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तेजस एमके-1ए पर HAL का बड़ा अपडेट, पांच फाइटर जेट तैयार, मार्च 2026 तक IAF को डिलीवरी

एचएएल चीफ के मुताबिक, जिन पांच तेजस एमके-1ए विमानों की बात हो रही है, उन पर एयर-टू-एयर हथियारों के ट्रायल, मिसाइल फायरिंग और जरूरी फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं...

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📍नई दिल्ली | 28 Jan, 2026, 4:59 PM

Tejas Mk-1A delivery: स्वदेशी फाइटर जेट तेजस एमके-1ए को लेकर हो रही देरी के बीच हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की ओर से एक अहम बयान सामने आया है। एचएएल के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. डी.के. सुनील ने कहा है कि तेजस एमके-1ए के पांच विमान पूरी तरह तैयार हैं और इन पर जरूरी फायरिंग और मिसाइल ट्रायल पूरे किए जा चुके हैं। हालांकि उन्हें डिलीवरी की कोई तय तारीख नहीं बताई है।

एचएएल अब भारतीय वायुसेना से संपर्क करेगा ताकि इन पांच विमानों को मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान ही वायुसेना में शामिल किया जा सके। अगर यह होता है, तो यह तेजस एमके-1ए प्रोग्राम के लिए एक बड़ा मोड़ माना जाएगा।

Tejas Mk-1A delivery: ट्रायल पूरे, इंडक्शन की प्रक्रिया शुरू

एचएएल चीफ के मुताबिक, जिन पांच तेजस एमके-1ए विमानों की बात हो रही है, उन पर एयर-टू-एयर हथियारों के ट्रायल, मिसाइल फायरिंग और जरूरी फ्लाइट टेस्ट सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। इन विमानों को ऑपरेशनल जरूरतों के हिसाब से तैयार किया गया है और अब वे वायुसेना में शामिल किए जाने के लिए तैयार हैं।

तेजस एमके-1ए, तेजस के पुराने वर्जन की तुलना में कहीं ज्यादा एडवांस है। इसमें एईएसए रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम, आधुनिक एवियोनिक्स और ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता जैसे कई अहम अपग्रेड शामिल हैं।

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वायुसेना के लिए क्यों अहम है तेजस एमके-1ए

भारतीय वायुसेना इस समय फाइटर स्क्वाड्रन की कमी से जूझ रही है। कई पुराने विमान रिटायर हो चुके हैं और कुछ को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। तेजस एमके-1ए को खास तौर पर पुराने मिग-21 विमानों की जगह लेने के लिए तैयार किया गया है।

ऐसे में तेजस एमके-1ए की हर डिलीवरी वायुसेना के लिए ऑपरेशनल तौर पर बेहद अहम है। लेकिन पिछले कुछ सालों में इस प्रोग्राम की समयसीमा बार-बार आगे खिसकती रही है। पहले अक्टूबर में डिलीवरी की बात कही गई, फिर 2025 के अंत तक का भरोसा दिया गया और बाद में मार्च 2026 तक डिलीवरी करने की बात कही गई है।

देरी की यह है वजह

डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, तेजस एमके-1ए की डिलीवरी में देरी की सबसे बड़ी वजह हथियारों का इंटीग्रेशन, सर्टिफिकेशन और फ्लाइट ट्रायल रहे हैं। एचएएल का कहना है कि किसी भी लड़ाकू विमान को बिना पूरी जांच और ट्रायल के सौंपना सुरक्षित नहीं होता, इसलिए हर चरण में सावधानी बरतना जरूरी है।

एचएएल यह भी दोहराता रहा है कि शुरुआती डिलीवरी में देरी के बावजूद तेजस एमके-1ए लंबी अवधि में भारतीय वायुसेना के लिए एक मजबूत और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म साबित होगा।

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