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गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगा अर्जुन टैंक का नया अवतार, जानें क्या-क्या हुए बदलाव?

अर्जुन टैंक में कुल चार सदस्यीय क्रू होता है। इसमें कमांडर, ड्राइवर, गनर और ऑपरेटर या लोडर शामिल होते हैं। ड्रोन को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी ऑपरेटर की होती है...

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📍नई दिल्ली | 23 Jan, 2026, 11:01 PM

Arjun Tank Republic Day 2026: 26 जनवरी को दिल्ली के कर्तव्य पथ पर हर भारतीय की नजर भारतीय सेना पर होगी। वहीं, इस बार गणतंत्र दिवस परेड में भारत के मुख्य युद्धक टैंक अर्जुन की खास मौजूदगी होगी। हालांकि यह टैंक पहले भी कई बार गणतंत्र दिवस परेड का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इस बार की गणतंत्र दिवस परेड में अर्जुन टैंक की मौजूदगी कुछ अलग है। भारतीय सेना ने आधुनिक युद्ध के नए खतरों को कितनी गंभीरता से समझते हुए और उनसे निपटने के लिए किस तरह जमीन पर ही समाधान तैयार किए हैं।

Arjun Tank Republic Day 2026: मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से किए बदलाव

भारतीय सेना का यह स्वदेशी मेन बैटल टैंक (एमबीटी) इससे पहले भी कई बार कर्तव्य पथ पर दिख चुका है। लेकिन इस बार इसकी पहचान सिर्फ एक स्वदेशी मुख्य युद्धक टैंक के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे प्लेटफॉर्म के तौर पर होगी, जिसे मॉडर्न वॉरफेयर के हिसाब से बदलाव किए गए हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक अब सीधे तौर पर भारतीय टैंकों में दिखाई देने लगे हैं।

भारतीय सेना की आर्मर्ड डिवीजन के लिए अर्जुन एक भरोसेमंद हथियार रहा है। यह थर्ड-जनरेशन एमबीटी-1 टैंक पहले ही अपनी ताकत, सटीकता और मजबूती साबित कर चुका है। हाल के सालों में दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते लेकिन घातक ड्रोन भारी टैंकों के लिए बड़ा खतरा बन गए हैं। ड्रोन आमतौर पर टैंक के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाते हैं, क्योंकि वहां का कवच सामने और साइड की तुलना में पतला होता है। इसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अर्जुन टैंक में एंटी-ड्रोन सुधार किए हैं। (Arjun Tank Republic Day 2026)

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Arjun Tank Republic Day 2026
Arjun Tank Republic Day 2026: Indian Army showcases upgraded MBT with anti-drone protection

ड्रोन युग के लिए तैयार अर्जुन टैंक

इसी खतरे को ध्यान में रखते हुए अर्जुन टैंक में कुछ अहम फील्ड-लेवल बदलाव किए गए हैं, जो इस साल गणतंत्र दिवस परेड में साफ नजर आएंगे। सबसे पहली चीज जो लोगों की नजर में आएगी, वह है टैंक के ऊपर लगाया गया कोप-केज, यानी तार की जाली। यह साधारण दिखने वाला स्ट्रक्चर असल में टैंक के लिए एक अतिरिक्त सुरक्षा कवच है। ड्रोन से गिराए गए हथियार या टॉप-अटैक वारहेड जब इस जाली से टकराते हैं, तो वे या तो समय से पहले फट जाते हैं या उनकी दिशा बदल जाती है। इससे टैंक के अंदर बैठे क्रू की जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है।

पश्चिमी सेक्टर में तैनात 75 आर्मर्ड रेजिमेंट के मेजर हितेश मेहता इस साल परेड में शामिल होने वाले एकमात्र अर्जुन टैंक के कमांडर हैं। वह बताते हैं कि यह कम लागत वाला लेकिन बेहद असरदार समाधान है। उनके मुताबिक, ऐसे बैटलफील्ड में जहां हर समय ऊपर से खतरा बना रहता है, यह जाली क्रू का भरोसा बढ़ाती है और उन्हें ज्यादा सुरक्षित महसूस कराती है। इसे तेजी से किसी भी टैंक पर लगाया जा सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन पर अब ड्रोन भी होंगे तैनात

ड्रोन खतरे से निपटने के लिए सिर्फ बचाव ही नहीं, बल्कि हमला भी जरूरी है। इसी सोच के तहत अर्जुन टैंक को अब ड्रोन से लैस किया गया है। टैंक पर दो तरह के ड्रोन लगाए गए हैं। पहला ड्रोन हालात की जानकारी लेने के लिए इस्तेमाल होता है। इसकी उड़ान क्षमता करीब 25 से 30 मिनट की है और यह टैंक से कई किलोमीटर दूर जाकर इलाके की स्थिति की जानकारी दे सकता है। कम विजिबिलिटी वाले इलाकों में यह ड्रोन आंखों और कानों की तरह काम करता है।

