief Poonch Visit)
वेटरन अचीवर अवार्ड से सम्मानित
इन्हीं योगदानों को देखते हुए जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने परवेज अहमद को वेटरन अचीवर अवार्ड से सम्मानित किया। इस मौके पर उनके परिवार के सदस्य, पूर्व सैनिक और स्थानीय लोग भी मौजूद थे। यह सम्मान सिर्फ एक व्यक्ति के लिए नहीं था, बल्कि उन सभी वेटरन्स के लिए था, जो रिटायरमेंट के बाद भी देश और समाज के लिए योगदान देते रहते हैं।
स्थानीय लोगों से किया संवाद
इस यात्रा के दौरान सेना प्रमुख ने अन्य वेटरन्स, महिलाओं और बच्चों से भी मुलाकात की। बातचीत पूरी तरह अनौपचारिक रही। लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और सेना के प्रति अपना भरोसा जताया।
पूंछ जैसे सीमावर्ती इलाकों में सेना सिर्फ एक सुरक्षा बल नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होती है। यहां लगभग हर परिवार का कोई न कोई सदस्य सेना से जुड़ा रहा है। (Army Chief Poonch Visit)


