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भारतीय वायुसेना निभाएगी आध्यात्मिक मिशन, भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों को लेकर जाएगी श्रीलंका

भगवान बुद्ध के ये पवित्र अवशेष गुजरात के अरावली जिले में श्यामलाजी के पास स्थित देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल से जुड़े हैं। इस स्थल की खुदाई वर्ष 1957 में की गई थी...

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📍नई दिल्ली | 3 Feb, 2026, 9:57 PM

IAF Buddha relics Sri Lanka: भारतीय वायुसेना एक बार फिर सिर्फ देश की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की जिम्मेदारी भी निभाने जा रही है। भगवान बुद्ध से जुड़े अत्यंत पवित्र देवनीमोरी अवशेषों को पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका ले जाया जाएगा। इन अवशेषों को सार्वजनिक दर्शन के लिए 4 फरवरी से 10 फरवरी 2026 तक कोलंबो में रखे जाएंगे। इसके बाद 11 फरवरी को ये पवित्र अवशेष वापस भारत लौटेंगे।

IAF Buddha relics Sri Lanka: कोलंबो के गंगारामय मंदिर में होंगे दर्शन

खास बात यह है कि इन पवित्र अवशेषों को एक विशेष विमान से भारतीय वायुसेना श्रीलंका ले जाएगी। श्रीलंका में भगवान बुद्ध के देवनीमोरी अवशेषों को कोलंबो के प्रसिद्ध गंगारामय मंदिर में रखा जाएगा। यह मंदिर श्रीलंका के सबसे प्रतिष्ठित बौद्ध धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में देवनीमोरी अवशेषों का यहां रखा जाना श्रीलंकाई बौद्ध समाज के लिए बेहद खास अवसर होगा।

श्रीलंका में बौद्ध धर्म न सिर्फ एक धार्मिक आस्था है, बल्कि वहां की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का भी अहम हिस्सा है। ऐसे में भारत से आए भगवान बुद्ध के अवशेष वहां के लोगों के लिए भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण होंगे। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

गुजरात से जुड़े हैं देवनीमोरी अवशेष

भगवान बुद्ध के ये पवित्र अवशेष गुजरात के अरावली जिले में श्यामलाजी के पास स्थित देवनीमोरी पुरातात्विक स्थल से जुड़े हैं। इस स्थल की खुदाई वर्ष 1957 में की गई थी, जिसमें बौद्ध स्तूप और कई महत्वपूर्ण अवशेष मिले थे। इन्हीं में से एक स्तूप में भगवान बुद्ध के अस्थि अवशेष पाए गए थे।

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यह अवशेष एक हरे रंग के पत्थर से बने पात्र में रखे गए थे, जिस पर ब्राह्मी लिपि में संस्कृत भाषा का लेख भी अंकित था। इस लेख का अर्थ बताया गया है- “दशबल शारीर निलय”, यानी भगवान बुद्ध के शरीर के अवशेषों का निवास स्थान। इस पात्र के भीतर तांबे का एक छोटा बॉक्स था, जिसमें पवित्र राख, रेशमी कपड़ा और मनके सुरक्षित रखे गए थे। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

बेहद सुरक्षित तरीके से रखे गए हैं अवशेष

वर्तमान में इन पवित्र अवशेषों को एक विशेष एयरटाइट कांच के डिब्बे में सुरक्षित रखा गया है, ताकि समय के साथ इनमें किसी तरह की क्षति न हो। इन्हें कपास के आधार पर रखा गया है, जिससे नमी या तापमान का असर न पड़े। जब इन्हें श्रीलंका ले जाया जाएगा, तब भी पूरी सुरक्षा और धार्मिक मर्यादा का पालन किया जाएगा। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

उच्चस्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल भी होगा साथ

इस पवित्र यात्रा में भारत का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी शामिल होगा। इस दल का नेतृत्व गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी करेंगे। उनके साथ वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु और सरकारी अधिकारी भी मौजूद रहेंगे। यह प्रतिनिधिमंडल कोलंबो में होने वाले धार्मिक और आधिकारिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेगा। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

भारत-श्रीलंका रिश्तों में आध्यात्मिक सेतु

देवनीमोरी अवशेषों को दर्शन के लिए रखा जाना सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम हिस्सा है। भारत, जहां बौद्ध धर्म का जन्म हुआ, आज भी पूरी दुनिया में अपनी इस विरासत को साझा करता रहा है। इससे पहले भी भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष थाईलैंड, मंगोलिया, वियतनाम, रूस और भूटान जैसे देशों में प्रदर्शित किए जा चुके हैं।

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श्रीलंका में यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच लोगों से लोगों के रिश्तों को और गहरा करेगा। यह दोनों देशों के बीच भरोसे, सम्मान और साझा मूल्यों को मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का मजबूत आधार

यह पहली बार नहीं है जब भारतीय वायुसेना भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को किसी देश में ले जा रही है। इन अवशेषों को आमतौर पर भारतीय वायुसेना के विशेष विमानों जैसे सी-17 ग्लोबमास्टर या सी-130 से ले जाया जाता है। श्रीलंका के अलावा, भारतीय वायुसेना मंगोलिया, थाईलैंड, वियतनाम, भूटान, रूस (काल्मिकिया गणराज्य), सिंगापुर और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों को ले जा चुकी है। मंगोलिया में 1993 और 2022 में, थाईलैंड में 1995 और 2024 में, वियतनाम में 2025 के वेसाक समारोह के दौरान और भूटान व रूस में 2025 में इन अवशेषों को सुरक्षित ले जा चुकी है। (IAF Buddha relics Sri Lanka)

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  • News Desk

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