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मेजर मेहता ने बताया कि अगर टैंक किसी सीमित या खतरनाक इलाके में फंसा हो, तो यह ड्रोन उड़ाकर आगे के हालात देखे जा सकते हैं, जिससे बिना जोखिम लिए सही फैसला किया जा सके।

दूसरा ड्रोन कामिकाजे ड्रोन है। इसमें कम से कम 5 किलोग्राम पेलोड ले जाने की क्षमता है। इसका इस्तेमाल लाइन-ऑफ-साइट से बाहर मौजूद टारगेट पर हमला करने के लिए किया जा सकता है। यानी अब टैंक सिर्फ सामने दिख रहे खतरे तक सीमित नहीं है, बल्कि दूर बैठे दुश्मन को भी निशाना बना सकता है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

क्रू की क्या हैं जिम्मेदारियां

अर्जुन टैंक में कुल चार सदस्यीय क्रू होता है। इसमें कमांडर, ड्राइवर, गनर और ऑपरेटर या लोडर शामिल होते हैं। ड्रोन को संभालने की मुख्य जिम्मेदारी ऑपरेटर की होती है, लेकिन जरूरत पड़ने पर कमांडर भी इसे कंट्रोल कर सकता है। वहीं, आधुनिक टैंक सिर्फ भारी हथियार नहीं, बल्कि मल्टी-डोमेन प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।

अर्जुन मूल रूप से 120 मिमी की पावरफुल गन से लैस है, जो दुश्मन के टैंकों और ठिकानों के लिए एक बड़ा खतरा मानी जाती है। अब इसके साथ ड्रोन आधारित ऑफेंसिव और डिफेंसिव जुगाड़ जुड़ जाने से इसकी भूमिका और व्यापक हो गई है। भारतीय सेना भविष्य में टैंक क्रू को एंटी-ड्रोन गन देने पर भी विचार कर रही है, ताकि ड्रोन से आने वाले खतरे को मौके पर ही रोका जा सके। (Arjun Tank Republic Day 2026)

अर्जुन में किए 70 से अधिक अहम सुधार

अर्जुन एमके-1ए भारत का एडवांस मेन बैटल टैंक है, जिसके लिए भारतीय सेना ने 118 यूनिट्स का ऑर्डर दिया था। इस टैंक में डीआरडीओ ने 70 से अधिक अहम सुधार किए थे। इनमें कमांडर के लिए बेहतर पैनोरमिक साइट, रिमोट कंट्रोल्ड वेपन स्टेशन, मजबूत एक्सप्लोसिव रिएक्टिव आर्मर, आधुनिक थर्मल इमेजिंग, नाइट विजन और ऑटोमैटिक टारगेट ट्रैकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हैं। इसके अलावा टैंक की मोबिलिटी और ट्रांसमिशन सिस्टम को भी बेहतर बनाया गया है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

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टी-90 टैंक में भी बदलाव

गणतंत्र दिवस परेड में सिर्फ अर्जुन ही नहीं, बल्कि टी-90 टैंक भी शामिल होंगे। इन टैंकों में भी इसी तरह के बॉडी में बदलाव किए गए हैं, ताकि ड्रोन और टॉप-अटैक हथियारों से बचाव किया जा सके। सूत्रों का कहना है कि भारतीय सेना ने ड्रोन को अब अस्थायी खतरा नहीं, बल्कि भविष्य के युद्ध का स्थायी हिस्सा मान लिया है।

दुनिया भर में यह देखा गया है कि सस्ते ड्रोन, जिनकी कीमत टैंक के मुकाबले बेहद कम होती है, ऊपर से हमला कर भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। टैंकों का फ्रंट और साइड आर्मर भले ही मजबूत हो, लेकिन ऊपर का हिस्सा अपेक्षाकृत कमजोर होता है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर ड्रोन सटीक वार करते हैं। यही वजह है कि अब टैंक डिजाइन और इस्तेमाल दोनों में बदलाव हो रहा है। (Arjun Tank Republic Day 2026)

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  • गणतंत्र दिवस परेड में दिखेगा अर्जुन टैंक का नया अवतार, जानें क्या-क्या हुए बदलाव?

    हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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हरेंद्र चौधरी रक्षा पत्रकारिता (Defence Journalism) में सक्रिय हैं और RakshaSamachar.com से जुड़े हैं। वे लंबे समय से भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना से जुड़ी रणनीतिक खबरों, रक्षा नीतियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों को कवर कर रहे हैं। पत्रकारिता के अपने करियर में हरेंद्र ने संसद की गतिविधियों, सैन्य अभियानों, भारत-पाक और भारत-चीन सीमा विवाद, रक्षा खरीद और ‘मेक इन इंडिया’ रक्षा परियोजनाओं पर विस्तृत लेख लिखे हैं। वे रक्षा मामलों की गहरी समझ और विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के लिए जाने जाते हैं।

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